डॉ. एसएन सुब्बा राव का जीवन परिचय

Dr SN Subba Rao Biography in Hindi: डॉ SN सुब्बाराव जिनका जन्म 7 फरवरी 1929 को बंगलोर में हुआ था। डॉक्टर एसएन सुब्बाराव का 92 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में गाते बजाते कर्म करते हुए दुनिया को अलविदा कहा।

डॉक्टर एसएन सुब्बाराव आजादी के बाद के असली आजादी का अर्थ समझाने वाले महानायक और हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने गांधीजी के रहते हुए गांधी जी का साथ दिया था, उनके जाने के बाद भी उनके पद चिन्हों पर चलते रहे और अधूरे रहे कामों को भी पूरा करने की जिम्मेदारी ली। एक तरह से देखा जाए तो डॉक्टर एसएन सुब्बाराव पुरुषार्थ की जलती हुई एक मशाल के रूप में थे।

Dr SN Subba Rao Biography in Hindi
Image: Dr SN Subba Rao Biography in Hindi

इन्होने भारत में सोशल वर्कर का काम किया था। साथ ही साथ ये फॉर्मर गवर्नर भी रह चुके थे। सोशल वर्कर के रूप में इसके द्वारा कई कार्य किये गए और इन्होंने कई डकेतो को सामूहिक सरेंडर करवाया था, जिसकी वजह से इन्हे पदमश्री पुरष्कार से नवाजा गया था।

डॉ. एसएन सुब्बा राव का जीवन परिचय | Dr SN Subba Rao Biography in Hindi

SN सुब्बाराव के जीवन के बारे में

डॉ SN सुब्बाराव का सम्पूर्ण जीवन जो समाज सेवा में ही बीत गया। इन्होने महात्मा गाँधी जी से प्रेरणा लेकर अपना सम्पूर्ण जीवन सोशल वर्कर के रूप में ही गुजार दिया। इनके जीवन में समाजसेवी के रूप में सबसे बड़ा कार्य 654 डकेतो को सामूहिक समर्पण करवाने का था। 654 में से 450 डकेतों ने जोरो आश्रम में समाजसेवी जय प्रकाश और उनकी धर्मपत्नी प्रभादेवी के सामने समर्पण किया था। बाकी पीछे बचे 100 से अधिक डकेतो ने अपना समर्पण राजस्थान के धौलपुर में गांधीजी की मूर्ति के सामने किया था।

डॉ SN सुब्बाराव को ग्वालियर में भाई जी के नाम से भी जाना जाता था। ऐसे कह सकते है कि SN सुब्बाराव जिनका दूसरा लोकप्रिय नाम भाई जी था।

डॉक्टर एसएन सुब्बाराव का प्रारम्भिक जीवन

डॉक्टर एसएन सुब्बाराव का जन्म 7 फरवरी 1929 को बेंगलुरु में हुआ था। शुरुआत में इनकी प्रारंभिक शिक्षा बेंगलुरु से ही हुई थी उसके बाद इनकी उच्च शिक्षा के लिए रामा कृष्णा वेदांता कॉलेज मल्लेश्वरम बेंगलुरु में अपनी आगे की पढ़ाई को पूरा किया। डॉक्टर सुब्बा राव ने अपने जीवन में सबसे अधिक प्रेरणा महात्मा गांधी से ली थी या यह भी कहा जा सकता है कि उनकी प्रेरणा के प्रमुख हीरो महात्मा गांधी जी थे, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में भी अपनी बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

देश की अमूल्य धरोहर के रूप में जाने जाते थे

डॉक्टर एसएन सुब्बाराव सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे हैं। इसके अलावा अगर उनकी व्यक्तित्व के बारे में बात की जाए देश के लिए उन्होंने बहुत बड़े-बड़े काम किए है। यहां तक कि देश की आजादी में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भारत के गवर्नर के रूप में भी वह जाने जाते हैं।

इन्होंने कभी भी अपना पहनावा नहीं बदला हमेशा हाफ पेंट और शर्ट पहन कर रहते थे। इनके अंदर अटल विश्वास अदम्य साहस निर्भीकता इनकी वजह से देश की अमूल्य धरोहर के रूप में भी जाने जाते थे।

बचपन से ही रहे क्रांतिकारी

डॉ सुब्बाराव बचपन से ही क्रांतिकारी विचारधारा वाले रहे हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत मात्र 13 साल की उम्र से ही हो गई थी। सन 1942 में गांधी जी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ो का आदेश दिया था, उस समय यह बेंगलुरु के स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे।

