अंडरवर्ल्ड कुख्यात डॉन मन्या सुर्वे जीवनी और इतिहास

Biography of Manya Surve in Hindi: अंडरवर्ल्ड की दुनिया में अनेकों प्रकार के डॉन आए, इसमें से एक नाम सामने निकल कर आता है मान्या सुर्वे। मान्या सुर्वे अंडरवर्ल्ड की दुनिया का एक ऐसा अपराधी था जो कि किसी व्यक्ति को मारने के लिए एक बार भी नहीं सोचता था। आइए जानते हैं मान्या सुर्वे अंडरवर्ल्ड की दुनिया में क्यों शामिल हुआ और मान्या सुर्वे का एक छोटा सा इतिहास।

Biography of Manya Surve in Hindi
Biography of Manya Surve in Hindi

मन्या सुर्वे का जीवन परिचय – Biography of Manya Surve in Hindi

मान्या सुर्वे कौन था?

मन्या सुर्वे अंडरवर्ल्ड (Manya Surve Gangster) का एक बहुत ही खूंखार अपराधी का। ऐसा माना जाता है कि मान्या सुर्वे अपने समय का दाऊद से भी कई गुना ज्यादा ताकतवर था। मान्या सुर्वे को एक बार जेल हुई थी इसके कारण मान्या सुर्वे सुधरा नहीं बल्कि और भी ज्यादा खूंखार हो गया। पिछले दो दशकों से मुंबई अंडरवर्ल्ड पर राज करने वाला पठान डॉन जिसने पूरी मुंबई पर अपना दबदबा बना कर रखा था।

यह पठान अपने विरोधी गैंग केसर ग्रुप को हराने के लिए मान्या सुर्वे की सहायता ली थी, जिस समय मान्या सुर्वे ने पठान की सहायता की थी, उस समय हुसैन का नेतृत्व दाऊद इब्राहिम का बड़ा भाई शब्बीर कर रहा था। मान्या सुर्वे की इस सफलता को ही उसका सुलझा हुआ राज माना जाता है।

इस घटना के बाद महाराष्ट्र की बड़ी से बड़ी गैंग भी मान्या सुर्वे के पास सहायता प्राप्त करने के लिए आती थी। मान्या सुर्वे एक ऐसा गैंगस्टर था जो कि पढ़ा लिखा था, इसी कारण मान्या सुर्वे को अंडरवर्ल्ड की दुनिया का पहला पढ़ा लिखा और ग्रेजुएट डॉन माना जाता था।

मन्या सुर्वे का जन्म कब हुआ था?

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मान्या सुर्वे अंडरवर्ल्ड का सबसे खूंखार अपराधी था। मान्या सुर्वे का जन्म 1944 में महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी कोकण क्षेत्र के पास रंपर गांव में हुआ था। मान्या सुर्वे रंपर गांव में पैदा होने के बाद उसके माता-पिता ने उसके साथ मुंबई जिले में रहने के लिए आ गए और इसी प्रकार मान्या सुर्वे की परवरिश, पढ़ाई लिखाई शिक्षा, ग्रेजुएशन इत्यादि मुंबई जिले में ही हुई। मन्या सुर्वे प्रारंभ में ऐसा नहीं था, उसने अपने सौतेले भाई को देखने के बाद अंडरवर्ल्ड की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।

मान्या सुर्वे की शिक्षा (Manya Surve Education)

मन्या सुर्वे मुंबई में ही रह कर मुंबई के एक विद्यालय से अपनी सारी शिक्षाएं प्राप्त की। इसके बाद उसने कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन भी कंप्लीट किया। अपनी इस ग्रेजुएशन को पूरा करने के बाद ही उसने अपना एक गैंग बनाना शुरू कर दिया और अपने सौतेले भाई की मदद से उसने अंडरवर्ल्ड की दुनिया में कदम रखा।

मान्या सुर्वे का इतिहास (Manya Surve History in Hindi)

