महानायक अमिताभ बच्चन की कविताएं – Amitabh Bachchan Poem Hindi

Amitabh Bachchan Poem Hindi: महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को आज कौन नहीं जानता। ये किसी भी परिचय के मोहताज नहीं ये एक महान अभिनायक के साथ-साथ महान कवि भी है।

amitabh-bachchan-poem

आज हमने यहां पर महानायक अमिताभ बच्चन की कविताएं (Amitabh Bachchan ki Kavita) शेयर की है जो इन्होंने अपने ट्विटर पर सभी लोगों के बीच शेयर की है। तो आइये जानते है Motivational Poem By Amitabh Bachchan in Hindi:

Read Also: अटल बिहारी वाजपेयी जी के सर्वश्रेष्ठ सुविचार और कविताएं

महानायक अमिताभ बच्चन की कविताएं – Amitabh Bachchan Poem Hindi

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती – Koshish karne walon ki kabhi haar nahi hoti

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

नन्हीं चीटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगुना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

Inspirational Poem By Amitabh Bachchan in Hindi

amitabh-bachchan-poem

मुझे कब तक रोकोगे

मुठ्ठी में कुछ सपने लेकर
भर कर जेबों में आशाएँ
दिल में है अरमान यहीं
कुछ कर जाएँ कुछ कर जाएँ।

सूरज सा तेज नहीं मुझमें
दीपक सा जलता देखोगे
आपनी हद रौशन करने से
तुम मुझको कब तक रोकोगे।

मैं उस उस माटी का वृक्ष नहीं
जिसको नदियों ने सीचा है,
बंजर माटी में पलकर मैंने
मृत्यु से जीवन खीचा है।

मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ
शीशे से कब तक तोड़ोगे
मिटने वाला मैं नाम नहीं
तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे।

इस जग में जितने जुल्म नहीं
उतने सहने की ताकत है
तानों के शोर में भी रहकर
सच कहने की आदत है।

मैं सागर से भी गहरा हूँ
तुम कितने कंकड़ फेकोगे
चुन चुन कर आगे बढूंगा मैं
तुम मुझको कब तक रोकोगे।

झुक झुक कर सीधा खड़ा हुआ,
अब फिर झुकने का शौक नहीं
अपने ही हाथों रचा स्वयं
तुमसे मिटने का खौफ़ नहीं।

तुम हालातों की भठ्ठी में
जब जब मुझको झोकोगे
तब तप कर सोना बनूँगा
तुम मुझको कब तक रोकोगे।

Mujhe Kab Tak Rokoge

Mutthi me kuch sapne lekar,
Bharkar jeebo me aashaaye,
Dilo me hai armaan yahi,
Kuch kar jaaye….kuch kar jaaye,

Suraj-sa tej nahi mujhme,
Deepak sa jalta dekhoge,
Apni hadd raushan karne se,
Tum mujhko kab tak rokoge..!

Mai us maati ka vraksh nahi jisko nadiyo ne seencha hai…
Banjar maati me palkar maine mrityu se jeevan kheencha hai.

Mai patthar par likhi ibadat hu,
Sheese se kab tak todoge…
mitne vala main naam nahi,
Tum mujhko kab tak rokoge,
Tum mujhe kab tak rokoge,

Is jung me jitne zulm nhi,
utne sehne ki taaqat hai,
Taano ke shor me reh kar
sach kehne ki aadat hai.

Mai saagar se bhi gehra hu…
Tum kitne kankad fekoge,
Chun chun kar aage badhunga mai,
Tum mujhko kab tak rokoge.

Jhuk jhuk kar seedha khada hua, ab fir jhukne ka shauk nahi
Apne hi haatho racha svyam
tumse mitne ka khauf nahi.

