कौआ पर निबंध

Essay on Crow in Hindi: अपने अपने जीवन में बहुत सारे पक्षियों को देखा हुआ। जिसमें कौवा पक्षी भी शामिल है। कौवा बहुत ही चतुर पक्षी है। यह हमारे पर्यावरण को साफ करने में बहुत ज्यादा मदद करता है। इसे पर्यावरण का सफाई कर्मी भी कहा जाता है। कौआ हमारे आस-पास सड़ी-गली वस्तुओं को भोजन के रूप में खाकर पर्यावरण को शुद्ध करने में बहुत ही मदद करता है।

पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तो आसपास बीमारियां नहीं करेगी और यह पक्षी इंसानों को बीमारियों से बचाने के लिए पर्यावरण को पूरी तरह से साफ करता है। आपने देखा होगा कि कौआ पक्षी पर निबंध अक्षर सभी कक्षाओं में विद्यार्थियों से पूछा जाता है।

Essay on Crow in Hindi
Essay on Crow in Hindi

यहां पर कौआ पर निबंध (Essay on Crow in Hindi) शेयर कर रहे हैं जो हर कक्षा के विद्यार्थी के लिए मददगार साबित होगा।

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कौआ पर निबंध – Essay on Crow in Hindi

कौआ बाकी पक्षियों की तरह एक साधारण पक्षी दिखता है लेकिन यह पक्षी काफी बुद्धिमान और चतुर होता है। संसार के हर कोने में यह पक्षी देखने को अवश्य मिलेगा। हालांकि इस पक्षी की बहुत सारी प्रजातियां है तो कहीं कोई दूसरी प्रजाति निवास कर रही होगी। लेकिन संसार के सभी प्रांतों में यह पक्षी पाया जाता है।

कौआ के शरीर की बात की जाए तो यह काले रंग का पक्षी है। जिसके 2 पैर और एक चौंच होती है। इन पैरों को उड़ते समय पंखों के रूप में काम में लेता है। कौआ की चोंच बहुत मजबूत होती है। यह पक्षी काफी कठोर चीज को खाने में सक्षम है। इसकी गर्दन स्लेटी रंग की होती है। ऐसे देखा जाए तो कौवा पक्षी से किसी भी व्यक्ति को कोई समस्या नहीं है लेकिन इस पक्षी की आवाज काफी तेज और अटपटी सी है। जिसकी वजह से कई लोग इस पक्षी को पसंद नहीं करते हैं।

यह पक्षी छोटे-छोटे तिनके से घोंसला बना कर रहता है। कौवा पक्षी को घोसला बड़ा अच्छा बनाना आता है और उसी घोसले में ये पक्षी अपना जीवन गुजरता है। इस पक्षी की उम्र 7 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक होती है। हालांकि ज्यादातर प्रजातियां जिनकी उम्र 7 वर्ष की होती है। परंतु कई स्पेशल प्रजातियां भी है, जिन प्राणियों की उम्र 14 वर्ष तक संभव है। कौआ की आमतौर पर अपने अन्य साथियों के साथ जुलूस में रहना पसंद करता है।

कौवा पक्षी की मुख्य खासियत यह है कि यह पक्षियों द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी को हटाना है और पर्यावरण को साफ करने में बहुत ज्यादा सहायता करता है। यह पक्षी भोजन के रूप में मनुष्य द्वारा फेंकी गई सड़ी गली वस्तुएं, रोटी, डबलरोटी, मरे हुए पशु, कीड़े मकोड़े, मिठाई खाकर पर्यावरण में हो रहे प्रदूषण को बचाता है।

मुख्य रूप से यह पक्षी घोंसला में रहता है लेकिन कहीं पर गांवों में और शहरों में ऐसे ही खुला घूमता हुआ पाया जाता है और बाहरी वातावरण में अपना जीवन यापन करता है। कौआ पक्षी की जीवन शैली अन्य पक्षियों की तुलना में काफी अधिक होती है। यह पक्षी मनुष्य के साथ रहना पसंद करता है और इस पक्षी को मनुष्य से ज्यादा डर भी नहीं लगता हैं।

कई बार आपने देखा होगा कि यह पक्षी छोटे बच्चों के हाथ से रोटी छीन कर ले कर चला जाता है। इसके अलावा यहां पक्षी मनुष्य की तरह हर प्रकार के भोजन को करने में सक्षम होता है। इस पक्षी को सर्वाहारी कह सकते हैं। ज्यादातर यह पक्षी झुंड में रहता है लेकिन इस पक्षी को घोंसला बनाकर रहने में भी बहुत अच्छा लगता है। मतलब यह है कि यह पक्षी कई बार घोसला बनाकर भी अकेले रहता है। इस पक्षी को छोटे-छोटे तिनकों से घौसला बनाना अच्छी तरह से आता है।

कौवा के अलग-अलग नाम

सामान्य भाषा में इसे कौवा नाम से पहचाना जाता है। लेकिन मारवाड़ी भाषा में 2-3 नाम दिए गए हैं। मारवाड़ी मतलब राजस्थान राज्य की भाषा में इस पक्षी को का “कागला” भी कहते हैं। इसके अलावा कई राजस्थान के इलाके जहां पर इस पक्षी को “हाडा” नाम से जाना जाता है।

