गुस्सा शायरी

Gussa Shayari in Hindi

गुस्सा शायरी | Gussa Shayari in Hindi

हमारा रूठना-मनाना तो लगा रहता है ,
हमारी आंखों में प्यार,
उनके चेहरे पर गुस्सा तो सदा रहता है।

साथ छोड़ना बहुत मुश्किल है,
तेरे से नाता तोड़ना बहुत मुश्किल है…
तू जान इस दिल की,
तुझसे रूठ जाना बहुत मुश्किल है…

आपके प्यार की कद्र कोई पराया भी करेगा ,
लेकिन आपके गुस्से की कद्र केवल अपने ही करेंगे ।

गुस्से में भी उसका प्यार दिखता है,
तकलीफ़ भले मुझको दे, दर्द उसको होता है।

ऊपर से गुस्सा दिल से प्यार करते हो,
नज़रें चुराते हो दिल बेक़रार करते हो,
लाख़ छुपाओ दुनिया से मुझे ख़बर है,
तुम मुझे ख़ुद से भी ज्यादा प्यार करते हो…

क्यो गुस्से में समझ लेती हूं ,
मै तुझे इतना गलत पर तू है नही इतना भी बुरा
सुनकर तेरी आवाज बदल जाता है
मेरा गुस्सा भी प्यार में ।

इतनी सारी शिकायतें थी उनके आने से पहले,
उन्होंने आकर हाल क्या पूछा,
अपनी शिकायतों पे गुस्सा आ गया।

तेरा रूठ जाना क्या…
उस चाँद का शर्मना क्या,
बदल दूँ या बदल जाऊं,
फिर मैं क्या…
जमाना क्या

दो पल के गुस्से से प्यार भरा रिश्ता बिखर जाता है ,
होश जब आता है तो वक्त निकल जाता है ।

क्यों अब मेरी जिंदगी का हर
सपना सच्चा नहीं लगता,
रूठ जाती है सांसें मेरी..
यूँ तुम्हारा नाराज होना
हमें अच्छा नहीं लगता

उनका गुस्सा और मेरा प्यार एक जैसा है ,
क्यूंकि ना ही उनका गुस्सा कम होता है ,
ना ही मेरा प्यार ।

गुस्सा क्यों करते हो बात-बात पर तुम,
शक ज्यादा करते हो या प्यार ?

तेरा ये रूठ जाना क्यों..
फिर मुझे तडपना क्यों..
तुम तो चले गए थे
मुझे छोड़कर
फिर तुम्हारा लौट आना क्यों.

देखों इस अजीब तरह से
भी इश्क़ हमसें निभाती है वो,
हमी पे गुस्सा कर फ़िर कंधे
पर सर रख सो जाती है वो।

मुझे तुम इस कदर भा चुके हो,
की मेरे दिल के बहुत करीब आ चुके हो,
तुमने मुझे नही छोड़ा,
बल्कि, मेरी रूह से दूर जा चुके हो…

इतना गुस्सा करोगे जो
हमसे तो और दिल में बस जाऊंगा ,
तुम्हारा ही हूँ मै जब चाहोगे तुम्हारे पास आ जाऊंगा ।

बेवजह किसी पर गुस्सा ना करना ऐ दोस्त,
सुना है अक्सर रिश्ते बिखर जाया करते हैं।

हम खुल के जिंदगी जिया करो…
हसी के घूंट पिया करो,
दिल रोने सा लगता है,
तुम यूँ ग़ुस्सा न किया करो

मोहब्बत में गुस्सा वही करता है ,
जिसमें मोहब्बत कूट-कूट के भरी होती है ।

मुझे तुम्हारा किस्सा पसंद है,
इस किससे में मेरा हिस्सा पसंद है,
ये जो तुम चेहरा लाल कर देखती हो मुझे,
खुदा कसम ! मुझे ये तुम्हारा गुस्सा पसंद है।

