बाल मजदूरी पर निबंध

Essay on Child Labour in Hindi: हम यहां पर बाल मजदूरी पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में बाल मजदूरी के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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बाल मजदूरी पर निबंध | Essay on Child Labour in Hindi

बाल मजदूरी पर निबंध (250 शब्द)

सरकार ने सभी क्षेत्र में काम करने के लिए एक निश्चित आयु निर्धारित की है। निर्धारित आयु से कम आयु वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य बाल मजदूरी है। बाल मजूदरी एक गंभीर सामाजिक समस्या है। बाल मजदूरी के लिए मुख्यत्व गरीबी जिम्मेदार है। जीवन जीने के लिए  जरुरी संसाधन की कमी बच्चों को बाल मजदूरी की तरक धकेलती है।

माता पिता का लालचीपन और परिवार की कुछ मजबूरियां बच्चे को इस राह में खींच लाती है। बाल मजदूरी के कारण बच्चे अपने बचपन से वंचित रह जाते है। वो अपने शिक्षा के हक़ से भी वंचित रह जाते है। बाल मजदूरी की वजह से बच्चे का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक  विकास नहीं होता।

अच्छा भोजन न मिलने के कारण बच्चें कुपोषण के शिकार हो जाते है। कभी कभी बच्चा ज्यादा पैसे की लालच में गैरकानूनी कार्य करने पर मजबूर हो जाता है। बच्चे का पूरा जीवन अंधकारमय भविष्य में लिप्त हो जाता है। सच में बाल मजदूरी देश और बच्चों के लिए एक अभिश्राप है।

सरकार द्वारा बाल मजदूरी रोकने के लिए कई कानून बनाये गये है। 14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम देना गैर-क़ानूनी  माना गया है। अगर कोई व्यक्ति बच्चों से मज़दूरी करवाता है या फिर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करता है तो उसे कड़ी जेल की सजा या भारी जुर्माना देने की सजा हो सकती है।

बाल मजदूरी के खिलाफ हमें एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए। बच्चे ही हमारे देश का भविष्य है। किसी भी बच्चे का सर्वांगी विकास बचपन में ही होता है और जब बच्चे का विकास होगा, तभी तो देश विकास कर पायेगा।

बाल मजदूरी पर निबंध ( 800 शब्द)

प्रस्तावना

बाल मजदूरी बचपन के लिए एक श्राप है। देश और विदेश में आज शिक्षित स्तर बढ़ने के कारण भी इस समस्या में कोई भी सुधार नहीं आया है। यह समस्या सरकार के लिए एक चुनौती साबित हुई है। निर्धारित की हुई उम्र से कम उम्र से बच्चे को किसी भी क्षेत्र में काम पर रखना बाल मजदूरी कहलाता है। यह एक गैरकानूनी अपराध है, जिसकी वजह से बच्चे की बचपन के साथ साथ उसकी पूरी जिंदगी खराब हो जाती है। समय के साथ-साथ यह समस्या बहुत उग्र रूप लेती जा रही है। बाल मज़दूरी समाज के लिए एक गहरा कलंक बन गया है, इस समस्या के कारण पूरे देश का भविष्य संकट में आ सकता है।

बाल मज़दूरी के कारण

बाल मजदूरी का मुख्य कारण है देश की बढ़ती जनसंख्या। बढ़ती जन जनसंख्या के कारन देश के कई परिवार दैनिक जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहे है। इस वजह से गरीब माता-पिता अपने बच्चे को  स्कूल भेजने के बजाय परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए काम पर भेजते है।

देश में कई परिवार ऐसे है, जिस में नशे, बिमारी या अपंगता के कारण कोई कमाने वाला नही होता है। ऐसे परिवार का आधार स्तंभ कौन बच्चा होता है। कुछ लालची और आलसी माता पिता अपने बच्चों को पढाई करने की बजाय ज्यादा पैसों के चक्कर में काम पर भेजते है।

बाल मजदूरी बढ़ने का एक कारण अनाथ बच्चे भी है, जो अपना पेट पालने के लिए काम करते है। ऐसे बच्चे को होटलों, ढाबों, चाय की दुकान, कारखानों  के मालिक बहुत कम वेतन देकर काम पर रखते है और उन से कठिन कार्य  भी करवाते है।

