मदर टेरेसा का जीवन परिचय

Biography of Mother Teresa in Hindi: लोगों का ऐसा कहना है कि दुनिया के सभी लोग केवल अपने लिए ही जीते हैं, परंतु इस संसार में कई लोग ऐसे भी हैं जो कि अन्य लोगों के लिए जीते हैं, ऐसे लोगों में सर्वोच्च स्थान मदर टेरेसा का है। आज के इस लेख के माध्यम से हम बात करने वाले हैं, लोगों की सेवा का शौक रखने वाली मदर टेरेसा के बारे में।

Biography of Mother Teresa in Hindi
Biography of Mother Teresa in Hindi

आज के समय में लगभग सभी लोग मदर टेरेसा के बारे में अवश्य ही जानते हैं। मदर टेरेसा लोगों की सेवा करने वाली महिला थी। आज के इस लेख में मदर टेरेसा के बारे में संपूर्ण जानकारी (जैसे कि मदर टेरेसा कौन थी?, उनका जन्म कब हुआ?, इनके कुछ अनमोल वचन इत्यादि) देने वाले हैं। यदि आप मदर टेरेसा के बारे में जानने के लिए इच्छुक हैं तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें। इस लेख में मदर टेरेसा के द्वारा किए गए कुछ कार्यों का विवरण भी दर्शाया गया है।

मदर टेरेसा का जीवन परिचय – Biography of Mother Teresa in Hindi

मदर टेरेसा की जीवनी एक नज़र में

नाममदर टेरेसा
अन्य नामअगनेस गोंझा बोयाजीजू
पिता का नामनिकोला बोयाजू
माता का नामद्रना बोयाजू
जन्म तारीख26 अगस्त 1910
जन्म स्थानस्काजपे
पदमिशनरी ऑफ चैरिटी
उम्र83-84
पतास्काजपे, कोलकाता
स्कूल
कॉलेज
शिक्षाTeacher, Principal
मृत्युवर्ष 1997 में 5 सितंबर
भाषाEnglish
WorkTeacher, Headmrs
धर्म
जाति
Biography of Mother Teresa in Hindi

मदर टेरेसा कौन थी?

मदर टेरेसा एक ऐसा नाम है, जिसका स्मरण करने मात्र से ही हमारा ही देश का धन से भर उठता है और हमारे चेहरे पर एक खाशाबा उम्र में पढ़ती है। मदर टेरेसा एक ऐसी महान आत्मा थीं, जिन्होंने संपूर्ण विश्व के बहुत से दिन दरिद्र, असहाय, गरीब, बीमार इत्यादि लोगों के लिए अपने हृदय में एक स्थान बनाया हुआ था। अपने इसी दया के कारण उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन भर में ऐसे ही लोगों की कर्तव्य और निष्ठा के साथ सेवा की और इनकी भलाई के लिए अनेकों कार्य किए हैं।

मदर टेरेसा का जन्म और उनका अन्य नाम

क्या आप जानते हैं मदर टेरेसा का जन्म कब हुआ था? यदि नहीं तो आपको बता दे कि मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 ईस्वी को स्काजपे में हुआ था, स्काजपे शहर इस समय पहले से दुनिया में बदल गया है। इनके पिता का नाम निकोला बोयाजू था। इनके पिता निकोला बोयसू एक साधारण से व्यवसाय थे।

मदर टेरेसा का अन्य नाम अगनेस गोंझा बोयाजीजू है। इनके नाम का अल्बेनियन भाषा में अर्थ फूल की कली से होता है और ऐसे में उन्होंने अपने नाम के जैसा ही कार्य भी किया है। इसमें कोई शक नहीं है कि मदर टेरेसा एक ऐसी कली थी, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में गरीबों, असहाय और दरिद्रओ इस जिंदगी में प्यार की खुशियां भरी है।

मदर टेरेसा का प्रारंभिक जीवन

जैसा कि हमने अब तक जाना कि मदर टेरेसा के पिता एक साधारण से व्यवसायिक थे। अतः इस प्रकार से मदर टेरेसा एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखती थी, एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने के बावजूद भी उन्होंने अनेक गरीब दुखियारी और असहाय लोगों की देखने की और उन्हें संभाला। जब मदर टेरेसा मात्र 8 वर्ष की थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका पालन करने वाली उनकी माता द्रना बोयाजू थी।

मदर टेरेसा के अतिरिक्त उनके चार और पुत्र-पुत्रियां थे, मदर टेरेसा अपने पांचों भाई बहनों में सबसे छोटी थी। जिस समय मदर टेरेसा का जन्म हुआ था, उस समय उनकी बड़ी बहन 7 वर्ष की थी, उनका भाई 2 वर्ष का था और उनकी माता के बाकी दो बच्चे बचपन में ही गुजर गए थे अर्थात मदर टेरेसा के दो भाई बहन बचपन में ही गुजर गए थे। मदर टेरेसा बहुत ही सुंदर लड़की थी, वह सुंदर होने के साथ-साथ दयालु, अध्ययनसील, परिश्रमी लड़की थी।

