गौरैया पर निबंध

Essay on Sparrow in Hindi: नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने गौरैया पर निबंध हिंदी में शेयर किया है। यह हिंदी निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

Essay on Sparrow in Hindi
Essay on Sparrow in Hindi

इस निबंध में हमने गौरैया के बारे में पूरी जानकारी (Information of Sparrow in Hindi) शेयर की है। आप इसे अंत तक जरूर पढ़े।

गौरैया पर निबंध | Essay on Sparrow in Hindi

चिड़िया पर 10 वाक्य (10 Lines on Sparrow in Hindi)

10 Sentences About Sparrow in Hindi

  1. गोरैया पक्षी दिखने में सुंदर, छोटी सी और आकर्षक होती है।
  2. गौरैया विश्व में लगभग हर जगह पर पाई जाती है।
  3. मादा गौरैया एक समय में 2 से 4 अंडे दे देती है।
  4. गौरैया की औसतन आयु 5 से 7 वर्ष तक होती है।
  5. गौरैया का वजन 30 से 40 ग्राम तक होता है।
  6. नर गौरैया की पीठ का रंग लाल होता है और मादा गौरैया की पीठ पर भूरी धारियां होती है।
  7. गौरैया की लम्बाई 15-17 सेंटीमीटर तक होती है इसके दो छोटे-छोटे पंख होते हैं।
  8. गौरैया अनाज के दाने, हानिकारक कीड़े, फल, फलों के बीज आदि को अपने भोजन के रूप में लेती है।
  9. वैज्ञानिकों के अनुसार गौरैया की कुल 43 प्रजातियां खोजी जा चुकी है।
  10. गौरैया को अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है जिनमें चिड़िया, चिड़ी, चिमनी आदि मुख्य है।

चिड़िया पर निबंध 250 शब्द में (sparrow bird in hindi)

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियाँ पाई जाती है, जिनमें गौरैया का विशेष महत्व है। गौरैया दिखने में सुंदर और छोटी होती है। गौरैया को अक्सर हमने अपने घरों और पेड़ पौधों पर देखा होगा। लेकिन आज के समय में पेड़ों को हो रही अंधाधुंध कटाई और कीटनाशक पदार्थों के छिड़काव के कारण यह विलुप्त होने के कगार पर है। यह एक ऐसी प्रजाति है, जिसे सभी जगह पर अलग अलग नाम से जाना जाता है, जिनमें चिड़िया, चिमनी, चिड़ी आदि प्रमुख है।

गौरैया विश्व में लगभग हर जगह पर पाई जाती है। इसका रंग हल्का भूरा और सफ़ेद होता है। मादा गौरैया और नर गौरैया में अंतर देखकर किया जा सकता है। मादा के आँखों के पास काला धब्बा पाया जाता है और नर में यह धब्बा नहीं होता है।

नर चटक रंग में भी पाया जाता है, जो दिखने में काफी सुंदर दिखता है। गौरैया को समूह में रहना बहुत पसंद होता है और इसकी औसतन आयु 5 से 7 वर्ष तक होती है। यह सर्वाहरी होती है और एक समय में 2 से 4 अंडे दे देती है। यह हमारे घरों में घोसला बनाकर भी अंडे देती है।

यह अपने भोजन की तलाश में कई मीलों का सफर तय करती है। यह अपने भोजन में फसलों के लिए हानिकारक कीड़ो, फूलों के बीज और अनाज आदि को लेती है। गौरैया के आँखों का रंग काला और पैरों का रंग भूरा होता है। इसकी लम्बाई 15 से 17 सेंटीमीटर तक हो सकती है। इसकी एक चोंच होती है, जिसका रंग पीला होता है।

sparrow essay in hindi
Image: sparrow essay in hindi

मेरे घर आने वाले पक्षी पर निबंध 400 शब्द (mere ghar aane wale pakshi per nibandh)

पंछिया पर्यावरण के अभिन्न अंग होते हैं तभी तो प्रकृति का चित्र बनाते वक्त हम पेड़, पौधे, नदी-झरने के साथ पक्षियों को बनाना नहीं भूलते। खुले आसमान में अपने खूबसूरत पंखों से जब यह पंक्तियां उड़ते हैं तो एक खूबसूरत और आकर्षक दृश्य उत्पन्न हो जाता है। पक्षियों के चहकान से धरती गूंज उठती है। पक्षियों के निवास से वन-प्रांतों की शोभा भी बढ़ जाती है।

भगवान ने ना केवल मनुष्य को ही विशेष गुणों का तोहफा नहीं दिया है बल्कि पक्षियों को भी विशेष गुणों का तोहफा दिया है तभी तो सभी पक्षियों में हमें अलग-अलग गुण देखने को मिलते हैं। कोयल को मधुर स्वर का वरदान भगवान ने दिया है, जो अपने मधुर स्वर से हर किसी को आकर्षित करता है। भले ही इसका रंग काला है लेकिन सभी का पसंदीदा है।

