पंडित जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय

Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi: आज के इस लेख में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में जानेंगे। यहां पर जवाहरलाल नेहरू कौन थे, इनका भारत की स्वतंत्रता के पीछे क्या हाथ था आदि जैसे कुछ सवालों के बारे में जानने के साथ ही इनकी पूर्णता विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए लेख को प्रारंभ करते हैं।

Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi
Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

पंडित जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय – Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

पंडित जवाहरलाल नेहरू की जीवनी एक नज़र में

नामजवाहरलाल नेहरू
अन्य नामपंडित जवाहरलाल नेहरू
पिता का नाममोतीलाल नेहरू
माता का नामस्वरूप रानी नेहरू
जन्म तारीख14 नवंबर 1889
जन्म स्थानइलाहाबाद
पत्नी का नामकमला कौर
उम्र76  साल
पताइलाहाबाद
स्कूलइंग्लैंड के हैरो नामक स्कूल
कॉलेजकेब्रिज के ट्रिनिंग कॉलेज
शिक्षास्नातक तक की डिग्री, वकालत
कुल सम्पति
भाषाहिंदी, इंग्लिश
नागरिकताइंडियन
धर्महिन्दू
जातिपंडित
Jawaharlal Nehru Biography in Hindi

पंडित जवाहरलाल नेहरू कौन थे?

पंडित जवाहरलाल नेहरु ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी में गांधीजी का मुख्य सहयोग किया तथा स्वतंत्रता के बाद जब भारत का संविधान लागू हुआ तो यह प्रथम प्रधानमंत्री बने। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री पद को धारण करने के बाद अपने देश की विभिन्न समस्याओं को दूर किया और शैक्षिक सामाजिक और विभिन्न क्षेत्रों में भी सुधार की नींव रखी।

हालांकि उस समय में इनको देश की संस्कृति भाषा और धर्म में विभिन्न प्रकार की आबादी को एकजुट करने के लिए अनेकों प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और उन्हें सफलतापूर्वक विभिन्न आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक सुधार करके उन्होंने लाखों भारतीयों से सम्मान और प्रशंसा अर्जित कर ली। जवाहरलाल नेहरू भारतीय, धर्मनिरपेक्ष और गांधीवादी राजनेता थे।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म कब हुआ था?

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म वर्ष अट्ठारह सौ नवासी के नवंबर माह में 14 तारीख को हुआ था। पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने माता-पिता के इकलौते संतान थे, इनके अलावा इनके दो बहने भी थी। नेहरू जी बचपन से ही बड़े प्रभावशाली एवं अच्छी बातें करते थे। इन्हें उनके माता-पिता से बहुत प्रेम प्राप्त हुआ। अपने माता-पिता से अत्यंत प्रेम प्राप्त होने के बावजूद भी पंडित जवाहरलाल नेहरू बिल्कुल नहीं बदले।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म कश्मीर के कश्मीरी पंडित समुदाय सी है अर्थात जिनका संबंध उस वंश से है जो कि कश्मीर के सास्वत ब्राह्मण थे। कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ संबंध होने के कारण उन्हें लोगों द्वारा पंडित नेहरू के नाम से भी पुकारा जाता था।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के पारिवारिक संबंध

मैंने आपको बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ। पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था। इनके पिता मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के बहुत ही प्रसिद्ध वकील थे। इनकी माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू था, इनकी माता एक समझदार और कुशल घरेलू महिला थी, जिन्होंने अपने घर को बड़े ही सफलतापूर्वक संभाला था।

जैसा कि हमने आपको बताया कि जवाहरलाल नेहरू की दो बहने भी थी तो आपको बता दे कि जवाहरलाल नेहरू की बड़ी बहन का नाम विजयालक्ष्मी तथा उनके छोटी बहन का नाम कृष्णा हठीसिंग था। उनकी बड़ी बहन विजयलक्ष्मी बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी और उनकी छोटी बहन कृष्णा हठीसिंग एक बहुत ही अच्छी लेखिका थी।

