कठपुतली पर निबंध

Essay on Kathputli in Hindi:  हम यहां पर कठपुतली पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में कठपुतली के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है। हम आपको कठपुतली कहां का प्रमुख खेल है, किस प्रकार बनाई जाती है, इनकी क्या क्या विशेषता है, कठपुतली के बारे में इस निबंध में आपको बताने जा रहे हैं।

Essay on Kathputli in Hindi

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कठपुतली पर निबंध | Essay on Kathputli in Hindi

कठपुतली पर निबंध ( 250 शब्द )

हमारे देश में कठपुतली का खेल बहुत प्रसिद्ध है। इस खेल के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया जाता है। कठपुतली के खेल में राजाओं की, जानवरों की और भी अन्य प्रकार की मनोरंजक, शिक्षाप्रद, कहानियां सुनाई जाती है। कठपुतली से लोगों का मनोरंजन होता है। सबसे अधिक कठपुतली के खेल से बच्चे प्रसन्न होते हैं। कठपुतली को बारीक धागों से बांधकर कठपुतली का खेल दिखाने वाले लोग गीत गाकर उनकी कहानियों के बारे में बताते है।

यह खेल दिखाने के लिए गांव और शहरों में बड़े बड़े आयोजन भी होते हैं। बड़ी भारी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित होती है क्योंकि यह हमारा सबसे पुराना खेल है और लोगों को बहुत पसंद आता है। सबसे ज्यादा प्रसन्न में इस खेल को देखकर बच्चे होते हैं।

यह ज्यादा लोकप्रिय खेल राजस्थान का है या फिर यह कह सकते हैं कि कठपुतली के खेल का जन्म राजस्थान में ही हुआ है। यहां पर कठपुतली का खेल दिखाने वाले लोग ज्यादातर दहेज प्रथा से जुड़े हुए, कन्या भूण हत्या लोगों को जागरूक करने के लिए कठपुतली के खेलों का आयोजन होता है। अनेक शिक्षाप्रद कहानियां सुनाई जाती है ताकि लोग उनके महत्व को समझ सके।।

कठपुतली के खेल को राजस्थान में भाट जाति के लोगों के द्वारा बनाया जाता है। यह लोग कठपुतलियों को इस प्रकार से बनाते हैं की दिखने में यह बहुत सुंदर लगती हैं। कठपुतलियां हमेशा कपड़े की बनी हुई होती है, और इनके हाथ पैर इतने पतले तार से बांध दिए जाते हैं, तो इनको खेल दिखाने में आसानी होती है। कठपुतली का खेल बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, नशा मुक्ति अभियान, के लिए भी किया जाता है। राजनीतिक क्षेत्र में प्रचार प्रसार के लिए अक्सर कठपुतलियों के खेल को ही शामिल किया जाता है।

कठपुतली पर निबंध ( 1100 शब्द )

प्रस्तावना

कठपुतली का खेल हमारे देश के राजस्थान राज्य का लोकप्रिय खेल है। यह पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध है, क्योंकि इस खेल के माध्यम से हमें लोगों को जागरूक करने में बहुत मदद मिलती है।  इस खेल को दिखाने वाले सभी तरह की कहानियां, कठपुतलियों के माध्यम से लोगों को दिखाते हैं और उसका प्रचार करते हैं। कठपुतलियों के खेल से लोग ज्यादा से ज्यादा जागरूक हो सके।  कठपुतलियां का खेल देखने के लिए बड़ी भारी संख्या में भी लोग आसानी से एकत्रित हो जाते हैं।

क्या होती है कठपुतली

यह कपड़ों के द्वारा बनाई गई एक गुड़िया की आकृति होती है। कपड़े के माध्यम से राजा, रानी, हाथी,घोड़े, गुड़िया आदि कई तरह की आकृतियां बनाई जाती है। इनको बनाकर भाट जाति के लोग कठपुतलियों का खेल दिखाते हैं। कपड़े की बनाई गई कठपुतलियों के धागे से इनके हाथ और पैर इस तरह से बांधे जाते हैं, कि जब यह कठपुतली का खेल दिखाते हैं तो इनको अच्छे से समझाने में इन धागों के माध्यम से मदद मिल जाती है। कठपुतली का खेल गीत गाकर किसी भी राजारानी, लैला मजनू, इन सब की कहानियों पर दिखाया जाता है।

कठपुतली का जन्म

कठपुतली का जन्म राजस्थान में हुआ, क्योंकि यह खेल सबसे अधिक प्रचलन में राजस्थान में ही हुआ था। इसके बाद यह हमारे देश में विदेशों में बहुत अधिक दिखाया जाने लग गया। आज कठपुतलियों के माध्यम से ये लोग गांव-गांव जाकर हमारे सरकार की लागू बहुत योजनाओं का प्रचार इन के माध्यम से ही करते हैं। सबसे अधिक दहेज प्रथा बालिका शिक्षा को बढ़ावा के माध्यम से सबसे ज्यादा लोगों को जागरूक करते हैं। राजस्थान में यह कठपुतली का खेल भाट जाति के लोगों के द्वारा बनाया हुआ है। आज विश्व में यह खेल अपनी एक अलग पहचान लिये हुए है।

