पीढ़ी अंतराल पर निबंध

Essay On Generation Gap In Hindi: आज का हमारा यह आर्टिकल जिसमें हम पीढ़ी अंतराल पर निबंध के बारे में बात करने वाले हैं। इस आर्टिकल में आपको पीढ़ी अंतराल पर निबंध के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलने वाली है।

Essay On Generation Gap In Hindi
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पीढ़ी अंतराल पर निबंध | Essay On Generation Gap In Hindi

पीढ़ी अंतराल पर निबंध (200 शब्द)

पीढ़ी अंतराल को अंग्रेजी भाषा में जनरेशन गैप कहा जाता है और अंग्रेजी भाषा के इस जनरेशन गैप Word से भी आपको अंदाजा हो गया होगा कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आने वाले अंतराल को पीढ़ी अंतराल कहा जाता है।

अंतराल का मतलब यह है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों के दिमाग में पुरानी पीढ़ी से कुछ अलग बातें आती है। दूसरे शब्दों में इस पीढ़ी अंतराल शब्द को समझा जाए तो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों के मानसिक सोच में आने वाले बदलाव को जनरेशन गैप कहा जाता है।

आपने भी अक्सर देखा होगा कि जिस प्रकार से आपके पिताजी सोचते थे, उस प्रकार से आप नहीं सोच पाते हैं। आप उनसे कुछ अलग सोचते हैं और हो सकता है कि आने वाली अगली पीढ़ी आपसे भी कुछ अलग सोचने का प्रयास करेगी और ऐसा संभव है।

हर एक पीढ़ी में मानसिक सोच में निरंतर बदलाव आता रहता है और यह बदलाव जरूरी है। इसी बदलाव को पीढ़ी अंतराल कहा जाता है। उदाहरण के रूप में समझा जाए तो हमारे पूर्वज विषम परिस्थितियों में भी रहने की क्षमता रखते थे। लेकिन आज की पीढ़ी हर प्रकार की सुख सुविधा चाहती है।

पीढ़ी अंतराल पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना

पीढ़ी अंतराल को हम लोग इंग्लिश में जेनरेशन गैप भी कह सकते हैं। यह पीढ़ी अंतराल अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच में एक टकराव बनता है। यदि पीढ़ी अंतराल की बात करें तो यह दो अलग-अलग पीढ़ियों से संबंधित लोगों के विचारधाराओं और विचारों को समझाया गया है।

आखिर जेनरेशन गैप क्या होता है?

इस शब्द की उत्पत्ति 1960 के दशक में हुई थी। उस समय बच्चे तथा माता-पिता के विचारों तथा विचार धाराओं के बारे में पूछा गया तो बच्चे लगभग सभी विचारधाराओं में अपने माता-पिता से अलग अलग विचार रखे हुए थे। इनमें से उनके धार्मिक विचारों राजनीति तथा नैतिक मूल्यों और रिश्ते चला यहां तक कि उनका मनपसंद म्यूजिक भी अलग अलग था।

एक सामान्य बात है, कई वर्षों से जारी है। पीढ़ी अंतराल अपने माता-पिता तथा दादा-दादी के विचारों के अंतराल को दर्शाता है।

दुनिया में यदि यह शब्द नहीं होता तो किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होती। इसी कारण से बच्चे और उनके माता-पिता को बीच में संघर्ष होता रहता है क्योंकि बच्चों के विचार अलग और उनके माता-पिता के विचार अलग होते हैं और इनके बीच में सामंजस्य बैठ नहीं पाता। यदि दुनिया में इस तरह का अंतर नहीं होता तो दुनिया काफी अलग होती है।

अगर जनरेशन गैप शब्द सबसे अधिक विकसित हुआ है। तो वह भारत में विकसित हुआ। यहां पर पहले के समय में लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते थे। लेकिन आजकल तो लोग अलग-अलग रहना ही पसंद करते हैं। इसी शब्द के कारण भारत में अलग परिवार बसाने की और धारणा प्रचलित होने लगी थी। यह भी एक पीढ़ी अंतराल है। इस समय लोग गोपनीयता की लालसा रखते हैं। उन्हें लगता है कि हमारी किसी भी बात दूसरे को पता ना चल पाए लेकिन ऐसा नहीं होता है।

आज के बच्चे

आजकल के बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बैठने के बजाय वह लोग स्मार्टफोन पर समय अधिक व्यतीत करना पसंद करते हैं। इसके कारण से परिवारों में कलह का कारण भी उत्पन्न होता है, क्योंकि इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में इतना समय ही नहीं मिल पाता कि अपने परिवार वालों को समय दे सकें। लेकिन जितना भी मिलता है, उतना समय अपने स्मार्टफोन को चलाने में व्यस्त कर देते हैं।

कुछ ऐसे भी काम होते हैं, जो आपको पसंद होते हैं। आपके माता-पिता को पसंद होते हैं। लेकिन आपके दादा-दादी को पसंद नहीं होते हैं। जिसके कारण वह आपसे बातचीत या आप से नफरत करना शुरू कर देते हैं। आपको लगता है कि यह मुझे पसंद नहीं कर रहे है, इसके एवज में आप उनसे बोलना ही बंद कर देते।

आजकल तो बच्चे अपने माता-पिता का किसी भी प्रकार की आज्ञा का पालन ही नहीं करते। यदि वह कहते हैं कि यह चीज गलत है, यह सही है तो उनकी बात का भरोसा ही नहीं करते और अपने मनपसंद कार्य को करना शुरू कर देते हैं। बाद में जब उन्हें पछतावा होता है तो काफी देर हो चुकी होती है।

जेनरेशन गैप का उदाहरण दें तो आजकल आपके आस-पास ही देखने को मिल जाएगा। क्योंकि कोई भी व्यक्ति संयुक्त परिवार में रहना पसंद नहीं करता है। वह चाहता है कि वह और उसका परिवार अकेले रहें जिससे अच्छा खाना और कपड़े पहन सकें, लेकिन वास्तव में जितना मजा संयुक्त परिवार में रहने पर आता है, उतना अकेले रहने पर नहीं लेकिन लोगों की सोच बिल्कुल बदल चुकी है। बस वह अपने परिवार से मतलब रखना चाहते हैं और किसी से नहीं। यह कैप पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है और यदि आप इसको बदलना चाहे तो बदल सकता है।

निष्कर्ष

आने वाली पीढ़ी में लगातार मानसिक बदलाव होते रहते है। आज के समय में हर किसी को सुविधा की आवश्कता रहती है। लेकिन हमारे पूर्वज इन सुविधाओं के बिना भी रह सकते है।

अंतिम शब्द

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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