चील पर निबंध

Kite Bird in Hindi: पृथ्वी पर तरह तरह के पक्षी निवास करते है। इन में से कई कद में छोटे है और कई बड़े। आज हम आपको इस आर्टिकल में आपको एक अलग ही तरह के पक्षी के बारे में बताने वाले है, जिसका नाम है चील। चील का नाम सुनते ही हमारे माइंड में दूर आकाश में उड़ने वाले पक्षी की आकृति उभर आती है।

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Image : kite bird in hindi

इस आर्टिकल के जरिये हम आपको चील पर निबंध (Essay on kite bird in Hindi) के बारे में बताने जा रहे है। यह निबन्ध सभी कक्षाओं के विद्यार्थी के लिए उपयोगी साबित होगा।

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चील पर निबंध | Kite Bird in Hindi

चील पर निबंध (250 शब्द)

चील एक शिकारी जाति का पक्षी है, जो चालाकी से शिकार करने की कला के लिए जाना जाता है। चील को एक चतुर पक्षी माना जाता है। चील पूरी दुनिया में निवास करते है लेकिन ज्यादातर वो बन्दरगाह इलाकों में पाये जाते है। वैसे तो चील प्रजाति पूरी दुनिया में पाए जाते है लेकिन सभी देशों में उनकी अलग अलग जातियाँ पायी जाती है।

अमेरिका, भारत और अफगानिस्तान जैसे देशों में काली चिल और ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, चीन, मलय जैसे देशों में ब्राह्मनी चील की जातियाँ पाई जाती है। चील का शरीर पतंग से भी हल्का होता है हालाँकि अलग अलग प्रजातियों में उनके आकार और वजन में अंतर पाया जाता है।

उनका सिर और चोंच छोटी होती है जबकि पंख लम्बे संकीर्ण होते है। उनकी पूछ अंग्रेजी के V शेप में होती है। चील की आँखे बहुत तेज होती है, जो अपने शिकार को काफी ऊंचाई से भी देख सकती है।

चील काफी ऊँची उड़ान भरते है। यह अपने पंखों को फड़फड़ाकर काफी ऊंचाई पर चले जाते है। चील के पंख काफी मजबूत होते है जो शिकार करने में और शिकार को उठाने में मदद करते है। चील ज्यादातर घोंघों, सरीसृपों, मछली और कीड़े मकोड़ों का शिकार करते है। कुछ चील मृतजीवों को भी अपना भोजन बनाती है।

चील के प्राचीन पक्षी है, जिसका उल्लेख पुराणों में भी किया गया है। कहा जाता है की जिस भवन पर चील बैठती है उस भवन में रहने व्यक्तियों का सौभाग्य नष्ट हो जाता है। ऐसा भी कहा गया है कि चील अगर किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क की उपर से जाये तो हो उसकी मृत्यु हो जाती है।

चील पर निबंध (850 शब्द)

प्रस्तावना

अपने कभी आकाश में दूर सबसे ऊपर पक्षी को उड़ते हुए देखा होगा। चील पक्षी आकाश में काफी ऊंचाई पर उड़ता है। चील पक्षी काफी बड़ा होता है लेकिन वजन में काफी हल्का होता है। आकाश में उड़ने के बावजूद भी वो नीचे धरती पर अपने शिकार को आसानी से शिकार लेता है। वह एक चालाक पक्षी माना जाता है। चील पक्षी को हिमालय के एवरेस्ट शिखर पर उड़ान भरता हुआ देगा गया है।

चील एक शिकारी पक्षी है, जिसकी विभिन्न 25 प्रजातियाँ दुनिया भर में रहती हैं। अंटार्कटिका को छोड़कर, वे पृथ्वी पर लगभग हर भाग पर रहते हैं। ये पक्षी उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया, यूरेशिया, अफ्रीका और बहुत कुछ में रहते हैं। ये पक्षी प्रजातियों से प्रजातियों में आकार में भिन्न होते हैं। वे शिकार के पक्षी हैं ।उनके लंबे पंख और कमजोर पैर हैं। वे ज्यादातर समय उड़ने में बिताते हैं।

चील की जातियां

चील सर्वभक्षी पक्षी कहलाता हैं। चील की सभी प्रजातियों में काली चील, ब्राह्मनी चील, लाल चील, ऑल बिल्ड चील काफी मशहूर है। काली चील एशियाई क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है लेकिन उनकी संख्या भारत में ज्यादा है। काली चील एक मौकापरस्त पक्षी है हालाँकि एक रिपोर्ट के अनुसार इसने इंसानों के साथ जीना सिख लिया है।

