मेरा विद्यालय पर निबंध

Essay on My School in Hindi: विद्यालय का एक ही मतलब हैं जो हम समझते हैं वो हैं गुरुकुल। विद्यालय एक ऐसा स्थान हैं जहा हमे रोजाना कुछ नया सीखने को मिलता हैं। विद्यालय में जाते ही पहले अपने गुरूजी की धोक देना एक विद्यार्थी के संस्कार को दीखता हैं। गुरुओ से आशीर्वाद लेने के बाद हम सुबह की प्रार्थना करते हैं।

Essay on My School in Hindi
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हम यहां पर अलग-अलग शब्द सीमा में मेरा विद्यालय पर निबंध (Essay on My School in Hindi) शेयर कर रहे हैं। यह निबन्ध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होंगे।

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मेरा विद्यालय पर निबंध | Essay on My School in Hindi

मेरा विद्यालय पर निबंध (250 शब्द) 

विद्यालय का नाम सुनते ही हमने अपने पुराने दोस्ती की याद आती हैं। विद्यालय के नाम से हमे उन सभी शरारतो की याद आती हैं जो हम स्कूल में अंतिम बेंच पर बेठ कर करते थे। मेरा विद्यालय 3 मंजिला हैं जो की गाँव से बाहर करीब 1 किलोमीटर दूर हैं।

मेरे विद्यालय के शिक्षक काफी दयालु हैं और इनके साथ स्कूल में पढने वाले विद्यार्थी भी काई संस्कारी हैं। हमे रोज सुबह स्कूल की वर्दी पहन कर स्कूल जाना पसंद हैं। स्कूल में हमे रोज नई नई चीजों के बारे में सीखाया जाता हैं। 

कहते हैं जो चीज़े हमे घर और विद्यालय में सिखाई जाती हैं वो हमें कही और सीखने को नहीं मिल सकती। एक विद्यार्थी के जीवन में विद्यालय का काफी महत्त्व होता हैं। विद्यालय में पढाई के साथ वो संस्कार भी सीखाये जाते हैं जो हमारे जीवन और हमारे भविष्य के लिए एक वरदान साबित हो सकते हैं।

मेरा विद्यालय सख्त कानून और अनुशाशन के लिए काफी मशहूर हैं। विद्यालय के वे सभी नियम और कायदे हमे भविष्य में एक अच्छा विद्यार्थी बनने में मदद करते हैं। 

मेरा विद्यालय हमारे घर से करीब 1 किलोमीटर दूर हैं जो गाँव से बाहर स्तिथ हैं। हमारे विद्यालय तीन मंजिला हैं और यह ऑरेंज कलर से रंगा हुआ काफी सुन्दर दिखाई देता हैं। मेरे विद्यालय में कक्षा 1 से कक्षा 10 तक की कक्षा की की पढाई होती हैं। मेरे विद्यालय में लडको के साथ लडकिय भी पढ़ती हैं और हमारे विद्यालय में शिक्षक हमे काफी अच्छे तरीके से पढाई करवाते हैं।

मेरा विद्यालय पर निबंध (800 शब्द) 

प्रस्तावना

विद्यालय का नाम सुनते ही हमे वो सभी पुराने पल याद आते हैं जिन पो को हम स्कूल के समय में पिछली वाली बेंच पर बैठ कर बिताते थे। ऐसा कहा जाता हैं कि जो हमें विद्यालय में सीखाया जाता हैं वो कही और हमे सीखने को नहीं मिल सकता हैं। विद्यालय में हमे वो अनुशासन सीखाया जाता हैं जो हमारे भविष्य के लिए एक बेहतर नीव साबित हो सकते हैं। 

विद्यालय में दिन की शुरुआत

मेरे विद्यालय की शुरुआत सुबह के समय 6 बजे होती हैं। स्कूल का समय सुबह 7।30 बजे का होता हैं। हम सुबह जल्दी उठ कर माता पिता और बड़ो का आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद हमारे रोजाना के कर्म करने के बाद हम स्नान कर स्कूल की ड्रेस पहन कर तेयार होते हैं। 

सुबह 7.20 पर हम विद्यालय जाते हैं और वहा जाते ही पहले हमारे गुरुजानो को प्रणाम करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते है। 7.25 बजे सुबह की प्रार्थना शुरू होती हैं जिसके बाद हम सब अपनी – अपनी कक्षाओ में जाते हैं। पुरे दिन की पढाई के बाद दिन के 12 बजे हमारे स्कूल की छुट्टी हो जाती हैं। शीत ऋतू में यह समय अलग होता हैं। 

विद्यालय की आवश्यकता

विद्यालय हमारे जीवन की पहली सीडी होती हैं। यह वही स्थान होता हैं जहा हम हमारे जीवन की पहली सीख अनुशासन सीखते हैं। विद्यालय में हमे बात करने के तौर तरीके सीखाये जाते हैं इसके साथ हमे अपने जीवन कैसी भी परिस्तिथि आये कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए, जैसी बातो के बारे में सीखाया जाता हैं। 

