महर्षि वाल्मीकि के अनमोल विचार

Valmiki Quotes in Hindi: भारत के ऐसी भूमि है जहां पर समय-समय पर कई संत महात्माओं ने जन्म लेकर अपने अच्छे कर्मों से दुनिया के लोगों को बेहतर जीवन के लिए प्रेरित किया है। इसलिए भारत भूमि को देवभूमि कहा जाता है। इन्हीं संत महात्माओं में महर्षि वाल्मीकि भी एक थे। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के महान कवि थे और संस्कृत के लौकिक छंदों के आदिकवि के रूप में भी जाने जाते हैं।

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महर्षि वाल्मीकि ने अपने ज्ञान और तप की सहायता से विश्व के महान ग्रन्थ रामायण की रचना की। वाल्मीकि की रचनाएँ बहुत ही लोकप्रिय है। ऐसा माना जाता है कि इनका पहले का नाम रत्नाकर था। हजारों सालों तक बाल्मीकि जी ने एक ही जगह पर बैठ कर राम के नाम का जप किया था। इनका शरीर दीमकों से भर गया था, इनका शरीर दीमकों के पहाड़ रूप सा प्रतीत होने लगा था।

आज हम यहां पर महर्षि वाल्मीकि के विचार शेयर करने जा रहे हैं।

महर्षि वाल्मीकि के अनमोल विचार – Valmiki Quotes in Hindi

वाल्मीकि सुविचार

जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है।

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मनुष्य का आचरण ही बतलाता है कि वह कुलीन है या अकुलीन,
वीर है या कायर अथवा पवित्र है या अपवित्र।

Valmiki Quotes in Hindi

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Maharshi Valmiki Anmol Vichar

दृढसंकल्प लेकर आप कोई भी काम आसान कर सकते हो।

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जीवन में सदैव सुख ही मिले यह बहुत दुर्लभ है।

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सत्य ही सबका मूल है और सत्य से बढकर कुछ भी नही है।

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सीते, पिता की सेवा करना जैसा कल्याणकारी है, वैसा उत्तम साधन न सत्य है,
न दान-सम्मान है और न प्रचुर दक्षिणा वाले ही है।

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Valmiki Quotes

होनी के प्रति दुःख मनाना कायरता और अज्ञान है।

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आपकी जन्मभूमि और जननी स्वर्ग से भी बढ़कर है।

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दुख और विपदा जीवन के दो ऐसे मेहमान हैं,
जो बिना निमंत्रण के ही आते हैं।

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Maharshi Balmiki Quotes in Hindi

अतिसंघर्ष से चंदन में भी आग प्रकट हो जाती है,
उसी प्रकार बहुत अवज्ञा किए जाने पर ज्ञानी के भी हृदय में भी क्रोध उपज जाता है।

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माता पिता की सेवा और उनकी आज्ञा पालन जैसा धर्म कोई नही है।

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पिताजी, आप अधिक सोच-विचार न कीजिए।
धन धान्य, राष्ट्र और प्रजा सहित यह धरती आप भरत को दे दीजिए, मुझे राज नहीं चाहिए।

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दुखी व्यक्ति प्रत्येक पाप कर सकता है।

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किसी वादे को तोड़ने से आपके सारे अच्छे कर्म नष्ट हो जाते हैं।

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वाल्मीकि विचार (Valmiki Quotes)

संसार में ऐसे लोग थोड़े ही होते हैं,
जो कठोर किंतु हित की बात कहने वाले होते हैं।

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Valmiki Quotes Hindi

संत दूसरों को दु:ख से बचाने के लिए कष्ट सहते रहते हैं,
दुष्ट लोग दूसरों को दु:ख में डालने के लिए।

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जन्म देने वाली मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढकर होता है।

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विवाह योग्य स्त्रियां प्रत्येक देश में मिल सकती हैं। मित्र-परिजन भी प्रत्येक देश में प्राप्त हो सकते हैं।
किन्तु मुझे कोई ऐसा देश दिखाई नहीं पड़ता, जहां सहोदर भाई मिल सकते हों।

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पराये धन का अपहरण, पर स्त्री के साथ संसर्ग,
सुहृदों पर अतिशंका – ये तीनों दोष विनाशकारी है।

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किसी भी व्यक्ति से मोह रखना आपको दुःख दे सकता है।

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Maharishi Valmiki Quotes

किसी भी मनुष्य की इच्छाशक्ति अगर उसके साथ हो तो वह कोई भी काम बड़े आसानी से कर सकता है।
इच्छाशक्ति और दृढ़संकल्प मनुष्य को रंक से राजा बना देती है।

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नीच की नम्रता अत्यंत दुखदायी है, अंकुश, धनुष, सांप और बिल्ली झुककर वार करते हैं।

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सहयोग करने वाले और सबसे मिलकर रहने वाले की सदैव जीत होती है।

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क्रोध ही व्यक्ति के समस्त सद्गुणों का नाश करता है। इसलिए क्रोध का त्याग करो।

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पुरुषार्थ किये बिना भाग्य का निर्माण नहीं हो सकता।

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संघर्ष से आप महान बन सकते है। आगे बढ़ना है तो संघर्ष जरूरी है।

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वाल्मीकि दोहे (Valmiki Quotes)