जवाहरलाल नेहरू की शैक्षणिक योग्यता

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर से ही प्राप्त की थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू को घर पर शिक्षा इनके माता-पिता द्वारा प्राप्त होता था। आपको बता दे कि बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू की शिक्षा दुनिया के कुछ सबसे अच्छे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में प्राप्त हुआ। पंडित जवाहरलाल नेहरू सन 1905 में लगभग 15 वर्ष की उम्र में इंग्लैंड चले गए।

वहां पर उन्होंने इंग्लैंड के हैरो नामक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की और वहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद जवाहरलाल नेहरू केब्रिज के ट्रिनिंग कॉलेज से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्नातक तक की डिग्री प्राप्त की। अपनी डिग्री प्राप्त करने के बाद जवाहरलाल नेहरू लंदन के इनर टेंपल में चले गए। वहां पर उन्होंने अपने जीवन के 2 वर्ष बिताए, उसके बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई शुरू की।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का विदेश में बिताया गया समय

जैसा कि आपको बताया पंडित जवाहरलाल नेहरू मात्र 15 वर्ष की आयु में ही इंग्लैंड चले गए और वहां पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। ऐसे में जवाहरलाल नेहरू लगभग 7 वर्षों तक इंग्लैंड में रहे और उन्होंने वहां पर फेबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक अलग दृष्टिकोण का विकास किया।

इसके बाद इन्होंने लंदन के इनर टेंपल में 2 वर्ष बताए जिससे वहां पर उन्होंने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा प्रदान किया। इस आधार पर पंडित जवाहरलाल नेहरू विदेश ने अपनी पढ़ाई से लेकर के घूमने तक में लगभग 9 से 10 वर्षों का समय लिया और जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अपने देश के संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विदेश जाया करते थे।

पंडित जवाहरलाल की पत्नी (Jawaharlal Nehru Marriage)

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इंग्लैंड में ही अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी कर ली थी। लगभग 1912 ईस्वी में पंडित जवाहरलाल नेहरू अपनी पढ़ाई पूरी करके इंग्लैंड से भारत लौटे। पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत आने के बाद यहीं पर अपनी वकालत की शुरुआत की। वर्ष 1916 में कमला कौर नामक एक औरत से पंडित जवाहरलाल नेहरू का विवाह हुआ। कमला कौर भी पंडित जवाहरलाल नेहरु की ही भारत एक कश्मीरी परिवार से संबंध रखती थी जो कि दिल्ली में स्थित था।

पंडित जवाहरलाल नेहरु की पुत्री

क्या आप जानते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरु की पुत्री कौन है? यदि नहीं तो हम आपको बता दे कि पंडित जवाहरलाल नेहरु की पुत्री का नाम इंदिरा गांधी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के विवाह के ठीक 1 वर्ष बाद उनकी पत्नी कमला नेहरू ने एक पुत्री को जन्म दिया अर्थात इंदिरा गांधी का जन्म वर्ष 1917 में हुआ। इंदिरा गांधी पहली ऐसी महिला थी जो प्रधानमंत्री बनी थी। इसलिए इंदिरा गांधी को प्रथम महिला प्रधानमंत्री के नाम से भी जाना जाता है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का राजनीतिक जीवन (Jawaharlal Nehru Political Career)

वर्ष 1926 ईस्वी से 1928 ईस्वी तक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में देश की सेवा की। इसके बाद वर्ष 1928 से 1929 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में किया था। इस सत्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मिलकर के पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया था।

जबकि मोतीलाल नेहरू और अन्य नेता ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत ही प्रभुत्व संपन्न राज्य चाहते थे। परंतु जवाहरलाल नेहरू का ऐसा मानना नहीं था, उनका मानना था कि वह खुद के देश में किसी के अंतर्गत चलने वाले साम्राज्य में ना रहे। इस मसले को हल करने के लिए महात्मा गांधी ने एक ऐसा रास्ता निकाला और उन्होंने कहा कि हम ब्रिटिश वादियों को भारतवर्ष के राज्यों का दर्जा दिलाने के लिए उन्हें 2 साल का समय देंगे।