मान्या सुर्वे एक ग्रेजुएट और पढ़ा लिखा आदमी था। उसने अपनी ग्रेजुएशन को पूरा करने के बाद अपने सौतेले भाई भार्गव दादा और सुमेश देसाई के साथ शामिल हो गया। भार्गव दादा और सुरेश बिश्नोई दोनों ही मुंबई के दादर के अगर बाजार के बहुत ही बड़े हत्यारे थे और उनका अगर बाजार पर बहुत ही दबदबा रहता था।

इनका सपोर्ट पा करके मान्या सुर्वे ने अपने कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ मिलकर के अपना एक गैंग बनाना शुरू किया। यह दोनों तो केवल अगर बाजार के ही डॉन थे परंतु मान्या सुर्वे पूरे अंडरवर्ल्ड पर राज करना चाहता था और उसने अपने इस सपने को पूरा भी किया, उसने संपूर्ण मुंबई पर अपना एक दबदबा बना लिया था।

मान्या सुर्वे ने मुंबई आने के बाद ही अपना घर बनाना शुरू किया था और उसे अपने दो भरोसेदार साथी धारावी के शेख मुनीर और डोंबिवली के विष्णु पार्टी के साथ एक मजबूत गैंग बनाया। उसकी गैंग में एक और गैंगस्टर उदय भी वर्ष 1980 के मार्च महीने में शामिल हो गया।

मान्या सुर्वे की पहली चोरी

मान्या सुर्वे ने अपनी पहली डकैती 5 अप्रैल 1980 को की थी, इस डकैती में उसने एक एंबेसडर कार को चोरी कर लिया था। बाद में यह खुलासा हुआ कि इस गाड़ी का उपयोग करी रोड पर स्थित लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी में ₹5700 लूटने के लिए किया गया था। उन्होंने 15 अप्रैल को फिर से एक बार डकैती नहीं सामूहिक हमला कर दिया, जिसमें उसने अपने साथी शेख मुनीर के दुश्मन शेख अजीज को बड़ी ही बेरहमी से मार दिया।

मान्या सुर्वे के सामूहिक विरोधी का मार्ग रक्षण कर रहे पुलिस के एक कांस्टेबल पर मान्या सुर्वे ने पूरा चला दिया। अपने इस कुकर्म के लिए उसे जेल हुई थी, जेल से आने के बाद वह और भी खूंखार हो गया था। जेल से वापस आने के बाद उसने एक प्लॉट खरीदा उसके बाद मान्या सुर्वे ने सरकारी मिल्क स्कीम में लगाए जाने वाली बोली के पैसे को लूट लिया और ऐसा करने के बाद उसने अपनी मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में एक छाप छोड़ दी।

इसके बाद मान्या सुर्वे ने एक और चोरी की जो कि बहुत ही बड़ी थी। उसने केनरा बैंक को लूट लिया, जिसमें उसने 1.6 लाख रुपए की चोरी की थी। जब मान्या सुर्वे इस अंडरवर्ल्ड दुनिया में आया था तब तो वह केवल चोरियां ही करता था, परंतु धीरे-धीरे मान्या सुर्वे की आतंकी गतिविधियां बढ़ने लगी। इन सभी के बाद मान्या सुर्वे ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए नारकोटिक्स ट्रैफिकिंग में भी शामिल हो गया क्योंकि उसे ऐसा लगता था कि इस धंधे में उसे काफी सारा मुनाफा होगा।

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मान्या सुर्वे को आजीवन जेल

भार्गव दादा और उसके साथी माननीय पौधा कर के साथ मिलकर के मान्या सुर्वे ने सन 1969 ईस्वी में एक दांडेकर की हत्या की थी, इसके कारण मान्या सुर्वे और उसके दोनों साथियों को इस कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया गया। मन्या सुर्वे बहुत ही बेरहम था, इसीलिए उस पर जल्द ही कार्यवाही हुई और उस पर मुकदमा चला।

मान्या सुर्वे को जज के द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सजा सुनाई जाने के बाद मान्या सुर्वे को मुंबई में नहीं अपितु पुणे की यरवदा नामक जेल में शिफ्ट कर दिया गया था, इस जेल में उसने अपना ऐसा आतंक मचाया कि वहां के प्रतिद्वंदी को वह तो बड़ी ही बेरहमी से मारता था और साथ ही छुड़ाने वाले कांस्टेबलों को भी मारता था।

