निगाह शायरी

Aankhein Shayari in Hindi

Aankhein Shayari in Hindi
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Aankhein Shayari in Hindi | निगाह शायरी

उठती नहीं है आँख किसी और की तरफ,
पाबन्द कर गयी है किसी की नजर मुझे,
ईमान की तो ये है कि ईमान अब कहाँ,
काफ़िर बना गई तेरी काफ़िर-नज़र मुझे।

जो सूरुर है तेरी आँखों में
वो बात कहां मैखाने में,
बस तू मिल जाए तो
फिर क्या रखा है ज़माने में।

मेरे होठों ने हर बात छुपा कर रखी थी,
आँखों को ये हुनर कभी आया ही नहीं।

पैगाम लिया है कभी पैगाम दिया है,
आँखों ने मोहब्बत में बड़ा काम किया है।

इकरार में शब्दों की एहमियत नहीं होती,
दिल के जज़्बात की आवाज़ नहीं होती,
आँखें बयान कर देती है दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ्जों की मोहताज नहीं होती।

क्या पूछते हो शोख निगाहों का माजरा,
दो तीर थे जो मेरे जिगर में उतर गए।

जाती है इस झील की गहराई कहाँ तक,
आँखों में तेरी डूब के देखेंगे किसी रोज।

तेरी निगाह दिल से जिगर तक उतर गयी,
दोनों को ही एकअदा में रजामंद कर गई।

बिना पूछे ही सुलझ जाती हैं
सवालों की गुत्थियाँ,
कुछ आँखें इतनी हाज़िर-जवाब होती हैं।

वो बोलते रहे…
हम सुनते रहे…
जवाब आँखों में था
वो जुबान में ढूंढते रहे।

सुकून की तलाश में तुम्हारी
आँखों में झाँका था हमने,
किसे पता था कम्बखत
दिल का दर्द और मिल जाएगा।

महकता हुआ जिस्म तेरा गुलाब जैसा है,
नींद के सफर में तू एक ख्वाब जैसा है,
दो घूँट पी लेने दे आँखों के प्याले से,
नशा तेरी आँखों का शराब जैसा है।

सागर से गहरी हैं आपकी ये नजरें,
खुशियों की शहनाई हैं आपकी ये नजरें,
हुस्न का जाम हैं आपकी ये नजरें,
छुपायें कई अरमान आपकी ये नजरें,
ले ले न कहीं हमारी जान आपकी ये नजरें।

तेरी आँखों की तौहीन नहीं
तो और क्या है यह,
मैंने देखा तेरे चाहने
वाले कल शराब पी रहे थे।

सामने ना हो तो तरसती हैं आँखें,
याद में तेरी बरसती हैं आँखें,
मेरे लिए नहीं इनके लिए ही आ जाओ,
आपका बेपनाह इंतज़ार करती हैं आँखें।

तमाम अल्फाज़ नाकाफी लगे मुझको,
एक तेरी आँखों को बयां करने में।

एक नजर देख ले हमे
जीने की इजाजत दे दे,
ए रुठने वाले…
वो पहली सी मोहब्बत दे दे।

क्या कहें, क्या क्या किया,
तेरी निगाहों ने सुलूक,
दिल में आईं दिल में
ठहरीं दिल में पैकाँ हो गईं।

ना जाने कौन सा जादू है तेरी बाहों में,
शराब सा नशा है तेरी आँखों में,
तेरी तलाश में तेरे मिलने की आस लिए,
दुआऐं मांगता फिरता हूँ मैं दरगाहों में।

****

ये कायनात सुराही थी, जाम आँखें थीं,
मुवसलत का पहला निज़ाम आँखें थीं।

जब भी देखता हूँ
मुझसे हरबार नज़रें चुरा लेती है,
मैंने कागज़ पर भी
बना के देखी हैं आँखें उसकी।

जब भी देखूं तो नज़रें चुरा लेती है वो,
मैंने कागज़ पर भी बना
के देखी हैं आँखें उसकी।

देखा है मेरी नजरों ने
एक रंग छलकते पैमाने का,
यूँ खुलती है आंख किसी की
जैसे खुले दर मैखाने का।

हम भटकते रहे थे अनजान राहों में,
रात दिन काट रहे थे यूँ ही बस आहों में,
अब तम्मना हुई है फिर से जीने की हमें,
कुछ तो बात है सनम तेरी इन निगाहों में।

Aankhein Shayari in Hindi

कोई आग जैसे कोहरे में दबी-दबी सी चमके,
तेरी झिलमिलाती आँखों में अजीब सा शमा है।

उसने आँखों से आँखें जब मिला दी,
हमारी ज़िन्दगी झूम कर मुस्कुरा दी,
जुबान से तो हम कुछ न कह सके,
पर आँखों ने दिल की कहानी सुना दी।

निगाहे-लुत्फ से इक
बार मुझको देख लेते है,
मुझे बेचैन करना
जब उन्हें मंजूर होता है।

