ताजमहल शायरी

Taj Mahal Shayari

ताजमहल शायरी और स्टेटस | Taj Mahal Shayari

मोहब्बत को नसीब अगर तेरा साथ हो जाए
मेरा छोटा सा आशियाना भी ताजमहल हो जाए।

रिश्ते ताजमहल की तरह होते हैं,
सबको उनकी खूबसूरती तो दिखती हैं,
पर उन्हें बनानें में लगी ‘मेहनत’ और ‘वक्त’
किसी को नहीं नजर आता.

दिखाने के लिए तो हम भी बना सकते है ताजमहल,
मगर मुमताज़ को मरने दे हम वो शाहजहाँ नहीं।

सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर,
इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता?
बस पत्थर बन के रह जाता “ताज महल”
अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता..

अगर यादें दफ़न हो जाया करती तो,
ताजमहल इतना नायाब ना होता।

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सिर्फ इशारों में होती मोहब्बत
तो इन अल्फाजों को खूबसूरती कौन देता,
बस इक पत्थर बनकर रह जाता ताजमहल
अगर इश्क़ इसे अपनी पहचान न देता।

अकेला पन क्या होता है,
कोई ताजमहल से पूछे,
देखने के लिए पूरी दुनिया आती है,
लेकिन रहता कोई नही।

मै भी बना लूंगा महल तू मुमताज़ बनके तो दिखा

ताजमहल भी बनवा देंगे,
एक बार उनको हमसे
सच्चा प्यार तो हो जाने दो।

किसकी खूबसूरती का दीदार करें हम,
आज वो और ताजमहल दोनों आमने सामने हैं.

मेरे खूबसूरत दिल को भी
शायद ताजमहल समझ लिया है लोगो ने,
देखने और घूमने तो बहुत लोग आते है,
पर रहता कोई नहीं।

कोई तो बात है मोहब्बत मे वरना एक
लाश के लिए कोई ताजमहल तो नही बनाता॥

तू रहकर इस दिल में इस
दिल को ही तोड़ गया इस तरह,
कि हमने हर टुकड़े को नकाश कर तेरी
यादों का ताजमहल बना लिया।

शहर के हर गली में ताज होता।
गर मेरे महबूब में भी अक्स-ए-मुमताज होता।

मत बनाओ हवाई ताज़महल हर किसी के लिए,
जो सबसे हो जाया करे वो मोहब्बत नहीं होती।

Taj Mahal Shayari

ताश के पत्तों से ताजमहल नहीं बनता,
नदीं रोकने से समुन्दर नहीं बनता,
लड़ते रहो जिन्दगी से हरपल
क्योकि एक जीत से कोई सिकन्दर नहीं

ना हम राजमहल चाहते थे,
ना कोई ताजमहल चाहते है,
हम तो बस आपसे थोड़ा प्यार और थोडी इज्जत चाहते है।

अगर तुम न होते तो गजल कौन कहता,
तुम्हारे चेहरे को कमल कौन कहता,
यह तो करिश्मा हैं मोहब्बत का
वरना पत्थर को ताजमहल कौन कहता.

इस ईश्क कि निशानी ने दुनिया को दिवाना बनाया हैं,
कैसी होगी वो मोहब्बत ये अफसाना बताया हैं।

सफ़र लम्बा है दोस्त बनाते रहिये,
दिल मिले ना मिले हाथ बढ़ाते रहिये,
ताजमहल न बनाईये महंगा पड़ेगा,
मगर हर तरफ मुमताज़ बनाते रहिये।

तुम आगरा की वह ताज हो,
तुम इश्क़ में मेरी मुमताज़ हो।

रिश्तें राजमहल की तरह होते हैं,
सबको उनकी ख़ूबसूरती तो दिखती हैं,
पर उन्हें बनाने में लगी “मेहनत” और “वक्त”
किसी को नजर नहीं आता हैं.

दौलत से महज़ महल बना करते है,
पाक़ रिश्तों से ताजमहल बना करते है।

जिन्दा है शाहजहाँ की चाहत अब तक,
जवान है मुमताज की उल्फत अब तक,
जाकर देखो ताजमहल को यारो
पत्थर से भी टपकती है मोहब्बत अब तक.