विश्व कठपुतली दिवस के बारे में

चौथी शताब्दी में महाकवि पाणिनि के प्रमुख ग्रंथ अष्टाध्याई के नटसूत्र में पुतला नाटक के बारे में बताया गया है।  लोगों के तो यह भी मान्यता है कि शिव जी ने जो काठ की मूर्ति के अंदर प्रवेश करके पार्वती जी माता का मन बहलाया था, तभी से यह कला की शुरुआत हो गई थी। प्रसिद्ध कहानी विक्रमादित्य की ‘ सिंहासन बत्तीसी ‘ में भी 32 पुतलियों के बारे में लेख मिलता है।

सबसे पहले फ्रांस में 21 मार्च 2003 को कठपुतली दिवस मनाने की पहल को शुरू किया गया था उसके बाद अन्य देशों ने भी इसकी पहल की आज संपूर्ण विश्व में 21 मार्च के दिन विश्व कठपुतली दिवस मनाया जाता है। कठपुतलियों का खेल को और अधिक बढ़ावा देने के लिए लोगों को इसके महत्व को समझाने के लिए ही कठपुतली दिवस मनाया जाता है।

कठपुतली के खेल की अलग पहचान देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी

कठपुतली के खेल को भाट जाति के लोग गांव गांव शहर शहर में घूम कर विभिन्न प्रकार की कहानियों के माध्यम से दिखा कर अपना जीवन का गुजारा करते हैं। इस कला को आप पूरे भारत में भी देख सकते हैं।  प्राचीन समय में जब हमारे देश में अंग्रेजों का शासन काल था। उस समय अंग्रेजों ने इस कला का प्रचार विदेशों में भी किया उनके द्वारा प्रसारित इस कला का प्रभाव विदेशी लोगों पर इस प्रकार पड़ा कि आज यह कला जापान, चीन,रूस, इंग्लैंड, अमेरिका, जावा,श्रीलंका, कनाडा, आदि सभी देशों में बहुत प्रसिद्ध हो गई है। इस कला के माध्यम से लोगों को नकारात्मक, सकारात्मक सभी प्रकार के संदेशों को पहुंचाने का काम भी किया जाता है। आज देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी कठपुतलियों के खेल की एक अलग पहचान सी बन गई है।

कठपुतलियों के खेल के उद्देश्य

कठपुतलियों के खेल के द्वारा भारत के सभी गांव में शहरों में अधिक से अधिक संख्या में लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जाता है। इसके अलावा मनोरंजन के लिए भी कठपुतली के खेल का आयोजन किया जाता है।कठपुतली के खेल के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, दहेज प्रथा, नशा मुक्ति, राजा रानी की कहानियां, लैला मजनू, हीर रांझा और भी बहुत सी सरकारी योजनाओं की जानकारी इन सभी कहानियों को लोगों को दिखाया जाता है।  लोगों को समझाने का कठपुतलियों के माध्यम से बहुत अच्छा और सरल तरीका है। कठपुतलियों के खेल से लोग जल्दी प्रभावित भी होते हैं, और जागरूक होने की भी पूरी कोशिश करते हैं।

कठपुतली कितने प्रकार की होती है

कठपुतलियां पांच प्रकार की बनाई जाती है। जिनमें से धागे वाली कठपुतली, दस्ताने की कठपुतली, छड़ वाली कठपुतली, दस्ताने और छड़ी वाली कठपुतली, छाया कठपुतली, धागे वाली कठपुतली यह प्रमुख पांच प्रकार की कठपुतलियां बनाकर खेल के लिए तैयार की जाती है।

कठपुतली के खेल से मानव जीवन पर प्रभाव

कठपुतलियों का खेल देखने के बाद मानव जीवन पर यह प्रभाव पड़ता है,कि जिस प्रकार से कठपुतलियां धागों में बंधी हुई रहती हैं। उसके बाद भी वह हर कार्य को बहुत अच्छे से आसानी से कर लेती हैं। हमारा जीवन भी कुछ ऐसा ही है हम बंधन में बंध जाने के बाद में बहुत परेशान हो जाते हैं,और किसी भी कार्य को करने की हमारे अंदर हिम्मत नहीं रहती है, लेकिन कठपुतलियों से हमें यही सीख मिलती है कि बंधन में बंधे रहने के बाद भी हर कार्य को आसानी से और बहुत सरलता के साथ किया जा सकता है।

निष्कर्ष

कठपुतलियों के माध्यम से बहुत अच्छी अच्छी कहानियों को हमारे सामने दिखाया जाता है। कठपुतली का खेल भारत का ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध खेल बन चुका है। कठपुतलियों का खेल दिखाने वाले जगह-जगह खेल दिखा कर अपना जीवन यापन करते हैं। आज हमारे देश में कठपुतली का खेल बहुत ज्यादा विद्यालयों में सरकारी कामों के लिए और भी अन्य प्रकार की योजनाओं के लिए इस खेल को दिखाया जाता है। इस खेल को दिखाने का मुख्य उद्देश्य सिर्फ लोगों में जागरूकता फैलाना है तथा बच्चों के मनोरंजन के लिए होता है।

अंतिम शब्द

आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख कठपुतली पर निबंध कठपुतली पर निबंध( Essay on Kathputli in Hindi) बहुत पसंद आया होगा। अगर आपको यह पसंद आया तो आप उसको लाइक कर सकते हैं इससे जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी के लिए आप हमारे कमेंट सेक्शन में जाकर कमेंट भी कर सकते है।

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