इस पक्षी को इंग्लिश में Crow कहा जाता है। अब यदि इस पक्षी के वैज्ञानिक नाम की बात की जाए तो इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम Corvus हैं। साधारण भाषा में कौवा की सभी प्रजातियों को कौवा के नाम से ही जाना जाता है। लेकिन इन सभी प्रजातियों के वैज्ञानिक नाम अलग-अलग है। ऐसे तो पूरे विश्व में 40 प्रजातियां पाई जाती है लेकिन कुछ फेमस प्रजातियों के नाम इस प्रकार के हैं: कौरिनस, हौवाइनेसिस, ब्राचिर्हिनचोस, कोरैक्स, फ्रुगिलगस, मेलोरी

कौवा की शारीरिक संरचना और विशेषताएं

कौवा पक्षी की पूरी विश्व भर में करीब 40 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। अगर भारत के अंदर कौवा की प्रजातियों की बात की जाए तो भारत में करीब 4 प्रजाति निवास करती हैं। भारत में पाई जाने वाली प्रजाति जिसके इन पक्षियों का आकार करीब 17 इंच 19 इंच के आस पास होता है। कौवा पक्षी का भजन 1 किलो से लेकर 1.5 किलो तक होता है। यह पक्षी रंग में काला होता है लेकिन दिखने में काफी सुंदर दिखता है।

इस पक्षी के 2 पैर होते हैं और पैरों के नीचे निकले पंजे होते हैं। जो किसी भी वस्तु को मजबूती से पकड़ने में सहायता करते हैं और उन वस्तुओं को पकड़ कर उड़ने में भी यह नुकीले पंजे सहायता करते हैं। इस पक्षी का मुंह छोटा होता है। मुंह के रूप में एक कठोर चौंच होती है। चौंच की मदद से यह पक्षी भोजन को आसानी से काटना और चबाने का काम करता है। इसी चौंच की मदद से कौआ भोजन को तोड़ मरोड़ कर खा लेता है। इस पक्षी की चौंच इतनी कठोर होती हैं कि यह कठोर से कठोर वस्तु को खाने में सक्षम है।

अब इस पक्षी के बाहरी शारीरिक संरचना की बात की जाए तो बाहरी शारीरिक संरचना के रूप में कौवा के शरीर पर छोटे-छोटे बाल पाए जाते हैं। इस पक्षी के शरीर पर बाल इसलिए होते हैं। ताकि आंतरिक शरीर को यह बाल बाहरी तापमान से बचा सके। सर्दी और गर्मी में शरीर के तापमान का अनुकूलन बनाए रखने के लिए यह बाल काफी मददगार है। कौवा के शरीर पर दो बड़े-बड़े पंख होते हैं। जो इस पक्षी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक उड़ने में सहायता करते हैं।

कौवा मध्यम आकार का पक्षी है। दिखने में ना तो ज्यादा छोटा लगता है और ना ही ज्यादा बडां इसलिए इसे मध्यम आकार का पक्षी माना जाता है। शारीरिक आकृति के अलावा अगर मानसिक आकृति की बात की जाए तो कौवा पक्षी अन्य पक्षियों की तुलना में काफी चतुर और बुद्धिमान होता है। कौवा की आवाज बहुत कर्कश होती है। जिसकी वजह से लोग इसे पसंद नहीं करते हैं। गोवा के शरीर में दो चमकीली आंखें होती हैं। जो इस पक्षी को बाहरी वातावरण दिखाने में मदद करती है।

कौवा पक्षी से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  1. इस पक्षी को मुख्य रूप से सफाई कर्मी माना जाता है। क्योंकि मनुष्य द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी को यह पक्षी भोजन के रूप में ग्रहण करके पर्यावरण को साफ बनाए रखने में सहायता करता है।
  2. यह पक्षी भोजन के रूप में कीड़े-मकोड़े का भी सेवन करता है। जिससे खेतों में फैलने वाले कीड़े मकोड़े जिसका भोजन बनाकर कौवा खा लेता है, जिससे मुख्य फायदा किसानों को होता है कि उनकी फसल खराब नहीं होती है।
  3. कौवा पक्षी जिसको आप भैस पर बैठा देखा होगा। यह पक्षी भैस पर बैठकर कीड़े मकोड़े का सेवन करता है।
  4. सामान्य तौर पर इस पक्षी का जीवन काल 7 से 8 वर्ष तक का होता है। परंतु कई विशेष प्रजाति है, जिसमें कौवे की उम्र 14 वर्ष तक बताई गई है।
  5. नीदरलैंड में कौआ को सफाई करने के रूप में छोड़ा गया है। वहां पर यह कौए छोटी-छोटी वस्तुएं और सिगरेट के कचरे को उठाकर डस्टबिन में डालने का काम करते हैं।
  6. यह पक्षी एक स्थान से दूसरे स्थान तक समूह के साथ जाता है।
  7. कौवा जहां पर रहता है यदि वहां पर कोई खतरा आने वाला है। तो उससे पहले ही कौवा चिल्ला चिल्ला कर सभी लोगों को सचेत कर देता है।
  8. इसके अलावा कई बार यह माना जाता है कि यदि कौवा घर की दीवार पर बैठकर चल रहा है तो आपके घर में मेहमान आने वाले हैं।

निष्कर्ष

पर्यावरण के सफाई कर्मी के रूप में को काफी अच्छा पक्षी है और यह पक्षी हर प्रकार की समस्या से पढ़ने से पहले व्यक्ति को सचेत कर देता है कि अब कोई नई आफत आने वाली है। ऐसे तो आपने अपने आस पास बहुत सारे कौवे देखे होंगे लेकिन कई विशेष स्थानों पर कोई की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इन पक्षियों को बचाना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि यह पक्षी पर्यावरण को साफ करने में काफी मदद करते हैं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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