वनों की कटाई पर भाषण

Speech on Deforestation in Hindi : वनों की कटाई करना यह एक गंभीर समस्या में से सबसे महत्वपूर्ण समस्या है। लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्सर वनों की कटाई करते हुए नजर आ रहे हैं। जहां पर उन्हें रहने के लिए जगह नहीं मिलती है, तो वहां पर वह पेड़ पौधे काटने लगते है और जंगल को साफ कर देते हैं और वहां पर अपनी रहने के लिए भवन का निर्माण करते हैं। इसके लिए सरकार को महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वनों की कटाई पर भाषण देने वाले हैं, जो आपके लिए लाभदायक हो सकता है और लोगों को जागरुक करने का काम कर सकता है।

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वनों की कटाई पर भाषण | Speech on Deforestation in Hindi

वनों की कटाई पर भाषण (500 शब्द)

माननीय अतिथि गण, प्रधानाचार्य जी, शिक्षक गण, एवं मेरे समस्त सहपाठियों, आप सभी को सुप्रभात। आज मैं आपके समक्ष एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहा हूं। आज दिन प्रतिदिन हम ग्लोबल वार्मिंग के बारे में सुनते हैं, उसी का एक विषय है वनों को काटना। वनों की कटाई की वजह से बहुत ही ज्यादा ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ती जा रही है, आईए इस पर को चर्चा करते हैं।

जैसा कि आप जानते हैं वनों की कटाई एक बहुत ही बड़ा विषय है और यह गंभीर समस्या बनती जा रही है। ऐसे में लोग एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित होते ही रहते हैं, जिसकी वजह से वह वनों की कटाई करते हैं और रहने के लिए जगह बना लेते हैं। वनों की कटाई तब ज्यादा की जाती है जब लोग बड़े घर या फार्म हाउस बनाने की इच्छा रखते हैं और इसके लिए वह वनों की कटाई करना शुरू कर देते हैं।

इसी के साथ जब भी किसी को ईंधन या लकड़ी की जरूरत होती है, तो वह वनों की कटाई करने के लिए निकल पड़ते हैं। इसका मतलब साफ है कि मनुष्य के द्वारा ही वन को खत्म किया जा रहा है, जिसकी वजह से हमारी जलवायु बहुत ही ज्यादा प्रभावित हो रही है और ग्लोबल ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती ही जा रही है।

इसी के साथ बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए लोग कारखाने, घर इत्यादि का निर्माण करने के लिए वनों का इस्तेमाल करते हैं। लोग बड़ी-बड़ी इमारत और अपार्टमेंट बना लेते हैं। इसी के साथ सड़कों का निर्माण करते हैं। इन सभी चीजों के लिए वनों की कटाई बहुत ही ज्यादा होने लगी है और भी कई अन्य कारण है, जिसकी वजह से वनों की कटाई बहुत ही अधिक बढ़ती जा रही है।

कुछ कारण इस प्रकार है जैसे कि जंगल की आग बढ़ना, कई बार जंगल में आग लगा दी जाती है और कई बार प्राकृतिक आग लग जाती है, जिसकी वजह से वन नष्ट हो जाते हैं। दूसरा कारण है झूमिंग यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें किसान आग लगाने के लिए जंगल से पेड़ काट लेते हैं और वहां जो राख उत्पन्न होती है। उसका इस्तेमाल उर्वरक के रूप में किया जाता है।

तीसरा कारण है जल विद्युत परियोजनाएं इसकी वजह से जलाशयों और मानव निर्मित बांधों के लिए वनों की कटाई बहुत ही ज्यादा हो रही है और सभी पौधे और जानवर मारे जाने लगे हैं। चौथा कारण है अधिक चराई जैसे जैसे देश में लोगों की आबादी बढ़ रही है वैसे पशुओं की आबादी भी बढ़ने लगी है। इसी के चलते लोग अपने पशुओं को जंगल में ले जाते हैं और वहां जंगल के जंगल खत्म हो जाते है।

यह सब ऐसे कारण हैं जिनको हमें रोकना चाहिए और वनों की अंधाधुंध कटाई को भी रोकना चाहिए। अगर ऐसे ही वनों की कटाई होती रही तो ग्लोबल वार्मिंग बहुत ही अधिक बढ़ जाएगी, जिसकी वजह से पृथ्वी पर सांस लेना तक मुश्किल हो जाएगा।

अंत में मैं केवल यही कहना चाहूंगा कि हमें पेड़ों की कटाई को रोकना चाहिए और अपने वातावरण को स्वच्छ रखना चाहिए और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने चाहिए।

धन्यवाद!

