विदाई समारोह पर कविताएं

नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने विदाई समारोह पर दिल को छूने वाली कविता (Farewell Poems in Hindi) शेयर की है। उम्मीद करते हैं आपको यह Poem on Farewell in Hindi पसंद आयेंगी।

विदाई का समय वो होता है जब हमारे आँखों में ख़ुशी और गम के आंसू होते हैं। ख़ुशी इस बात की होती है कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए सबको छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं और गम सभी दोस्तों, गुरुजनों और हमारे विद्यालय कॉलेज को छोड़ने का होता है।

Farewell Poems in Hindi

यह समय एक विद्यार्थी और टीचर के लिए बहुत ही गम भरा होता है। इस पोस्ट में हमने बेहतरीन बिदाई पर हिन्दी कविताएँ शेयर की है। आप इन हिंदी कविताओं (Poems in Hindi) को स्कूल और कॉलेज में आयोजित विदाई समारोह (Farewell Ceremony) में अपने Seniors का मनोबल बढ़ा सकते हैं।

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विदाई समारोह पर कविताएं – Farewell Poems in Hindi

विदाई-गान (विदाई समारोह कविता) – 1

आये संग बहार लिये, जा रहे उसे ले साथ कहाँ?
पूछ रहा यह चमन ‘तरुण’ बोलो मेरा गुलजार कहाँ?
बेलि लगायी शिक्षा की सींचे इसको श्रम जल से तुम,
पनपी हरियाली ले फूली खुशबू भी दे जाते तुम।
आया था उल्लास नया, चेतना नयी लहरायी जो,
गम जड़ता का भार दिये जा रही थी दिल बहलाती जो।
उगे ‘अरुण’ जो विभा ‘तरुण’ से ले प्रकाश फैलाने को,
दूर हुए जाते क्यों फैलाते तुम पुंज पहारों को।
दीप जलाये शिक्षक उर में आशा के, नवजीवन के,
सेवा निवृति के विरह झकोरे पवन चले उत्पीड़ण के।
गाऊँ क्या दिल उमग न पाता प्यारे जीना सुख पाना,
नेह-लता मुरझा नहीं जाये सिंचन सुधि लेते रहना।

-जनार्दन राय

बिदाई (Farewell Party ke liye Kavita) – 2

कृष्ण-मंदिर में प्यारे बंधु
पधारो निर्भयता के साथ।
तुम्हारे मस्तक पर हो सदा
कृष्ण का वह शुभचिंतक हाथ।।

तुम्हारी दृढ़ता से जग पड़े
देश का सोया हुआ समाज।
तुम्हारी भव्य मूर्ति से मिले
शक्ति वह विकट त्याग की आज।।

तुम्हारे दुख की घड़ियाँ बनें
दिलाने वाली हमें स्वराज्य।
हमारे हृदय बनें बलवान
तुम्हारी त्याग मूर्ति में आज।।

तुम्हारे देश-बंधु यदि कभी
डरें, कायर हो पीछे हटें,
बंधु! दो बहनों को वरदान
युद्ध में वे निर्भय मर मिटें।।

हजारों हृदय बिदा दे रहे,
उन्हें संदेशा दो बस एक।
कटें तीसों करोड़ ये शीश,
न तजना तुम स्वराज्य की टेक।।

-सुभद्राकुमारी चौहान

अपने छात्रों की विदाई पर (College Farewell Poem in Hindi) – 3

एक बच्चे की तरह प्यार से पाला है तुम्हें
अपने हाथों के सहारों से सँभाला है तुम्हें
बाप के दिल की तरह हमने जिगर फैलाकर
हमने मारा भी, मारा है मगर सहलाकर।

आज उस प्यार को किस तौर विदाई दे दूँ
भर के वरदान में सारी ही पढ़ाई दे दूँ
काश कुछ ऐसा हुनर मेरी जुबाँ में होता
स्वर्ग का भूमि से होता नहीं है समझौता।

हम मुसाफिर की तरह आके चले जाते हैं
फूल-सा खिलके बहारों में बिखर जाते हैं
गन्ध अपनी तुम्हें देते हैं बहुत ख़ुश होकर
और हम ख़ुश हैं ये ख़ुशबू को बीज-सा बोकर।

तुम इसे अपने पसीने से सींचना, बोना
और फिर देश के आँगन में सुर्ख़रू होना
ज्ञान की गन्ध पसीने में मुस्कराती है
यह खिज़ाओं के बग़ीचों में लहलहाती है।

