रहीम दास के दोहे हिन्दी अर्थ सहित

रहीम दास के दोहे सार सहित (Rahim Das Ke Dohe in Hindi): हम सबने छोटी कक्षाओं में रहीम के दोहे (Rahim ke dohe) जरूर पढ़ें होंगे। लेकिन समय के साथ इनका अस्तित्व भी कम हो रहा है। आज हम यहां पर रहीम के दोहे (Rahim ke dohe) प्रस्तुत कर रहे हैं।

Rahim Das Ke Dohe in Hindi

Read also: चाणक्य के जिन्दगी जीने का तरीका बदल देने वाले प्रेरणादायी सुविचार।

रहीम दास जी (Rahim Das) के जीवन को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें (Rahim Das Wikipedia in Hindi)

रहीम दास के दोहे हिन्दी अर्थ सहित (Rahim Das Ke Dohe in Hindi):

दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय।
जो सुख में सुमिरन करें, तो दुःख काहे होय।।

रहीम जी कहते है कि संकट में तो प्रभु को सब याद करते है, लेकिन सुख में कोई नहीं करता। यदि आप सुख में प्रभु को याद करते है, तो दुःख आता ही नहीं।

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह।
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह।।

रहीम जी कहते है जैसे पृथ्वी पर बारिश, गर्मी और सर्दी पड़ती है और पृथ्वी यह सहन करती है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में सुख और दुःख सहन करना सीखना चाहिए।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं।
गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं।।

रहीम जी कहते है कि बड़े को छोटा कहने से बड़े की भव्यता कम नहीं होती। क्योंकि गिरधर को कन्हैया कहने से उनके गौरव में कमी नहीं होती।

बिगड़ी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।।

रहीम जी कहते है कि मनुष्य को बुद्धिमानी की तरह व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि यदि किसी कारण से कुछ गलत हो जाता है, तो इसे सही करना मुश्किल हो जाता है। जैसे एक बार दूध के ख़राब हो जाने से लाख कोशिश करने पर भी उसमें न तो मखन बनता है और न ही दूध।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

Rahim Das ji ke Dohe:

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परी जाय।।

रहीम जी कहते है कि प्रेम का संबंध बहुत ही नाजुक होता है। इसे झटका देकर तोड़ना अच्छा नहीं होता। यदि कोई धागा एक बार टूट जाता है तो उसे जोड़ना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। यदि वापस जोड़ते है तो उसमें गांठ आ ही जाती है। उसी प्रकार आपसी संबंध एक बार टूट जाने से मन में एक दरार आ ही जाती है।

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहें, बनत न लगिहैं देर।।

रहीम जी कहते है कि जब ख़राब समय होता है तो मौन करना ठीक होता है। क्योंकि जब अच्छा समय आता है, तब काम बनते विलम्ब (Late) नहीं होता। इस कारण हमेशा अपने सही समय का इन्तजार करें।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

वाणी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।।

रहीम जी कहते है कि हमें हमेशा ऐसी वाणी (Voice) बोलनी चाहिए, जिसे सुनने के बाद खुद को और दूसरों को शांति और ख़ुशी हो।

जे गरिब सों हित करें, ते रहीम बड़ लोग।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग।।

रहीम जी कहते है कि जो लोग गरिब का हित करते है, वो बहुत ही महान (Great) लोग होते है। जैसे सुदामा कहते हैं कि कान्हा की मित्रता भी एक भक्ति है।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

Rahim Das ke Dohe in Hindi:

खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौन लगाय।
रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय।।

रहीम जी कहते है कि खीरे की कड़वाहट को दूर करने के लिए उसके ऊपरी छोर को काटकर उस पर नमक लगाया जाता है। यह सजा उन लोगों के लिए है, जो कड़वा शब्द बोलते है।

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय।।

रहीम जी कहते है कि संघर्ष (Struggle) जरूरी है। क्योंकि इस समय के दौरान ही यह ज्ञात होता है कि हमारे हित में कौन है और अहित में कौन है।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।

रहीम जी कहते है कि पेड़ अपना फल स्वयं कभी नहीं खाता और सरोवर कभी अपना जल स्वयं नहीं पीता इसी प्रकार सज्जन और अच्छे व्यक्ति वो है जो दूसरों के लिए सम्पति संचित करते है

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग।

रहीम जी कहते है जिन लोगों का स्वभाव अच्छा होता है उनका बूरी संगती भी कुछ नहीं बिगाड़ पाती जैसे जहरीले सांप सुगन्धित चंदन के पेड़ के लिपटे हुए रहते है पर उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाते
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

Rahim Das ji ke Dohe in Hindi:

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।

रहीम दास जी कहते है कि बड़ी वस्तु को देखकर छोटी वस्तु को फेक नहीं देना चाहिए। जहां सुई काम आती है वहां बड़ी तलवार क्या कर सकती है।

रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न प्रीत।
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँती विपरीत।।

रहीम जी कहते है कि गिरे हुए लोगों से न ही दोस्ती अच्छी होती और न ही दुश्मनी। जैसे कुते चाटे या काटे दोनों ही अच्छा नहीं होता।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं।
जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के नाहिं।।

रहीम जी कहते है कि कोयल और कौआ दोनों काले रंग के होते है। जब तक उनकी आवाज नहीं सुनाई देती उनकी पहचान नहीं होती। लेकिन जब वसंत ऋतू आती है तो कोयल की मधुर आवाज से अंतर स्पष्ट हो जाता है।

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार।
रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार।।

रहीम जी कहते है कि यदि आपका प्रिय आपसे रूठ जाये तो उसे मना लेना चाहिए। क्योंकि यदि मोतियों की माला टूटती है तो उसे भी सही किया जाता है।
Rahim Das Ke Dohe in Hindi

Read also:

आपको “रहीम दास के दोहे हिन्दी अर्थ सहित (Rahim Das Ke Dohe in Hindi)” पसंद आये हो तो इन्हें शेयर जरूर करें और इससे जुड़ा कोई सवाल हो तो कमेंट बॉक्स (Comment Box) में जरूर बताएं। ऐसी ही और जानकारी हमेशा पाने के लिए हमारे Facebook Page को लाइक जरूर कर दें।

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here