जल बचाओ पर भाषण

Speech on Save Water in Hindi : जल एक महत्वपूर्ण तत्व अर्थात इस पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए जल एक महत्वपूर्ण साधन है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जल ही है जो जीवन को बनाए हुए रखे हैं और इस जल को हम इस प्रकार बर्बाद तथा फिजूल खर्च कर रहे हैं, जिससे कि भविष्य में जल की कमी देखी जा सकती है।

Speech on Save Water in Hindi
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हम इस आर्टिकल में आपको जल बचाओ पर भाषण (Speech on Save Water in Hindi) के बारे में बेहद सरल भाषा में माहिति प्रदान करेंगे। यह भाषण हर कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

जल बचाओ पर भाषण | Speech on Save Water in Hindi

जल बचाओ पर भाषण (500 शब्द)

आदरणीय प्रधानाचार्य तथा सभी शिक्षक गण और मेरे सहपाठियों को मेरा शुभ प्रभात।

आज जल बचाओ के विषय में हम आपके सामने अपने विचारों को प्रस्तुत करने जा रहे हैं। यह विषय एक ऐसा विषय है, जिस पर सोचना महत्वपूर्ण है। जल एक ऐसा साधन है, जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। पृथ्वी पर जीवन का आधार जल है। अर्थात सभी जीव पेड़ पौधे पक्षी मनुष्य सभी के लिए जल अति आवश्यक है। जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है।

जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी पर 60 से 70 % पानी उपलब्ध है, इसी कारण से पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है। अन्य ग्रहों पर पानी न होने के कारण जीवन नहीं देखा गया है अर्थात वहां जीवन की संभावना व कल्पना नहीं की जा सकती है। इसी कारण से अन्य ग्रहों पर किसी भी प्रकार की जीवित प्रजाति की होने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

पृथ्वी पर पानी नवीनीकृत स्रोतों से आता है अर्थात पानी का साधन एक साइकिल की तरह चलता है अर्थात समुद्रों से वाष्पीकृत  होकर पानी बादलों में जाता है। बादलों से बारिश के रूप में फिर से पृथ्वी पर आता है। इसी प्रकार से यह प्रक्रिया चलती रहती है और पानी निरंतर पृथ्वी पर बना रहता है। लेकिन पृथ्वी पर 29% स्थल है और 70 से 71% पानी जिसमें से 2 परसेंट पानी पीने के लिए उपलब्ध है। बाकी का पानी समुद्रों में पाया जाता है, जो खारा है।

2% पानी से हम अपने विभिन्न में और दैनिक कार्यों को करते हैं। इस दो पर्सेंट पानी में आज कमी देखी गई है अर्थात भविष्य में यदि इसी प्रकार से पानी की कमी बनी रही तो यह 2%पानी भविष्य के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। इसीलिए हमें पानी को कम खर्च करना चाहिए।

पानी के बारे में सोचें तो यह एक नवीनीकृत स्रोत है और इस नवीनीकृत इस स्रोत को बचाने के लिए हमें चिंतित होना चाहिए। आखिर ऐसा क्यों नहीं हम कर रहे हैं?, हमारे अंदर हमारे मन में ऐसे सवाल उठने चाहिए। इतने कम परसेंट पानी को बचाने के लिए हमें अपने आप को सजग करना चाहिए तथा हमें जिम्मेदार होकर इस पृथ्वी पर पीने के पानी को बचाना चाहिए।

यह सवाल हमारे मन में उठता है कि हम जल बचाओ के बारे में इतनी देर से कैसे सोच सकते हैं?, जो हमारे जीवन का आधार जिस पर हमारा जीवन टिका हुआ है तथा जिससे जीवन संभव है। उसको हम कैसे भूल सकते हैं। उसकी सुरक्षा करना हम कैसे भूल सकते हैं?

आज पानी की निरंतर कमी देखी जा रही है। यदि पीने योग्य पानी गंदा हो गया तो जीवन मौत से भी बदतर लगने लगेगा अर्थात एक मुरझाया हुआ पेड़ के जैसा जीवन हो जाएगा। दूर से देखने पर पानी साफ और अच्छा स्वच्छ लगता है, परंतु उसने विभिन्न प्रकार की गंदगी, धूल तथा इत्यादि प्रकार के कारखानों से निकला हुआ विषैला पदार्थ मिश्रित होता है, जिसे पीने से पशु पक्षी पेड़ पौधे तथा जीव जंतु भी बीमार हो सकते हैं।

यदि हम पीने के पानी को एक सीमित मात्रा में उपयोग करें तथा सभी प्रकार के नियमों कानूनों से पीने के पानी का उपयोग करें तो वास्तव में हमें भविष्य में ऐसे परिस्थितियों का सामना नहीं करना होगा।