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वनों की कटाई पर भाषण (500 शब्द)

माननीय कक्षाअध्यापक और मेरे प्यारे मित्रों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। आज मैं आपसे बहुत ही महत्वपूर्ण विषय कि उन्हें बात करने जा रहा हूं, वनों की कटाई के बारे में हम बात करने जा रहे हैं।

मैं एक प्रकृति प्रेमी हूं और मुझे नदियों और पेड़ों से बहुत ही ज्यादा प्यार है। मैं इन सभी के बीच में रहकर खुद को भाग्यवान मानता हूं, इसीलिए जब जब प्रकृति पर प्रहार होता है तो मुझे इन सब को देखकर बहुत ही ज्यादा दुख होता है। मैं अक्सर पेड़ों को नष्ट होते हुए देखता हूं। नदियों को गंदा और प्रदूषित होते हुए देखता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है मानो लोग मुझे ही नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसी तरह से इस समय वनों की कटाई मतलब वन भूमि का कम होना, यह मेरे लिए बहुत ही दुर्भाग्यवश है। मैं इन सभी को देखकर आश्चर्यचकित हो जाता हूं। क्या आप जानते हैं आने वाले समय में यह समझ से भी अधिक बढ़ जाएगी, जिसकी वजह से हम इस पृथ्वी पर रहकर सांस तक नहीं ले पाएंगे और हमारा जीना भी दुश्वार हो जाएगा, इसकी वजह से अक्सर नई-नई बीमारियां भी पनपती रहती हैं।

वनों की कटाई की वजह से पर्यावरण बहुत ही अधिक प्रभावित होता है। इसकी वजह से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बहुत ही अधिक वृद्धि हो रही है क्योंकि जितनी अधिक पेड़ पौधे होते हैं उतनी ही ऑक्सीजन मिलती है। जैसे जैसे वनों की कटाई हो रही है वर्षा में भी कमी आती जा रही है और सूखे का खतरा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है।

मिट्टी की गुणवत्ता भी बिगड़ रही है क्योंकि वह पहले सूखती है फिर उसे पानी और हवा नष्ट कर देती है। गर्मियों को ठंडा और सर्दियों को गर्म बनाकर वातावरण में बहुत ही अधिक असंतुलन पैदा हो रहा है। लकड़ी की उपलब्धता बहुत ही कम होती जा रही है।

जंगलों की कमी की वजह से मिट्टी का कटाव और भी सूखा बढ़ता जा रहा है और भूमि बंजर होती जा रही है क्योंकि अगर बारिश नहीं होगी तो, हमारी भूमि बंजर होगी। जिसकी वजह से कोई भी काम नहीं हो पाता है। बारिश ना होने की वजह से वन भूमि रेगिस्तान बनती जा रही है, जिसकी वजह से अक्सर बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं आती ही रहती हैं।

वनों की कटाई की वजह से हमारे पर्यावरण पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है। इसके लिए सरकार को कड़े से कड़े नियम और कानून बनाने चाहिए और वनों की अंधाधुंध कटाई पर प्रतिबंध लगाना बहुत ही आवश्यक है, अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए।

अंत में मैं केवल आपसे इतना ही कहना चाहूंगा कि जितना हो सके हमें और हमारी युवा पीढ़ी को सभी प्रकार की स्थिति का महत्व समझना बहुत ही आवश्यक है। इसी के साथ भीड़ और जंगलों की कटाई को रोकना बहुत ही जरूरी है। अन्यथा आने वाले समय में अनर्थ होने से कोई भी नहीं रोक पाएगा, इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।

धन्यवाद!

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने आपको वनों की कटाई पर भाषण ( Speech on Deforestation in Hindi) बताया है। अगर आप स्कूल या कॉलेज की छात्रा है या किसी भी अन्य समारोह में आपको या लोगों को जागरूक करने के लिए वनों की कटाई के बारे में भाषण देना है, तो यह आपके लिए सहायक हो सकता है।

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