मदर टेरेसा का मन पढ़ाई लिखाई में बहुत लगता था, उनका मन पढ़ाई लिखाई में लगने के साथ-साथ उनका गाना गाने में भी मन लगता था अर्थात उन्हें गाना गाने का भी शौक था। अपने इसी शौक के चलते मदर टेरेसा और उनकी बड़ी बहन पास के ही गिरजाघर (चर्च) में मुख्य गायिका थीं।

जब मदर टेरेसा लगभग 12 वर्ष की उम्र की थी तभी उन्होंने “सिस्टर ऑफ लोरेट” मैं शामिल हो गई, इसके उपरांत वह आयरलैंड भी गई जहां पर रखकर उन्होंने अंग्रेजी भाषा का अध्ययन किया। उन्होंने अंग्रेजी भाषा का अध्ययन केवल इसीलिए किया क्योंकि सिस्टर ऑफ लोरेट को इसी भाषा के माध्यम से भारत में पढ़ाना था।

मदर टेरेसा का आगमन भारत में कब और कैसे हुआ?

जैसा कि हम ने बताया कि मदर टेरेसा लोरेट सिस्टर्स में शामिल हो गई थी, इसके लिए उन्होंने आयरलैंड जाकर के अंग्रेजी भाषा का अध्ययन किया था। आयरलैंड से मदर टेरेसा वर्ष 1929 में 6 जनवरी को कोलकाता में लोरेटो कॉन्वेंट नामक स्कूल में पहुंची। मदर टेरेसा एक अनुशासित शिक्षिका के रूप में साबित हुई और उनकी दयाशीलता के कारण सभी विद्यार्थी उनसे अत्यधिक स्नेह करते थे।

अपने इसी मेहनत की वजह से वर्ष 1944 में मदर टेरेसा उसी विद्यालय में हेडमिस्ट्रेस बन गई। मदर टेरेसा का मन पठन-पाठन के कार्य में बहुत ही अच्छी तरीके से मिल गया था, परंतु उनके आसपास फैली गरीबी, दरिद्रता और लाचारी ने उनके मन को बहुत सी आशांतता प्रदान की। मदर टेरेसा के हेडमिस्ट्रेस बनने से 1 वर्ष पूर्व अर्थात वर्ष 1945 में आए हुए अकाल के कारण संपूर्ण शहर में भारी संख्या में लोगों की मृत्यु होने लगे, उस समय भी मदर टेरेसा ने उन लोगों की काफी सहायता की थी।

वर्ष 1946 में हिंदू-मुस्लिम युद्ध के कारण उन लोगों ने कोलकाता शहर की स्थिति को बहुत ही भयानक और डरावनी बना दी थी, इस समय भी मदर टेरेसा ने उन्हें एक साथ रहने का संदेश दिया था।

मदर टेरेसा को प्राप्त पुरस्कार

मदर टेरेसा उर्फ सिस्टर टेरेसा को अपने इन अच्छे कामों और मानवता की सेवा के लिए अनेकों अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान कराए गए हैं और उन्हें सामूहिक रूप से सम्मानित भी किया गया है। भारत सरकार के द्वारा सर्वप्रथम पद्मश्री पुरस्कार सन 1962 ईस्वी को मदर टेरेसा को ही दिया गया था और इसके बाद भारतवर्ष के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पुरस्कार भारत रत्न से भी सन 1880 ईस्वी में मदर टेरेसा को सम्मानित किया गया था।

केवल भारत में ही नहीं बल्कि सयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका ने भी उन्हें वर्ष 1950 ईस्वी में मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया। मदर टेरेसा के मानव सेवा और उनकी कर्तव्यनिष्ठा के कारण वर्ष 1779 में उन्हें शांति नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया उनको यह पुरस्कार असहाय, दरिद्र और लाचार व्यक्तियों की सहायता करने के लिए दिया गया था। मदर टेरेसा ने नोबेल पुरस्कार के द्वारा प्राप्त $1,92,000 की राशि को गरीब, दरिद्र, लाचार लोगों के लिए एक फंड के रूप में उपयोग किया।

कोलकाता की संत मदर टेरेसा

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मदर टेरेसा को कोलकाता किस संत के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कोलकाता राज मेरा करके अनेक दरिद्र, गरीब, लाचार आदि जरूरतमंद लोगों की सेवा की है और उन्होंने जरूरतमंदों के लिए प्राप्त नोबेल प्राइज से आवाज और भोजन का बंदोबस्त भी किया था। इतना ही नहीं उन्होंने नोबेल प्राइज से ही अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए रहने और खाने के लिए अनेक निवास बनवाएं, जैसे कि शांति निवास निर्मल बाल निवास आदि का निर्माण मदर टेरेसा के द्वारा ही किया गया है।