मोर जिसे भगवान ने खूबसूरती का वरदान दिया है। यह खूबसूरत तो है ही इसके अतिरिक्त नाचने का भी गुण है, जो बारिश के मौसम में नृत्य करके लोगों के मन को लुभाता है। तोता जिसे मिट्ठू मियां भी कहा जाता है, नकल करने में होता है सबसे आगे। सभी की आवाज निकालने में होता है तेज। बाज जो सबसे बड़ा शिकारी पक्षी माना जाता है, कई किलोमीटर दूर यह पक्षी अपने शिकार को देख पाने में सक्षम होता है।

भले ही सभी पंक्षी रंग रूप और गुण में एक दूसरे से भिन्न भिन्न हो लेकिन सभी पक्षियों में उड़ने की क्षमता होती है। हालांकि सभी पक्षी एक समान नहीं उड पाते हैं। कुछ पक्षी आसमान की ऊंचाई को छूने की काबिलियत रखते हैं तो कुछ पक्षी थोड़ी ऊंचाई पर ही उड़ने में सक्षम होते है। कुछ पक्षी तो हवाई जहाज से भी तेज उड़ते हैं। उल्लू अंधेरे में भी देखने में सक्षम होता है।

पक्षियों का घर उनका घोसला होता है, जो वे खुद तिनका तिनका जमा करके बनाते हैं। जहां पर भी पेड़ों की हरियाली देखते हैं, वहीं पर वे अपना बसेरा डाल लेते हैं। पक्षी पेड़ों के कोठार में भी अपना आशियाना बनाते हैं। बया पक्षी तो अपना घोंसला बनाने में बहुत ही निपुण होती है। इसके घोसले के बनावट को देख इंजीनियर भी आश्चर्यचकित रह जाए।

पक्षियों की आवाज को भले ही इंसान समझ ना सके लेकिन पक्षी एक दूसरे की आवाज समझते हैं। मानव की तरह उनमें भी भावनाएं होती हैं। पक्षियों में भी इंसानी मां की तरह मातृत्व की भावना होती है। तभी तो वह अपने छोटे चूजों की रक्षा दुश्मनों से करती है, सैकड़ों किलोमीटर दूर से भोजन को इकट्ठा करके लाती है और अपनी चूजों को खिलाती हैं।

पक्षियों में भी एकता की भावना होती है तभी तो एक प्रजाति के पक्षी अक्सर एक साथ देखने को मिलते हैं। एक पक्षी के बीमार पड़ने या मर जाने से उनके समूह के अन्य पक्षियों को भी दुख होता है।

सभी पक्षियों अलग-अलग चीजों के खाने की शौकीन होती है। यह छोटे छोटे जीव जंतुओं को खाकर अपना पेट भरती है। मोर सांप खाने का शौकीन होता है, सायस मछली का दीवाना होता है, जिसे पकड़ने की प्रतीक्षा में वह नदि या दलदली भूमि के पास घंटों खड़ा रहता है। गिध्द यह जानवरों के मांस खाने का शौकीन होता है।

यह सभी पक्षीया प्रकृति से जुड़े हुए हैं। लेकिन दुख की बात है कि मानव अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का नाश कर रहा है, पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है, वनों को काट रहा है, जिसके कारण पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही है। मनुष्य के गलत गतिविधियों के कारण जलाशय भी खराब हो जा रहा है पानी प्रदूषित हो रहा है, जिसके कारण पक्षी प्यासे ही मर जा रहे हैं।

वनों के हटाने के कारण पक्षियां अपने घरों से बेघर हो रहे हैं। कुछ लोग पक्षियों के दर्द को समझते हैं, इसीलिए तो कई लोग अपने घरों के छत पर पक्षियों के लिए पानी की सुविधा भी करते हैं। हालांकि सरकार भी पक्षियों की रक्षा के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वन्य जीव अभ्यारण बनाकर अनेकों प्रजाति के पक्षियों का संरक्षण किया जा रहा है। लेकिन हर एक मानव को इसके लिए कदम उठाने की जरूरत है।

गौरैया पर निबंध 800 शब्द में (gauraiya in hindi)

प्रस्तावना

विश्व में पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ पाई जाती है। इन सबमें गौरेया भी प्रजाति है। इसे अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जिनमें चिड़िया, चिड़ी, चिमनी आदि मुख्य है। यह दिखने में छोटी और बहुत सुंदर होती है, जो अंटार्कटिका के अलावा विश्व के हर कोने में पाई जाती है। यह इंसानों के बीच भी रहना पसंद करती है। इसे हम अपने घरों की छतों और पेड़ पौधों पर दिखाई देती है।

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, आधुनिकीकरण, हानिकारक कीटनाशक छिड़काव, बढ़ते प्रदुषण आदि के कारण यह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। पक्षी हमारे वातावरण की सुन्दरता को बढ़ाने का काम करते हैं। इनकी सुरक्षा करना हमारी मुख्य भूमिका है। इनके लिए हमें अपने घरों की छतों पर अनाज के दाने और पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।

