फुर्सत के पल शायरी

Fursat Ke pal Shayari In Hindi

Fursat Ke pal Shayari In Hindi
Fursat Ke pal Shayari In Hindi

Fursat Ke pal Shayari In Hindi | फुर्सत के पल शायरी

उन्हें फुर्सत नहीं हमारे लिए,
चलो “मन” दीवारों से बात करते हैं।।

दिल ने आज फिर तेरे
दीदार की ख्वाहिश रखी है,
अगर फुरसत मिले
तो ख्वाबों मे आ जाना।

फुर्सत मिले कभी तुम्हें तो
एक मुलाकात जरूर हो
ना बांट सको खुशियां हमसे
तो दुख में ही याद किया करो

कभी मिले तुम्हे फुरसत
तो इतना जरुर बताना,
वो कौन सी मौहब्बत थी
जो हम तुम्हे दे ना सके।

ताजमहल न सही
बनाऊंगा ऊंची इमारत..
अपने प्यार के लिए
निकाल लें थोड़ी फुरसत.

खुदा ने बड़ी फुर्सत से बनाया हैं
तुम्हे तभी तो आज तक कोई
तुमसा नहीं देखा।। “मन”।।

मुझे तेरे सिवा कुछ
सोचने की फुरसत नहीं,
ओर तुम कहते हो मैं भूल जाऊँ तुम्हें।

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खुद से मिलने की भी
फुरसत नहीं है अब मुझे,
और वो औरो से मिलने
का इल्ज़ाम लगा रहे है !!

मेरे लिए दिल में
उनके, चाहत नहीं..
शायद अब उन्हें
जरा भी फुरसत नहीं..

आज सुबह से ही हिचकिया आ रही हैं
“मन” लगता हैं
आज उन्हें फुर्सत मिल ही गयी,
मुझे याद करने की।।

****

सालो साल बातचीत से
उतना सुकून नही मिलता,
जितना सिर्फ एक
बार गले लग कर मिलता है।

फुरसत अगर मिलें
तो मुझे पढ़ना जरूर
मैं तेरी उलझनों का मुकम्मल जवाब हूँ

रिश्तों में जब होती है
एक दूसरे के लिए फुरसत..
तब ऐसे रिश्तों में
इश्क़ की होती है बरकत..

लगता हैं उन्हें अब फुर्सत नहीं मिलती
मुझे याद करने की “मन” तभी तो
अब हिचकिया आती नहीं।।

Fursat Ke pal Shayari In Hindi

चलो छत से ही सही,
मेरे जनाजे को देखने
की फुर्सत उन्हें मिली।।

बेचैनी भी जहाँ सुकून देने लगती है,
आ देख, उस दौर से गुजर रहा हूँ मैं।

सुनता नहीं है दिल मेरा
सिर्फ उसी पर मरता..
अब तो फुर्सत में उसकी
मुस्कान याद करता..

मुझे दिल से भुलाने वाले,
कभी फुर्सत से बैठना फिर सोचना,
मेरा कसूर क्या था?

एक सुकून की तलाश मे
जाने कितनी बेचैनियां पाल ली,
और लोग कहते है हम बडे हो गए
हमने जिंदगी संभाल ली।

तेरे पास भी कम नहीं,
मेरे पास भी बहुत हैं,
ये परेशानियाँ आजकल
फुरसत में बहुत हैं ……

दिन रात मेहनत करके
कमा रहा हूं मैं दौलत..
सुकून के पलों के लिए
नहीं मिलती है फुरसत..

सुकून तलाशती फिरती हैं,
है रात भी कुछ मेरी जैसी।

मसरुफ रहने का अंदाज
आपको तन्हा ना कर दे,
रिश्ते फुरसत के नही,
तवज्जो के मोहताज़ होते हैं ….

तन्हाइयों से हमारी बात कर लेना..
कभी फुर्सत में हमें याद कर लेना..

बड़ी फुर्सत से बैठे हैं आज तेरी यादों के
ख़ज़ाने को लेकर “मन” इन्हे देख कर
ऑंखें छलक आयी तो मैं क्या करू?।

बड़ी फुर्सत में रहती हो तुम
चली आती हो दिन-रात यादो में।।

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फुरसत मिले तो चाँद से
मेरे दर्द की कहानी पुछ लेना…
एक वही तो है हमराज
मेरा तेरे सो जाने के बाद…

बड़ी फुर्सत से कमरे की
तन्हाईयों में बैठे रहते हैं,
पता हैं क्यू?
तुम्हे याद करने के लिए।। “मन”.।।

खत्म कर दी थी जिन्दगी
की हर खुशियाँ तुम पर,
कभी फुर्सत मिले तो
सोचना मोहब्बत किस ने की थी।।

अधूरे मिलन की आस हैं जिंदगी,
सुख – दुःख का एहसास हैं जिंदगी,
फुरसत मिले तो ख्वाबो में आया करो,
आप के बिना बड़ी उदास हैं जिंदगी

बात करने ले लिए
निकाल ले फुरसत..
सच्चे रिश्ते में
नहीं होता कुछ गलत..

****

मंजिल पे पहुँचकर लिखूंगा
मैं इन रास्तों की मुश्किलों,
का जिक्र अभी तो बस
आगे बढ़ने से ही फुरसत नही।।

मेकअप करने के लिए
होती है बड़ी फुरसत..
मेरे लिए 2 मिनिट नहीं
इस बात की होती मुझे हैरत..!

