भारत का सबसे ऊंचा बांध कौन सा है?

नमस्कार दोस्तों, आज हम यहां पर “Bharat Ka Sabse Uncha Bandh Kaun Sa Hai” के बारे में जानने वाले है इस बांध की पूरी जानकारी जानने के साथ ही भारत के अन्य बांध के बारे में भी जानेंगे तो इस लेख को अंत तक पूरा जरूर पढ़े।

Bharat Ka Sabse Uncha Bandh Kaun Sa Hai
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हर जगह का मौसम हमेशा एक जैसा नहीं होता है, कहीं धूप ज्यादा होती है तो कहीं सर्दी ज्यादा होती है। मानव जाति को हर मौसम में जीने के लिए किसी ना किसी तकनीक की आवश्यकता होती है, उसी तकनीक का नतीजा बाँध है।

बाँध का आविष्कार उस समय हुआ जब पानी को इकट्ठा करके रखने की आवश्यकता पड़ी। बाँध की सहायता से किसी भी नदी या नहर के पानी के बहाव को रोक कर उसे संचित यानि इकट्ठा किया जाता है। फिर उस संचित किए पानी का प्रयोग बहुत तरीके से किया जाता है, जैसे – सिंचाई में, पानी से बिजली बनाने में, कृत्रिम झील बनाने में, बहुत सारे शहरों में पानी की आपूर्ति करने में, बाढ़ से बचने में, नदी या नहर के बहाव को संतुलित करने में।

इसी को ध्यान में रख कर भारत में बहुत सारे बाँधों का निर्माण हुआ है। उनमे से कोई बहुत पुराने है, कोई लम्बे है और कोई ऊँचे है।

बांध का निर्माण कैसे होता है?

बाँध जगह के अनुसार अलग-अलग तरीको से बनाया जाता है, लेकिन इसको बनाने में कंक्रीट का इस्तेमाल मुख्य है। बाँध बनाने से पहले इंजीनियर उस जगह का अवलोकन करते है जिस जगह बाँध बनेगा, उसके बाद इंजीनियर जगह के अनुकूल बाँध की आकृति बनाता है। ये आकृति उस जगह के ऊपर निर्भर करती है।

बांध कितने प्रकार के होते हैं?

जैसा मैंने पहले बताया बाँध जगह के अनुसार बनता है, इसलिए कॉमन बाँध के शेप इस प्रकार है- अर्क बाँध, ग्रेविटी बाँध, अर्क-ग्रेविटी बाँध, बर्रगेस बाँध, तटबंध बाँध, रॉक फिल, कंक्रीट फेस रॉक फिल बाँध और धरती भरने के बाँध।

भारत का सबसे ऊंचा बांध कौन सा है?

भारत देश का सबसे ऊँचा बाँध टिहरी बाँध है। यह उत्तराखंड राज्य के टिहरी में स्थित है। यह बाँध गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी भागीरथी पर बनाया गया है। यह बाँध दुनिया का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध है।

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इस बाँध की ऊँचाई 260.5 मीटर है, यह विश्व का आठवाँ सबसे बड़ा बाँध है जिसका उपयोग सिंचाई और बिजली पैदा करने हेतु किया जाता है। इसकी लम्बाई 575 मीटर है और इसके जलाशय की क्षमता 21,00,000 एकर फुट है। साल 1972 में टिहरी बाँध के निर्माण को मंजूरी मिली थी और 1977-78 में बाँध का निर्माण कार्य शुरू हुया था। देश की जनता के लिए 2006 में इसे खोल लिया गया।

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टिहरी बांध के कुछ रोचक तथ्य

बाँध की दीवारें

जैसा कि उत्तराखंड राज्य भूकंप पीड़ित क्षेत्र है, और टिहरी जिला उच्च तीव्रता वाले भूकंप ज़ोन में आता है। इसलिए नुकसान को रोकने के लिए टिहरी बाँध को रॉकफिल बाँध बनाया गया है। इसके लिए बाँध की दीवार को पूरी तरह पत्थर और मिट्टी भर कर बनाया गया है।

दिल्ली और उत्तर प्रदेश को पानी पहुँचाना

इस बाँध से हर दिन 2400 मेगावाट विद्युत उत्पादन 2,70,000 हेक्टेयर क्षेत्र तक की सिंचाई और 102.20 करोड़ लीटर पीने के लिए पानी दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड को उपलब्ध कराया जाता है।

टिहरी जल विद्युत परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत 3 मुख्य इकाइयाँ मुख्य रूप से स्थापित की गयी है- 1000 मेगावाट की टिहरी बाँध और जल विद्युत इकाई, 400 मेगावाट की कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना और 1000 मेगावाट की टिहरी पम्प स्टोरेज परियोजना है। इनके अतिरिक्त भारत सरकार ने टिहरी जल विद्युत परियोजना में अतिरिक्त 1000 मेगावाट इकाई लगाने के लिए मंजूरी भी दे दी है।

बाँध के निर्माण में गाँव डूबे थे

इस परियोजना या बाँध को बनाने के लिए पुराने टिहरी शहर को जलमग्न यानि टिहरी शहर पानी में डूब गया था। इसके साथ 125 गाँवों पर भी असर पड़ा था। इस दौरान 37 गाँव पूर्ण रूप से डूब गए थे और 88 गाँव आंशिक रूप से प्रभावित हुये थे। इन इलाको में रहने वाले रहवासी को नए टिहरी और देहरादून के आस-पास क्षेत्रो में विस्थापित करना पड़ा था।

