महाशिवरात्रि पर निबंध

Essay on Mahashivratri in Hindi : भारत में हिंदू धर्म विभिन्न प्रकार के देवी देवता और उनके पूजा अर्चना के नाम से जाना जाता है। जिस दिन देवताओं के भी देवता महादेव की पूजा करते है उस दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। आज हम इस आर्टिकल में आपके साथ महाशिवरात्रि पर निबंध शेयर करने जा रहे है। यह निबंध परीक्षा में सभी कक्षाओं के लिए मददगार साबित होगा।

Essay on Mahashivratri in Hindi
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महाशिवरात्रि पर निबंध | Essay on Mahashivratri in Hindi

महाशिवरात्रि पर निबंध (250 शब्द)

महाशिवरात्रि फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। हिंदू धर्म वालों के लिए यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन सभी लोग महादेव की भक्ति में लीन हो जाते है और उन्हें विभिन्न प्रकार के भेंट चढ़ा कर उनकी पूजा करते है। इस त्यौहार को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। 

कुछ जगहों पर यह माना जाता है कि आज ही के दिन भगवान शिव को 6 महीने के तपस्या के बाद कैलाश पर्वत से उतरकर लोगों के बीच श्मशान में निवास करते हैं, जिस वजह से लोग इस त्यौहार को भगवान शिव की आराध्या करने मैं बिताते हैं। हिंदू धर्म में सभी भगवान के बीच शिव को एक अनोखा स्थान दिया गया है।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि आज ही कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव तांडव करते हुए पहली बार अपने तीसरे नेत्र को खोला था, जिससे ब्रह्मांड का संपूर्ण विनाश हुआ था और दोबारा जीवन का प्रारंभ किया गया था। भगवान शिव के इस अवतार को रुद्र अवतार माना जाता है। 

विभिन्न जगहों पर विभिन्न प्रकार की कहानी मानी जाती है। महाशिवरात्रि के दिन सभी लोग भभूत बेलपत्र और जल चढ़ाकर शिव की पूजा करते है साथ ही दूध से उनका अभिषेक किया जाता है। भगवान शिव को सभी देवताओं का गुरु भी माना गया है। भगवान शिव को महादेव और भोले बाबा जैसे शब्दों से भी संबोधित किया गया है।

महाशिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति दया भाव दिखाते हुए शिव जी की पूजा करते है। उसे मोक्ष प्राप्त होता है। वैसे भी भोलेनाथ शिव जी को जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में भी माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाए जाने वाले इस त्यौहार को भारत में मुख्य त्योहार के रूप में देखा गया है। यह एक काफी प्रचलित त्यौहार है, जिस दिन सभी हिंदू धर्म के लोग भगवान शिव की आराधना में लीन रहते है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। इस वजह से सभी लोग इस त्यौहार को काफी हर्ष उल्लास से मनाते हैं। 

महाशिवरात्रि एक ऐसा पर्व है जिसे हर साल विश्व के लगभग सभी हिंदू द्वारा बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। आज के दिन लोग अपने भगवान शिव के मंदिर में जाकर बेलपत्र धतूरा और भभूत जैसी भेंट चढ़ा कर उनसे अपनी मनोकामना मांगते है। हिंदू धर्म के मुताबिक भगवान से काफी भोले है और उनसे जिस भी प्रकार की मांग मांगी जाए वह प्रसन्नता से उसे पूरी कर देते हैं। 

कैसे पड़ा इस दिन का नाम महाशिवरात्रि

आपको बता दें कि कृष्ण पक्ष के जिस नक्षत्र की बात महाशिवरात्रि में की गई है वह हर महीने एक बार आकाश में दिखता है जिस वजह से हम यह कह सकते हैं कि हर महीने एक बार शिवरात्रि आती है। मगर फागुन माह के एक खास दिन वह नक्षत्र खास प्रकार कब बर्ताव करता है जिसे याद रखने के लिए इस त्यौहार को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

लोगों का मानना है कि उस नक्षत्र के खास बर्ताव करने का अर्थ है कि यही वह खास दिन है जिस दिन हमारे देवता धरती पर आए थे। यह एक पुरानी मान्यता है जिसके आधार पर लोग यह मानते है कि महाशिवरात्रि वह दिन है जिस दिन भगवान भोलेनाथ अपनी तपस्या से उठकर कैलाश त्याग कर जमीन पर श्मशान में निवास करते हैं। 

अर्थात हम कह सकते है कि पुराणिक मान्यता और शिव पुराण में मिले नक्षत्र के सहयोग की वजह से इस दिन को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। 