तुम भी इस देश के आँगन में जगमगाओगे
हमको उम्मीद, सितारों से चमचमाओगे
रात को दीप, सुबह आफ़ताब बन जाओ
हर मुसीबत में चट्टानों की तरह तन जाओ।

ज़िन्दगी नींद से पहले का नाम है गोया
भिड़ना तूफ़ान से वीरों का काम है गोया
इम्तहाँ कुछ नहीं तूफ़ान का छोटा भाई
तोड़ दो इसकी नसें ले के एक अँगड़ाई।

-महेश उपाध्याय

विदाई समारोह पर कविता (Farewell Poem in Hindi for Friends) – 4

आपके साथ बिताया हर एक लम्हा है यादगार
जो भी पल गुज़ारे आपके साथ वो सब बीते शानदार
आपकी हर एक याद को ताउम्र संजोकर रखेंगे हम
याद जब भी आएगी आपकी तो आँखें हो जाएँगी नम।

अगर कभी अनजाने में हुई हो हमसे कोई गलती
तो कर देना हमको माफ़
बस दिल से भुला देना हर एक कड़वी बात
हम सब करेंगे आपको तहे दिल से याद।

क्यूंकि आप हो हमारे लिए बेहद ख़ास
बस यूँही बनाये रखियेगा आप अपनी मिठास
हमको हमेशा रखना अपने दिल के पास।

अब बस यही है शुभकामना हमारी
आपकी खुशियाँ बदस्तूर रहे हमेशा ज़ारी
कोई भी गम आपको छूने ना पाए
ज़िन्दगी आपकी फूलों की तरह महकती चली जाए।

खुशियाँ आपके कदमों को छूती रहे बार-बार
आपकी ज़िन्दगी में आती रहे खुशियों की बौछार
भले ही यहाँ से जा रहे हैं आप लेकिन
अपने दिल से हमें कभी ना भुलाना।

हो सके तो कभी हमसे मिलने भी चले आना
जब भी आये याद हमारी तो फ़ोन पर हमारा नंबर घुमाना
और इसी तरह हमेशा आप खिलखिलाना।

विदाई (Vidai Samaroh Par Kavita) – 5

तुम सोचते हो अपने
उदित होते हुए दिन को
तैरते हो कठिनाई से
घण्टों पानी में

रात
ध्यान रखती है तुम्हारा
रात-भर
नींद में चलती हुई साँसों में
तुम ध्यान नहीं देते
कि तुम विदा हो रहे हो।।

-रोज़ा आउसलेण्डर

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मत करो मन को उदास (Poetry for Farewell in Hindi) – 6

मत करो मन को उदास
मेरी अम्मा फिर से मिलूँगी।
दादस अपनी को मैं दादी कहूँगी
मेरी अम्मा दादी न आवैगी याद,
मेरी अम्मा फिर से मिलूँगी।
सासू को अपनी माता कहूँगी
मेरी अम्मा तुम न आओगी याद,
मेरी अम्मा फिर से मिलूँगी।
ससुरे को अपने पिताजी कहूँगी
पिता नहीं आएँगे याद,
मेरी अम्मा फिर से मिलूँगी।
नणदिया को अपनी बहना कहूँगी
मेरि अम्मा बहना न आएगी याद,
मेरी अम्मा फिर से मिलूँगी।

जब बेटी घर से विदा हो जाएगी (Poem of Farewell in Hindi) – 7

ये घर दरो दीवार सब तरसेंगे
जब बर्तन खन खन खनकेंगे
सारे पकवान फ़ीके पड़ जायेंगे
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

बात बात पर उसका नाम
मेरी जुबां पे कभी तेरी जुबां पे
सांसें बहन की अटकी रह जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

वो जो दिन भर लडता था भैय्या
पापा जिसको धमकाते थे
ताकेगा दीवारों को चुपचाप
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

फ़ूलों की रंगत तब कैसी होगी
खुश्बू भी फ़िर न सुहायेगी
चिड़ियों की चहक भी रुलायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

बागीचे की गिलहरी क्या भूखी होगी
गमलों में डालेगा अब कौन पानी
क्यारी अब सूखी हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

दादा की चाय की प्याली
भरी भी लगेगी अब खाली
दादी गुम सुम हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

तेरी सहेलियों की वो सारी बातें
कमरे से आती हंसने की आवाज़ें
मुंडेर की बुल बुल चुप हो जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

घर से दफ़्तर अब दूर होगा
मेरा सेहन अब सूना होगा
शायद ज़हन भी अब गीला होगा
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

