दुर्गा पूजा पर निबंध – Essay on Durga Puja in hindi

Essay on Durga Puja in Hindi: हिन्दू त्यौहारों में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। इस पर्व के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिनों तक पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की पूजा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इन नौ दिनों के बाद दसवें दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है। मां दुर्गा को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि मां दुर्गा ने महिषासुर दानव का वध किया था। मां भारत के पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का पर्व काफी प्रसिद्ध है।

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About Durga Puja in Hindi

हम यहां पर Durga Puja से जुड़ी हर जानकारी शेयर करने जा रहे हैं। जिससे आपको दुर्गा पूजा की जानकारी अच्छे से हो जाएगी और अलग-अलग शब्दों की सीमा में दुर्गा पूजा पर निबन्ध लिखे हैं। जिनसे विद्यार्थियों को परीक्षा में पूछे गये सवाल दुर्गा पूजा पर निबंध लिखें का जवाब भी आसानी से मिल जायेगा। ये निबन्ध बहुत ही सरल भाषा में लिखे गये है।

अन्य निबन्ध

दुर्गा पूजा पर निबंध – Essay on Durga Puja in hindi

निबंध दुर्गा पूजा – Durga Puja Essay in Hindi (100 Words)

भारत एक ऐसा देश है जहां पर विश्व के सभी त्यौहार धूमधाम मनाये जाते हैं। दुर्गा पूजा भी भारत का एक विशेष धार्मिक पर्व हैं। इस पर्व के दौरान मां दुर्गा की नौ दिन तक पूजा की जाती है। Durga Pooja का पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। इस दिन मां दुर्गा ने दानव महिषासुर का विनाश किया था और इस दिन राम ने रावण के विनाश के लिए मां दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए चंडी पूजा की थी।

इस त्यौहार के चलते कई लोग लगातार नौ दिन तक उपवास रखते हैं और कई लोग शुरूआत के दिन और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। इसके पीछे लोगों का मानना है कि ऐसा करने से उन्हें Durga Devi नकारात्मक प्रभाव से दूर रखती है और उनमें सकरात्मक भाव आता है उनका जीवन शांति से भर जाता है।

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दुर्गा पूजा पर लेख हिंदी में – Essay on Durga Puja (300 Words)

विश्व में सबसे अधिक त्यौहार भारत में मनाये जाते हैं और इन सभी त्यौहारों के पीछे एक विशेष कारण होता है। दुर्गा पूजा हर वर्ष मनाया जाने वाला एक विशेष त्यौहार है। यह त्यौहार अश्विन महीने के पहले दस दिनों के अंदर मनाया जाता है।

भारत के कुछ राज्यों में इसका विशेष महत्व है। दुर्गा पूजा के त्यौहार के दिन ओडिशा, त्रिपुरा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन होता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई के विजय का प्रतीक है।

महिषासुर ने स्वर्ग के देवताओं पर आक्रमण कर दिया था महिषासुर बहुत ही शक्तिशाली था और काफी किसी से हारा नहीं था। इस दिन ब्रम्हा, विष्णु और महेश ने महिषासुर राजा के अंत के लिए आन्तरिक शक्ति का निर्माण किया था और उसका नाम दुर्गा रखा गया था। फिर दुर्गा को आन्तरिक शक्तियां दी थी। दुर्गा अपने दस हाथों में विशेष हथियार लिए एक नारी शक्ति का रूप थी।

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माँ दुर्गा ने नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया और अंत में दसवें दिन उसका अंत कर दिया। इस दिन को आज भी विजयदशमी और दशहरे के रूप में मनाते है। इस दिन राम ने रावण का अंत करने के लिए मां दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए चंडी पूजा भी की थी।

इस पर्व के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा होती है और अंत के दिन दुर्गा की मूर्ति या प्रतिमा को नदी या तालाब में विसर्जित (Durga Puja Visarjan) कर दिया जात्ता है। इन नौ दिनों में लोग लगतार उपवास भी रखते हैं और कुछ लोग शुरू के दिन और अन्त के दिन उपवास रखते हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि मां दुर्गा उन्हें अच्छे काम करने के लिए शक्ति प्रदान करती और घर में शांति बनी रहती है।

इस दिन डांडिया और गरबा का भी विशेष आयोजन होता है। मां के पंडाल में विवाहित महिलाएं सिंदूर से खेलती है और इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाती है।

दुर्गा पूजा पर निबंध – Hindi Essay on Durga Puja (500 Words)