बाल मज़दूरी के परिणाम

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है की बच्चा अपनी शिक्षा से वंचित हो जाता है। जिस उम्र में बच्चों को सही शिक्षा मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पाती जिसके कारण उसका बौद्धिक विकास रुक जाता है। बचपन के उसके खेलने कूदने के दिन मजदूरी का काम करने में बीत जाता है। कारखाने में काम करने वाले बच्चों के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

समय पर और अच्छा भोजन नहीं मिलने के कारण  बच्चे अक्सर कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। उनके शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। जिसके चलते उसका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। मालिकों द्वारा कई बच्चे का शारीरिक शोषण  भी किया जाता है। कभी कभी बच्चे को मारा भी जाता है।

कभी कभी बच्चे गलत संगति में भी पड़ जाता है। छोटी उम्र में ही बच्चे  नशा और चोरी करने लगता है। चंद पैसों के लिए उनका पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है।

बाल मजदूरी रोकने के उपाय

बाल मजूदरी देश के विकास में एक बड़ा बाधक है। इस समस्या का जल्द से जल्द निवारण करना हमारे बहेतरीन भविष्य के लिए जरुरी है। सबसे पहले हमें बाल मजदूरी रोकने के लिए एकजुट होना पड़ेगा। लोगों की सोच को बदलना पड़ेगा।

हमें अपने किसी भी कार्य क्षेत्र में काम के लिए कोई भी बच्चा  नही रखना होगा। बाल मजदूरी के खिलाफ सबसे कठिन कानून बनाना होगा।सरकार द्वारा गरीब माता-पिता को अपने बच्चों के लिए शिक्षा, खाना और दवाईयां जैसी चीजों को मुक्त में प्रदान करना होगा।

छह से 14 साल के बच्चों को श्रम करने से रोकने के लिए समाज के सभी वर्गो को सामने आना होगा। बाल मजदूरी रोकने के लिए हो सके इतना गरीब लोगों में शिक्षा का प्रसार करना होगा क्योंकि अशिक्षित व्यक्ति बाल मजदूरी को नहीं समझता है।

बाल मजदूरी रोकने के लिए हमें यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए की वो ऐसी दुकानों से समान या अन्य वस्तु नहीं खरीदेगा जहां पर कोई बच्चा बाल मजदूरी कर रहा है। स्कूली बच्चों में श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग और एनजीओ द्वारा इस समस्या के बारे में जागरूकता लाने की कोशिश करनी होगी ताकि वो भविष्य में इस समस्या के प्रति उजागार रहे।

सरकार द्वारा किये गए प्रयास

देश की सरकार के लिए बाल मजदूरी एक गहरा चिंता का विषय है। क्योंकि यह समस्या देश के भविष्य के साथ भी जुडी हुई है। इस समस्याको जड़ मूल से खत्म करने के लिए सरकार ने कठिन से कठिन कानून बनाए है। 14 साल और उनसे कम आयु के बच्चे को काम पर रखना घोर अपराध माना जाता है। ऐसा करने वाली व्यक्ति को कठिन से कठिन सजा का सामना करना पड़ेगा। उस व्यक्ति को 6 महीने से 2 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है और साथ ही 20,000 से 50,000 रूपए तक का जुर्माना भी हो सकता है।

निष्कर्ष

बचपन सभी बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। बाल मजदूरी की वजह से ही बच्चे बचपन के सबसे यादगार और खुशनुमा पलों से दूर हो जाते हैं। भगवान का रूप माने जाते बच्चों से काम करवाना पाप भी है। बाल मजदूरी देश के भविष्य के लिए भी नुकसानकारक साबित हो सकती है।  इस लिए बाल श्रम निषेध दिवस मना कर लोगों को इस समस्या के प्रति  जागरूक करना बेहद जरूरी है।

बाल मजदूरी की समस्या को जड़मूल से खत्म करना किसी एक बन्दे का काम नही है। इसके लिए समाज और सरकार दोनों को हाथ मिलाना होगा। देश के सुनहरे भविष्य के लिए देश का हर एक बच्चा शिक्षित होना बेहद जरूरी है।

अंतिम शब्द

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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