टिहरी बाँध की रूपरेखा

टिहरी बाँध का जलाशय क्षेत्र 42 वर्ग किमी लम्बा है। बाँध की दीवार की शीर्ष पर लम्बाई 575 मीटर है और चौड़ाई 25.5 मीटर से 30.5 मीटर तक है। बाँध के दीवार के तल पर चौड़ाई 1125 मीटर है। बाँध के निर्माण से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में आने वाली बाढ़ में कमी आई है और बाँध में बिजली उत्पादन से देश को हर साल 2000 करोड़ रूपये का फायदा होता है।

उच्च तीव्रता भूकंप झेलने की क्षमता

सुरक्षा की दृष्टि से यह बाँध काफी अहम माना जाता है, क्योंकि इसे इस तरह बनाया गया है कि यह बाँध उच्च तीव्रता वाले भूकंप को भी झेल सकता है। इसको कोई भारी नुकसान नहीं होगा। कहा जाता है कि यह बाँध 7.5 रिक्टर स्केल तक का भूकंप झेल सकता है, इससे अधिक आने पर परिणाम काफी भयानक हो सकते है।

अगर टिहरी बांध टूटता है तो क्या होगा?

बाँध उच्च भूकंप ज़ोन वाले क्षेत्र में बना हुया है, इसलिए अगर किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के चलते यह बाँध टूट जाता है तो इसका असर उत्तराखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल तक देखने को मिल सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर ऋषिकेश और हरिद्वार में देखने को मिलेगा। ये शहर जलमग्न हो जायेंगे। इनके अलावा उत्तर प्रदेश के शहर हापुड़, मेरठ, बिजनौर और बुलंदशहर में भी 10 मीटर तक पानी भरने की आशंका बनेगी।

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भारत के अन्य प्रमुख बांध

देश में टिहरी बाँध के अलावा भी बहुत सारे बाँध है जो निम्नलिखित है:

भाखड़ा बाँध

यह बाँध 226 मीटर ऊँचा है और यह बाँध बिलासपुर में सतलज नदी के ऊपर बनाया गया है। इसके अलावा एक और बाँध इसके नीचे बनाया है जिसे नांगल बाँध कहते है। दोनों बाँधों को भाखड़ा-नांगल बाँध कहा जाता है। 1963 में इस बाँध को 245.28 करोड़ रुपयों में बनाया गया था।

भाखड़ा बाँध

यह बाढ़ तीन राज्य सरकारों (राजस्थान, हरियाणा और पंजाब) का संयुक्त उद्यम है। एशिया का दूसरा सबसे लम्बे बाँध का रिकॉर्ड भी इसे ही है। इसके जलाशय की क्षमता 75,01,775 एकड़ फीट है और इससे 1325 मेगावाट की बिजली उत्पादित की जाती है।

हीराकुड बाँध

इस बाँध की लम्बाई 25.79 किमी और ऊँचाई 61 मीटर है। हीराकुड बाँध उड़ीशा राज्य में महानदी नदी के ऊपर स्थित है। इसके जलाशय की क्षमता 47,79,965 एकड़ फीट है और इससे 347.5 मेगावाट की बिजली उत्पादित होती है। साल 1957 में इसका निर्माण हुया था और इसे बनाने में कुल लागत 1.01 बिलियन रूपये थी।

हीराकुड बाँध

नागार्जुन सागर बाँध

यह बाँध भारत का चौथा सबसे बड़ा बाँध है और इसकी ऊँचाई 124 मीटर है। यह बाँध तेलंगाना राज्य में कृष्णा नदी पर बनाया गया है। इसकी निर्माण लागत 1300 करोड़ रुपये थी। इसके 26 गेट है और यह 1.55 किमी लम्बा है। इसकी पूरी लम्बाई 4863 मीटर है और इसके जलशाय की क्षमता 93,71,845 एकड़ फीट है। इससे 816 मेगावाट की बिजली बनाई जाती है।

नागार्जुन सागर बाँध

सरदार सरोवर बाँध

यह बाँध गुजरात राज्य में नर्मदा नदी के ऊपर बनाया गया है। इस बाँध का नाम सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर रखा गया है। इस बाँध से केवल गुजरात को ही नहीं बल्कि इसके पड़ोसी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को भी मदद मिलती है। इसकी लम्बाई 1210 मीटर और ऊँचाई 163 मीटर है। इसके जलाशय की क्षमता 77,00,000 एकड़ फीट है और इससे 1450 मेगावाट की बिजली बनती है।

सरदार सरोवर बाँध

इनके अलावा भी बहुत सारे बाँध है जिसे सारणी में दर्शाया गया है-

बांध के नामराज्यनदी
भवानी सागर बाँधतमिल नाडुभवानी
तुंगभद्रा बाँधकर्नाटकतुंगभद्रा
रिहंद बाँधउत्तर प्रदेशरिहंद
मैथन बाँधझारखंडबरकर
कोयना बाँधमहाराष्ट्रकोयना
बिसलपुर बाँधराजस्थानबनास
मेत्तुर बाँधतमिल नाडुकावेरी
कृष्णराज सागर बाँधकर्नाटककावेरी
इन्दिरा सागर बाँधमध्य प्रदेशनर्मदा
चेरुथोनि बाँधकेरलचेरुथोनि

भारत देश का सबसे पुराना बाँध कल्लनई बाँध है जो कावेरी नदी के ऊपर तमिल नाडु राज्य में बनाया गया था। यह बाँध 100 ई.पू. बनाया गया था।

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वर्तमान में मैं स्टूडेंट हूँ, साथ ही ब्लॉग्गिंग करना भी मुझे अच्छा लगता है। इसके आलावा मुझे घूमना फिरना व लिखना पसंद है।

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