मै मुस्कुरा कर अपनी किस्मत
पर सारा गुस्सा उतार देता हूँ ।

Gussa Shayari in Hindi

किस बात पर गुस्सा है,
ये पूछने वाला हो तो,
मुस्कान क़भी नहीं जाती।

थोड़े गुस्से वाले थोड़े नादान हो
तुम मगर जैसे भी हो मेरी जान हो तुम ।

गुस्से का कोई इलाज नहीं,
चाहे दोस्ती हो या हो प्यार
सब उजाड़ ही देती है।

तुम जब गुस्सा हो जाते हो
तो ऐसा लगता है मनाते
मनाते जिन्दगी गुजारा हूं ।

कैसे कह दें कि उनके कुछ नहीं लगते हम,
उनके गुस्से पर आज भी हमारा ही हक है।

गुस्से में जो छोड़ जाये वो
वापस आ सकता है ,
मुस्कुराकर छोड़कर जाने
वाला कभी वापस नही आता ।

गुस्सा उन बादलों की तरह है,
जो बरसने से पहले बहुत गर्मी करते है,
और आंसू उस बारिश की तरह है,
जो बरसने के बाद बहुत ठंडक देते है।

मोहब्बत में शक और गुस्सा वो ही करता है ,
जो कभी भी तुम्हे खोना नही चाहता ।

हम जानते है मायने रिश्तों के,
इसलिए गुस्सा हम नही हो पाते,
समझ सकते है हम उनकी तकलीफ को,
हमे जो अपना हक्क समजते है।

ऐसा नही की मुझे गुस्सा नही आता ,
बल्कि उस गुस्से से भी कही ज्यादा ,
प्यार करते है तुमसे ।

रिश्तों में मिठास लाने के लिए
कई ज़हर पिये है मैंने भी,
इसलिए लोग पूछते है
अब गुस्सा क्यों नही आता मुझे।

थोड़े गुस्से वाली थोड़ी नादान हो तुम ,
पर जैसी भी हो मेरी जान हो तुम ।

ये जो मेरे गुस्से को भी मुस्कुराहट में बदल देते हो,
बस यही वजह कि तुम दिल को इतना भाते हो।

कभी कभी इंसान गुस्से में ही सही,
कुछ कुछ सच बयान कर ही देता हैं,
वो सच जो वो खुद से भी छिपाता फिरता है

तुम्हारा गुस्सा भी इतना प्यारा है कि
दिल करता है तुम्हे दिन भर तंग करते रहे ।

जिन्हें गुस्सा आता हैं वो लोग सच्चे होते है,
मैंने झूठो को अक्सर मुस्कराते हुए देखा है।

मेरा गुस्सा वही पर खत्म हो जाता है जहाँ ,
प्यार से वो पगली बोलती है “ Sorry बाबा Sorry ”.

रूबरू था कोई शख्स आइने में मुझसे,
गुस्से में मुझे देखकर वो रोने लग गया।

प्यार इतना कि मुझे पाने को हर
वक्त खुदा से इबादत किया करती थी,
और गुस्सा इतना कि मुझसे
लिपटकर मेरी शिकायत किया करती थी।

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Gussa Shayari in Hindi

गुस्सा तो बहुत है
मुझे यूँ छोड़ के जाने का,
उम्मीद भी उतनी है
फ़िर से लौट कर आने की।

गुस्सा कर लो चाहे जितना पर
नफरत मुझसे मत करना ,
क्योंकि गुस्सा करोगे तो मनाऊंगा ,
नफरत किया तो बिगड़ जाऊंगा ।

गुस्से से गया शख्स वापिस आ जायेगा,
खामोशी से गया शख्स वापिस नहीं आएगा।

न तेरी शान कम होती न रूतबा ही घटा होता ,
जो गुस्से में कहा तुमने वही हंस के कहा होता ।

नाराजगी उतनी ही जाहिर करो
जितना कसूर है मेरा,
ज्यादा प्यार और गुस्से से रिश्ते
टुटते है।

आपका गुस्सा आपके चरित्र
को परिभाषित करता है ,
देखना ये है की आपको किन
चीजो पर गुस्सा आता है ।

तेरे गुस्से पर मुझे आज
बहुत प्यार आया,
कोई तो है जिसने मुझें
इतने हक़ से धमकाया।

यदि आप सही है तो आपको
गुस्सा करने की जरूरत नही है ,
यदि आप गलत है
तो आपको गुस्सा करने का हक नही है ।

एक पल में खिलखिला कर हँसती है,
एक पल में गुस्से से तिलमिलाती है,
कुछ ज़िन्दगी सी है माशूका मेरी।

गुस्सा आने पर चिल्लाने के
लिए ताकत नही चाहिए ,
परन्तु गुस्से में शांत रहने के
लिए बहुत ताकत चाहिए ।