प्रस्तावना

भारत में कई धार्मिक त्यौहार मनाये जाते हैं उन्हीं में से एक दुर्गा पूजा का त्यौहार विशेष महत्व रखता है। इस त्यौहार में भारतीय संस्कृति और रीती-रिवाज का अच्छा सन्देश मिलता है। दुर्गा पूजा को षष्ठोत्सव और दुर्गोत्सव भी कहा जाता है। ये त्यौहार अश्विन महीने के शुरू के दस दिनों में मनाया जाता है।

मां दुर्गा हिमालय और मेनका की पुत्री और मां सती का अवतार थी। जिनका बाद में भगवन शिव से विवाह हुआ था।

दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है – Paragraph on Durga Puja in Hindi

दुर्गा पूजा के मानाने के पीछे कई कारण और कई कथाएं प्रचलित है।

एक महिषासुर राजा था। उसने स्वर्ग के देवताओं पर आक्रमण कर दिया था। वह इतना शक्तिशाली था कि उसने कभी किसी से हार नहीं मानी थी। दुर्गा देवी ने लगातार नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया था और दसवें दिन उसका अंत किया था। इसलिए उस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।

रामायण के अनुसार राम ने मां दुर्गा से रावण को मारने के लिए शक्ति प्राप्ति के लिए चंडी पूजा की थी।

दस हाथों में अलग-अलग हथियार लिए मां दुर्गा नारी का रूप है। मां दुर्गा के कारण सभी लोगों राक्षस से छुटकारा मिला था। इसलिए सभी लोग मां दुर्गा की श्रद्धा से पूजा करते हैं। इस दिन गरबा और डांडिया का भी विशेष आयोजन होता है।

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उपसंहार

भारत विश्व का एक ऐसा देश है जहां पर सभी देवी-देवताओं को विशेष महत्व दिया जाता है और सभी का सम्मान किया जाता है। दुर्गा पूजा का दिन भारत में विशेष महत्व रखता है। इस दिन प्राचीन भारत की संस्कृति और रीती-रिवाज लोगों में देखने को मिलते हैं। दुर्गा पूजा का पर्व भारत के अलावा नेपाल और बांग्लादेश देश में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

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दुर्गा पूजा पर निबंध – Essay on Durga Puja in Hindi (1000 Words)

रूपरेखा

भारत में कई प्रकार के त्यौहार मनाये जाते हैं। सभी त्यौहारों का अलग-अलग और विशेष महत्व होता है। इन्हीं त्यौहारों में से दुर्गा पूजा का त्यौहार विशेष महत्व रखता है। दुर्गा पूजा का पर्व सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। ये भारत का एक धार्मिक त्यौहार है। यह त्यौहार दुर्गोत्सव और षष्ठोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।

माँ दुर्गा सती का अवतार थी जो हिमालय और मेनका की पुत्री थी। बाद में मां दुर्गा का विवाह शिव से हुआ था। दुर्गा पूजा एक परम्परागत अवसर है। यह अवसर सभी को भारतीय संस्कृति और रीती-रिवाज का अच्छा सन्देश देता है।

दुर्गा पूजा कब से शुरू हुआ – Durga Puja in Hindi

जब राक्षस रावण ने सीता माता का हरण का लिया था। तब भगवान राम ने सीता माता को रावण से आजाद करवाने और रावण का अंत करने के लिए माँ दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की थी। तब से मां दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई का सन्देश देता है।

भारत के ओडिशा, सिक्किम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में Durga Pooja के दिन विशेष उत्सव और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, बड़े ही धूमधाम से इस पर्व को मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान मां दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा की जाती है और बाद में मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति का नदी या तालाब में विसर्जन (Durga Puja Visarjan) कर दिया जाता है।

लोगों की भावना

सभी लोग माँ दुर्गा देवी की नौ दिनों तक लगातार पूजा करते हैं और कई लोग इन नौ दिनों के दौरान उपवास रखते हैं। इन नौ दिनों के भीतर सिर्फ पानी का ही प्रयोग करते हैं। हालांकि कुछ लोग इसके शुरूआत के दिन और अंत के दिन उपवास रखते हैं। सभी लोगों का यह मानना है कि माँ दुर्गा उन्हें नकारात्मकता से दूर रखती है और उनकी हर समस्या का समाधान करती है। उपवास करने से उन्हें दुर्गा देवी का पूरा आशिर्वाद मिलता है।

दुर्गा पूजा का इतिहास – Durga Puja History

दुर्गा पूजा की कहानी के पीछे कुछ कहानियां प्रचलित है जो निम्न है।

कहानी – 1

ऐसा माना जाता है कि महिषासुर नाम का एक राजा था जो कि बहुत ही शक्तिशाली था। इस राजा को कोई हरा नहीं सका था। एक बार इस दानव राजा ने स्वर्ग में देवताओं पर आक्रमण कर दिया। तब ब्रम्हा, विष्णु और शिव (महेश) ने महिषासुर दानव का विनाश करने के लिए एक आन्तरिक शक्ति का निर्माण किया और इस शक्ति का नाम दुर्गा रखा।