उस जेल के प्रशासन ने उस से तंग आकर के उसे तुरंत वहां से हटाने का निर्णय ले लिया और फिर मान्या सुर्वे को रत्नागिरी जेल में भेज दिया गया। मान्या सुर्वे इससे नाराज होकर के भूख हड़ताल पर बैठ गया भूख हड़ताल के दौरान उसने एक चर्चित विदेशी उपन्यास को पढ़ा।

मान्या सुर्वे का एनकाउंटर कब और किसने किया

मुंबई में बढ़ते इस आतंक को देख कर के पुलिस ने भी अब गतिविधियों का तमाशा देखना बंद करके एनकाउंटर करना शुरू कर दिया। उस समय में पुलिस फोर्स ने एक साथ मिलकर के अंडरवर्ल्ड को एक संदेश आदेश जारी करवा दिया, अब उनकी गतिविधियों को और ज्यादा सहन नहीं किया जाएगा और इसी के साथ इस ऑपरेशन को मान्या सुर्वे के एनकाउंटर के साथ जारी कर दिया गया।

मान्या सुर्वे के बढ़ते इस आतंक को देखकर के इंस्पेक्टर ईशान बागवान और राजा तांभट ने मान्या सुर्वे के इस केस को अपने हाथ में ले लिया। मान्या सुर्वे की केस को अपने हाथ में लेते ही उन्होंने मान्या सुर्वे के खिलाफ ऑपरेशन शुरू कर दी और उन्होंने मान्या सुर्वे की गैंग के लोगों को पकड़ना शुरू कर दिया।

पुलिस के द्वारा 22 जून 1981 को केमिकल कंपनी जो कि कल्याण के पास थी वहां से शेख मुनीर को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिनों बाद ही पुलिस दयानंद और परशुराम काटकर को भी गोरेगांव के एक लॉज से गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों की गिरफ्तारी को देखकर मान्या सुर्वे घबरा गया और वह घबराकर के 19 नवंबर 1981 को भिवंडी चला गया। जब पुलिस ने अपनी खोज जारी रखते हुए मान्या सुर्वे के प्लॉट की छानबीन की तो उन्हें वहां पर देश में बनने वाले अवैध हथियार (ग्रेनेड, गोला बारूद, बंदूकें इत्यादि) भी मिले।

वर्ष 1982 की 11 जनवरी की सुबह मान्या सुर्वे को वाघेला के अंबेडकर कॉलेज जंक्शन से एक टैक्सी से बाहर आते हुए देखा गया। ऐसा कहा जाता है कि दाऊद इब्राहिम ने ही पुलिस को मान्या सुर्वे की सभी गतिविधियों की सूचना दी है और ऐसा भी कहा जाता है कि दाऊद ने ही मान्या सुर्वे की सभी लोकेशन को पुलिस को दिया था।

उसी दिन तकरीबन 01:30 PM पर पुलिस ने अपनी टीम के साथ उस लोकेशन पर मैंने सुबह का इंतजार कर रहे थे। करीब 20 से 22 मिनट के बाद मन्या सुर्वे अपने गर्लफ्रेंड को पिकअप करने के लिए टैक्सी से बाहर उतरा तभी पुलिस की नजर उस पर पड़ी। पुलिस को अपनी तरफ आता हुआ देखकर के मन्या सुर्वे ने अपनी बंदूक निकाली और जब तक कि वह ट्रिगर दबा पाता पुलिस के दो जांबाज सिपाही राजा तांबत और इसाक बागवान ने मान्या सुर्वे के छाती और कंधे पर 5 गोलियां चला दी। मान्या सुर्वे के इस एनकाउंटर के बाद मुंबई के अंडरवर्ल्ड से मान्या सुर्वे की दहशत समाप्त हो गई।

निष्कर्ष

आज के इस लेख “मन्या सुर्वे की बायोग्राफी (Manya Surve Biography in Hindi)” में आपको बताया कि मान्या सुर्वे कौन था? वह किस प्रकार से मुंबई अंडरवर्ल्ड में दाखिल हुआ और अपना एक छाप छोड़ गया। इसी के साथ हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख अवश्य ही पसंद आया होगा तो कृपया इसे अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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