कैद खानें हैं… बिन सलाखों के,
कुछ यूँ चर्चे हैं तुम्हारी आँखों के।

नजर से नजर मिली तो दिल मचल गया,
आपके दिल की शमा में दिल पिघल गया,
क्या करें कसूर न हमारा है न दिल का,
जो आपको देखा और धड़कना भूल गया।

होता है
राजे-इश्को-मोहब्बत इन्हीं से फाश,
आँखें जुबाँ नहीं है मगर बेजुबाँ नहीं।

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दीवाने हैं तेरे, इस बात से इंकार नहीं,
कैसे कहें कि हमें तुमसे प्यार नहीं,
कुछ तो कसूर है तेरी इन आँखों का,
हम अकेले तो गुनहगार नहीं।

निगाहों से कत्ल कर दे
न हो तकलीफ दोनों को,
तुझे खंजर उठाने की मुझे गर्दन झुकाने की।

आँखें नीची हैं तो हया बन गई,
आँखें ऊँची हैं तो दुआ बन गई,
आँखें उठ कर झुकी तो अड़ा बन गई,
आँखें झुक कर उठी तो कदा बन गई।

चिरागों को आंखों में महफूज रखना,
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी,
मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,
किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।

साकी को गिला है
कि उसकी बिकती नहीं शराब,
और एक तेरी आँखें हैं
कि होश में आने नहीं देती।

****

एक सी शोखी खुदा ने दी है
हुस्नो-इश्क को,
फर्क बस इतना है
वो आंखों में है ये दिल में है।

क़ैद ख़ाने हैं, बिन सलाख़ों के,
कुछ यूँ चर्चे हैं, तुम्हारी आँखों के।

इतने सवाल थे
कि मेरी उम्र से न सिमट सके,
जितने जवाब थे
कि तेरी एक निगाह में आ गए।

आँखों से आँखें मिला कर तो देखो,
हमारे दिल से दिल लगा कर तो देखो,
सारे जहान की खुशियाँ तेरे दामन में रख देंगे,
हमारे प्यार पर ज़रा ऐतबार करके तो देखो।

डूब कर तेरी झील सी गहरी आँखों में,
एक मयकश भी शायद पीना भूल जाए।

बहुत बेबाक आँखों में
ताल्लुक टिक नहीं पाता,
मोहब्बत में कशिश
रखने को शर्माना जरूरी है।

देखकर काजल की
लकीरें उनकी आँखों में,
पहली दफ़ा ये जाना कि
ये चाँद की ख़ूबसूरती रात से क्यूं है।

Aankhein Shayari in Hindi

रात बड़ी मुश्किल से
खुद को सुलाया है मैंने,
अपनी आँखों को
तेरे ख्वाब का लालच देकर।

आँखों में हया हो तो
पर्दा दिल का ही काफी है,
नहीं तो नक़ाब से भी होते हैं,
इशारे मोहब्बत के।

आँखों पर तेरी निगाहों
ने दस्तख़त क्या दिए,
हमने साँसों की
वसीयत तुम्हारे नाम कर दी।

कभी बैठा के सामने
पूछेंगे तेरी आँखों से,
किसने सिखाया है
इन्हें हर दिल में उतर जाना।

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुजरता है गुजर जाएगा।

खुलते हैं मुझ पे
राज कई इस जहान के,
उसकी हसीन
आँखों में जब झाँकता हूँ मैं।

मेरी निगाह-इ-शौक़ भी
कुछ कम नहीं मगर,
फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।

कुछ तुम्हारी निगाह काफिर थी,
कुछ मुझे भी खराब होना था।

अगर कुछ सीखना ही है तो
आँखों को पढ़ना सीख लो,
​वरना ​लफ़्ज़ों के मतलब तो
हजारों निकल आते है।

जाने क्यों डूब जाता हूँ
हर बार इन्हें देख कर,
इक दरिया हैं
या पूरा समंदर हैं तेरी आँखें।

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सिर्फ आँखों को देख के
कर ली उनसे मोहब्बत,
छोड़ दिया अपने
मुक़द्दर को उसके नक़ाब के पीछे।

फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला,
देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको।

तेरी निगाह में, एक रंग-ए-अजनबियत था,
किस ऐतेबार पे हम खुल के गुफ्तुगू करते।

एक नजर फेर ले जीने की इजाजत दे दे,
रुठने वाले वो पहली सी मोहब्बत दे दे।

मिली जब भी नजर
उनसे धड़कता है हमारा दिल,
पुकारे वो उधर
हमको इधर दम क्यों निकलता है।

****

सौ सौ उम्मीदें बंधती है,
इक-इक निगाह पर,
मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।

कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जाये,
तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये,
हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाये,
चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाये।

साकी देख ज़माने ने कैसी तुहमत लगायी है,
आँखें तेरी नशीली हैं शराबी मुझे कहते हैं।

मैं उम्र भर जिनका न कोई दे सका जवाब,
वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये।

