ट्रिपल तलाक पर निबंध

Essay on Triple Talaq in Hindi: मुस्लिम समाज में तीन बार तलाक कहने से  शादीशुदा महिला को तलाक दिया जाता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पश्चात यह तीन तलाक वाला नियम बंद हो गया है। आज के इस आर्टिकल में हम ट्रिपल तलाक पर निबंध के बारे में संपूर्ण जानकारी आप तक पहुंचाने वाले हैं। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है। 

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ट्रिपल तलाक पर निबंध | Essay on Triple Talaq in Hindi

ट्रिपल तलाक पर निबंध (250 शब्द)

तीन तलाक का मामला हाल ही में काफी चर्चित हुआ है क्योंकि तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला जारी किया गया, जिसमें यह सिद्ध किया गया कि तीन बार तलाक कहने से किसी भी महिला को तलाक नहीं दिया जा सकता है। तीन तलाक का मामला मुस्लिम समाज का काफी चर्चित मामला रहा है क्योंकि मुस्लिम समाज में शादी होने के पश्चात जब पति और पत्नी के बीच झगड़े होने शुरू होते हैं। तो पति द्वारा तीन बार तलाक तलाक तलाक कह देने पर पति और पत्नी के बीच तलाक हो जाता है।

पुरुषों द्वारा अपनाए जाने वाले इस तलाक शब्द की वजह से मुस्लिम महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान थी और मुस्लिम महिलाओं ने इस तीन तलाक को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में वर्षों तक तीन तलाक का मामला चलता रहा और आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक कहने वाले लोगों के खिलाफ फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार तीन बार तलाक कह देने से ही कोई भी शादी खत्म नहीं हो सकती है। उसे कोर्ट से तलाक लेने से पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। उसके पश्चात ही शादी से तलाक मिलेगा।

मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा कहा जाता है कि उनके कुरान में लिखा गया है। कि पुरुष तीन बार तलाक शब्द का प्रयोग करके शादी शुदा महिला को छोड़ सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गलत करार दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक की बात को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया।

ट्रिपल तलाक पर निबंध (1200 शब्द )

प्रस्तावना

तलाक शब्द आप सबने सुना होगा। तलाक शब्द जो विवाह के विघटन मतलब विवाह को तोड़ने को लेकर दर्शाया जाता है। तलाक एक अरबी शब्द है। यह शब्द मुख्य रूप से मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपने पत्नी के साथ वैवाहिक संबंधों को तोड़ने के लिए किया जाता था। जब एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ शादी रचा देता है और उसके पश्चात इस्लामिक कानून के अनुसार तीन बार तलाक शब्द का उच्चारण करने से उस व्यक्ति को विवाह के संबंधों से स्वतंत्रता मिल सकते हैं।

इसीलिए मुस्लिम पुरुष द्वारा अपने पत्नी के साथ बंधे हुए इस बंधन को तोड़ने के लिए तीन तलाक शब्द का प्रयोग किया जाता था। इस तात्कालिक तलाक शब्द की वजह से हजारों महिलाओं की जिंदगियां बर्बाद होने लग गई। ट्रिपल तलाक को ‘तालाक-ए-बिदत’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा ट्रिपल तलाक को ओरल तलाक भी कहा जाता है। क्योंकि मुंह से तीन बार तलाक शब्द बोलने से विवाह के संबंध टूट जाते हैं।

सन 1937 में सरिया कानून के माध्यम से तीन तलाक प्रथा को मान्यता दे दी। उसके पश्चात मुस्लिम समाज के लोगों ने तीन तलाक शब्द का प्रयोग विवाह के संबंध को तोड़ने के लिए उपयोग करना शुरू किया।  मुस्लिम पति के द्वारा इस विशेष अधिकार के माध्यम से तीन बार अपने मुंह से तलाक बोलने के पश्चात अपनी पत्नी के साथ बंधे संबंध से छुटकारा पाया जा रहा था। एक बार मुस्लिम पति द्वारा तलाक शब्द का प्रयोग करने के पश्चात वह निर्णय अपरिवर्तनीय हो जाता था। उसके पश्चात उन दोनों का बिछड़ना निश्चित हो जाता था।

कुरान में तलाक के बारे में क्या लिखा है?

मुस्लिम समाज में तलाक शब्द का कुरान से संबंधित कई प्रकार के संदेश और भ्रम का जिक्र किया हो सकता है। तलाक के बारे में कुरान में कई बातें और भी लिखी हुई है। हालांकि कुरान में तलाक को लेकर कोई विरोध नहीं किया गया है। लेकिन उसने यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने सभी के इस पवित्र रिश्ते को तोड़ना चाहता है। व्यक्ति जो अपने पतियों को तलाक देने का इरादा रखता है। वह व्यक्ति तलाक लेने के पश्चात् 4 महीने तक इंतजार करेगा और उसके पश्चात ही दूसरी शादी रचा पाएगा। लेकिन कुरान के इन नियमों को कोई भी नहीं मानता था और ना ही वर्तमान में इस प्रकार के नियमों को माना जा रहा है।

क्या है ट्रिपल तालक?

