ग्राम पंचायत पर निबंध

Essay on Gram Panchayat in Hindi: ग्राम पंचायत क्या होता है? इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी है। हालांकि ज्यादातर लोग इसके बारे में अच्छे से वाकिफ होंगे, कि ग्राम पंचायत क्या होता है। आज का हमारा आर्टिकल जिसमें हम ग्राम पंचायत पर निबंध के बारे में जानकारी आप तक पेश करने वाले हैं। इस निबंध में ग्राम पंचायत के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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ग्राम पंचायत पर निबंध | Essay on Gram Panchayat in Hindi

ग्राम पंचायत पर निबंध (250 शब्द)

भारत बहुत ही बड़ा देश है, जिसके अंदर बहुत सारे गांव और कस्बे बसे हुए है। हर एक गांव के अंदर बहुत सारे जनजाति रहती है, जो कि गांव में रहकर ही अपने जीवन का गुजर-बसर करती है। वे लोग वैसे तो अपनी जिंदगी से बहुत ज्यादा खुशहाल होते हैं। परंतु अभी उनके पास किसी भी प्रकार की समस्या हो तो वे सबसे पहले अपने ग्राम के प्रधान व्यक्ति जो कि वहां के सरपंच होते हैं। छोटे-छोटे गांव में पुलिस थाना और ऐसी सुविधाएं नहीं होती, जहां पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सके। यही कारण है, कि वे अपने दुखों का समाधान करने के लिए ग्राम पंचायत के पास जाते है।

वैसे तो ग्राम पंचायत में सात मुख्य व्यक्ति होते हैं, जो कि अपनी सूझबूझ और सलाह के माध्यम से ही किसी भी प्रकार का निर्णय लेते हैं। ग्राम पंचायत द्वारा जो फैसला लिया जाता है हर किसी को इसी फैसले पर अमल करके उनके नियमों का पालन करना पड़ता है। ग्राम पंचायत में एक सबसे बड़ा पंछी होता है। जिसे लोग सरपंच या फिर मुखिया जी कहते हैं। ऐसा कई बार होता है,.कि गांव में किसी प्रकार के हाथ से या दुर्घटना के वजह से लोगों को परेशानियां होती है। इन सब का निवारण करना ग्राम पंचायत का कार्य होता है।

इनके द्वारा कई बार ऐसे निर्णय भी लिए गए हैं। जो बहुत बड़ा कठोर और असहनीय होते हैं। परंतु ग्राम पंचायत द्वारा लिए गए हर निर्णय का पालन करना ही गांव वालों की जिम्मेदारी होती है। जो उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करते हैं। उनके लिए बहुत ज्यादा कठोर सजा का ग्राम पंचायत द्वारा दी जाती है। गांव के लोगों की भलाई करना और वहां के लोगों की देखभाल करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है और वे अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरीके से निभाते हैं।

ग्राम पंचायत पर निबंध (800 शब्द)

ग्राम पंचायत

भारत एक ग्राम प्रधान देश हैं। यहां की अधिकांश जनता गांवों में बसती हैं। जिस प्रकार राज्य के लिए राज्य सरकार हैं, नगरों के लिए नगर पालिका हैं, उसी प्रकार गांव के लिए ग्राम पंचायत होती हैं। ग्राम पंचायत लगभग सभी गांव में होती हैं। यह गांव में हो रही गतिविधियों का ध्यान रखती हैं तथा उनके विकास के लिए कार्य करती हैं।

किसी भी गांव के सभी व्यस्क मिलकर ग्राम सभा का निर्माण करते हैं तथा ग्राम सभा के सदस्य के द्वारा चुने जाते हैं। ग्राम पंचायत में पंचों का चुनाव किया जाता हैं उसके बाद सभी पंच मिलकर सरपंच का चुनाव करते हैं और गांव पंचायत का निर्माण होता हैं।ग्राम पंचायत को गांव के लोगों के हित में कार्य करना होता हैं।

ग्राम पंचायत का उदय या प्रारंभ

भारत एक गांवो का देश हैं। यहां की अधिकांश जनता गांव बस्ती हैं। भारत में शुरुआत से ही छोटे-छोटे प्रजातंत्रिक जनपद थे। उन सब में पंचायती राज व्यवस्था थी। छोटे-छोटे राज्यों में सबको स्वतंत्रता तथा समान अधिकार प्राप्त थे और सबके लिए सुलभ तथा समुचित न्याय व्यवस्था थी।

गांव की समस्याओं का निपटारा गांव की सार्वजनिक सभा में किया जाता था। प्रजातंत्र का अर्थ हैं शासन की बागडोर जनता के हाथ में होना। प्रजातंत्र या लोकतंत्र जनता का जनता द्वारा जनता के लिए शासन होता हैं। बिहार सरकार ने 1948 में पंचायती राज कानून पारित किया इसके पश्चात यहां ग्राम पंचायत का निर्माण हुआ। 1959 मैं इस कानून मैं संशोधन करके उत्तर बिहार में 5000 तथा झारखंड में 2500 जनसंख्या वाले गांव में ग्राम पंचायत का निर्माण किया गया।

