भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है?

भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है? यह प्रश्न तो आपने कई बार सुना होगा और भारतीय इतिहास के पन्नों में भी आपको यह जानने को मिला होगा। आखिर कौन वो व्यक्ति है, जिसे भारत का नेपोलियन कहा जाता है और आखिर उन्हें नेपोलियन क्यों कहा जाता है और असल में नेपोलियन कौन थे, जिसकी उपमा एक भारतीय व्यक्ति को दी गई।

Bharat Ka Napoleon Kise Kaha Jata Hai

इन्हीं सवालों का जवाब हम आज के इस लेख में देने वाले हैं। तो चलिए लेख में आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले असल नेपोलियन के बारे में जानते हैं, जिनका पूरा नाम नेपोलियन बोनापार्ट था।

नेपोलियन बोनापार्ट कौन थे?

नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांसीसी सेना के एक नेता थे, जिनका जन्म 15 अगस्त 1769 को कॉर्सिका में हुआ था। नेपोलियन के युद्ध की तकनीक उनके हथियार और युद्ध की रणनीति के उपयोग करने की कोशिश था, शायद किसी अन्य में देखने को नहीं मिला। यही कारण है कि इन्हें एक महान सैन्य नेता कहा जाता है।

samudragupta

19वीं शताब्दी के शुरू में नेपोलियन ने यूरोप के अधिकांश हिस्सों पर विजय प्राप्त कर ली थी। सम्राट के रूप में उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान अपने देशवासियों द्वारा निर्वाचित होने से पहले कई यूरोपीय गठबंधन के खिलाफ युद्ध किया। इतिहासकार द्वारा माना जाता है कि पेट के कैंसर के कारण 52 साल की उम्र में इनकी मृत्यु हो गई थी।

भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है?

ऊपर लेख में आपने जाना कि नेपोलियन बोनापार्ट असल में कौन थे है। अब प्रश्न यह उठता है कि भारत का नेपोलियन किसे कहा जाता है? गुप्त वंश के शासक समुद्रगुप्त जो चंद्रगुप्त के पुत्र थे, उन्हें भारत का नेपोलियन माना जाता है। समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त के पुत्र थे। चंद्रगुप्त की राजधानी पाटलिपुत्र थी, जिसे वर्तमान में पटना के नाम से जाना जाता है।

समुद्रगुप्त की माता का नाम कुमारी देवी था, जो लिच्छवि वंश की राजकुमारी थी। कुमारी देवी के विवाह के पश्चात चंद्रगुप्त को दहेज में वैशाली मिला था, जो उस समय भारत की अर्थव्यवस्था का केंद्रीय बिंदु था। चंद्रगुप्त के मृत्यु के बाद उनके पुत्र समुद्रगुप्त इनके उत्तराधिकारी बने।

समुद्रगुप्त का दरबारी कवि हरीश चंद था, जिसने इलाहाबाद प्रशस्ति लेख की रचना की थी। समुद्रगुप्त विष्णु का उपासक था, उन्होंने अश्वमेधकर्ता की उपाधि धारण की थी। कहा जाता है समुद्रगुप्त संगीत प्रेमी था, इन्होंने अपने आपको सिक्को पर वीणा वादन करते हुए दिखाया था। समुद्रगुप्त ने विक्रमंक की भी उपाधि धारण की थी, इसे कविराज भी कहा जाता था।

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन क्यों कहा जाता है?

समुद्रगुप्त को पूरी दुनिया जीतने की जिज्ञासा थी। यह  एक सफल योद्धा के रूप में इतिहास के पन्नों में जाने जाते हैं। समुद्रगुप्त को एक विशाल सैन्य अभियान के रूप में इतिहास में वर्णित किया गया है। यह जैसे ही चंद्रगुप्त के बाद 365 ईसवी में राजगद्दी पर बैठे, उसके तुरंत बाद उन्होंने राज्य की सीमा के आसपास के राज्यों को भीतर समेटने का अभियान शुरू कर दिया।

समुद्रगुप्त ने सबसे पहला आक्रमण भारत के रोहिलखंड और पद्मावती राज्यों पर किया था। विजय होकर उन्होंने अपने राज्य सीमा में मिला लिया, उसके बाद उन्होंने बंगाल और नेपाल के राज्य पर आक्रमण करके उसे एक करवाया। इन्होंने असम राज्य को भी शुल्क देने के लिए विवश किया था।

एक विशाल सेना के साथ समुद्रगुप्त ने यौधेय, अर्जुनाय, मालवासा, मधुरस और अभिरस साम्राज्य के आदिवासी राज्यों को जीता। समुद्रगुप्त ने अफगानिस्तान, पूर्वी ईरान तथा मध्य एशिया के कई शासको को पराजित करके विदेशी राज्यों को अपने राज्य में शामिल किया और एक विशाल राज्य की स्थापना की।

समुद्रगुप्त ने अपने शासनकाल में आर्यावर्त 9 शासकों और दक्षिणावर्त के 12 शासकों को पराजित करके गुप्त साम्राज्य की सीमाओं को समस्त भारत सहित चारों दिशाओं में विदेशों में भी फैलाया था। इसीलिए इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त को नेपोलियन की उपाधि दी और इस तरह इन्हें भारत का नेपोलियन कहा जाने लगा।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने आपको गुप्त साम्राज्य के एक महान और वीर शासक समुद्रगुप्त के बारे में बताया, जिन्हे भारत का नेपोलियन कहा जाता है। हमें उम्मीद है कि इस लेख के जरिए आपको पता चल गया होगा कि आखिर क्यों समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है और असल में नेपोलियन कौन थे, उनके बारे में भी जानने को मिला।

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