रजनीश के गुरु ओशो बनने तक का विवादस्पद सफ़र

रजनीश के गुरु ओशो बनने का विवादस्पद सफ़र (Osho Biography in Hindi): ओशो (Osho) एक ऐसे आध्यात्मिक गुरू (Spiritual Teacher) रहे हैं, जिन्होंने ध्यान (Meditation) की अतिमहत्वपूर्ण विधियाँ दी ओशो (Osho) के चाहने वाले पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। इन्होंने ध्यान की कई विधियों के बारे बताया तथा ध्यान की शक्ति का अहसास करवाया है। हमें ध्यान (Meditation) क्यों करना चाहिए? ध्यान क्या है और ध्यान को कैसे किया जाता है। इनके बारे में ओशो (Osho) ने अपने विचारों में विस्तार से बताया है। इनकी कई बार मंच पर निंदा भी हुई लेकिन इनके खुले विचारों से इनको लाखों शिष्य भी मिले। इनके निधन के 25 वर्षों के बाद भी इनका साहित्य लोगों का मार्गदर्शन (Guidance)कर रहा है।

Osho Biography in Hindi

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ओशो का जीवन परिचय (Osho Biography in Hindi):

संक्षिप्त जीवनी (Osho Rajneesh Biography in Hindi):

आचार्य रजनीश (Rajneesh) और ओशो (Osho) के नाम से विख्यात भारतीय आध्यात्मिक गुरू का जन्म 11 दिसम्बर, 1931 को भारत के कुचवाड़ा में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय शिक्षण का कार्य किया और इसके बाद उन्होंने एक दिन दावा किया कि उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हो गई है। 1970 में उन्होंने ध्यान की एक नई पद्धति को दुनिया के सामने रखा। जिसे डायनेमिक मेडिटेशन (Dynamic Meditation) का नाम दिया गया। अपने विवादास्पद उपदेशों (Precepts) और विचारों के कारण भारत का परम्परागत समाज जब उनका विरोध करने लगा तो उन्होंने आॅरेगन में अपना आश्रम बनाया और एक कम्यून की स्थापना की। वहां भी कुछ समय के बाद उनका स्थानीय लोगों से विवाद शुरू हो गया और उन्हें अमेरिका छोड़कर वापस भारत लौटना पड़ा। भारत के पूना में उन्होंने अपना शेष जीवन बिताया और 19 जनवरी, 1990 को पूना में ही उनका स्वर्गवास हो गया।

प्रारम्भिक जीवन (Osho Biography in Hindi):

ओशो (Osho) या भगवान श्री रजनीश का वास्तविक नाम चंद्र मोहन जैन (Chandra Mohan Jain) था। उनका जन्म 11 दिसम्बर 1931 को भारत के एक छोटे से कस्बे कुचवाड़ा में हुआ। उनका बचपन उनके नाना-नानी के साथ ही बिता। बचपन से ही वे विद्रोही स्वभाव के थे। स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद उन्हें काॅलेज में अपने प्रोफेशर्स से विचित्र सवाल पूछने की वजह से दूसरी काॅलेज में शिफ्ट कर दिया गया। पहले उन्होंनेे हितकारी काॅलेज में प्रवेश लिया लेकिन अपने शिक्षकों को परेशान करने का आरोप लगने के बाद उन्होंने दूसरे महाविद्यालय डी. एन. जैन काॅलेज में दाखिला ले लिया। दर्शन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक शिक्षण संस्थान में व्याख्याता के तौर पर व्याख्यान देने शुरू किए और कुछ समय बाद उन्होंने घोषणा कर दी कि उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई है। वे बुद्ध हो गए हैं।

आध्यात्मिक गुरू ओशो (Osho Biography in Hindi):

ओशो (Osho) ने जल्दी ही स्वयं को एक आध्यात्मिक गुरू (Spiritual Teacher) के तौर पर स्थापित कर लिया। इस दौरान उन्होंने पूरे भारत की यात्रा की और अपने विचारों से बड़ी संख्या में अनुयायी बनाये। उन्होंने अपने विचारों से तब के युवा समाज को उद्वेलित कर दिया। उनके विचार संभोग से समाधी तक नाम की पुस्तक में सहेजे गए जो सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में से एक बन गई।

Osho Biography in Hindi

ओशो (Osho) पारम्परिक भारतीय अध्यात्म के विपरीत संभोग को ज्ञान प्राप्त करने की राह में रोड़ा मानने की बजाय रास्ता मानते थे। उस वक्त के भारतीय समाज में उनका जम कर विरोध हुआ और उन्हें सेक्स गुरू तक की संज्ञा दे दी गई। पूना में उन्होंने एक आश्रम की स्थापना की। उनके भक्तों में भारत के एलिट ग्रुप (Elite Group) के साथ ही पश्चिमी देशों के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे।

तब भारतीय सिनेमा के सूपर स्टार माने जाने वाले विनोद खन्ना (Vinod Khanna) ने अपने करिअर को छोड़ ओशो के शरण में जाने का फैसला लिया। भारतीय सिनेमा उद्योग के कई जाने-माने लोग ओशो (Osho) के पूणे आश्रम के नियमित सदस्य बने। उनके अनुयायी भगवा और लाल कपड़े पहनते थे और विदेशी अनुयायियों (Followers) का भी हिंदुस्तानी नामकरण किया गया था।

1970 आते-आते पूणे में छह एकड़ में फैला आश्रम अनुयायियों (Followers) के लिए छोटा पड़ने लगा। उन्हें एक नये आश्रम की जरूरत पड़ी। तब तक भारत में ओशो (Osho) का विरोध भी अपने चरम पर पहुंच गया था और सामान्य जनमानस उन्हें स्वीकार करने को बिल्कुल तैयार नहीं था। इसी बीच 1980 में एक घटना घटी जब एक व्यक्ति ने ओशो (Osho) की हत्या करने का प्रयास किया हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका।

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ओशो का भारत छोड़ना (Osho Biography in Hindi):

इस विरोध से परेशान होकर ओशो (Osho) ने अपने 2000 अनुयायियों के साथ भारत छोड़ दिया और अमेरिका के आॅरेगन शहर में 100 मील के एक रेंच का अपना आश्रम बना लिया। इस रेंच को एक शहर में बदल दिया गया और नाम रखा गया रजनीशपुरम (Rajnispuram)। वहां की स्थानीय सरकार ने इसका विरोध किया लेकिन अदालत में ओशो (Osho) की जीत हुई और आश्रम को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया लेकिन स्थानीय सरकार के साथ ओशो (Osho) की नहीं बनी और उन्हें आखिर में 1986 में आॅरेगन छोड़ एक बार फिर से भारत लौटना पड़ा।

Osho Biography in Hindi

भारत लौटने के बाद एक बार फिर उन्होंने अपने पूणे के आश्रम में उपदेश (Preaching) देना शुरू किया लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा और 19 जनवरी 1990 को उनकी मृत्यु (Death) हो गई। उनकी मृत्यु के बाद उनके आश्रम को ओशो इंस्टीट्यूट (Osho institute) में बदल दिया गया और यहीं पर ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसोर्ट (Osho International Meditation Resort) की भी स्थापना की गई। इस रिसोर्ट में हरे साल लाखो लोग ध्यान साधना के लिए आते हैं। इस सेंटर से जुड़े आज सैकड़ों ध्यान केन्द्र पूरे भारत में खुल चुके हैं जो ओशो (Osho) के विचारों के अनुसार ध्यान साधना करवाते हैं।

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