रख कर सिर पर बेटी के हाथ
बस बाप दुआ देता रह जायेगा
माँ बिलखती हुई रह जायेगी
जब बेटी घर से विदा हो जायेगी।

-शमशाद इलाही अंसारी

विदा कर रहे हैं (Poetry on Farewell in Hindi) – 8

तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना
अगर भूल जाओ तो चिन्ता नहीं है
मगर याद आकर हमें मत रुलाना।

तुम्हारे लिए तो तड़पना पड़ेगा
बहुत पास आकर बने हो पराए
तुम्हारे लिए क्यों न आएँगी आहें
दबेगा नहीं दर्द दिल का दबाए।

तुम्हें आँख से हम मिटाने चले हैं
कहीं आँसुओं में नज़र आ न जाना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

बहुत हो चुकी रोक लेने की कोशिश
मनाए न माने मगर जानेवाले
अभी तो मिले थे अभी जा रहे हैं
अभी जा रहे हैं अभी आनेवाले।

भुलाने की तुमने क़सम ली अगर ले
शपथ है कभी भी सपन में न आना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

अगर जानते ये कि मिलना बुरा है
किसी बेरहम से मिला ही न होता
विदाई की रहती न कोई कहानी
जुदाई से कोई गिला ही न होता।

अगर मन पतंगा नहीं मानता है
तुम्हें चाहिए क्या दिए को बुझाना?
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

चले जा रहे हो तुम्हारे मिलन के
ये सारे सितारें ग़वाही रहेंगे
ग़वाही रहेंगी ये जूही की डारें
नदी के किनारे ग़वाही रहेंगे।

तुम्हारे सहारे कभी हम भी कुछ थे
तुम्हीं से अलग कर रहा है ज़माना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

किसी के गरम आँसुओं की कलम से
लिखी जा रही है तुम्हारी विदाई
किसी की नरम कल्पना की शरम से
लजाई हुई है तुम्हारी जुदाई।

जहाँ जो मिले वे विदा हो गए हैं
कि धंधा है कोई दिलों का लगाना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

उमड़ आँख में आँसुओं की घटाओं
अरे! उनको इसकी ख़बर भी नहीं है
हमारी नज़र आज उनकी तरफ़ है
मगर इस तरफ़ वो नज़र ही नहीं है।

फ़िक़र ही नहीं है उन्हें अब किसी की
अभी सोचते हैं सवारी मँगाना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

मिले थे तो सोचा बिछुड़ना न होगा
चले हैं सफ़र में तो मिलना न होगा
मगर राह से राह मिलने न पाई
डगर से लिखी थी तुम्हारी विदाई।

कि मिलना बिछुड़ना यही ज़िन्दगी है
मनाया सभी ने मगर मन न माना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

हमारे लिए फूल शोले बने हैं
तुम्हारे लिए हो मुबारक़ बहारें
हमारी हँसी भी लिए जा लिए जा
मुबारक़ तुम्हें आसमाँ के सितारें।

कभी डूबती प्यास बढ़ने लगे तो
ज़रा ओस बनकर वहीं झिलमिलाना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

अगर हो तुम्हें भूल जाने की आदत
हमें भूल जाना नहीं भूल होगी
हमें भूलकर तुम ख़ुशी से रहोगे
हमें भी इसी से ख़ुशी कुछ मिलेगी।

भला हम ग़रीबों की हस्ती ही क्या है?
न हक़ है हमें एक नाता निभाना?
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

विदाई तुम्हारी रुलाएगी हमको
बुलाए बिना याद आएगी हमको
कि मौसम तुम्हें याद देगा हमारी
कभी तो कहीं याद आएगी तुमको।

कभी याद आने लगे जो हमारी
हमें भूलने के लिए मुस्कुराना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

कहाँ कौन पंछी करेगा बसेरा
कहाँ घोंसला कल बनाएगा कोई
पड़े गीत सौ-सौ मिलन के रहेंगे
विदाई की कविता सुनाएगा कोई।

नहीं कम सकेगा कभी आँसुओं का
किसी याद के ही लिए रिमझिमाना
बहुत पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

अगर जा रहे हो तो जाओ मगर हम
तेरी याद दिल में बसाकर रहेंगे
निगाहों में आँसू हँसी चेहरे पर
छिपा दर्द ये मुस्कुराकर कहेंगे।

हमारी यही कामना अन्त में हो
जहाँ भी रहो तुम वहीं लहलहाना
तुम्हें पास आकर विदा कर रहे हैं
कहीं दूर जाकर हमें मत भुलाना।