बहुत खूबसूरत हैं ये आँखें तुम्हारी,
इन्हें बना दो किस्मत हमारी,
हमें नहीं चाहिये ज़माने की खुशियाँ,
अगर मिल जाये मोहब्बत तुम्हारी।

जो उनकी आँखों से बयान होते हैं,
वो लफ्ज शायरी में कहाँ होते हैं ।

Aankhein Shayari in Hindi

बस इक लतीफ तबस्सुम
बस इक हसीन नजर,
मरीजे-गम की हालत सुधर तो सकती है।

तुम्हारी बेरुखी ने
लाज रख ली मैखाने की,
तुम आँखों से पिला
देते तो पैमाने कहाँ जाते ।

उतर चुकी है मेरी रूह में किसी की निगाह,
तड़प रही है मेरी ज़िंदगी किसी के लिए।

होता है
राजे-इश्को-मुहब्बत इन्हीं से फाश,
आँखें जुबाँ नहीं है मगर बेजुबाँ नहीं।

आपने नज़र से नज़र जब मिला दी,
हमारी ज़िन्दगी झूमकर मुस्कुरा दी,
जुबां से तो हम कुछ भी न कह सके,
पर आँखों ने दिल की कहानी सुना दी।

ऐ समंदर मैं तुझसे वाकिफ हूँ
मगर इतना बताता हूँ,
वो ऑंखें तुझसे गहरी हैं
जिनका मैं आशिक हूँ।

महफिल अजीब है ये मंज़र अजीब है,
जो उसने चलाया वो खंजर अजीब है,
ना डूबने देता है ना उबरने देता है,
उसकी आँखों का वो समंदर अजीब है।

कोई दीवाना दौड़ के लिपट न जाये कहीं,
आँखों में आँखें डालकर देखा न कीजिए।

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मदहोश आंखो से वो जब हमें देखते हैं,
हम घबरा के अपनी पलके झुका लेते हैं,
कैसे मिलाए हम उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।

मिलायेंगे नजर किससे
कि वो बेदीद हैं ऐसे,
नहीं आईना में
आँखें मिलाते अपनी आँखों से।

जो उनकी आँखों से बयां होते हैं,
वो लफ्ज़ शायरी में कहाँ होते हैं।

निगाहे बोलती हैं
जब जुबा खामोश रहती है,
दिलों की धड़कने ही
तब दिलों की बात कहती हैं।

निगाह-ए-लुत्फ़ से एक
बार मुझको देख लेते हैं,
मुझको बेचैन करना
जब उन्हें मंजूर होता है ।

जो वो आँखों में आया कौन
उसको देख सकता था,
क़सम आँखों की हम
उसको छुपाते अपनी आँखों से।

****

मुझ से कहती थीं वो शराब आँखें,
आप वो ज़हर मत पिया कीजिये।

जब से देखा है तेरी आँखों में झाँककर,
कोई भी आईना अच्छा नहीं लगता,
तेरे इश्क में ऐसे हुए हैं दीवाने हम,
कोई और देखे तुझे तो अच्छा नहीं लगता।

ये अदाए, ये मुस्कराहट,
ये मस्त निगाहें आपकी,
नकाब ओढ़ लिजिये,
कही हम उजड़ ना जाए।

ज़फ़र गिरिया हमारा
कुछ-न-कुछ तासीर रखता है,
उन्‍हें हम देखते हैं
मुस्कुराते अपनी आँखों से।

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं,
हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं,
कौन मिलाये उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।

Aankhein Shayari in Hindi

कोई आँख जैसे कोहरे
में दबी-दबी सी चमके,
तेरी झिलमिलाती
आँखों में अजीब सा शमा है।

अदा निगाहों से होता है
फ़र्ज़-ए-गोयाई,
जुबान की हद से
जब शौके-ए-बयां गुजरता है।

दरिया जब-जब दिल से निकला,
एक समंदर आंखों में समाया,
मेरे दामन में कुछ तो देते,
यूं तो कुछ नहीं मांगा खुदाया|

दोस्ती अच्छी हो तो रंग़ लाती है
गहरी हो तो सबको भाती है
दोस्ती नादान हो तो टूट जाती है
पर अगर दोस्ती अपने जैसी हो
तो इतिहास बनाती है

जहां भी देखा गम का साया,
तू ही तू मुझको याद आया,
ख्वाबों की कलियां जब टूटी,
ये गुलशन लगने लगा पराया,

नशे में डूबे कोई, कोई जिए, कोई मरे
तीर क्या क्या तेरी
आँखों की कमाँ छोड़ती है

सोचते ही रहे पूछेंगे तेरी आँखों से ,
किस से सीखा है
हुनर दिल में उतर जाने का…

अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है,
तेरी इन आँखों में एक शख्स बेतहाशा है

मैं ने जिस लम्हे को पूजा है
उसे बस एक बार,
ख़्वाब बन कर तेरी
आँखों में उतरता देखूँ

ये गुलाबों सा तेरी
आँखों का जाम अच्छा है
जिस ख़त में आए
तेरा नाम वो पेग़ाम अच्छा है

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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