गौरैया की शारीरिक संरचना और रंग-रूप

गौरैया छोटी और दिखने में बहुत ही सुंदर पक्षी होती है। गौरैया के दो पैर, दो छोटे-छोटे पंख, दो आंखें और एक छोटी-सी पीले रंग की चोंच होती है। यह दिखने में बहुत ही सुंदर होती है। इसके पैरों का रंग भूरा होता है और यह सफ़ेद और हल्के भूरे रंग में पाई जाती है। इसके आँखों के चारों ओर काला रंग का घेरा होता है, जो इसकी सुन्दरता को और भी ज्यादा बढ़ा देता है।

नर गौरैया की पीठ का रंग लाल होता है और मादा गौरैया की पीठ पर भूरी धारियां होती है। इसकी लम्बाई 15-17 सेंटीमीटर तक होती है। इसके दो छोटे-छोटे पंख इसे उड़ने में मदद करते हैं। यह अपने पंखों की मदद से 25 मील प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ सकती है। गौरैया जरूरत पड़ने पर पानी में तैर भी सकती है।

मादा के आँखों के पास काले रंग का धब्बा पाया जाता है और नर के ये नहीं पाया जाता है। इससे नर और मादा में अंतर किया जा सकता है और इसकी औसतन आयु 5 से 7 वर्ष तक होती है। इसका वजन 30 से 40 ग्राम तक होता है।

गौरैया का भोजन

गौरैया सर्वाहरी पक्षी है यह मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार के ही भोजन को लेती है। यह अनाज के दाने, हानिकारक कीड़े, फल, फलों के बीज आदि को अपने भोजन के रूप में लेती है। यह अधिकतर इंसानों के साथ रहती है तो यह ज्यादातर शाकाहारी भोजन ही लेती है। यह पानी के पास रहना पसंद करती है और बर्फीले और पहाड़ी इलाकों में कम पाई जाती है।

इसके शरीर का आकार बहुत छोटा होता है। इसके कारण इसे अधिक भोजन की जरूरत नहीं होती है। फिर भी काफी कभी यह अपने भोजन की तलाश में मीलों तक का सफर तय कर देती है। कई बार कुता, बिल्ली, सांप आदि इसे अपना भोजन बना देते हैं।

गौरैया का प्रजाति

गौरैया एक ऐसी प्रजाति का पक्षी है, जो विश्व के हर कोने में पाई जाती है। यह अंटार्कटिका महाद्वीप को छोड़कर विश्व के हर कोने में पाई जाती है। जैसा कि पहले बताया इसे बर्फीले और पहाड़ी जगहों पर रहना पसंद नहीं होता है।

डेड सी स्पैरो, रसेट स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो, सिंड स्पैरो, हाउस स्पैरो, ट्री स्पैरो आदि गौरैया की कुछ प्रजातियों के नाम है। यह सभी प्रजातियां विश्व के अलग-अलग जगहों पर पाई जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार गौरैया की कुल 43 प्रजातियां खोजी जा चुकी है।

रहन-सहन और निवास

गौरैया को अक्सर हम अपने घरों की छतों और आस पास के पेड़-पौधों पर देखते हैं। यह वातावरण का एक मुख्य भाग है। यह इंसानों के घरों और पेड़-पौधों पर अपना घोसला बनाकर रहती है। यह अधिकतर इंसानों के बीच में भी रहती है।

भारत में यह अधिकतर ग्रामीण इलाकों में अधिक पाई जाती है और शहरों में कम देखने को मिलती है। गौरैया को झुण्ड में रहना अधिक पसंद होता है। यह सभी मौसम को आसानी से सहन कर लेती है।

प्रजनन काल के दौरान मादा गौरैया एक बार में 2 से 4 अंडे देती है, जो छोटे और सफेद रंग के होते है। यह अंडे 20 दिन होने बाद बाहर निकल आते है। गौरैया की चीं-चीं की आवाज सुनने में मधुर होती है।

विलुप्त के कगार पर

शहरीकरण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, आधुनिकीकरण, हानिकारक कीटनाशक छिड़काव, बदलती जलवायु, बढ़ते प्रदुषण आदि के कारण आज के समय में यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। जंगल और कच्चे घर नहीं होने के कारण इसकी संख्या में भारी कमी देखने को मिल रही है।

खेतों में फसलों के बचाने के लिए उपयोग में आने वाले हानिकारक कीटनाशक से अधिकतर गौरैया की मृत्यु हो जाती है। बिजली के बैठने से भी कई सारी गौरैया अपनी जान गंवा बैठती है।

गौरैया के बचाव के उपाय

इसके बचाना हमारी प्रकति के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके लिए हमें अपने घरों में के छोटा सा बगीचा जरूर बनाना चाहिए और समय समय अपने घरों की छत पर अनाज के दाने और इनके पीने के लिए पानी की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। घरों में उपयोग होने वाली कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग भी कम करना चाहिए।

उपसंहार

गोरैया पक्षी दिखने में सुंदर, छोटी सी और आकर्षक होती है। इसका वातावरण के पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमें इसकी सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए।

गोरैया के विलुप्त होने से बचाने और इसके प्रति जागरूकता के लिए विश्व में 20 मार्च को गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोगों के इसे बचाने के प्रति जागरूक किया जाता है।

निष्कर्ष

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।