दहेज प्रथा पर निबंध

Dahej Pratha Par Nibandh: दहेज़ प्रथा जो हमारे समाज की सबसे कुरीति है, इसको रोकना बहुत जरुरी है। यहां पर हम दहेज प्रथा पर निबंध शेयर कर रहे है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

Dahej Pratha Par Nibandh
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दहेज प्रथा पर निबंध | Dahej Pratha Par Nibandh

दहेज प्रथा पर निबंध (200 शब्द)

दहेज प्रथा एक ऐसी प्रथा है, जिसे सामाजिक कुरीतियां मैं शामिल किया जा सकता है। यह सदियों से चली आ रही प्रथा है। इस प्रथा को वर्तमान में रोकने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है लेकिन अभी भी यहां प्रथा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।

दहेज प्रथा का मतलब होता है कि लड़की की शादी के समय लड़की के साथ दहेज के रूप में बहुत कुछ संभाल लड़के परिवार वालों को देना पड़ता है। लेकिन गरीब परिवार के लोग यह सभी करने में असमर्थ होते हैं और उसके पश्चात लड़के पक्ष के लोगों द्वारा दहेज प्रथा के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है या दहेज के लिए विवश किया जाता है।

इसीलिए इस प्रथा को सामाजिक कुरीति मानते हुए प्रतिबंधित करने का फैसला सरकार द्वारा लिया गया। सरकार द्वारा दहेज को पूरी तरह से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अभी भी लोगों में पूरी तरह से जागरूकता नहीं फैली है। दहेज को देना और लेना लोग अच्छा काम मानते हैं लेकिन यह अच्छा काम नहीं है। यदि आप भी इस प्रकार के कार्य कर रहे हैं तो आप इस सामाजिक कुरीति को बढ़ावा दे रहे हैं जो वर्तमान और भविष्य के लिए उचित नहीं है।

दहेज प्रथा को रोकना वर्तमान में बहुत ही जरूरी है। यदि यह प्रथा ऐसे ही चलती रही तो लाखों जिंदगियां तबाह होती रहेगी। लोगों के मन में दहेज को लेकर जो सवाल खड़े होते हैं, उन सवालों को पूरी तरह से मिटाना होगा। दहेज की वजह से महिलाओं के साथ अत्याचार भी हो रहे हैं।

दहेज के नाम पर चली आ रही यह प्रथा सदियों पुरानी है लेकिन वक्त इस प्रथा को खत्म करने का नंबर आ चुका है। मतलब ऐसे कह सकते हैं कि इस प्रथा को अभी से खत्म करना बहुत ही जरूरी है। अन्यथा आने वाली पीढ़ी के लिए यह प्रथा और भी ज्यादा खतरनाक साबित होगी। दहेज को लेकर घर घर में लड़ाई होती है और महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है।

दहेज प्रथा पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना

दहेज देने की प्रणाली भारतीय समाज का एक बहुत प्रमुख हिस्सा रही है। कई जगहों पर यह भारतीय संस्कृति में अंतर्निहित होने के लिए जानी जाती है और उन जगहों पर यह परंपरा से भी बढ़कर है। दुल्हन के माता-पिता ने इस अनुचित परंपरा को शादी के दौरान नकद और कई महंगे उपहार बेटियों को देकर उनकी मदद के रूप में शुरू किया, क्योंकि उन्हें शादी के बाद पूरी तरह से नई जगह पर अपना जीवन शुरू करना पड़ता था।

शुरुआत में ऐसे अन्य उपहार दिए जाते थे, परंतु इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य समय गुजरने के साथ बदल गया और अब उपहार दूल्हा और उसके माता-पिता रिश्तेदारों को दिए जाते हैं। इस प्रथा में लिंग असमानता और सख्त कानूनों की कमी जैसे कई कारणों को भी जन्म दे दिया है।

दहेज प्रणाली के खिलाफ कानून

दहेज प्रथा आर्य समाज के सबसे जघन्य सामाजिक प्रणालियों में से एक है। इसने कई तरह के मुद्दे जगह कन्या भूण हत्या, लड़की को लावारिस छोड़ना, लड़की के परिवार में उनकी समस्या पर पैसे कमाने के लिए अनुचित साधनों का उपयोग करना, बहू का भावनात्मक और शारीरिक शोषण करने जैसी नई समस्याओं को पैदा किया हैं। इस समस्या को रोकने के लिए सरकार ने दहेज को दंडनीय अपराध बताते हुए कानून बना है और यहां इन कानूनों का हिसाब से जानकारी दी गई हैं।