ग्राम पंचायत की संरचना

इसका प्रधान मुखिया होता हैं। ग्राम पंचायत का प्रमुख अंग कार्यकारिणी समिति हैं। मुखिया का चुनाव व्यस्कमताधिकार के आधार पर किया जाता हैं।

ग्राम पंचायत के प्रमुख आधार

ग्राम पंचायतों के दो प्रमुख आधार है पहला कार्यकारिणी समिति तथा दूसरा कचहरी।

  1. कार्यकारिणी समिति- कार्यकारिणी समिति में कम से कम 7 सदस्य तथा अधिक से अधिक 15 सदस्य होते हैं। गांव की शांति तथा सुव्यवस्था का कार्य पूर्ण रूप से मुख्य का होता हैं।
  2. कचहरी- ग्राम पंचायत का दूसरा प्रमुख कचहरी हैं। यह गांव के प्रमुख कार्यों का संपादन करते हैं। इसका प्रमुख सरपंच होता हैं। सरपंच की सहायता लिए पंच होते हैं। सरपंच तथा पंचो का चुनाव गांव के व्यस्को द्वारा किया जाता हैं। ग्राम कचहरी को तीसरे दंडाधिकारी का अधिकार प्राप्त होता हैं।
    ग्राम सेवक- प्रत्येक ग्राम पंचायत में राज सरकार द्वारा एक ग्राम सेवक नियुक्त किया जाता हैं। जिसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता हैं।

ग्राम पंचायत के कार्य

इनके दो प्रकार के कार्य होते हैं1. अनिवार्य कार्य 2.ऐच्छिक कार्य।

1.अनिवार्य कार्य- इसके अंतर्गत गांव के लिए पानी बिजली की व्यवस्था करना, गांव में विद्यालय का निर्माण करना तथा युवाओं को रोजगार दिलाना आदि कार्य अनिवार्य के अंतर्गत आते हैं। इन कार्यों को करवाना ग्राम पंचायत के लिए जरूरी होता हैं।
2.ऐच्छिक कार्य- इसके अंतर्गत गांव में कुएं, नलकूपों आदि का निर्माण करवाना हैं। यह कार्य ग्राम सभा के ऐच्छिक कार्य हैं। इनको करवाना नहीं करवाना उनकी इच्छा पर निर्भर करता हैं।

ग्राम पंचायत के आय के स्रोत

ग्राम पंचायत लोगों से कर ले कर उनके लिए कार्य करवाती हैं। सरकार द्वारा मिलने वाली राशि से भी गांव के विकास हेतु कार्य करती हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायत में भी बहुत सारी त्रुटिया आने लगी हैं।जो व्यक्ति सालों से सरपंच बता रहा हैं उसी के परिवार में से लगातार किसी को सरपंच बनाया जाता हैं।इससे अन्य लोगों को मौका प्राप्त नहीं होता हैं।
इस कारण सरकार के धन का सही उपयोग नहीं होता हैं। कई लोग इसको अपने निजी कार्य में लगाने लगते हैंऔर जनकल्याण के कार्य नहीं करते हैं। हर बार ग्राम पंचायत की बागडोर किसी जाति विशेष या व्यक्ति विशेष के पास चली जाती हैं। ग्राम पंचायत का निर्माण ग्राम कल्याण तथा ग्रामीण विकास के लिए किया गया हैं।

इस कारण से इसके सदस्यों का चुनाव सूझबूझ के साथ करना चाहिए। इसके सदस्य के रूप में हमें कर्मढ तथा ईमानदार व्यक्ति को चुनना चाहिए। कई बार ग्राम पंचायतें आय के साधनों की कमी के कारण बहुत सारे कार्य नहीं कर पाती हैं। इसलिए ग्राम पंचायत को सहकारी खेती तथा सहकारी बैंक बनाने चाहिए।

लोगों को भी सोच समझ के अच्छे व्यक्तियों को ग्राम पंचायत के सदस्य के रूप में नियुक्त करना चाहिए जो कि उनके कल्याण के लिए तथा विकास के लिए कार्य करें।
महिलाओं के लिए आरक्षण- वर्तमान में ग्राम पंचायतों में 50% महिलाओं का आरक्षण प्राप्त हैं। इस दिशा में प्रयास करने वाला बिहार पहला राज्य उसके बाद झारखंड।

निष्कर्ष

ग्राम पंचायत का निर्माण गांव में रहने वाली जनसंख्या के आधार पर होता है। यदि गांव में रहने वाले लोगों की जनसंख्या कम है। तो ऐसे में 2 गांवों को मिलाकर एक ग्राम पंचायत का निर्माण किया जाता है। ग्राम पंचायत का मुखिया सरपंच होता है। जिसका चयन हर 5 वर्ष में गांव में चुनाव करवा कर किया जाता है। जब तक 5 वर्ष पूरे होते हैं। तब तक उस ग्राम पंचायत का मुखिया उस गांव की देखरेख करता है और उस गांव में कई प्रकार के विकास संबंधित कार्य करवाता है।

अंतिम शब्द

आज का हमारा आर्टिकल जिसमें हमने ग्राम पंचायत पर निबंध ( Essay on Gram Panchayat in Hindi) के बारे में जानकारी आप तक पहुंचाई है। हमें पूरी उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है। हम आपके सवाल का जवाब देने का जल्द से जल्द प्रयास करेंगे।

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