संत गुरू रविदास जी का जीवन परिचय

Sant Ravidas Biography in Hindi: भारत देश में कई संत और महात्माओं ने जन्म लिया है। इन सब संत-महात्माओं के कारण ही तो भारत आज विश्व गुरू के नाम से जाना जाता है। जब भी हमारे देश में बुराइयां, भेदभाव (Discrimination) और जातीपाती जैसी समस्याएं फैली। तब संत मह्त्माओं ने अपने वचनों से सभी को सच्चे मार्ग और एक साथ रखने का काम किया है।

Sant Ravidas Biography in Hindi

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इन्ही संतो में से एक संत रविदास (Sant Ravidas Maharaj) भी हुए। इन्होनें भी सभी लोगों को सच्चे मार्ग पर भगवान की भक्ति में चलने के लिए सभी को प्रेरत किया। तो आइये जानते है संत रविदास के जीवन के बारे पूरे विस्तार से (Sant Guru Ravidas Biography In Hindi)।

संत गुरू रविदास जी का जीवन परिचय (Sant Ravidas Biography in Hindi):

संत रविदास जी जो कि रैदास के नाम से भी जाने जाते है। (Guru Ravidas Date of Birth) उनका जन्म 1377 से 1398 के बीच माना जाता है। इनका जन्म उतरप्रदेश के वाराणसी शहर के गोवर्धनपुर नाम के गांव में हुआ था। हिन्दू महीनो के अनुसार संत रविदास जी की जयन्ती माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है (Sant Ravidas Jayanti)

इनके पिताजी का नाम संतोख दास जी (Santokh Das) था। इनके पिता मल साम्राज्य के राजा नगर में सरपंच के रूप में भी काम करते थे और इनका जुते बनाने का काम था। इनके पिता का यह काम होने के कारण संत रविदास जी (Sant Ravidas Ji) भी इस काम को अच्छी तरह से कर लेते थे। ये जो भी काम करते थे तो उसे पूरी निष्ठा (Loyalty) और भावना से पूरा करते थे। संत रैदास का जन्म से ही भक्ति भाव से जुड़ाव रहा है। जब भी लोगों को उनकी जरूरत पड़ती थी तो संत रविदास जी (Sant Raidas Ji) अपने काम का मूल्य पूरा उन लोगों को दे दिया करते थे।

संत रविदास जी (Sant Ravidas Maharaj) के दादा जी का नाम कालू राम, दादीजी का नाम लखपति, माता जी का नाम कलसा देवी था। संत रविदास जी (Sant Rohidas Maharaj) की पत्नी का नाम लोना और इनके एक पुत्र ही हुआ जिसका नाम विजय दास (Vijay Das) था। उन्होंने अपने बचपन से लोगों को यही सिखाया है कि अपने पड़ोसियों से प्रेम करो।

मीरा बाई से जुड़ाव (MIRA BAI):

मीराबाई (Mira Bai) राजस्थान के चितोड़ की रानी थी। संत रविदास जी को इनका आध्यात्मिक गुरू माना जाता है। मीराबाई संत रविदास जी की शिक्षा से बहुत प्रभावित हुई थी और इनकी अनुयायी थी। मीराबाई (Mira Bai) ने अपने गुरू संत रविदास जी (Guru Ravidas JI) के सम्मान में कुछ पन्क्तियां भी लिखी है।

रविदास जी की कहानी (Sant Ravidas Ki Kahani):

एक बार की बात है जब संत रविदास जी (Raidas in Hindi) के गांव वाले सभी गंगास्नान के लिए जा रहे थे। तब इस गंगास्नान में संत रैदास को आने का भी निमंत्रण (Invitation) दिया गया। लेकिन संत रविदास जी (Sant Ravidas) ने मना कर दिया। क्योंकि उस दिन रविदास जी ने किसी को जुते बनाकर देने का वचन पहले से ही दे रखा था। इस दौरान रविदास जी ने कहा कि यदि में गंगास्नान के लिए जाऊ तो मुझे यह वचन बार बार याद आता रहेगा और मेरा मन इस वचन पर पड़ा रहेगा। यदि मैं इस वचन को तोड़ता हूं तो मुझे गंगास्नान (GangaSnan) का क्या लाभ मिलेगा। रविदास ने कहा कि मेरा मन सच्चा है और मेरा इस जूते धोने वाली कठौती में ही गंगास्नान है।

Sant Ravidas Biography in Hindi

Sant Ravidas Ki Kahani: एक बार गुरू रविदास जी ने ब्रह्माण की जान एक भूखे शेर के आगे से बचाई थी। उस दिन से उनकी और उस ब्रम्हाण की मित्रता हो गई। लेकिन इस मित्रता (FriendShip) से सभी ब्रम्हाण चिड़ते थे और इनकी शिकायत राजा से कर देते थे। एक दिन राजा ने उस ब्रम्हाण को दरबार में बुलाया और उसे भूखे शेर (Hungry Lion) से मारने की सज़ा सुनाई। फिर ब्रम्हाण को भूखे शेर आगे छोड़ दिया गया। रविदास जी (Ravidas Ji) वहां आये तो भूखा शेर वहां से चला गया। इस घटना से सभी लोग और राजा को शर्म महसूस हुई और उन्होंने रविदास जी (Sant Ravidas Maharaj) को आध्यात्मिक शक्ति के रूप में महसूस किया। उस दिन के बाद से उनका अनुसरण करना शुरू कर दिया।

सिख धर्म में रविदास (Role in Sikh Religion):

संत रविदास जी के पद (Ravidas Ke Pad), भक्ति गीत और अन्य लेखन (लगभग 41 छंद) सिख धर्म ग्रंथों में वर्णित किये गये है। गुरू ग्रन्थ साहिब जो 5वें सिख गुरू, अर्जुन देव (Arjun Dev) द्वारा संकलित किये गये थे। इनकी शिक्षाओं के अनुयायियों को आमतौर पर रविदासिया कहा जाता है और शिक्षाओं का संग्रह जिसे रविदासिया पंथ कहा जाता है।

गुरू ग्रन्थ साहिब (Guru Granth Sahib) में शामिल किये गए संत रविदास के 41 पवित्र लेखन निम्न है; राग-सिरी, गौरी, आसा, गुजरी, सोरठ, धनसारी, जैतसारी, सुही, बिलावल, गौंड, रामकली, मारू, केदार, भेरू, बसंत और मल्हार।

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संत रविदास की मृत्यु (Sant Ravidas Death):

Guru Ravidass Ji History in Hindi: सत्यता, मानवता, ईश्वर की एकता और समाज में समानता लाने के कारण रविदास जी अनुयायिओं की संख्या बढती जा रही थी। पिरान दित्ता मिरासी और कुछ ब्रम्हाण संत रैदास (Sant Raidas) को मारने की योजना बना रहे थे। इस कारण इन्होने संत रविदास जी को गांव से दूर एक बैठक के लिए बुलाया। लेकिन संत रविदास (Sant Ravidas) अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से सब जान चुके थे।

उनके कुछ अनुयायिओं का मनाना है कि उनकी मृत्यु जीवन के 120 या 126 साल बाद स्वाभाविक रूप से हो गई थी। लेकिन कुछ लेकिन कुछ का मानना है कि उनकी मृत्यु 1540 में वाराणसी में हुई थी (Sant Ravidas Maharaj History)

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