मैं अंतिम शब्दों में बस इतना ही कहना चाहूंगा की जल है तो जीवन है और जीवन है तो संसार है। इसलिए जल को बचाएं और संसार को हरा भरा करें।

धन्यवाद।

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जल बचाओ पर भाषण (500 शब्द)

सम्मानित प्रधानआचार्य तथा आए हुए अतिथि महोदय और हमारे विद्यालय के समस्त अध्यापकों और सहपाठियों को मेरा शुभ प्रभात।

मैं अभिषेक कुमार, आज विश्व जल दिवस के अवसर पर जल की विशेषता तथा इसकी महत्वपूर्णता को समझाने के लिए अपने शब्दों को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। जल एक ऐसा विषय है या एक ऐसा विषय बन जाता है, जब इसकी कमी हो जाती है अर्थात देखा जाए तो पृथ्वी पर जल लगभग एक तिहाई उपस्थित है।

लेकिन हमारे मन में यह सवाल उठता है कि इतना जल उपस्थित है, तो हम इसे बचाने की बात क्यों कर रहे हैं? अर्थात जल एक तिहाई पृथ्वी पर पाया जाता है और एक भाग पर पृथ्वी अर्थात स्थल पाया जाता है।

70 से 71 % पानी पृथ्वी पर है और 29% स्थल है, जिस 70 से 71% पानी में से हमें सिर्फ 1% पानी उपयोग करने के लिए मिलता है अर्थात हम एक पर्सेंट पानी को पीते, नहाते खाना पकाने तथा कपड़े धोने आदि में  उपयोग करते हैं। आज की परिस्थितियों को देखकर ऐसा लग रहा है कि एक प्रश्न पानी में भी कमी देखी जा सकती है और वास्तव में यह कमी देखी गई है।

पानी एक ऐसा विषय बन जाता है, जब इसकी कमी निरंतर बढ़ती जाती है। कुछ वर्षों में इसकी कमी देखी गई है। वैज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों के अनुसार बताया गया है कि यदि लगभग 20 से 30 साल में पानी बचाओ अभियान के प्रति जागरूकता न दिखाया गया तो इस 1%  पानी की मात्रा घट जाएगी और पृथ्वी पर उपस्थित उपयोगी जल कम हो जाएगा। इस 1% पानी पर पूरा विश्व निर्भर है अर्थात एक पर्सेंट पानी पूरे संसार में उपयोग किया जाता है

लेकिन इस 1%  पानी में 70 से 75 %  पानी फिजूल खर्च तथा ऐसे कार्यों में उपयोग किया जाता है, जो उपयोगी नहीं है। उसमें सिर्फ 25% पानी ही खाने-पीने, नहाने, कपड़े धोने में उपयोग किया जाता है। इस तरह से हम अपने पानी का बचाव नहीं कर सकते हैं। यदि हमें उन्हें इस उपयोगी पानी का बचाव नहीं किया गया तो भविष्य में एक मुख्य तथा भयंकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।।

पानी की उपयोगिता बात करें तो मनुष्य का शरीर 75% पानी से मिलकर बना हुआ है अर्थात उसके शरीर में 75 % पानी उपस्थित है। लगभग 42 लीटर पानी मानव के शरीर में पाया जाता है। यदि इस 42 लीटर में यदि 1 से 2 लीटर पानी की कमी होती है, तो उसके शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां, चिड़चिड़ापन इत्यादि जैसी बीमारियां उत्पन्न हो जाते हैं, जो मनुष्य के लिए घातक हो सकती हैं।

आज हम उपयोगी पानी को गंदा करते जा रहे हैं। कारखानों सीवर तथा अन्य कंपनियों से निकलने वाला गंदा तथा विषैला पदार्थ उपयोगी पानी में मिलकर पानी को गंदा करता जा रहा है, जिससे कि वह पीने योग्य पानी न रहकर बड़े-बड़े समुद्रों में चला जाता है।

इस विषय पर हमें सोचना चाहिए तथा इसे बचाने के लिए तथा इस पर खर्च करने के लिए हमारे अंदर सवाल उठने चाहिए कि पानी को हम कैसे बचाये?, कैसे कम से कम कैसे खर्च करें? यह हमारी जिम्मेदारी है और हम पृथ्वी की रक्षा इसी प्रकार अर्थात प्राकृतिक दी हुई वस्तुओं से उसकी रक्षा कर सकते हैं।

मैं अपने आखिरी शब्दों में बस इतना कहना चाहूंगा कि हमें सिर्फ अपने जरूरत के अनुसार ही पानी को लेना चाहिए। हमें उसे उतना ही उपयोग करना चाहिए, जो हमारे लिए उपयोगी है क्योंकि जल में ही जीवन पाया जाता है और जीवन सबसे पहले जल में ही पाया गया था धन्यवाद।

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जल बचाओ पर भाषण (500 शब्द)