हमें फुरसत नहीं मिलती कभी आंसू
बहाने से कई ग़म पास आ
बैठे तेरे एक दूर जाने से।।

जब हो थोड़ी फुरसत,
तो अपने मन की बात हमसे कह लेना,
बहुत खामोश रिश्ते कभी जिंदा नहीं रहते।।

सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली,
एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली,
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर,
हमको तेरे ख्याल से कभी फुरसत न मिली।

Fursat Ke pal Shayari In Hindi

मोहब्बत को तुम
दिल में ना छुपाना..
जब मिले फुर्सत तो
हमें जरूर बताना..

तुम्हे फुर्सत नहीं अपनी महफ़िल से,
और हम तुम्हे हर-पल याद करते हैं।

ना मिले फुरसत हमें देखने की
तो अनदेखा ही किया करो
पर यूं सर आंखों पर बिठाकर
हमें अचानक ठुकराया ना करो

गुज़र गया आज का
दिन पहले की तरह,
ना हम को फुर्सत मिली
ना उनको ख्याल आया।।

दिन भर सिर्फ काम करता
नहीं होती उसे जरा फुरसत..
मोहब्बत क्या ख़ाक होगी उससे
मशीन जैसी है उसकी हरकत..

तेरे पास भी काम नहीं,
मेरे पास भी बहुत हैं,
ये परेशानियाँ आजकल
फुर्सत में बहुत हैं।।

तुम ताल्लुक तोड़ने का
जिक्र किसी से भी ना करना,
हम लोगों से कह देंगे
कि उन्हें फुर्सत नहीं मिलती।

दिल से मेरे सच्चा
प्यार जरूर जताना..
फुर्सत के समय
मुझसे मिलने आना..

तुम्हे गेरौ से कब फुरसत,
हम अपने ग़म से कब खाली।।
चलो बहुत हो गया मिलना,
ना तुम खाली ना हम खाली।।

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बड़े अजीब से हो गए हैं रिश्ते आजकल,
सब फुरसत में हैं पर वक्त किसी के पास नहीं।

मेरे दिल की दुआओं का
असर रंग लाया है..
खुदा ने तुमसे, फुरसत में
जो मुझे मिलाया है..

खुशी जल्दी में थी,रूकी नही।
गम फुरसत में थे जो ठहर गए।

गुजारिश है मेरी, कभी ना
करना दिल से जुदा हमें..
क्या करूं तारीफ़, फुर्सत में
बनाया है खुदा ने तुम्हें..

मोहब्बत करने से
फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते
नफरत किसको कहते है।।

कभी फुरसत में खुद से मिलेंगे,
लोगों से सुना है कि बहुत बुरे है हम।

*****

तमन्ना है के वो याद
कर ले हमें फुर्सत में..
उनके सिवा कोई और
नहीं है इस जिंदगी में..

कभी मिले तुम्हे फुर्सत
तो इतना जरुर बताना,
वो कौन सी? मोहब्बत
थी हम तुम्हे दे ना सके।।

तेरे बिना किसी से चाहत नहीं..
अब तो जीने की भी फुर्सत नहीं..

तुम्हें जब कभी मिले फ़ुरसतें मेरे
दिल से बोझ उतार दो,
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ
मुझे कोई शाम उधार दो।।

फुर्सत अगर मिलें तो मुझे पढ़ना जरूर,
मैं तेरी उलझनों का मुकम्मल जवाब हूँ।।

Fursat Ke pal Shayari In Hindi

अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे
याद करते हो तो मुझे याद मत करना;
मैं तनहा ज़रूर हूँ मगर फ़जूल नहीं।

दिल में बस तेरी ही बात हो..
फुरसत में भी तुम ही साथ हो..

बड़ी मसरूफ़ रहती है,
जिंदगी शायरों की,
फुरसतों में भी वो,
शब्दों के जाल बुनते हैं।।

दिल तुझे याद करता है कितना..
फुर्सत मिले, तो तुम जरूर सोचना..

कमाल करता है ऐ दिल तू भी,
उसे फुरसत नहीं और तुझे चैन नहीं।।

फुर्सत में ही याद कर लिया करो हमें,
दो पल मांगते है पूरी जिंदगी तो नहीं।

बेहद फिज़ुल हमें समझ रखे है वो
याद तब ही करते है
जब फुरसत में रहते है वो।

उनको तो फुरसत नहीं,
दीवारो तुम ही बात कर लो मुझसे।।

तमाम लोगों का हाल
जाना तमाम लोगों से बात की,
कभी फुर्सत ही न
मिल सकी खुद से मुलाकात की।।

शहर भी वही, वक़्त भी वही,
पर दिल जो खोजे, वो शख्स ही नहीं।

तू ही मेरी जिंदगी जाना,
तू ही जुस्तजू है..
फुर्सत में याद करना
मुझे, यही आरजू है..

काश तुझे कभी फुरसत
में ये खयाल आ जाए,
की कोई याद करता है
तुम्हें जिन्दगी समझकर।।

हमें फुरसत नहीं
मिलती कभी आंसू बहाने से,
कई ग़म पास आ
बैठे तेरे एक दूर जाने से।

पेट्रोल जैसी महंगी
हो रही है तुझको मेरी यादें..
तू मुझे फुरसत में याद करे
अब कैसे करू ये फरियादें..

तमाम लोगों का हाल जाना तमाम
लोगों से बात की, कभी फुर्सत ही
न मिल सकी खुद से मुलाकात की।।

मिल जाए उलझनों से
फुर्सत तो जरा सोचना,
क्या सिर्फ फुरसतों मे
याद करने तक का रिश्ता है हमसे।।

कहीं नजर ना लगे तुम्हें
आंखों से कैसे करूं जुदा..
तुम्हें फ़ुरसत में बनाकर
जैसे खुद, खो गया है खुदा..

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