Tum haalaato ki mutthi me
jab jab bhi mujhko jhokoge..
Tab tapkar sona banunga mai,
Tum mujhko kab tak rokoge.

amitabh-bachchan-poem

Amitabh Bachchan Poem in Hindi

ये गर्व है मेरा, बेटी, बेटियाँ जब उभर कर आती हैं,
अपने दम पर कुछ करके हमें दिखाती हैं
मोतियों से पिरोयी हुई ये माला, ऐसे करना
गहना अनमोल है, इसे सुरक्षित रखना 

जी हाँ हुज़ूर मैं काम करता हूँ

जी हाँ हुज़ूर मैं काम करता हूँ
मैं सुबह शाम काम करता हूँ
मैं रात बा रात काम करता हूँ
मैं रातों रात काम करता हूँ

Amitabh Bachchan Kavita Hindi

केवल एक दिवस देते हो कवि

केवल एक दिवस देते हो कवि, कविता के लिए,
आश्चर्य होता होगा सभी कवि दिग्गजों के लिए।
जानते नहीं हो तुम विश्व के आचरण को जीव जीवनी,
प्रति क्षण कविता होती है सर्व प्रिये!

amitabh-bachchan-poem

अमिताभ बच्चन कविता इन हिंदी – Poem By Amitabh Bachchan

जी हाँ जनाब मैं अस्पताल जाता हूँ

जी हाँ जनाब मैं अस्पताल जाता हूँ
बचपन से ही इस प्रतिकिया को जीवित रखता हूँ,
वहीं तो हुई थी मेरी प्रथम पैदाइशी चीत कार
वहीं तो हुआ था अविरल जीवन का मेरा स्वीकार
इस पवित्र स्थल का अभिनंदन करता हूँ मैं
जहाँ इस्वर बनाई प्रतिमा की जाँच होती है तय

धन्य है वे, धन्य हैं वे
जिन्हें आत्मा को जीवित रखने का सौभाग्य मिला
भाग्य शाली हैं वे जिन्हें, उन्हें सौभाग्य देने का सौभाग्य ना मिला
बनी रहे ये प्रतिक्रिया अनंत जन जात को
ना देखें ये कभी अस्वस्थता के चंडाल को
पहुँच गया आज रात्रि को Lilavati के प्रांगण में

देव समान दिव्यों के दर्शन करने के लिए मैं
विस्तार से देवी देवों से परिचय हुआ
उनकी वचन वाणी से आश्रय मिला
निकला जब चौ पहियों के वाहन में बाहर,
‘रास्ता रोको’ का ऐलान किया पत्र मंडली ने जर्जर
चाका चौंद कर देने वाले हथियार बरसाते हैं ये
मानो सीमा पार कर देने का दंड देना चाहते हैं वे

समझ आता है मुझे इनका व्यवहार;
समझ आता है मुझे, इनका व्याहार
प्रत्येक छवि वार है ये उनका व्यवसाय आधार,
बाधा ना डालूँगा उनकी नित्य क्रिया पर कभी
प्रार्थना है बस इतनी उनसे मगर, सभी
नेत्र हीन कर डालोगे तुम हमारी दिशा दृष्टि को
यदि यूँ अकिंचन चलाते रहोगे अपने अवज़ार को
हमारी रक्षा का है बस भैया, एक ही उपाय,
इस बुनी हुई प्रमस्तिष्क साया रूपी कवच के सिवाय।।

Note: ये सभी अमिताभ बच्चन की कविताएं अमिताभ बच्चन के ट्विटर अकाउंट से ली गई है।

Read Also: महर्षि वाल्मीकि के अनमोल विचार – Valmiki Quotes in Hindi

हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह Amitabh Bachchan Poem Hindi पसंद आई होगी। कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं कि आपको यह कैसी लगी। यदि आपको इससे जुड़ा कोई सवाल या सुझाव हो तो वो भी आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। हमारे से जुड़े रहने के लिए हमारा Facebook Page लाइक जरूर करें।

धन्यवाद!

Read Also

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here