कबीर दास जी के दोहे हिन्दी अर्थ सहित

Kabir Das ke Dohe in Hindi: नमस्कार दोस्तों, कहा जाता है कि कबीर दास जी जन्म से मुसलमान थे। लेकिन शुरू से ही उनके स्वामी रामानन्द (Swami Ramanand) के सम्पर्क में रहने के कारण हिन्दू धर्म का पूरा ज्ञान हो गया था। कबीर दास जी (Kabir Das Ji) को शांतिपूर्ण जीवन बहुत ही पसन्द था और वे अहिंसा, सत्य और सदाचार जैसे गुणों के बहुत ही प्रशंसक थे। कबीर दास जी (Kabir Das) अनपढ़ आदमी थे। लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान से वे अनुभव दिए, जिसे यदि कोई अनुपालन करता है तो उसका जीवन पूरी तरह से बदल (Change) सकता है (Kabir Ke Dohe)

Kabir Das ke Dohe in Hindi

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कबीर दास जी के दोहे (Kabir Das Ji ke Dohe) पढ़कर हर व्यक्ति के मन में एक प्रेरणा और सकारात्मक भाव आते है। व्यक्ति को कुछ नया करने की प्रेरणा देते है। इससे पहले भी हमने तुलसीदास के दोहे (Tulsidas ke Dohe with Meaning in Hindi), रहीम के दोहे (Rahim ke Dohe), रविदास के दोहे (Raidas ke Dohe) भी बताए है। तो आज हम आपको बताने जा रहे है कबीर के दोहे तो आइये जानते है कबीर के दोहे (Kabir ke Dohe in Hindi) विस्तार से:

कबीर दास जी के दोहे हिन्दी अर्थ सहित (Kabir Das ke Dohe in Hindi):

Bada Hua to Kya Hua:

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।

कबीर दास जी कहते है कि खजूर (Datepalm) के पेड़ जैसा बड़ा होने से कोई फायदा नहीं है। क्योंकि खजूर के पेड़ से न तो पंथी को छाया (Shadow) मिलती और उसके फल भी बहुत दूर लगते है जो तोड़े नहीं जा सकते। कबीर दास जी कहते है कि बड़प्पन (Nobility) के प्रदर्शन मात्र से किसी का भला नहीं होता।

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मीलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।

कबीर दास जी कहते है कि मैं बुराई (Evil) की खोज में निकला तो मुझे कोई बुराई (Evil) नहीं मिली। लेकिन जब मैंने मेरे खुद के मन में देखा तो मुझे मुझसे बुरा कोई नहीं मिला।

गुरू गोविन्द दोउ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरू आपने, गोविन्द दियो बताय।।

कबीर दास जी कहते है कि यदि आपके सामने गुरू (Guru) और इश्वर दोनों ही खड़े हो तो आप किसके चरण स्पर्श सबसे पहले करेंगे गुरू ने अपने ज्ञान से हमें इश्वर तक पहुंचाया है तो गुरू की महिमा (Glory) इश्वर से अधिक है इसलिए हमें गुरू के चरण स्पर्श सबसे पहले करने चाहिए

हिन्दू काहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना।
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोऊ जाना।।

कबीर दास जी कहते है कि हिन्दू को राम प्यारा है और तुर्क (मुसलमान) को रहमान। इस बात पर हिन्दू (Hindu) और मुस्लीम (Muslim) लड़ लड़ कर मौत के मुंह में जा रहे है और फिर भी इनमें से कोई सच को नहीं जान पाया।
Kabir Das ke Dohe in Hindi

Kabir Ke Dohe Download:

गुरू की आज्ञा आवै, गुरू की आज्ञा जाय।
कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय।।

कबीर दास जी कहते है कि व्यवहार में भी साधु को गुरू की आज्ञा के अनुसार ही आना जाना चाहिए। कबीर (Kabir) कहते है कि संत वही है जो जन्म और मरण से पार होने के लिए साधना (Cultivate) करते है।

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।

कबीर दास जी (Kabir Das Ji) कहते है कि जो हमेशा प्रयास करते रहते है वो अपने जीवन में कुछ न कुछ पा ही लेते है। जैसे गोताखोर (Pearl-Diver) गहरे पानी में जाता है तो कुछ न कुछ पा ही लेता है और जो डूबने के डर से प्रयास नहीं करता है वो किनारे (Edge) पर ही रह जाता है।

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पण्डित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पण्डित होय।।