दुर्गा अपने दस हाथों में अलग-अलग विशेष हथियार धारण किये, अद्भुत नारी शक्ति थी। दुर्गा को आन्तरिक शक्ति प्रदान की गई। फिर मां दुर्गा ने नौ दिनों तक लगातार दानव महिषासुर के साथ युद्ध किया और अंत में दसवें दिन दानव का विनाश किया। उस दिन को आज हम Vijayadashami और दशहरे के रूप में मानाते है।

कहानी – 2

रामायण के अनुसार भगवान राम ने रावण का अंत करने के लिए मां दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए चंडी पूजा (Chandi Puja) की थी। दुर्गा पूजा के दसवें दिन राम ने रावण का विनाश कर दिया था। उस दिन को विजयदशमी कहा जाता है। ये दुर्गा पूजा का पर्व बुराई का अच्छाई पर विजय का प्रतीक है।

कहानी – 3

देवदत के पुत्र कौस्ता ने अपनी शिक्षा पूरी होने पर अपने गुरू वरतंतु को गुरूदक्षिणा प्रदान करने का निश्चय किया। उन्हें 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं के भगतान के लिए कहा गया। इन स्वर्ण मुद्राओं को पाने के लिए वह राम के पूर्वज राजा रघुराज के पास गया।

हालांकि इन स्वर्ण मुद्राओं को विश्वजीत के त्याग के कारण देने में वह समर्थ नहीं थे। फिर कौस्ता इन्द्रराज के पास गया और बाद में धन के देवता कुबेर के पास अयोध्या में आवश्यक स्वर्ण मुद्राओं की “शानु” और “अपति” पेड़ों पर बारिश कराने के लिए गया। इतना करने के बाद कौस्ता को स्वर्ण मुद्राएँ प्राप्त हुई और उन्हें अपने गुरू को अर्पण की।

यह घटना आज भी याद की जाती है। इस दिन लोग पतियों को एक दुसरें को सोने के सिक्के के रूप में देते हैं।

दुर्गा पूजा का महत्व – Durga Puja Hindi

भारत में नारी शक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण लोग अपनी भावना से भारत को भारत माता (Bharat Mata) कहते हैं। विश्व में देवी-देवताओं को सबसे अधिक महत्व भारत में दिया जाता है। मां दुर्गा से सम्पूर्ण विश्व को सभी प्रकार की शक्तियां मिलती है। इस कारण माँ दुर्गा को बाकि देवी-देवताओं से ऊंचा माना जाता है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा का त्यौहार अधिक महत्व रखता है।

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यह पर्व लोगों की क्षमता, स्थान, परम्परा और विश्वास के अनुसार मनाया जाता है। नवरात्रि का मतलब होता है नौ रात और इसके अलगे दिन यानी दसवें दिन को दशहरे और विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। दुर्गा पूजा का पर्व नौ दिनों तक चलने वाला एक विशेष पर्व है।

दुर्गा मां की पूजा षष्ठी से दशमी तक होती है। आखिरी दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन (Durga Puja Visarjan) किया जाता है। इसके पीछे लोगों का मानना है कि उन्हें दुर्गा पूजा का पूरा आशिर्वाद और नई ताकत मिलती है। सभी लोग नकारात्मक प्रभाव से दूर रहते हैं और उन्हें एक शांति पूर्ण जीवन मिलता है। सभी लोग इस पर्व को रावण का पुतला जलाकर और पटाखे जलाकर मनाते है।

डांडिया और गरबा का आयोजन

नवरात्रि में डांडिया और गरबा की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है और जीतने वालों को पुरुस्कार भी दिए जाते हैं। इस दिन सभी विवाहित महिलाएं मां के पंडाल में सिंदूर के साथ खेलती है और कई स्थानों पर सिंदूरलेखन का भी रिवाज है।

उपसंहार

हिन्दू धर्म में सभी त्योहारों का विशेष महत्व है इस पर्व को मनाने के पीछे भी एक विशेष और सामाजिक कारण है। शक्ति को प्राप्त करने के लिए इस उत्सव को मनाया जाता है जिससे की विश्व में हो रही सभी बुराइयों का विनाश हो सके। दुर्गा पूजा का पर्व अनीति, तामसिक शक्तियों और अत्याचार के नास का प्रतीक है।

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