भारत में रहने वाले कई मुस्लिम लोगों ने विशेष रूप से इस ट्रिपल तलाक प्रणाली के माध्यम से अपनी पत्नी को तलाक देने की प्रथा को वापस उजागर किया। ट्रिपल तलाक की प्रणाली की अनुपालन करने वाले मुस्लिम समुदाय के यह लोग जो अपने शादी के पवित्र रिश्ते को तीन बार तलाक तलाक तलाक बोल देने से इस रिश्ते को तोड़ दिया जाता था।  यह प्रथा 1400 साल पुरानी है। इस प्रथा के माध्यम से पति अपने पत्नी को तलाक देने के लिए स्वतंत्र है। उसे अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए किसी भी प्रकार के कारण को बताने की जरूरत नहीं है। ट्रिपल तलाक की यह प्रथा जिसकी वजह से सिर्फ पुरुष को ही तलाक देने की अनुमति की महिलाएं अपने पति को इस प्रथा के माध्यम से तलाक नहीं दे सकती थी।

भारत की मुस्लिम महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में हर समय डर कर जी रही थी। क्योंकि ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाने से पहले मुस्लिम महिलाओं के हालात बहुत खराब थे। मुस्लिम महिलाओं को इस बात का डर हमेशा रहता था। कि कहीं उनका पति तलाक शब्द का प्रयोग तीन बार करके उनके वैवाहिक जीवन को समाप्त ना कर दें। इसलिए मुस्लिम महिलाओं को हमेशा डर कर जीना पड़ता था। लेकिन वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश आने के पश्चात अब मुस्लिम महिलाओं का हौसला काफी बढा है।

ट्रिपल तलाक कानून

भारत के संसद भवन में ट्रिपल तलाक को लेकर कानून पारित किया गया। यह कानून 30 जुलाई 2019 को पारित किया गया। इस कानून के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं के लिए विवाह सरंक्षण और मुस्लिम महिलाओं के लिए कई प्रकार की समस्याओं का समाधान हुआ है। ट्रिपल तलाक को अपराधिक अपराध बनाने के लिए यह विवाह विधेयक संसद भवन में पारित हुआ।

भारत के संसद में यह कानून गैर जमानती अपराध के रूप में पारित किया गया 21 फरवरी 2019 को इस कानून को बनाने के बारे में लोकसभा में चयन लिया था और उसके पश्चात 30 जुलाई 2019 को यह कानून देशभर में पारित किया गया।

हालांकि हर प्रकार के नए कानून को लेकर संसद भवन में मुख्य रूप से विरोध जताया जाता है। लोकसभा में विधेयक पास होने के पश्चात राज्यसभा में लंबे समय तक यह कानून निलंबित रहा। लेकिन आखिर में ट्रिपल तलाक का यह कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रिपल तलाक के इस इस नियम को असंवैधानिक मानते हुए फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक माना क्योंकि यह लैंगिक कानून के खिलाफ है और समानता के सिद्धांत के रूप में यह कानून पूरी तरह से गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत में इस्लाम के विषय विश्वास के लिए किसी के साथ गलत होना मौलिक नहीं है। इसलिए इस कानून को देशभर में पारित किया गया।

सन 1985 में शाहबानो नाम की एक महिला ने अपने पति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा था। क्योंकि शाह बानो के पति ने उसे तीन बार तलाक शब्द का प्रयोग करके छोड़ दिया था। ऐसे में शाहबानो ने सुप्रीम कोर्ट में केस लगाया, कि वह उसे बिना कोई गुजारा भत्ता दिए छोड़ चुका और अंत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाह बानो के पक्ष में फैसला सुनाया गया।

ट्रिपल तलाक अवैध 

ट्रिपल तलाक का कानून देश में पारित होने के पश्चात जस्टिस हुआ कि तीन बार ट्रिपल तलाक शब्द का प्रयोग कर देने से किसी भी प्रकार से शादी का संबंध नहीं टूट सकता है। इसके साथ ही जो व्यक्ति तीन बार तलाक शब्द का उच्चारण करता है वह गलत है। यदि कोई महीना उसके खिलाफ कंप्लेंट करती है। तो उस व्यक्ति को सजा भी हो सकते हैं। ट्रिपल तलाक विधेयक पारित होने के पश्चात जो व्यक्ति ट्रिपल तलाक शब्द का प्रयोग करता हुआ पकड़ा जाता है,तो उसे जेल हो सकती है।

निष्कर्ष

भारत देश में रीति रिवाज और धर्म संस्कृति के आधार पर अलग-अलग विविधता है। भारत में अनेक प्रकार के धार्मिक समुदाय हैं और सभी धर्म के लोगों के अलग-अलग ग्रंथ और कानून निर्मित किए गए हैं। जो उस धर्म के लोगों को रहने और उस धर्म के लोगों को कई मामलों में नियंत्रित करते हैं। लेकिन कई जगह धार्मिक कानून इंसान के जीवन को बर्बाद कर देते हैं। जिस प्रकार से तीन बार तलाक शब्द बोलने से मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी गुजर जाती थी। लेकिन वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के पश्चात मुस्लिम महिलाएं पूरी तरह से सुरक्षित है।

अंतिम शब्द

भारत में रहने वाले मुस्लिम पुरुषों द्वारा तीन बार तलाक शब्द का प्रयोग करके अपने शादी के बंधन को तोड़ दिया जाता था। जिसकी वजह से महिलाओं को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। महिलाएं बेसहारा होकर अपना जीवन व्यतीत करती थी। लेकिन सरकार द्वारा महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया गया। आज का आर्टिकल जिसमें हमने ट्रिपल तलाक पर निबंध( Essay on Triple Talaq in Hindi) के बारे में जानकारी आप तक पहुंचाई है। मुझे उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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