कबीर दास जी कहते है कि कई सारे लोग बड़ी बड़ी पुस्तकें (Books) पढ़कर मृत्यु को चले गये। लेकिन कोई विद्वान (Savant) नहीं बन पाया। कबीर दास जी का मनाना है कि यदि कोई प्यार और प्रेम के ढाई अक्सर ही पढ़ लेता है और वह प्रेम का सही मतलब जान लेता है तो वही सच्चा ज्ञानी (Wiseman) है।

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।

कबीर दास जी कहते है कि जरूरत से ज्यादा बोलना अच्छा नहीं होता और जरूरत से ज्यादा चूप (Silence) रहना भी अच्छा नहीं होता। जैसे बहुत अधिक मात्रा में वर्षा भी अच्छी नहीं होती और धूप भी अधिक अच्छी नहीं होती।
Kabir Das ke Dohe in Hindi

Kabir Ke Dohe on Guru With Meaning:

गुरू पारस को अन्तरो, जानत हैं सब संत।
वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महंत।।

कबीर दास जी कहते है कि गुरू और पारस-पत्थर (Philosopher’s Stone) में अंतर है। ये अंतर सभी संत ही जानते है। पारस-पत्थर तो लोहे को सोना (Gold) ही बनाता है। परन्तु गुरू अपने शिष्य को अपने से भी महान बना देता है।

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।।

कबीर दास जी कहते है कि कोई व्यक्ति लम्बे समय तक अपने हाथों में मोतियों की माला तो फेरता है। परन्तु उसके मन का भाव (Emotion) नहीं बदलता। कबीर दास जी की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को छोड़कर अपने मन के मोतियों की माला फेरे।

कहैं कबीर देय तू, जब लग तेरी देह।
देह खेय होय जायगी, कौन कहेगा देह।।

कबीर दास (Kabir Das) जी कहते है कि जब तक तेरे पास देह (Body) है तब तक तू दान करते जा। जब तेरे देह से प्राण (Life) निकल जायेगा तो न ही तेरी यह सुंदर (Graceful) देह रहेगी और न ही तू। फिर तेरी देह मिट्टी में मिल जाएगी और देह देह नहीं कहलाएगी।

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।।

कबीर दास जी कहते है कि इस संसार में ऐसे सज्जनों (Gentlemen) की जरूरत है जैसे अनाज साफ करने वाला सूप होता है। जो सार्थक को तो बचा लेंगे और निरर्थक (Pointless) को उड़ा देंगे।
Kabir Das ke Dohe in Hindi

Kabir Ke Dohe With Meaning in Hindi Language:

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय।।

कबीर दास जी कहते है कि मनुष्य इश्वर को दुःख (Sorrow) में ही याद करता है। सुख (Happiness) में कोई भी इश्वर को नहीं याद करता है। यदि सुख में इश्वर को याद करें तो दुःख किस बात का होय।

कुमति कीच चेला भरा, गुरू ज्ञान जल होय।
जनम-जनम का मोरचा, पल में डारे धोया।।

कबीर दास जी कहते है कि शिष्य पूरा कुबुद्धि (Malevolent) जैसे कीचड़ से भरा है। इसे धोने के लिए गुरू का ज्ञान ही जल है। कबीर दास (Kabir Das) जी कहते है कि गुरुदेव जन्म-जन्म की बुराई (Evil) को क्षण में ही नष्ट कर देते है।

कांकर पाथर जोरि कै मस्जिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय।।

कबीर दास जी कहते है कि कंकर पत्थर (Stone) से बनी मस्जिद में मुल्ला जोर जोर से अजान देता है। कबीर दास जी कहते है कि क्या खुदा बहरा (Deaf) है।

या दुनिया दो रोज की, मत कर यासो हेत।
गुरू चरनन चित लाइये, जो पुराण सुख हेत।।

कबीर दास जी कहते है कि यह दुनिया दो दिन का झमेला (Mess) है, इससे मोह नहीं जोड़े। कबीर दास जी कहते है कि सदगुरुदेव की चरणों में मन लगाओ। वह पर ही सुख (Happiness) मिलेगा।

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।

कबीर दास जी कहते है कि अपने मन में धीरज (Patience) रखना चाहिए। मन में धीरज रखने से ही सब कुछ होता है। जैसे माली यदि पेड़ को सौ घड़े से सींचता (Irrigate) है, पर फल तो ऋतु (Season) आने पर होते है।
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