नफ़रत भी नहीं है,
गुस्सा भी नहीं हूं,
पर तेरी ज़िन्दगी का अब
हिस्सा भी नहीं हूं।

जो हमेशा गुस्से में रहे उसे छोड़ना जरूरी है ,
ऐसे मूर्ख इंसान का घमंड तोड़ना जरूरी है ।

कहने को तो अनेक शिकायतें थी उनसे,
वो ज़रा सा पास क्या आए,
सारा गुस्सा मोम सा पिघल गया।

गुस्सा मे कभी गलत मत बोलो ,
मूड तो ठीक हो जाता है ,
पर बोली हुई बातें वापस नही आती ।

लड़ते बहुत है,
गुस्सा भी बहुत है,
मगर गुस्सा बाहर से है,
मोहब्बत अंदर से है।

गुस्सा ज्यादा आता है
तो कोई बात नही ,
बस उस गुस्से को सही दिशा दो ।

ज़िन्दगी को कुछ ऐसे जीना है,
धोखा खाना और गुस्सा पीना है।

गुस्से में किया हुआ सीधा
बात भी कई बार लोगो को
उल्टी बात ही लगती है ।

Gussa Shayari in Hindi

मासूम-सी आँखों में मासूम-सा
अब कुछ न रहा,
रहने को गुस्सा और दर्द तो रहा,
बस भरोसा ही न रहा।

गुस्से में अक्सर लोग
कड़वा सच बोल ही देते है ।

तुम्हारे चेहरे पर गुस्सा देख कर ना जाने क्यूँ,
तुम पर और भी प्यार आता हैं।

मै बदला नही ,
आजकल बस अंदाज सही है ,
खामोश रहता हूँ पर गुस्से का मिजाज वही है ।

वैसे तो बहुत अच्छा हूं मै ,
सिर्फ गुस्सा ना आने तक ।

गुस्सा बहुत चतुर होता है ,
अक्सर कमजोर पर ही निकलता है ।

गुस्से में कभी इतना रायता ना फैलाओ ,
की चाहकर भी उसे सिमेट ना पाओगे ।

खुद की कमियों पर गुस्सा करना सिखिए ,
आपका व्यक्तित्व निखरता चला जायेगा ।

गुस्सा भी समय-समय पर
करना ठीक होता है ,
पर कहां और कब करना है
ये समझना मुश्किल होता है ।

कुछ लोग इतने कमाल होते है ,
कि बिन वजह गुस्से से लाल होते है ।

गुस्से और आंधी से होने का नुकसान ,
इनके थम जाने के बाद नजर आता है ।

ना जाने क्यूं नजर लगी जमाने की ,
अब वजह मिलती नही मुस्कुराने की ,
तुम्हारा गुस्सा होना तो जायज था ,
हमारी आदत छूट गई मनाने की

कभी-कभी खुद पर ही गुस्सा आ जाता है ,
कि मुझे इतना गुस्सा क्यो आता है ।

गुस्से में लोग सब भूल जाते है ,
कर्मो के मोल सब वसूल जाते है ,
कभी सोचते नही है क्या होगा आगे ,
क्योकि जिन्दगी छोड़कर ही वो झूल जाते है ।

जब कोई गुस्से में आपके सामने बात करे ,
तो उसे खामोशी के साथ गौर से सुने ,
क्योकि इंसान अक्सर गुस्से मेे बहुत कड़वा बोल देता है ।

ना तो तेरी शान कम होती
ना रूतबा ही घटा होता ,
जो गुस्से में कहा तुमने
वही हंस के कहा होता ।

कोरे कागज पर तेरी ,
इक तस्वीर बनाई है ,
मैने गुस्से में आकर उसमें ,
आग लगाई है ।

ये जो मासूम लोग होते है न ,
वो गुस्से में भी रोने लगते है ।

Gussa Shayari in Hindi

हंसी के पीछे का दर्द और गुस्से के पीछे का प्यार
हर किसी को नजर नही आता है ।

दिमाग से पैदल है वो…
मगर दिल की साफ ,
प्यार से तू बोलती है…
और गुस्से में आप ।

कौन कहता है
कलम में आग नही होती ,
जरा , गुस्से को कलम से उखार
के तो देखो आग लगा देगी ।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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