ब्राह्मनी चील को क्षेमकरी और खेमकारी नामों से भी जाना जाता है। भारत में यह चील भारतीय चील के नाम से जानी जाती है। ब्राह्मनी चील ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, चीन जैसे क्षेत्र में ज्यादा पाई जाती है। ब्राह्मनी चील धान के खेतों के आसपास ज्यादा रहती है।

चील की शारीरिक रचना

वैसे तो चील की आकृति देखने में चिड़ियाँ जैसी मालूम होती है लेकिन चिल 2 फुट लंबा होता है और आकार में बड़ा होता है। उसके शरीर का रंग कलछौंह भूरा होता है। चील का सर छोटा होता है। चील की चोंच छोटी लेकिन पॉइंटेड होती है।

चील के पंजे मजबूत होते है, जिसके चलते वो अपने शिकार को आसानी से पकड़ सकते है। लम्बी पूछ उनकी उड़ने और उतरने की गति में तीव्रता लाने में मददरूप होता है। फिर एक बार उड़ने के बाद वे करीब पांच घंटे तक उड़ान भर लेते हैं।चील की आंखें बहुत तेज होती है।

अगर वो जमीन से 200 मीटर की उड़ान भी भर रही हो तब भी जमीन पर उनके शिकार को देख सकती है और आसानी से अपने पंजे में पकड़ भी लेती है।

चील का निवास स्थान

चील ज्यादातर बंदरगाह और सूखे रन जैसे विस्तार में पाये जाते है। चील की विभिन्न प्रजातियां विभिन्न प्रकार के आवास में रहती हैं। कुछ गर्म तापमान और उच्च वर्षा वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं तो कुछ ठंडी हवा में रहना पसंद करते है।

इन पक्षियों में रहने वाले कुछ अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों में सवाना, घास के मैदान, जंगल, वर्षावन, घास के मैदान और बहुत कुछ शामिल हैं। प्रत्येक प्रजाति की अलग-अलग प्राथमिकताएँ होती हैं, हालाँकि कुछ प्रजातियाँ समान निवास स्थान साझा करती हैं। काली चील पेड़ की पतली डाली पर अपना घोंसला बनाना पसंद करती है और घोंसले की सुरक्षा भी करती है।

चील का भोजन

चील मुख्य रूप से मांसाहारी होते हैं और विभिन्न प्रकार के शिकार पर भोजन करते हैं। प्रत्येक प्रजाति अलग-अलग शिकार का शिकार करती है और अलग-अलग क्षेत्रों में चील का आहार अलग अलग होता है।

ये पक्षी चूहों और गिलहरियों से लेकर छिपकलियों, सांपों और मेंढकों तक कुछ भी खाते हैं। कुछ प्रजातियां बहुत विशिष्ट प्रकार के जीवों का शिकार करती है जैसे की घोंघा पतंग, जबकि कुछ प्रकार की चील मृतदेह खाना पसंद करती है।

चील से जुड़ी मान्यता

भारतीय पुराणों में भी चील के बारे में काफी बताया गया है। चील को अशुभ पक्षी माना जाता है। कहा जाता है कि चील जिस मकान के उपर बैठती हो, उस मकान में रहनेवालों का बुरा वक्त शुरू हो जाता है। पुराणों में बताया गया की कि अगर चील किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क के उपर से उड़ान भरे तो वो व्यक्ति को काफी कष्टदायक मौत मिलती है।

स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपके सपने में चील दिखाई दे तो आपको आने वाले समय में बदनामी का सामना करना पड़ सकता है लेकिन सपने में उड़ती हुई चील को देखना यह एक शुभ सपना माना जाता है, जो आपकी सफलता को बताता है।

निष्कर्ष

अब चील पक्षी पहले की मुकाबले में कम देखने को मिलते है। चाहे पुराणों में चील को एक बुरा पक्षी बताया गया हो लेकिन हमारे पर्यावरण के लिए वो काफी मददगार साबित हुआ है।

क्योंकि वो मृतदेहों से उत्पन होने वाले बैक्टेरिया का नाश करता है क्योंकि वो मृतदेहों का भोजन करता है। चील प्रजाति ने अपने अस्तित्व पर होने वाले संकट के कारण मानवजीवन के साथ अपना अनुकूलन बना लिया है।

अंतिम शब्द

तो दोस्तों इस आर्टिकल के द्वारा हमने आपको चील पर निबंध (Kite Bird in Hindi) के बारे में विस्तारपूर्वक बताया है। आर्टिकल पसंद आये तो उनके शेयर जरुर करें। आर्टिकल के सम्बंधित कोई भी सुझाव हो तो हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरुर बताएं। हम आपसे जल्द से जल्द जुड़ने की कोशिश करेंगे।

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