दहेज प्रथा पर लगे मुख्य कानून

दहेज प्रथा एक बहुत ही रूढ़िवादी पड़ता है और इस प्रणाली के माध्यम से लड़की को और उसके परिवार को बहुत परेशान किया जाता हैं। दहेज प्रथा के कारण कई लड़कियों ने अपनी जान भी गंवाई हैं, इसलिए सरकार ने इस प्रथा को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं, जो निम्नलिखित हैं:

दहेज निषेध अधिनियम, 1961

सरकार द्वारा जारी किए गए इस अधिनियम के माध्यम से दहेज देने और लेने की निगरानी करने के लिए एक कानूनी व्यवस्था लागू की गई है। इस अधिनियम के अनुसार दहेज लेन-देन की स्थिति में जुर्माना लगाया जा सकता हैं। पूजा में कम से कम 5 वर्ष का कारावास और ₹15000 तक का जुर्माना राशि के आधार पर शामिल किया गया हैं।

दहेज की मांग करना दंडनीय अपराध है अगर कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दहेज की मांग करता है तो उसे 6 महीने का कारावास और ₹10000 का जुर्माना भरना पड़ सकता हैं।

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिला का संरक्षण

दहेज प्रथा के कारण बहुत सी महिलाओं के साथ ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग को पूरा करने के लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से दूर किया जाता हैं। इस तरह के खिलाफ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस कानून को लागू किया गया हैं।

यह महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाता है। शारीरिक भावनात्मक मौखिक आर्थिक और यौन सहित सभी प्रकार के इस कानून के तहत अपराध हैं। विभिन्न प्रकार की सजा और दुरुपयोग की गंभीरता अलग-अलग रखी गई हैं।

दहेज प्रणाली को समाप्त करने के संभावित तरीके

सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के बावजूद दहेज प्रणाली की अभी भी समाज में एक मजबूत पकड़ है। इस समस्या को समाप्त करने के लिए यहां कुछ समाधान दिए गए हैं:

शिक्षा

दहेज प्रथा जाति भेदभाव और बाल श्रम जैसे सामाजिक संस्थाओं के लिए शिक्षा का अभाव बहुत महत्वपूर्ण होता है, लोगों को ऐसे विश्वास प्रणालियों से छुटकारा पाने के लिए तार्किक और उचित सोच को बढ़ावा देने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए। अगर संपूर्ण समाज में शिक्षा का अभाव बढ़ जाए तो ऐसी बुरी प्रथाएं खत्म हो सकती हैं।

महिला सशक्तीकरण

अपनी बेटियों के लिए एक अच्छी तरह से स्थापित दूल्हे की तलाश में और बेटी की शादी में अपनी सारी बचत का निवेश करने के बजाए लोगों को अपनी बेटी की शिक्षा पर पैसा खर्च करना चाहिए और उसे स्वयं खुद पर निर्भर करना चाहिए।

महिलाओं को अपने विवाह के बाद भी काम करना जारी रखना चाहिए और ससुराल वालों के व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के प्रति झुकने की बजाए अपने कार्य पर अपनी ऊर्जा केंद्रित करना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों और वे किस तरह खुद को दुरुपयोग से बचाने के लिए इनका उपयोग कर सकती हैं से अवगत कराया जाना चाहिए।

लैंगिक समानता

हमारे समाज में दहेज प्रणाली का मुख्य कारण लिंग असमानता हैं। बहुत कम उम्र यदि बच्चों को यह सिखाया जाना चाहिए कि पुरुषों और महिलाओं का सम्मान अधिकार होता है और कोई भी एक दूसरे से बेहतर या कम नहीं होता हैं। अगर इस प्रकार की सोच बच्चों में पहले से ही डाल दी जाए तो इस समाज में लिंग असमानता जैसी समस्या भी खत्म हो सकती हैं।

इन सभी के अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए कई अलग-अलग प्रकार के अभियान का भी आयोजन करना चाहिए। जिसके माध्यम से बच्चों के साथ साथ बुजुर्गों को भी इस चीज के बारे में पता चले और वह लिंग भेदभाव को करने से रोक सकें।

निष्कर्ष

दहेज प्रणाली लड़की और उसके परिवार के लिए पीड़ा का कारण हैं। इस कुंती से छुटकारा पाने के लिए समाचारों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इन्हें कानून में भी शामिल करना चाहिए। अगर हमारे समाज से दहेज प्रथा जैसी प्रीति को हमेशा के लिए समाप्त करना है तो हमें एकजुट होकर इसके खिलाफ एक अभियान चलाना होगा।

अंतिम शब्द

हमने यहाँ पर दहेज प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) शेयर किया है उम्मीद करते हैं कि आपको यह निबंध पसंद आया होगा, इसे आगे शेयर जरूर करें। आपको यह निबन्ध कैसा लगा, हमे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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