झोपड़ियों में कहां बसता है इश्क “शहजादी”
ताजमहल की बात तो अगले जन्म में करूंगा।

रहा यूँ ही नामुकम्मल ग़म-ए-इश्क का फसाना,
कभी मुझको नींद आई कभी सो गया ज़माना।

बेचैन हो ‘तुम भी और बेचैन हूँ ‘मैं’ भी,
तुम ताज़ के लिए,मैं मुमताज़ के लिए।

हजारों झोपडियां जलकर राख होती हैं,
तब जाकर एक महल बनता हैं,
आशिको के मरने पर कफ़न भी नहीं मिलता,
हसीनाओं के मरने पर ‘ताज महल’ बनता हैं.

सीख रही हूं लफ्ज़ो की कारीगरी,
मुझे भी तो उसकी याद में,
लफ्ज़ो का ताजमहल बनाना हैं।

Taj Mahal Shayari

कुछ तो बात है मोहब्बत में,
वरना एक लाश के लिए कोई
ताजमहल नहीं बनवाता।

हर दिल में एक मुमताज होती है,
हर दिल एक ताजमहल होता हैं.

ए ताज तेरा रंग या मेरा इश्क़ गहरा है,
यूं तो दोनों पर ही दुनिया का पहरा है।

जब इश्क का जादू चलता है
सेहरा में फूल खिल जाता है
जब कोई दिवाना मचलता है
तब ताजमहल बन जाता है.

एक मुलाकात बस आखरी बार,
फिर मैं दफन कर दूंगा अपनी
मोहब्बत को ताजमहल के पास।

ताजमहल की ईमारत मोहबत की मिसाल नज़र आती है
हम किस किस के लिए ताजमहल बनाये
हमे तो हर लड़की में मुम्ताज़ नज़र आती है

अगर इस जहाँ में मजदूर का न नामों निशाँ होता,
फिर न होता हवामहल और न ही ताजमहल होता…

महलों में जो ढ़ूंढ़ोगे तो तरसोगे मोहब्बत को,
ख़ज़ाना यहाँ छूपा है, झोंपड़ी के ताजमहल में।

ताजमहल को देख कर बोला शाहजहाँ का पोता.
आज हमारा भी बैंक बैलेंस होता, अगर दादा आशिक ना होता!

ताजमहल तो वो ईमारत है,
जब जब कोई इसे देखे तो
तो महबूब याद आ जाता है।

हम कोनसा उस बेवफा की वफा के मोहताज है,
हमारे सपनों के ताजमहल के लिए उम्मीदवार कई मुमताज है।

ताज महल क्या चीज़ है
मैं तेरे लिए हीरों का महल बनवाऊंगा
मुमताज़ महल तो मर के दफ़न हुई थी
मैं तुझे जिंदा ही दफ्नाऊंगा.

चाहत थी मेरी हंसी ताजमहल की तरह,
तेरी यादो ने हमको ही खण्डहर बना दिया।

इश्क ने इंसान को क्या बना दिया,
किसी को कवि किसी को कातिल बना दिया,
दो फूलों का बोझ न उठा सकती थी मुमताज
और शाहजहाँ ने उसपर ताजमहल बना दिया.

जब ख़्वाबों के ताज को जलाया दर्द के महल में,
तब रौशनी बिखरी है जाकर ताजमहल पर।

Taj Mahal Shayari

अगर इतना ही आसान होता,
किसी की यादों को भुलाना तो,
मुमताज की याद में शाहजहां को,
ताजमहल नहीं बनवाना पड़ता।

इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज-महल,
सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है…

एक आगरा में है
और दूसरा मेरे दिल मे,
जो अपनी मुमताज के इंतजार में
फ़ना होता जा रहा है।

जब प्यार किसी से होता हैं,
हर दर्द दवा बना जाता है,
क्या चीज मोहब्बत होती हैं,
एक शख़्स खुदा बन जाता हैं.

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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