एपीजे अब्दुल कलाम पर कविताएं

APJ Abdul Kalam Poems in Hindi: नमस्कार दोस्तों, डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जिन्हें सभी “मिसाइल मैन” के नाम से जानते है। इनका जीवन बहुत संघर्षशील और कठिनाइयों से भरा हुआ रहा है। उन्होंने अपनी सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।

इनको भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है। कलाम भारत के एक प्रख्यात वैज्ञानिक होने के साथ ही भारत के 11वें राष्ट्रपति भी रह चुके है। उनका जीवन युवाओं और बच्चों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है, हमें इनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

APJ Abdul Kalam Poems in Hindi
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आज हम इस पोस्ट में अब्दुल कलाम पर हिंदी कविताएं (अब्दुल कलाम की कविता) शेयर कर रहे है जो आपको बहुत कुछ करने को प्रेरित करेगी। आपको यह कविताएं पसंद आएगी, ऐसी हम उम्मीद करते हैं।

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम कविताएं | APJ Abdul Kalam Poems in Hindi

देश का सच्चा सपूत था वो

देश का सच्चा सपूत था वो
जात-पात से परे नेक बन्दा था वो
फ़कीराना जिन्दगी जीकर जिसने
देश को ताकतवर बनाया
सबसे चाहिता राष्ट्रपति कहलाकर
दिलों में अपनी जगह बनाया
नम आँखों को छोड़ वो
अनगिनत यादों में बस गया
मिसाइल मेन कहलाने वाला
अलविदा दोस्तों कह गया।

apj abdul kalam poem in hindi
Image: apj abdul kalam poem in hindi

जब अनंत आकाश भी दहल उठता था…

मुख मौन हैं…
महिमायें आपके सामने गौण हैं…
माँ भारती का शक्तिध्वज…
फहराने बचा ही कौन है…
सूनी पड़ गई ये धरती…
आपके अलविदा कह जाने से…
जब अनंत आकाश भी दहल उठता था…
आपकी मिसाइल टकराने से…
सच्ची श्रद्धांजलि के लिए युवाओं को…
आगे आना होगा…
कलाम अलख भीतर जगा…
माँ भारती को मनाना होगा…
हे कलाम उदास मत होना हम आयेंगे हम आयेंगे…
आपकी प्रेरणा की ताकत ले स्वप्न उड़ान भर जायेंगे…।।

एक साथ गीता और कुरान चले गए…

आधुनिक भारत के भगवान चले गए…
इस देश के असली स्वाभिमान चले गए…
धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए…
एक साथ गीता और कुरान चले गए…
मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए…
धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए…
इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए…
कलयुग के इकलौते इंसान चले गए…
ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए…
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए…।।

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Short Poem on APJ Abdul Kalam In Hindi

वो कलाम नहीं कमाल थे…
मिसाइलमैन वो बेमिसाल थे…
उनकी खूबियां करती रहेगीं
पथ प्रदर्शन मेरा…
वो मेरी मातृभूमि की ढाल थे…
वो कलाम नहीं कमाल थे…।।

तेरे ना होने का शिकवा तुझसे कैसै लिखूं ए कलाम…
आज मैं भी गमगीन हूं मेरी कलम भी गमगीन है…।।

कलाम आप तो हैं कमाल

एक समपर्ण, एक था अर्पण
था जिनका जीवन एक दर्शन।
जन्में घर निर्धन के फिर भी पाया विशेष स्थान,
देख भेदभाव बालपन से, हुआ मन बेताब।

मानवता की सेवा करने उठाई आपने किताब।
की चेष्टा कोई जीव चोट ना पावें,
हर जन अपने हृदय, प्रेम अलख जगावें।
टिकाए पैर ज़मी पर, मन पंछी ऊँचा आसमाँ पावें।

किया निरतंर अभ्यास, न छोड़ी कभी आस,
विफलताओं से हुए, न कभी आप निराश।
किए निरंतर प्रयास पर प्रयास।
देशभक्त्ति की आप हो एक मिसाल,
जिसने जलाई देश में 2020 की मशाल।

सपनों को विचार, विचार को गति,
दी युवकों को ये संमति।
देश को दी आपने पहचान नई।
किया ‘ के-15 ‘ से मुकम्मल सुरक्षा इंतज़ाम।

आप तो कमाल हो, श्रीमान कलाम।
कर्मक्षेत्र था आपका विज्ञान,
पर गीत संगीत में थे बसे आपके प्राण।
आप बने बच्चों के हितैषी,
दिया मंत्र, वे बने स्वदेशी।

विश्व पटल पर रखी भारतीयों की मिसाल,
आपके गुणों की है, खान अति विशाल।
कलाम आप तो हैं कमाल!
हर देशवासी हो नत मस्तक, करें आपको सलाम।

आपको हमारा शत – प्रणाम।।

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APJ Abdul Kalam Kavita

बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष
फिर कभी नही उठने की लिए
वृक्ष जो रत्न था,
वृक्ष जो शक्ति पुंज था,
वृक्ष जो न बोले तो भी
खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना
सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर
वृक्ष अब नही उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने
फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें
शन्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए
वृक्ष कभी मरते नही
अंकुरित होते हैं
नये-नये पल्लवों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते है
किसी के कलाम।

हमारा सलाम, कलाम के नाम

आइये, एक महान आत्मा को सलाम करे,
एक ऐसी आत्मा, जिन्होंने अपना जीवन,
बलिदान कर दिया – हमारे लिए।

आइये, श्रद्धांजलि दे एक ऐसी आत्मा को,
जिन्होंने असम्भव को संभव किया हमारे लिए।
आइये, एक महान आत्मा श्रद्धांजलि दे,
जिसने अपने देश के लिए एक सपना देखा।

आइये, हम अपने भूतपूर्व राष्ट्रपति को नमन करें,
जिन्होंने हर विद्यार्थी को प्रोत्साहित किया,
जिनके किताबों और भाषण ने हमें प्रेरणा दी।

आइये, एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो किसी भी धर्म के बीच अंतर नही करते।
एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो सबके दिल पर राज करते हैं।

abdul kalam poem in hindi
Image: abdul kalam poem in hindi

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