माया के दो भेद हैं – अविद्या और विद्या।

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जो लोग गलत रास्ते पर चलते है,
उन्हें कभी भी सच्चा ज्ञान नही प्राप्त होता है।

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महर्षि वाल्मीकि के अनमोल वचन

प्रण को तोड़ने से पुण्य नष्ट हो जाते हैं।

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अगर आपके अंदर उत्साह होगा
तो आप असम्भव काम को भी संभव बना सकते हैं।

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किसी के साथ अत्यंत प्रेम न करो और प्रेम का सवर्था अभाव भी न होने दो,
क्योंकि ये दोनों ही महान दोष है, अत: मध्यम स्थिति पर ही दृष्टि रखो।

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संतोष नन्दनवन है तथा शांति कामधेनु है।
इस पर विचार करो और शांति के लिए श्रम करो।

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मन इच्छित वस्तु को प्राप्त करने के बाद भी ठीक वैसे ही कभी संतुष्ट नहीं होता,
जैसे छिद्रयुक्त पात्र को कितना भी जल डाल कर भरा नहीं जा सकता।

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मित्र बनाना सरल है, मैत्री पालन दुष्कर है।
चितों की अस्थिरता के कारण अल्प मतभेद होने पर भी मित्रता टूट जाती है।

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बिना अच्छे चरित्र के आप महान नहीं बन सकते।

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असत्य के समान पातक पुंज नहीं है। समस्त सत्य कर्मों का आधार सत्य ही है।

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दुःख और संकट की घड़ी हमेशा बिना बताये और बिना बुलाये ही आते हैं।

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Valmiki Thoughts in Hindi

महत्वाकांक्षा से युक्त मन सदैव रिक्त रहता है।
इसीलिए वह ठीक उसी प्रकार कहीं भी शांति प्राप्त नहीं करता,
जैसे अपने समूह से बिछुड़ कर हिरण अशांत होता है।

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उत्साह, सामर्थ्य और मन में हिम्मत न हारना
ये कार्य की सिद्धि कराने वाले गुण कहे गये है।

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किसी के लिए घृणा का भाव अपने मन में रखने से आप खुद मैले हो जाते हो।

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प्रियजनों से भी मोहवश अत्यधिक प्रेम करने से यश चला जाता है।

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माता पिता की सेवा करना सदैव कल्याणकारी होता है।

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Valmiki Quotes

आप साहसी या कायर, गुणवान है या दोष से भरे हुए
यह आपका चरित्र से दिख जाता है।

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सारे पुण्यों और सद्गुणों की जड़ सत्य है।

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जिस प्रकार चुहिया प्रत्येक दिन थोडा-थोडा खोद कर धरती में अपना बिल बनाती है,
उसी प्रकार काल प्राणियों के जीवन को क्षण-प्रतिक्षण समाप्त करता जाता है।

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सेवा से शत्रु भी मित्र हो जाता है।

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अगर आप किसी के सेवा के लिए अपना बल लगाते है तो वह बल अमर है।

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Maharishi Valmiki Quotes in Hindi

दुखी लोग कौन सा पाप नही करते है?

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जो व्यक्ति वीर और बलवान होते है,
वे जलहीन बादलों के समान खाली गर्जना नही करते है।

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किसी व्यक्ति से ज्यादा मोह रखना भी दुःख का कारण बन सकता है।

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सेवा के लिए उपयोग किया बल हमेशा टिकेगा और अमर होगा।

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परमात्मा ने जो कुछ तुमको दिया है, तुमको चाहिए कि उसके लिए परमात्मा के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करो।
इस विषय में तुम्हे कृतघ्न नहीं होना चाहिए।

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तुम्हें गर्व, अहंकार और कुटिलता का परित्याग करना चाहिए।
तुम्हें दूसरों की आलोचना की कभी चिंता नहीं करनी चाहिए।

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नारी के लिए वास्तव में उसका पति ही सम्पूर्ण आभूषण है।
उससे पृथक रहकर वह कितनी भी सुंदर क्यों न हो सुशोभित नहीं होती।

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जो व्यक्ति अपने पक्ष को छोड़कर दुसरो के पक्ष में मिल जाता है
फिर उस पक्ष के नष्ट होने पर वह खुद ही नष्ट हो जाता है।

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संघर्ष से ही आप महान बन सकते है।
यदि जीवन में आगे बढना है तो तो संघर्ष करना भी जरूरी है।

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प्रियजनों सेमोहवश अत्यधिक प्रेम से यश भी चला जा सकता है।

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संत पुरूष हमेशा लोगों को दुःख से बचाने के लिए कष्ट सहते हैं।
जबकि दुष्ट प्रवित्ति के लोग दूसरों को हमेशा दुःख में डालने के लिए ही जीते हैं।

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सदा सुख ही सुख दुर्लभ है।

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स्त्री या पुरुष के लिए क्षमा ही अलंकार है।

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सहयोग और समन्वय की सदैव जीत होती है।

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राजा को आदर्श व सच्चरित होना चाहिए।
क्योंकि वह प्रजापालक कहलाता है।

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अच्छे स्वाभाव वाले लोग अपने घर के सोने गहनों
और मित्र में कोई फर्क नही समझते हैं।

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जैसा राजा का आचरण होता है
ठीक वैसा ही प्रजा भी आचरण करती है।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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