संयुक्त परिवार पर निबंध

Essay On Joint Family in Hindi: मनुष्य का जीवन परिवार के बिना अधूरा है। परिवार के बिना जीवन में कोई रस नहीं है क्योंकि परिवार ही तो है जिसके कारण जीवन को मनोरंजन के साथ जिया जा सकता है। परिवार दो तरह की होती है संयुक्त परिवार और एकल परिवार।

Essay On Joint Family in Hindi
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हम यहां पर संयुक्त परिवार निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में संयुक्त परिवार से सभी जानकारी का वर्णन किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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संयुक्त परिवार पर निबंध | Essay On Joint Family in Hindi

संयुक्त परिवार पर निबंध (250 शब्द)

भारत में प्राचीन काल से लोग संयुक्त परिवार में रहते आ रहे हैं। संयुक्त परिवार का अर्थ होता है जिस परिवार में एक से अधिक पीढ़ी के लोग मिल जुल कर रहते हो उदाहरण के रूप में संयुक्त परिवार में माता-पिता के अतिरिक्त दादा -दादी, चाचा-चाची और उनके बच्चे सभी लोग रहते हैं।

संयुक्त परिवार 8 से 10 लोगों का सदस्य हो सकता है जबकि एकल परिवार में मात्र माता-पिता और बच्चे शामिल होते हैं।
संयुक्त परिवार प्रणाली न केवल गृहकार्य के बोझ को कम करती है, यह वित्तीय कठिनाइयों, दुर्घटनाओं या आपदाओं के समय मिल जुल कर रहना सिखाती है।

कठिनाइयों के समय में, परिवार मजबूत भावनात्मक समर्थन प्रदान करता है क्योंकि यह हमेशा सभी सदस्यों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनने के लिए होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये समस्याएं महत्वपूर्ण हैं या नहीं, महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि सभी समस्याओं को सुना जाता है।

समय के साथ संयुक्त परिवार का प्रचलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है क्योंकि आज के समय में ज्यादातर महिलाएं भी नौकरी पेशा वाली होती हैं और परिवार का हर सदस्य काम की तलाश में अलग-अलग शहरों में रहता है, जिसके कारण एक साथ संयुक्त परिवार के रूप में रह पाना संभव नहीं होता।

हालांकि ऐसे लोग छुट्टियों में या फिर त्योहारों में वे अपने पैतृक घर आते हैं, जहां पर सभी परिवार एक साथ मिलते हैं।
संयुक्त परिवार प्रणाली परिवार के सदस्यों को प्यार और स्नेह में बांधती है और दूसरों के साथ साझा करने और देखभाल करने के दृष्टिकोण को विकसित करके उन्हें अन्य लोगों की गलतियों के प्रति सहिष्णु होना सिखाती है।

संयुक्त परिवार पर निबंध (850 शब्द)

प्रस्तावना

भारत में प्राचीन काल से ही संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित है। संयुक्त परिवार एक छत के नीचे एक साथ रहने वाला एक बड़ा परिवार है। ऐसे परिवारों में, सबसे बड़े पुरुष सदस्य को परिवार के मुखिया के रूप में जाना जाता है और उसकी पत्नी, उनके बेटे, बहू, पोते, सभी एक साथ रहते हैं। ये बड़े परिवार हैं जो एक साथ रहते हैं और ज्यादातर मामलों में उनका एक ही पेशा या सामान्य व्यवसाय होता है। लोग आमतौर पर बहुत महत्वाकांक्षी नहीं होते हैं और अपने परिवार की सदियों पुरानी संस्कृति और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।

संयुक्त परिवार का लाभ

संयुक्त परिवार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि संयुक्त परिवार में रहते हुए एक सुरक्षात्मक भावना विकसित होती है। किसी भी प्रकार के खतरे का डर नहीं होता। संयुक्त परिवार में रहने पर किसी भी समस्या में हमें अपने परिवार के हर सदस्य का समर्थन मिलता है वह हमारी हिम्मत बढ़ाते हैं।

जिस प्रकार एकल परिवार में परिवार की पूरी जिम्मेदारी एक व्यक्ति पर होती है लेकिन संयुक्त परिवार में जिम्मेदारी बट जाती है किसी एक व्यक्ति के ऊपर घर का बोझ नहीं होता। इस तरीके से संयुक्त परिवार में रहते हुए परिवार का हर एक सदस्य घर के खर्चे में अपनी भागीदारी देता है।