-शिवदेव शर्मा ‘पथिक’

करियर या बिदाई (Farewell Poem For School Students In Hindi) – 9

कैरियर की
चिंता में लगी लड़कियां
मां-बाप की आशाओं का
वे पहाड़ हो जाती हैं
जिसका टूटना कई बार
मुश्किल हो आता है
ये वे स्थितियां हैं
जहां पर संभवनाएं भी
विकल्प तलाशती दिखती हैं
लड़कियां अपने कैरियर की
चिंता में लगी हैं
और
उनके माता-पिता
उनकी विदाई की चिंता में।
कब गूंजेगी शहनाई
कब होगी
बिटिया की विदाई।

-लालित्य ललित

शब्द के हार से दी बिदाई तुम्हें (Farewell Poem in Hindi) – 10

देख लो हमने दे दी रिहाई तुम्हें
अब देंगे कभी हम दिखाई तुम्हें।।

हो गये अज़नबी इक-दूजे से हम
प्रीत मेरी नहीं मीत भाई तुम्हे।।

तोड़ देना अजी दिल लगाकर कहीं
ये अदा मीत किसने सिखाई तुम्हें।।

है न कोई गिला और शिकवा कहीं
अश्क़ देंगे नहीं अब दिखाई तुम्हें।।

दूँ तड़पकर सदा जो कभी मीत मैं
ख़्वाब में भी नहीं दे सुनाई तुम्हें।।

यश फ़लक तक चले ख़ूब गुणगान हो
हर जगह में मिले रोशनाई तुम्हें।।

जा रही छोड़कर ‘हीर’ ख़त आख़िरी
शब्द के हार से दी बिदाई तुम्हें।।

-हरकीरत हीर

विदाई का गीत (Poem for Farewell in Hindi) – 11

यह जाने का छिन आया
पर कोई उदास गीत
अभी गाना ना।
चाहना जो चाहना

पर उलाहना मन में ओ मीत!
कभी लाना ना!
वह दूर, दूर सुनो, कहीं लहर
लाती है और भी दूर, दूर, दूरतर का स्वर,

उसमें हाँ, मोह नहीं,
पर कहीं विछोह नहीं,
वह गुरुतर सच युगातीत
रे भुलाना ना!

नहीं भोर-संझा उमगते-निमगते
सूरज, चाँद, तारे, नहीं वहाँ
उझकते-झिझकते डगमग किनारे;
वहाँ एक अन्तःस्थ आलोक

अविराम रहता पुकारे;
यही ज्योति-कवच है हमारा निजी सच,
सार जो हम ने पाया गढ़ा, चमकाया, लुटाया:
उस की सुप्रीत छाया से बाहर, ओ मीत,
अब जाना ना!

कोई उदास गीत, ओ मीत!
अभी गाना ना!

-अज्ञेय

दफ़्तर से विदाई (Vidai Kavita in Hindi) – 12

इतनी आसानी से
नहीं हो जाता कोई विदा

वह थोड़ा-थोड़ा
जरूर रह जाता है
तुम्हारे साथ

अदृश्य और निराकार

और तुम भी
थोड़ा ही सही

चले जाते हो
दूर तलक साथ-साथ उसके
जो हुआ है
अभी-अभी तुमसे विदा…

-योगेंद्र कृष्णा

Vidai ki Kavita

एक बन गईं दुसरे बन (विदाई गीत) (Vidai ki Kavita in Hindi) – 13

एक बन गईं दुसरे बन गईं तीसरे बबिया बन
बेटी झलरी उलटी जब चित्वें तो मैया के केयू नाही
लाल घोड़ चितकबर वहिसे वै पिया बोलें
धना हमरे पतुक आंसू पोछो मैया सुधि भूली जाव
केना मोरी भुखिया अगेंहैं तो केना पियसिया
केना जगहियें आल्ह्ड निन्दियन अपने मैयरिया बिन
मईया मोरी भुखिया अगेंहैं बहिनी पियसिया
हमही जगेईबै आल्ह्ड निन्दिया तो मईया सुधि भूली जाओ
मईया तोहरी गरियहै बहिनी टुकरीहै
आपे प्रभु गरजी तड़प बोलिहै छतिया बिहरी जेईहैं
मईया मोरी बहुअरि गोहरैहैं बहिन भउजी
कहिहैं हमही लागैबें हिरदैया मईया सुधि भूली जाओ।।

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