यदि ऐसा नहीं होता है तो कांग्रेस पूर्व राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेगी। सुभाष चंद्र बोस और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस समय को कम करके 1 वर्ष कर दिया। परंतु ब्रिटिश वादियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हमारे भारतवर्ष के इतिहास में एक ऐसा मौका भी आया था कि जब महात्मा गांधी को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के लिए स्वयं श्री सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू ने किसी एक का चयन करना था। परंतु लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के सामने पंडित जवाहरलाल नेहरू का विनम्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण भारी पड़ा। ऐसा करके महात्मा गांधी जी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को ना केवल प्रधानमंत्री बनाया। अपितु उन्हें लंबे समय तक के लिए संपूर्ण विश्व के सबसे विशाल लोकतंत्र की बागडोर संभालने का गौरव प्राप्त कराया गया।

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पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार

पंडित जवाहरलाल नेहरू का देश के प्रति बहुत ही अच्छा विचार था जो कि निम्न निम्नलिखित प्रकार से दर्शाया गया है।

  • उनका कहना था कि नागरिकता देश की सेवा में छिपी होती है।
  • असफलता तभी आती है जब हम स्वयं के अंदर के आदर्श, उद्देश्य और सिद्धांत को भूल जाते हैं।
  • लोगों की कला लोगों के दिल और दिमाग का सही दर्पण होता है।
  • हमारी संस्कृति हमारे मन और आत्मा का विस्तार करती हैं।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के अन्य कार्य प्रसिद्धि

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू एक अच्छे राजनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे लेखक, कवि थे। यह अपने लेख हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी लिखते थे। उनके लेखों में उपन्यास आत्मकथा इत्यादि शामिल है। इनके लेख बहुत ही कठिन होते हैं परंतु बहुत ही प्रभावशाली भी होते हैं।

जवाहरलाल नेहरु को मिले सम्मान

  • भारत रत्न (1955)

पंडित जवाहरलाल नेहरू की क़िताबे (Jawaharlal Nehru Books)

  • डिस्कवरी ऑफ इंडिया
  • विश्व इतिहास की एक झलक
  • दुनिया के इतिहास का ओझरता दर्शन (1939)
  • भारत और विश्व
  • भारत की एकता और स्वतंत्रता
  • सोवियत रूस

डिस्कवरी ऑफ इंडिया पंडित नेहरू की सबसे लोकप्रिय किताब है। इसे डिस्कवरी पंडित नेहरू अहमदनगर की जेल में अप्रैल-सितंबर 1944 में लिखा था। पंडित नेहरू ने इस पुस्तक को अंग्रजी भाषा में लिखा था। इसके बाद इस पुस्तक को अन्य कई भाषाओं में अनुवाद कर दिया गया।

पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु

पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत की बहुत ही दयनीय दुर्दशा देखकर के उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उन्हें गांधी जी के द्वारा उचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। वह इसके लिए कई बार जेल भी गए फिर भी उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने जुनून को नहीं छोड़ा।

वर्ष 1964 के मई माह में 27 तारीख की एक सुबह पंडित जवाहरलाल नेहरु की तबीयत अचानक खराब हुई। डॉक्टरों तथा वादियों द्वारा यह बताया गया कि उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा है। उसी दिन की दोपहर को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने प्राण त्याग दिए और वीरगति को प्राप्त हो गए।

निष्कर्ष

आज के इस लेख “पंडित जवाहरलाल नेहरु जीवन परिचय (Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi)” के माध्यम से हम सभी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त की। हमने यह भी जाना कि पंडित जवाहरलाल नेहरू का क्या विचार था और पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु किस कारण वश हुई। हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख “Jawaharlal Nehru History In Hindi” पसंद आया होगा तो कृपया इसे अवश्य शेयर करें।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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