मदर टेरेसा की जीवन का अंतिम पल

उन्होंने गरीब बच्चों की सेवा करते हुए अपना सारा जीवन गुजार दिया। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे उनकी उम्र भी बढ़ती गई और ऐसे में उनका स्वास्थ्य बिगड़ता गया। लगभग 73 वर्ष की उम्र में उन्हें पहला हृदयाघात (हार्ड अटैक) आया। जिसके लिए उन्हें वर्ष 1989 में पेसमेकर भी लगाया गया ताकि वह जीवित रह सके।

इसके बाद वह रोम में पोप जॉन पौल द्वितीय से मिलने के लिए गई थी। वर्ष 1991 में वह निमोनिया रोग से ग्रसित हो गई जिसके कारण उनकी तबीयत और भी अधिक बिगड़ने लगी। वर्ष 1997 में 13 मार्च को उन्होंने मिशनरी ऑफ चैरिटी के पद से त्यागपत्र दे दिया और वर्ष 1997 में 5 सितंबर को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। यही मदर टेरेसा के अंतिम पल थे।

मदर टेरेसा अवार्ड

  • पद्म श्री, भारत सरकार (1962)
  • नोबल पुरुस्कार (1979)
  • भारत रत्न, भारत सरकार (1980)
  • मैडल ऑफ़ फ्रीडम, अमेरिका सरकार (1985)
  • आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर, इंग्लैंड महारानी द्वारा
  • टेम्पलस, इंग्लैंड राजकुमार फिलिप द्वारा
  • पॉप शांति, पॉप छठे द्वारा
  • ब्लेस्ड टेरेसा ऑफ़ कलकत्ता (2003), पॉप जॉन पोल

मदर टेरेसा के कुछ अनमोल वचन (Mother Teresa Quotes)

  • मदर टेरेसा के अनुसार प्रेम एक ऐसा फल है जो हर मौसम में होता है और प्रत्येक व्यक्ति के पास पर्याप्त मात्रा में पहुंच जाता है।
  • मदर टेरेसा का मानना था कि जो भी व्यस्त हुए किसी को न दिया जाए, वह वस्तु खोने के समान है अर्थात वह वस्तु खो देने लायक है।
  • यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आपने किसी को कितना दिया बल्कि यह बात मायने रखती है कि वह वस्तु देते समय आपने किस प्रेम भाव के साथ दिया।
  • खूबसूरत लोग सदैव अच्छे नहीं होते, परंतु अच्छे लोग सदैव खूबसूरत होते हैं।
  • कुछ लोग आपकी जिंदगी में एक सबक की तरह होते हैं और कुछ लोग तो आपकी जिंदगी में एक आशीर्वाद बनकर आते हैं।
  • आप ठीक वैसे ही संदेश प्रेम को सुनने के लिए स्वयं जाएं, जैसे कि एक दिए को जलाने के लिए पहले तेल डालना होता है।
  • सबसे बड़ा गरीब व्यक्ति वह है जो कि अकेले और अवांछित रूप से रहता है।
  • किसी भी उपलब्ध और लक्ष्य के बीच का पुल अनुशासन ही होता है।
  • दया और प्रेम से भरे शब्द छोटे हो सकते हैं, परंतु वास्तव में उनकी गूंज बहुत ही उन्नत होती है।
  • मैं चाहती हूं कि आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहें।
  • यदि आप 100 लोगों को भोजन नहीं करा पा रहे हैं तो कम से कम एक गरीब को तो भोजन अवश्य करा दीजिए।
  • आप अकेले ही किसी गरीब की देखभाल करके प्राप्त प्रेम की अनुभूति कर सकते हैं।

यह कुछ मदर टेरेसा द्वारा बोले गए ऐसे शब्द है जिनसे लोग बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुए और उन्होंने इसका अनुसरण भी किया। अपने इन्हीं वचनों के कारण मदर टेरेसा बहुत ही प्रिय है। आज के समय में लोग मदर टेरेसा के नाम की मिसाल भी दिया करते हैं अर्थात अब के समय में मदर टेरेसा का नाम कायम हो चुका है।

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निष्कर्ष

आज के इस लेख “मदर टेरेसा बायोग्राफी (Mother Teresa Biography in Hindi)” के माध्यम से हमने देश की ही नहीं बल्कि पूरे पूरे विश्व की माता मदर टेरेसा के विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदान कराई है और सबसे महत्वपूर्ण बात उनके अनमोल वचन है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा, कृपया इसे शेयर करें।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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