मकर संक्रांति पर संस्कृत निबंध

Makar Sankranti Essay in Sanskrit: नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने मकर संक्रांति पर निबंध संस्कृत में शेयर किया है। यह निबन्ध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

Makar Sankranti Essay in Sanskrit
Sanskrit Essay on Makar Sankranti

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मकर संक्रांति पर संस्कृत निबंध – Makar Sankranti Essay in Sanskrit

मकरसङ्क्रमणम् (5 Lines on Makar Sankranti in Sanskrit)

  1. मकरसङ्क्रमणं भारतीयानां प्रमुखपर्वसु अन्यतमम्।
  2. इदं पर्व तिलपर्व इत्यपि निर्दिश्यते।
  3. अस्मात् दिनात् परमपवित्रस्य उत्तरायणकालस्य आरम्भः।
  4. तमिळुनाडुराज्ये पोङ्ग्ल इति वदन्ति।
  5. एतत् सूर्यस्य चलनसम्बद्धं पर्व।

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मकरसङ्क्रमणम् (मकर संक्रांति संस्कृत निबंध)

मकरसङ्क्रमणं भारतीयानां प्रमुखपर्वसु अन्यतमम्। अस्मात् दिनात् परमपवित्रस्य उत्तरायणकालस्य आरम्भः। इदं पर्व तिलपर्व इत्यपि निर्दिश्यते। तमिळुनाडुराज्ये पोङ्ग्ल इति वदन्ति। एतत् सूर्यस्य चलनसम्बद्धं पर्व। सूर्यस्य एकराशित: अन्यराशिं प्रतिप्रवेशदिनं सङ्क्रमणम् इति उच्यते।

सौरमानानुसारं सूर्यस्य मेषादिद्वादशराशिं प्रति प्रवेशदिनम् एव सङ्क्रमणदिनम्। एवंक्रमेण वर्षे १२ सङ्क्रमणानि भवन्ति। तत्र प्रमुखं सङ्क्रमणद्वयम्। कर्काटकसङ्क्रमणं (दक्षिणायनस्य आरम्भ:) मकरसङ्क्रमणं (उत्तरायनस्य आरम्भ:) चेति। कर्काटकमकरसङ्क्रमणे अयनसङ्क्रमणे, मेषतुलासङ्क्रमणे विषुवसङ्क्रमणे, कन्या-मिथुन-धनु-मीनसङ्क्रमणानि षडशीतिमुखसङ्क्रमणानि, वृषभ-सिंह-वृश्चिक-कुम्भसङ्क्रमणानि विष्णुपदसङ्क्रमणानि इति विभाग: कृत: अस्ति।

मकरसङ्क्रमणदिनत: आरभ्य रात्रिकालस्य अवधि: न्यून: भवति। एतद्दिने एव स्वर्गः [स्वर्गस्य] द्वारोद्घाटनं क्रियते इति। परमपवित्रे अस्मिन् सङ्क्रमणदिने क्रियमाणं स्नान-दान-जप-तप-हवन-पूजा-तर्पण-श्राद्धादिकम् अधिकं फलप्रदम् इति वदन्ति शास्त्रपुराणानि। तद्दिने य: पापाचरणं करोति, य: पवित्रकर्माणि न आचरति स: पापभाक् भवति इत्यपि वदन्ति ज्ञानिन:।

अन्यानि सङ्क्रमणानि आचरितुम् अशक्त: एतदेकं सङ्क्रमणं वा आचरेत् इति वदति शास्त्रम्। शैत्यकाले अस्माकं शरीरे विद्यमान: तैलांश: शाखार्थं व्ययित: भवति। तेन शरीरे तैलांशस्य अभाव: भवति। तस्मात् शीतसम्बद्धा: रोगा: जायन्ते। नारिकेल-गुड-कलायमिश्रितस्य तिलस्य, इक्षुदण्डस्य, शर्कराभक्ष्यस्य च भक्षणेन अभाव: निवार्यते।

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