स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार

Swami Dayanand Saraswati Quotes in Hindi

swami dayanand saraswati quotes in hindi
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स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार | Swami Dayanand Saraswati Quotes in Hindi

“ये ‘शरीर’ ‘नश्वर’ है, हमे इस शरीर के
जरीए सिर्फ एक मौका मिला है,
खुद को साबित करने का कि,
‘मनुष्यता’ और ‘आत्मविवेक’ क्या है।”

“कोई मूल्य तभी मूल्यवान है
जब मूल्य का मूल्य स्वयं के लिए मूल्यवान हो।”

अज्ञानी होना गलत नहीं है,
अज्ञानी बने रहना गलत है.

“वेदों मे वर्णीत सार का पान करनेवाले ही ये
जान सकते हैं कि
‘जिन्दगी’ का मूल बिन्दु क्या है।”

नुक्सान से निपटने में सबसे ज़रूरी चीज है
उससे मिलने वाले सबक को ना भूलना.
वो आपको सही मायने में विजेता बनाता है.

“क्रोध का भोजन ‘विवेक’ है,
अतः इससे बचके रहना चाहिए।
क्योकी ‘विवेक’ नष्ट हो जाने पर,
सब कुछ नष्ट हो जाता है।”

“जिस इंसान में अहंकार ने वास किया,
उस इंसान का विनाश होना निश्चित है।”

धन एक वस्तु है जो ईमानदारी
और न्याय से कमाई जाती है.
इसका विपरीत है अधर्म का खजाना.

“‘मानव’ जीवन मे ‘तृष्णा’ और ‘लालसा’ है,
और ये दुखः के मूल कारण है।”

“काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी,
काम करते हुए सोचना सतर्कता,
और काम करने के बाद सोचना मूर्खता है।”

जीह्वा को उसे व्यक्त करना
चाहिए जो ह्रदय में है.

“‘क्षमा’ करना सबके बस की बात नहीं,
क्योंकी ये मनुष्य को बहुत बङा बना देता है।”

सबसे उच्च कोटि की सेवा ऐसे व्यक्ति की मदद करना है
जो बदले में आपको धन्यवाद कहने में असमर्थ हो.

“‘काम’ मनुष्य के ‘विवेक’ को भरमा
कर उसे पतन के मार्ग पर ले जाता है।”

“दुनिया में सबसे बढ़िया
संगीत यंत्र इंसान की आवाज़ है।”

इंसान को दिया गया सबसे
बड़ा संगीत यंत्र आवाज है.

Swami Dayanand Saraswati Quotes in Hindi

“लोभ वो अवगुण है,
जो दिन प्रति दिन तब तक बढता ही जाता है,
जब तक मनुष्य का विनाश ना कर दे।”

आत्मा अपने स्वरुप में एक है,
लेकिन उसके अस्तित्व अनेक हैं.

“मोह एक अत्यंन्त विस्मित जाल है,
जो बाहर से अति सुन्दर और अन्दर से अत्यंन्त कष्टकारी है;
जो इसमे फँसा वो पुरी तरह उलझ ही गया।”

“ऐसे व्यक्ति की मदद करना है जो बदले में
आपको धन्यवाद कहने में असमर्थ हो,
सबसे उच्च कोटि की सेवा है।”

उपकार बुराई का अंत करता है,
सदाचार की प्रथा का आरम्भ करता है,
और लोक-कल्याण तथा सभ्यता में योगदान देता है.

“हर इंसान को अपना पल पल आत्मचिंतन में
लगाना चाहिऐं क्योंकि हर क्षण हम परमेश्वर
द्वारा दिया गया समय खो रहे हैं।”

आप दूसरों को बदलना चाहते हैं
ताकि आप आज़ाद रह सकें. लेकिन,
ये कभी ऐसे काम नहीं करता.
दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हैं.

“ईष्या से मनुष्य को हमेशा दूर रहना चाहिए।
क्योकि ये ‘मनुष्य’ को अन्दर ही अन्दर जलाती रहती है
और पथ से भटकाकर पथ भ्रष्ट कर देती है।”

“आप दूसरों को बदलकर स्वम को आज़ाद नहीं कर सकते,
क्योंकि यह ऐसे काम नहीं करता।
दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हो जायेंगे।”

प्रबुद्ध होना- ये कोई घटना नहीं हो सकती.
जो कुछ भी यहाँ है वह अद्वैत है.
ये कैसे हो सकता है? यह स्पष्टता है.

मद ‘मनुष्य की वो स्थिति या दिशा’ है,
जिसमे वह अपने ‘मूल कर्तव्य’ से भटक
कर ‘विनाश’ की ओर चला जाता है।”

“वेदों मे वर्णीत सार का पान करने वाले ही
यह जान सकते हैं कि ‘जिन्दगी’ का मूल बिन्दु क्या है।”

लोग कहते हैं कि वे समझते हैं
कि मैं क्या कहता हूं और मैं सरल हूं.
मैं सरल नहीं हूँ, मैं स्पष्ट हूं.

“मनुष्य की विद्या उसका अस्त्र है,
धर्म उसका रथ, सत्य उसका सारथी और
उसकी भक्ति ‘रथ के घोड़े’ होते हैं।”

हमें पता होना चाहिए कि भाग्य भी कमाया जाता है
और थोपा नहीं जाता. ऐसी कोई कृपा नहीं है
जो कमाई ना गयी हो.

“अगर ‘मनुष्य’ का मन ‘शाँन्त’ है, ‘
चित्त’ प्रसन्न है, ह्रदय ‘हर्षित’ है,
तो निश्चय ही ये अच्छे कर्मो का ‘फल’ है।”

“जो व्यक्ति सबसे कम ग्रहण करता है
और सबसे अधिक योगदान देता है वह परिपक्कव है,
क्योंकि जीने मेंही आत्म-विकास निहित है।”

“जिस ‘मनुष्य’ मे ‘संतुष्टि’ के ‘अंकुर’ फुट गये हों,
वो ‘संसार’ के ‘सुखी’ मनुष्यों मे गिना जाता है।”

अगर आप पर हमेशा ऊँगली उठाई जाती रहे तो
आप भावनात्मक रूप से अधिक समय तक खड़े नहीं हो सकते.

” आत्मा, ‘परमात्मा’ का एक अंश है,
जिसे हम अपने ‘कर्मों’ से ‘गति’ प्रदान करते है।
फिर ‘आत्मा’ हमारी ‘दशा’ तय करती है।”

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Swami Dayanand Saraswati Quotes in Hindi

“जो लोग दूसरों की मदद करते हैं
वो एक तरह से भगवान की मदद करते हैं।”

दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिये
और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा.

“मानव को अपने पल-पल को ‘आत्मचिन्तन’ मे लगाना चाहिए,
क्योकी हर क्षण हम ‘परमेश्वर’ द्वार दिया गया ‘समय’ खो रहे है।

गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करता है.
और बिना गीत के, मर्म को छूना मुश्किल है.

“अहंकार आने पर मनुष्य के भीतर वो स्थितआ जाती है,
जब वह अपना आत्मबलऔर और आत्मज्ञानको खो देता है।”

वह अच्छा और बुद्धिमान है जो हमेशा सच बोलता है,
धर्म के अनुसार काम करता है और दूसरों को
उत्तम और प्रसन्न बनाने का प्रयास करता है.

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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