तनोट माता मंदिर का इतिहास और रोचक तथ्य

Tanot Mata Mandir History in Hindi: आज इस कलयुग में भी कई ऐसी जगह है, जो इस दुनिया मे अच्छी शक्ति होने का प्रणाम देती है। उनमे से एक सामाजिक स्थल तनोट माता का मंदिर है, जो चमत्कारी मंदिर कहलाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर पर पाकिस्तान ने 23 बम गिराए थे। आपको जानकर यह आश्यर्य होगा कि उनमें से एक बम भी फटा नहीं। वह मंदिर वैसा का वैसा ही रहा, अब इसे सयोंग कहे या माता जी का जादू। लेकिन कहा जाता है कि इस स्थान पर और भी कई चमत्कार हुऐ है, जो काफी सराहनीय है।

पाकिस्तान सीमा के पास जैसलमेर है, जहां से करीब 120 किलोमीटर दूर तनोट माता का मंदिर है। जहां पर काफी श्रद्धालु लोग अपनी कामना और पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। उनकी इच्छा अनुसार उनको वह प्राप्त होता है, जो चाहते हैं।

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Tanot Mata Mandir History in Hindi

तनोट को भावी राजपूत राव तनुजी ने बसाया था, उसके बाद राजपूत राव ने तनोट माता का मंदिर (tanot mata ka mandir) भी बनवाया था। जो आज तनोट माता के नाम से प्रसिद्ध है और पूरे भारत से लोग यहां पर दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के दिनों में यहाँ पर बहुत ही भीड़ उमड़ उठती है। माता के दर्शन के लिए माता की पूजा अर्चना वहां पर उपस्थित फौजी लोग करते हैं तथा रात में तथा सुबह आरती भी की जाती है।

माता रानी के मंदिर पूरे भारत में अत्यधिक है, जहां पर श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। क्योंकि यहां पर उनकी इच्छाएं प्राप्त हो जाती है। जब भी माता रानी की आरती होती है तो उसके बाद जयकारा होने पर पूरा बॉर्डर जयकारों से गूंज उठता है और वहाँ पर एक अलग रौनक होती है।

कहा जाता है कि भारत और पाकिस्तान के युद्ध 1965 और 1971 में माता रानी का विशेष रोल रहा है। माता रानी ने ही इस युद्ध में भारत की विजय करवाई थी। जैसा कुछ फिल्मों में दिखाया गया है।

तनोट माता मंदिर का इतिहास और रोचक तथ्य | Tanot Mata Mandir History in Hindi

भारत व पाक की लड़ाई में माता रानी का चमत्कार

जैसा कि श्रद्धालुओं द्वारा इस मंदिर पर काफी श्रद्धा है और उनके अनुसार बताया जाता है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच सितंबर सन 1965 और सन 1971 में के बीच युद्ध हुआ था, उस समय पाकिस्तान ने अपने कई बम मंदिर पर गिराए। परंतु चमत्कार की बात यह है कि यह मंदिर टूटा नहीं और इस पर गिरने वाले बम फटे ही नहीं। तब से वहां के फौजी और आर्मी ऑफिसर इस मंदिर की पूजा अर्चना में श्रद्धा रखने लगे।

Tanot Mata Mandir History in Hindi

तनोट माता मंदिर का इतिहास

बहुत समय पहले की बात है। यहां पर एक चारण रहता था, जिसका नाम मामढिया चारण था और उसकी कोई संतान नहीं थी। वह बहुत परेशान और उदास था, उसने कई बार हिंगलाज माता की पैदल यात्रा की। एक रात माता रानी ने उसके सपने में आकर उससे पूछा कि तुम पुत्र चाहते हो या पुत्री बताओ। तो चारण ने कहा माता आप ही जगत जननी है आप ही मेरे यहां से जन्म ले लीजिए।

माता हिंगलाज की कृपा से तभी चारण के यहां 7 पुत्रियों ने तथा 1 पुत्र ने जन्म लिया और उन पुत्री में से एक पुत्री आवड़ माता थी, जिन्हें आज तनोट माता के नाम से जाना जाता है। चारण बहुत खुश था, उसके यहां माता ने जन्म लिया था और उसका जीवन धन्य हो गया।

यह मंदिर लगभग 1200 साल पहले का बताया जाता है। पहले यहां पर जाने की किसी व्यक्ति को अनुमति नहीं थी। परंतु सरकार से नतमस्तक पाकिस्तानी ब्रिगेडियर शाहनवाज खान ने परमिशन लेकर यहां पर दर्शन करने वाले व्यक्तियों को आने की परमिशन दिलाई।

दर्शन करने की इजाजत मिलने के उपरांत प्रेग्रेडियट ने माता रानी के मूर्ति पर एक सोने की चित्र चड़वाई जो आज भी उस इतिहास की गवाह है। आज भी उस मूर्ति के ऊपर सोने की चित चढ़ी हुई है।

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घूमने के लिए अच्छी जगह

मित्रों यदि आप तनोट माता के यहां दर्शन करने के लिए जाते हैं तो बहुत ही खुशी और श्रद्धा की बात है। परंतु कहीं जाने से पहले वहां की जानकारी होनी चाहिए तथा वहां के आसपास घूमने की जगह भी अवश्य होनी चाहिए और हमें यह पता होना चाहिए कि हम तनोट माता के दर्शन कैसे कर पाएंगे, क्या यातायात का साधन वहां तक होता है?

तो मित्रों यदि आप खुद की अपनी गाड़ी से जाते हैं तो आपको सबसे पहले जैसलमेर जाना होगा। जैसलमेर से लगभग 120 किलोमीटर तनोट माता का मंदिर है। यदि आप बस के द्वारा जाते हैं तो आपको जैसलमेर से गाड़ी पकड़नी पड़ेगी। यहां पहुंचने के उपरांत आपको एक शांति और सुंदर वातावरण की अनुभूति होगी।

जोधपुर से इस मंदिर की दूरी लगभग 399 किलोमीटर की है। यदि आप पाली होते हुए जाते हैं तो 448 किलोमीटर की दूरी आपको तय करनी पड़ेगी और यदि आप जयपुर से जाना चाहते हैं तो आपको 676 किलोमीटर (वाया फलोदी, नागौर) दूरी तय करनी पड़ेगी।

दिल्ली से 857 किलोमीटर की दूरी तनोट माता की मंदिर की है तथा अगर हम बात करें मुंबई से तो माता के मंदिर की दूरी मुंबई से 1146 किलोमीटर की है।

तनोट माता को रक्षा की देवी भी कहा जाता है। जैसा कि मैंने ऊपर की पंक्तियों में बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच का युद्ध में पाकिस्तान द्वारा फेंके गए बमों पर तनोट माता के आसपास के स्थान पर कोई फर्क नहीं पड़ा, जिससे तनोट माता का चमत्कार पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया है।

निष्कर्ष

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