बहुव्रीहि समास (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas): हिंदी व्याकरण में बहुत सारे भाग है, जिसमें समास मुख्य रूप से शामिल है। समास बहुत ही बड़ा हिस्सा हिंदी व्याकरण का माना जाता है। हिंदी व्याकरण में संज्ञासर्वनामविशेषण के साथ-साथ समास भी मुख्य रूप से हिंदी व्याकरण का अंग है।

Bahuvrihi Samas
Bahuvrihi Samas

समास हिंदी व्याकरण की एक प्रमुख शाखा है। आज यहां पर समास के एक भाग बहुव्रीहि समास के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले है। यहां पर हम बहुव्रीहि समास को निम्न स्टेप्स में जानेंगे:

  • बहुव्रीहि समास किसे कहते है? (Bahuvrihi Samas in Hindi)
  • बहुव्रीहि समास के भेद (Bahuvrihi Samas ke Bhed)
  • बहुव्रीहि समास के उदाहरण (Bahuvrihi Samas ke Udaharan)

समास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां पर क्लिक करें समास (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

बहुव्रीहि समास किसे कहते है?

बहुव्रीहि समास की परिभाषा: जिस समास में कोई पद प्रधान न होकर (दिए गए पदों में) किसी अन्य पद की प्रधानता होती है। यह अपने पदों से भिन्न किसी विशेष संज्ञा का विशेषण है, उनको बहुव्रीहि समास कहा जाता है।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

Bahuvrihi Samas Examples in Hindi

  • चतुर्भुज: चार हैं भुजाएं जिसकी।

इस वाक्य में कोई भी एक पद प्रधान नहीं है, दोनों पद मिलकर अन्य पद की तरफ इशारा कर रहे हैं। इस वाक्य में दोनों पद मिलकर भगवान विष्णु की तरफ इशारा कर रहे हैं। अतः जिस वाक्य में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं, वहां पर बहुव्रीहि समास होता है। अतः यह उदाहरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

  • त्रिलोचन: तीन आँखों वाला

उदाहरण में स्पष्ट रुप से देख सकते हैं कि यहां पर पूर्व पद और उत्तर पद दोनों में से कोई भी प्रधान नहीं है। लेकिन दोनों के मिलने पर तीसरे पद की तरफ संकेत हो रहा है। इन दोनों पद के मिलने पर भगवान शिव की तरफ संकेत किया जा रहा है। अतः यह उदाहरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत रखा जाएगा।

  • दशानन: दस हैं आनन जिसके

ऊपर दिए गये उदाहरण में देख सकते हैं कि प्रथम पद और उत्तर प्रद दोनों प्रधान नहीं है। दोनों पद मिल कर एक तीसरे पद की तरफ इशारा कर रहे हैं। इन दोनों पद के मिलने पर रावण की तरफ इशारा हो रहा है। अतः यह उदाहरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

बहुव्रीहि समास के प्रकार

यह समास भी पांच प्रकार का होता है, जो निम्न है:

  1. समानाधिकरण बहुव्रीहि समास
  2. व्याधिकरण बहुव्रीहि समास
  3. तुल्ययोग बहुव्रीहि समास
  4. व्यतिहार बहुव्रीहि समास
  5. प्रादी बहुव्रीहि समास

समानाधिकरण बहुव्रीहि समास

इसमें सभी शब्द कर्ता कारक की विभक्ति के होते हैं लेकिन समस्त पद के द्वारा जो अन्य उक्त होता है वो कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण आदि विभक्तियों में भी उक्त हो जाता है, उसे समानाधिकरण बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे:-

  • जितेंद्रियां: जीती गई इंद्रियां है जिसके द्वारा
  • दत्तभोजन: दत्त है भोजन जिसके लिए
  • कलहप्रिय: कलह है प्रिय जिसको
  • दत्तधन: दिया गया है धन जिसके लिए
  • पीताम्बर: पीत है अम्बर जिसका
  • चौलड़ी: चार हैं लड़ियाँ जिसमें

ऊपर उदाहरण के रूप में जो वाक्य दिए गए हैं, इन वाक्य में आप देख सकते हैं कि इस वाक्य का समास करने पर कर्ता कारक की विभक्ति होती है। अतः यह उदाहरण समानाधिकरण बहू बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएंगे।

व्याधिकरण बहुव्रीहि समास

समानाधिकरण समास में दोनों पद कर्ता कारक की विभक्ति के होते हैं लेकिन यहां पहला पद तो कर्ता कारक की विभक्ति का होता है, बाद वाला पद संबंध है या अधिकरण कारक का होता है, इसे व्याधिकरण बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे:-

  • शूलपानणि: शूल है पाणि में जिसके
  • वीणापाणि: वीणा है पाणि में जिसके
  • चन्द्रशेखर: चन्द्र है शेखर पर जिसके

ऊपर दिए गए उधर ने देख सकते हैं कि जब वाक्य का समास किया जाता है तो कर्ता कारक की विभक्ति होती है और पहला पद कर्ता कारक में विभक्त होता है व दूसरा शब्द अधिकरण कारक मे विभक्त होता है। अतः यह उदाहरण व्याधिकरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

तुल्ययोग बहुव्रीहि समास

जिसमें पहला पद “सह” होता है, वह तुल्ययोग हो बहुव्रीहि समाज कहलाता है। “सह” का अर्थ होता है साथ समास होने की वजह से “सह” के स्थान पर केवल ‘स’ जाता है।

इस समास में इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि विग्रह करते समय जो दूसरा वाला शब्द प्रतीत हो वह समास में पहला पद हो जाता है। जैसे:-

  • सपरिवार: जो परिवार के साथ है।
  • सबल: जो बल के साथ है।

व्यतिहार बहुव्रीहि समास

जिससे घात या प्रतिघात की सूचना मिले, उसे व्यतिहार बहुव्रीहि समास कहते हैं। इस समास में यह प्रतीत होता है कि इस चीज से और उस चीज से लड़ाई हुई है। जैसे:-

  • मुक्कामुक्की: मुक्के-मुक्के से जो लड़ाई हुई
  • लाठालाठी: लाठी-लाठी से जो लड़ाई हुई

ऊपर दिए गए इन उदाहरण में घात और प्रतिघात की सूचना मिल रही है। अथवा इन सभी उदाहरण को व्यतिहार बहुव्रीहि समास के अंतर्गत रखा जाएगा।

प्रादी बहुव्रीहि समास

जिस बहुव्रीहि समास में पूर्व पद उपसर्ग को वह प्रादी बहुव्रीहि समास कहलाता है। जैसे:-

  • बेरहम: नहीं है रहम जिसमें
  • निर्जन: नहीं है जन जहां

ऊपर जो उदाहरण दिया गया है, इस उदाहरण में पूर्व पद उपसर्ग है, यह स्पष्ट रुप से दिखाई दे रहा है। अतः यह उदाहरण प्रादी बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

हमने क्या सिखा?

हमने यहां पर बहुव्रीहि समास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की है। बहुव्रीहि समास की परिभाषा (Bahuvrihi Samas ki Paribhasha) और बहुव्रीहि समास के उदाहरण को बहुत ही गहराई से समझा है। यदि आपका कोई सवाल है तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

समास के अन्य भाग

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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