संयुक्त परिवार में बच्चों के लिए एक अनुशासन से भरा माहौल विकसित होता है क्योंकि संयुक्त परिवार में घर का सबसे बड़ा व्यक्ति हमारे बुजुर्ग यानी कि हमारे दादा जी होते हैं, जो अपने अनुभव और ज्ञान से घर के बच्चों को मार्गदर्शन देते हैं‌ इसके अतिरिक्त परिवार का हर एक सदस्य बच्चों का अच्छे से देखभाल कर पाता है। इस तरीके से संयुक्त परिवार में रहते हुए बच्चों का लालन-पालन अच्छे से हो पाता है।

संयुक्त परिवार में रहते हुए बच्चो साथ ही बड़ों को भी कभी बोरियत महसूस नहीं होता है क्योंकि संयुक्त परिवार के साथ हंसी मजाक कर सकते हैं और जीवन को मनोरंजन से जी सकते हैं। संयुक्त परिवार में हर प्रकार के त्योहारों को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे भी बिना परिवार की किसी भी त्योहार का कोई मजा नहीं।

संयुक्त परिवार में रहते हुए हर एक त्यौहार में एक अलग उमंग और उत्साह देखने को मिलता है। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें हर एक समस्याओं का हल मिल जाता है। संयुक्त परिवार में रहते हुए हमें अकेला महसूस नहीं होता।

संयुक्त परिवार के नुकसान

संयुक्त परिवार में रहने के तो कई सारे लाभ है लेकिन कभी-कभी हानि भी होता है क्योंकि परिवार के हर सदस्य एक बहुत नाजुक रिश्ते के धागे से बंधे होते है और यदि धागे में जरा भी तनाव आया तो रिश्ते में तकरार आ सकती हैं और यह खास करके परिवार के दो बहुओं के बीच में ज्यादातर होता है। ऐसे में परिवार का पूरा माहौल खराब हो सकता हैं जिसके कारण बहुत सोच समझ कर चलना पड़ता है।

संयुक्त परिवार को बनाए रखने के लिए परिवार के हर सदस्य को एक दूसरे की खुशी को प्राथमिकता देनी पड़ती है। यहां तक कि परिवार में जो सदस्य छोटा है, उसे कई बार अपनी इच्छाओं को दबाना पड़ता है और अपने बड़ों के इच्छाओं के अनुसार काम करना पड़ता है।

संयुक्त परिवार में यदि हर एक सदस्य का विचार एक जैसे ना हो तो वह अन्य लोगों के बहकावे में बहुत जल्दी आ जाता है जिससे परिवार में विभाजन तक की नौबत आ जाती है।

संयुक्त परिवार में आय की भी समस्या होती है। यदि किसी सदस्य की आय अन्य सदस्य से ज्यादा हो तो दूसरे सदस्य को शर्म महसूस करना पड़ता है। यहां तक कि कई बार कम आय वाले सदस्यों को ज्यादा आय वाले सदस्य का ताना भी सुनना पड़ता है।

इसके अतिरिक्त संयुक्त परिवार में आय की बचत कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि संयुक्त परिवार बड़ा होता है ऐसे में सारी कमाई परिवार के खर्चे में निकल जाता है। संयुक्त परिवार में महिलाओं के बीच काम को लेकर भी काफी झगड़े होते हैं जो परिवार में अशांति फैलाता है।

निष्कर्ष

जीवन की परिस्थितियों में परिवार ही तो हमारा सबसे बड़ा हिम्मत होता है जो हमें परेशानियों में हमारी हिम्मत बढ़ाता है, मुसीबतों में हमारा समर्थन करता है। इस तरीके से संयुक्त परिवार में रहना काफी लाभकारी होता है लेकिन कहते हैं ना जैसे एक बूंद नींबू पूरे दूध को खट्टा कर सकता है वैसे ही परिवार का कोई भी एक सदस्य की सोच खराब निकली तो वह संयुक्त परिवार के रिश्ते को तोड़ सकता है।

इसीलिए संयुक्त परिवार में रिश्ते को बनाए रखने के लिए सब के विचार एक जैसे होने चाहिए। सदस्य में एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना होनी चाहिए, बड़ों के प्रति सम्मान होना चाहिए और छोटों के प्रति मैत्रीपूर्ण व्यवहार होना चाहिए,सभी सदस्यों को घर में समान रूप से भागीदारी दिखाना चाहिए और किसी भी सदस्य के ऊपर हीन भावना नहीं होना चाहिए। तभी संयुक्त परिवार में खुशी से रहा जा सकता है।

अंतिम शब्द

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