समाज को एक आदर्श समाज बनाने में विद्यालय का काफी महत्त्व हैं। विद्यालय हमारे जीवन का पहला आधार हैं जहा पर हम अच्छे भले के बारे में सीखते हैं। विद्यालय परिवार को जोड़े रखने की कड़ी हैं। 

मेरा विद्यालय

मेरा विद्यालय हमारे गाँव का एकमात्र विद्यालय हैं। मेरे विद्यालय में करीब 900 विद्यार्थी पढ़ते हैं। मेरे विद्यालय में कक्षा 1 से 10 तक पढाई होती हैं। हमारे विद्यालय में लडको के साथ लडकियां साथ में पढ़ती हैं। हमारे विद्यालय में शिक्षक की संख्या 13 हैं उनमे से 3 महिलाये शिक्षिकाए हैं। हमारा विद्यालय 3 मंजिला हैं जो दूर से ऑरेंज कलर से रंग हुआ काफी सुंदर दिखाई देता है। 

मेरे विद्यालय में करीब 30 रूम हैं जिसमे 2 स्टाफ रूम और एक प्रधानाध्यापक के लिए रूम हैं। मेरे विद्यालय के पास एक बड़ा खेल का मैदान हैं जहा हम छुट्टी के समय कई तरह के खेल खेलते हैं जैसे क्रिकेट, कबड्डी, खो – खो इतियादी। 

मेरे विद्यालय में और भी की सुविधाए हैं। मेरे विद्यालय में स्वच्छ पियाऊ भी हैं जहा से सभी स्कूल के बच्चे पानी पीते हैं। स्कूल में एक रसोई भी है जहा स्कूल के बच्चो के लिए खाना बनाया जाता हैं। 

मेरे विद्यालय के पास बना हैं एक हॉस्टल

मेरे विद्यालय के पास एक बड़ा होस्टल भी बना हुआ हैं। जो लड़के अपने घर से दूर रह कर पढाई करते हैं उनके लिए यह काफी अच्छी सुविधा हैं। मेरे विद्यालय के पास ही बना यह 2 मंजिला हॉस्टल उन लडको के लिए हैं जो यहाँ आकर पढ़ते हैं। इस हॉस्टल में खाने की सुविधा भी अच्छी हैं और इसके साथ ही मेरे विद्यालय के बने इस हॉस्टल में रहने की भी उत्तम सुविधा हैं। यहा रहने वाले बच्चे 2 – 2 के ग्रुप में एक ही रूम में रहते हैं और साथ में ही पढाई करते हैं। 

मेरे विद्यालय की कंप्यूटर लेब

मेरे विद्यालय में एक सुव्यव्स्तिथ लेब भी बनी हुई हैं। विद्यालय में बनी इस लेब में 4 – 6 कंप्यूटर सेट है। इस कंप्यूटर लेब को चलाने के लिए एक कंप्यूटर शिक्षक की भी नियुक्ति विद्यालय प्रशासन दुवारा की गई हैं। हमारे विद्यालय में बनी इस लेब में एक सप्ताह में एक बार एक विद्यार्थी को प्रशिक्षण दिया जाता हैं। आज के समय में कंप्यूटर का काफी महत्त्व हैं हमारे जीवन में, उसी कंप्यूटर की शुरुआत हमारे विद्यालय के समय से ही होती हैं।

विद्यालय में बने पुस्तकालय का महत्त्व

मेरे विद्यालय में एक पुस्तकालय भी बना हुआ हैं। विद्यालय में बने इस पुस्तकालय में रोज अखबार आते हैं। विद्यालय में पढने वाले विद्यार्थियों को इस पुस्तकालय में जाकर अखबार और मैगज़ीन पहने की अनुमति होती हैं। हम जिस सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं वहां हमें पुस्तके भी मुफ्त में मिलती हैं वो पुस्तके भी हमें इसी पुस्तकालय से मिलती हैं।

विद्यालय में बने इस पुस्तकालय में कई ज्ञानवर्धक पुस्तके भी उपलब्ध होती हैं जिन्हें हम पढ़ सकते हैं या उन्हें घर पर ले जा सकते हैं जिसे कुछ दिन बाद वापस देनी होती हैं।

निष्कर्ष

विद्यालय के हमारे जीवन के काफी महत्त्व होता हैं। विद्यालय में हमे वो सीखाया जाता हैं जो हम समाज में शायद नही सीख सकते। हमारे जीवन में अनुशासन सीखने के लिए विद्यालय वो पहली कड़ी होती हैं जहा और हमे अनुशासन के साथ शिष्टा के बारे में सीखाया जाता हैं। जीवन को बेहतर बनाने के लिए विद्यालय में जाना जरुरी हैं और पढना भी जरुरी हैं।

अंतिम शब्द 

हमने यहां पर “मेरा विद्यालय पर निबंध (Essay on my school in Hindi)” शेयर किया है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह निबंध पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह निबन्ध कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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