क्यों मनाते है महाशिवरात्रि

केवल उस नक्षत्र के सहयोग की वजह से महाशिवरात्रि नहीं मनाया जाता। लोगों का मानना है कि भगवान शिव कैलाश में निवास करते है और प्रत्येक साल 6 महीने तक कैलाश में तपस्या करने के बाद वह फागुन माह के कृष्ण पक्ष को कैलाश से उतरकर श्मशान में निवास करते है। जिस दिन को याद रखने के लिए महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। 

भारत के विभिन्न जगहों पर ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन को भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था इस वजह से इस दिन को विशेष रूप से महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस देना भगवान शिव- मां पार्वती के नाटकीय विवाह का प्रदर्शन विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। साथ ही सभी भक्तगण बेलपत्र धतूरा और भभूत जैसे विभिन्न प्रकार के भी भगवान शिव को चाहा कर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। 

महाशिवरात्रि मनाने के पीछे वैज्ञानिक तर्क

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि शिव पुराण में जिस महा शिवरात्रि त्यौहार के बारे में जिक्र किया गया है। उसका वैज्ञानिक तर्क भी मौजूद है। जिस जमाने में शिवपुराण को लिखा गया था, वह आज से कई वर्ष पहले है। आप इस बात का अंदाजा लगा सकते है कि उस जमाने में किस तरह बड़े ऋषि-मुनियों ने सितारों के भ्रमण का सटीक अंदाजा लगाकर एक खास सितारे के खास व्यवहार को देखते हुए इस दिन को चुना। 

इसके अलावा यह बात भी गौर करने वाली है कि हर साल ठंडी का महीना पार होने के बाद ही महाशिवरात्रि मनाया जाता है। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव 6 महीने तक कैलाश में निवास करते हैं और उनके साथ सभी भूत प्रेत की तुम कीड़े मकोड़े अपने बिल में छुपे हुए रहते हैं। इस बात का तात्पर्य है कि 6 महीने तक भारत का मौसम काफी ठंडा रहता है जिस वजह से विभिन्न प्रकार के कीड़े मकोड़े हमें देखने को नहीं मिलते मगर जब ठंड खत्म होती है। 

तो शिवपुराण में इस बात का वर्णन किया गया है कि भगवान शिव कैलाश से श्मशान में निवास करने आते है अर्थात यह वह दिन है जब ठंडा खत्म होने वाला होता है और सभी कीड़े मकोड़े अपने बिल से बाहर आते है, जिसे शिव पुराण में भूत प्रेत के नाम से दर्शाया गया है। ताकि लोग अपने जीवन में सतर्क हो जाएं और इस तरह इस सतर्कता को सभी के बीच फैलाने के लिए इस त्यौहार को विशेष रुप से महाशिवरात्रि के नाम से मनाया जाता है। 

कैसे और कहां मनाते है महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि का पर्व ना केवल भारत में बल्कि विभिन्न एशियाई देशों में मनाया जाता है। भगवान शिव की आराधना करने वाले लोग एशिया के विभिन्न देशों में मौजूद हैं जिनमें कंबोडिया, वियतनाम, मलेशिया जैसे देश शामिल है। 

अलावा हिंदू धर्म में एक ऐसा धर्म है जिसका पालन करने वाले लोग आपको लगभग विश्व के सभी देशों में मिल जाएंगे। इस वजह से इस त्यौहार को पश्चिमी और यूरोपीय देशों में भी मनाया जाता है। 

इस त्यौहार के दिन भारत के विभिन्न जगहों पर मां पार्वती और भगवान शिव का नाटक यह विवाह दिखाया जाता है और बाकी बहुत सारे जगहों पर भगवान शिव की पूजा करने के लिए उनके भक्तजनों उनके मंदिर में जाकर उन्हें भभूत और बेलपत्र चढ़ाते हैं। 

इस त्यौहार का महत्व समझते हुए हमें महाशिवरात्रि हर साल हर्षोल्लास के साथ पूरे नियम का पालन करते हुए उन सभी लोगों को सम्मान देना चाहिए जिन्होंने महाशिवरात्रि का पर्व मनाने के लिए खास अध्ययन किया। 

निष्कर्ष

शिव शंकर भगवान को जल्दी प्रसन्न होने वाले भोलेनाथ के भी नाम से जाना जाता है। शिवरात्रि के दीन जो व्यक्ति भोले मन से उनकी पूजा करता है, तो वो जल्दी पसंद होकर सभी पर अपनी कृपादृष्टि करते है।

अंतिम शब्द

हमने यहां पर  महाशिवरात्रि पर निबंध (Essay on Mahashivratri in Hindi) शेयर किया है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह निबंध पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह निबन्ध कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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