आदरणीय आए हुए विधायक जी तथा इस विद्यालय के समस्त अध्यापक गण और मेरे प्यारे मित्रों तथा दोस्तों को मेरा नमस्कार।

आज इस पर्व पर मैं एक विशेष विषय पर चर्चा करना चाहूंगा, जो वास्तव में हमारे जीवन से, हमारी पृथ्वी से तथा आम दैनिक कार्यों में उपयोगी वस्तुओं में से है। हां दोस्तों आज हम पानी के विषय में चर्चा करने जा रहे हैं।

जल एक ऐसा तत्व है, जो पृथ्वी पर उपस्थित प्रकृति द्वारा एक सुंदर तथा अत्यंत उपयोगी तत्व दिया गया है। प्रकृति ने हमें जल भरपूर मात्रा में दिया है। पृथ्वी पर लगभग 70 से 71 %  पानी पाया जाता है अर्थात पृथ्वी एक तिहाई भाग जल से घिरा हुआ है और 29 %  में स्थल हैं यानी एक चौथाई भाग में जीवन निवास करता है।

लेकिन इस 70 से 71 % पानी में 1%  पानी भी पीने योग्य है अर्थात 1% पानी को ही उपयोग में लाते हैं। बाकी का पानी समुद्रों में नदियों में उपस्थित है, जिसमें नमक की मात्रा अर्थात खारा पानी है। वह पीने उपयोग नहीं है। एक परसेंट पानी पर इस पृथ्वी पर समस्त जीव जंतु मानव वह पेड़ पौधे निर्भर करते हैं।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस पानी में कमी देखी गई है अर्थात इसकी मात्रा में कमी का आकलन किया गया है, इसका कारण हम लोग हैं अर्थात हम लोग फिजूल पानी तथा अन्धादुन्ध पानी को खर्च करते हैं, जहां पर हमें 1 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

वहां पर हम दो  लीटर पानी को खर्च करते हैं। इस प्रकार पानी में कमी का आकलन करते हुए भविष्य की चिंता जताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार बताया गया है कि यदि 20 से 30 वर्ष में ऐसी ही स्थिति बनी रही तो उपयोगी पानी में काफी गिरावट देखी जा सकती है, जो मानव तथा जीव जंतुओं के लिए भयंकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

हम आपको बता दें की हमारा शरीर 75% पानी से मिलकर बना हुआ है अर्थात हमारे शरीर में सभी प्रकार की उपापचय तथा अपचन की क्रियाएं जल से ही संभव होती हैं अर्थात भोजन का पाचन हो या ब्लड का सरकुलेशन या सारी क्रियाएं जल में घुली कर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचती है।

पानी का बचाव जरूरी है। आने वाले कई वर्षों में यदि हमारी पीढ़ियों को स्वच्छ और साफ पानी न मिला तो शायद इस पृथ्वी पर जीवन की कमी को देखा जा सकता है। यदि आप इस विषय पर नहीं सोच सकते तो आपको कोई वस्तु पहले मिल रहे हो और बाद में उसकी कमी के कारण आप को विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो तो आप उसी स्थान पर अपने आप को रख कर देखिए।

जो आज से लगभग 20 से 30 साल बाद ऐसी स्थिति बनी रहने पर विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़े। भविष्य अंधकार की ओर जाने में देर नहीं लगाएगा। भविष्य तथा आने वाले पीढ़ियों के लिए जल बचाओ अभियान कुछ सरकार ने चलाया है अर्थात इसकी जिम्मेदारी हम सभी पृथ्वी वासियों को है।

सभी देश अपने अपने देश में जल बचाओ जागरूकता का अभियान अवश्य चलाएं, जिससे कि पृथ्वी पर उपयोगी जल में कमी की पूर्णता की जा सके और पृथ्वी फिर से अपने अनुसार कार्यों को निरंतर प्रगति पर ला सके।

आज बड़े बड़े कारखानों से निकलने वाला जल उस उपयोगी जल में मिश्रित हो जाता, जिसे हम उपयोग करते हैं। जिसकी कमी से आज उपयोगी जल में कमी देखी गई और इसका सबसे बड़ा कारण मानव जाति द्वारा फैलाई गई गंदगी है, जिसकी भरपाई हम पृथ्वी वासी को ही करनी होगी।

मैं अपने अंतिम शब्दों में बस इतना ही कहना चाहूंगा कि हमें भी फिजूल पानी को बहाना नहीं चाहिए तथा उतना ही पानी उपयोग करना चाहिए, जो हमारे लिए उपयोगी है। जल है तो जीवन है और जीवन है तो विश्व है, इन्हीं शब्दों से मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं धन्यवाद।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको जल बचाओ पर भाषण ( Speech on Save Water in Hindi) पसंद आये होंगे। इसे आगे शेयर जरूर करें और कोई सुझाव या सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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