13 साल की उम्र में डॉक्टर सुब्बाराव को कुछ नहीं समझ में आया और उन्होंने स्कूल के दीवारों पर अंग्रेजों भारत छोड़ो लिखना शुरू कर दिया, इसके लिए इनको जेल भेज दिया गया। सरकार ने इनकी कम उम्र की वजह से इनको जेल में नहीं रखा। इस प्रकार से आजादी के संघर्ष में 13 साल की उम्र से ही इन्होंने बहुत बड़ी भूमिका निभाना शुरू कर दिया था।

महात्मा गांधी से थे प्रभावित

डॉ सुब्बाराव ने अपना सारा जीवन समाज सेवा में ही बिता दिया था। एक का सबसे प्रमुख कारण महात्मा गांधी थे, उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन से प्रभावित होकर ही अपने पूरे जीवन को समाज सेवा में लोगों की मदद करने में लगा दिया था। महात्मा गांधी के मरने के बाद भी यह उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते रहे उनके अधूरे कामों को भी डॉक्टर सुब्बाराव ने पूरा किया।

654 डकैतों को करवाया था आत्मसमर्पण

डॉ सुब्बाराव ने 14 अप्रैल 1972 को गांधी सेवा आश्रम जोरा में 654 डकैतों को महा के एक समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभा देवी के सामने एक साथ सामूहिक समर्पण करवाया था। इन डकैतों में 450 लोगों को जोरा आश्रम में और 100 डकैतों को राजस्थान के धौलपुर में गांधी जी की तस्वीर के सामने उन सभी के हथियारों को डालकर आत्मसमर्पण करवाया।

डॉक्टर सुब्बा राव ग्वालियर में चंबल संभाग में भाई जी के नाम से जाने जाते थे, उन्होंने जोरा में गांधी सेवा आश्रम की नींव रखी थी। वहां पर आज भी एक एनजीओ चलाया जा रहा है। यह श्योपुर तक के गरीब और जरूरतमंद कुपोषित बच्चों के लिए काम कर रहा है। आदिवासियों को मूल विकास की धारा में लाने के लिए भी इसमें सभी कार्यकर्ता मेहनत और लगन के साथ काम कर रहे हैं। डॉक्टर सुबाराव राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्य भी रहे हैं इन्होंने नेशनल यूथ प्रोजेक्ट की स्थापना की थी।

डॉ SN सुब्बाराव की उपलब्धियां

इन्होने अपने जीवन में कई पुरस्कार जीते है, जिनके बारे में जानकारी नीचे दी गयी है।

  • 14 अप्रैल 1972 को इनको भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री अवार्ड दिया गया था।
  • इनको 1995 में नेशनल युथ अवार्ड दिया गया था।
  • अगला अवार्ड भारतीय एकता पुरुस्कार से रूप में दिया गया था।
  • साल 2002 में इनको विश्व मानवाधिकार प्रोत्साहन पुरुष्कार दिया गया था।
  • साल 2003 में इनको राजीव गाँधी नेशनल सद्भावना अवार्ड दिया गया था।
  • इसको साल 2003 का दूसरा अवार्ड राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भावना पुरुस्कार मिला था।
  • जमनालाल बजाज पुरस्कार साल 2006 में दिया गया था।
  • महात्मा गाँधी पुरुस्कार 2008 में दिया गया था।
  • उसके बाद साल 2014 में तीन पुरस्कार लाइफ टाइम अचीवेमनेट अवार्ड, महात्मा गाँधी प्रेरणा पुरुस्कार, राष्ट्रीय सद्भावना एकता अवार्ड डॉ SN सुब्बाराव को दिए गए थे।

डॉ. SN सुब्बाराव की मृत्यु

डॉ. सुब्बाराव को हमेशा गांधीवादी विचारधारा के लिए उनको एक अलग पहचान मिली है। डॉक्टर सुब्बा राव को राजस्थान के मुख्यमंत्री सीएम अशोक गहलोत भी अपना आदर्श मानते थे।

27 अक्टूबर 2021 को सुबह 4:00 बजे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। अपने गांधीवादी विचार धाराओं की वजह से और महात्मा गांधी के विचारों को स्थापित करने के लिए भी जाना जाता है।

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