ऊर्जा संरक्षण पर निबंध

Urja Sanrakshan Par Nibandh: देश में ऊर्जा का संरक्षण करना बहुत ही जरूरी हो गया है। ऊर्जा का संरक्षण वर्तमान में करने से भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए कई प्रकार की समस्याएं कम हो जाएगी। यदि वर्तमान में उर्जा संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ेगा। आज का हमारा ही आर्टिकल जिसमें हम ऊर्जा संरक्षण पर निबंध के बारे में जानकारी आपके सामने पेश करने वाले हैं।

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ऊर्जा संरक्षण पर निबंध | Urja Sanrakshan Par Nibandh

ऊर्जा संरक्षण पर निबंध (250 शब्द)

मनुष्य विकास के राह पर  तेजी  के साथ अग्रसर कर रहा है,उसने समय के साथ खुद के लिए जीवन में सुख के सभी साधन एकत्रित कर लिया हैं । इतना कुछ होने के बाद भी और अधिक सुख पाने के लिए मनुष्य अभी भी खोज किये जा रहा है। समय के साथ मनुष्य की असंतोष प्रवृत्ति बढ़ती ही चली जा रही है। कारखाने, रेलगाड़ी, मोटर -गाड़ियां,हवाई जहाज, कार, दो पहिया वाहन, जेसीबी, आदि सभी की खोज वैज्ञानिको के खोज के द्वारा ही सम्भव हुआ है।

प्रकृति में संसाधन सीमित मात्रा मे होते हैं । दूसरे शब्दों में, प्रकृति में उपलब्ध ऊर्जा भी सीमित मात्रा मे होती है। विश्व में जितनी अधिक जनसंख्या बढ़ रही उसके साथ -साथ  उन सब की आवश्यकताएँ भी बढ़ती ही जा रही हैं । इन सभी प्रकार की मशीनों के संचालन के लिए ऊर्जा की बहुत आवश्कता होती है परंतु जिस गति से ऊर्जा की जरूरत बढ़ रही है। उसको देखते हुए ऊर्जा के सभी संसाधनों को नष्ट करने की आशंका बढ़ने लगी है। खासकर ऊर्जा के उन सभी साधनों को जिन्हें  हम पुन: निर्मित नहीं कर सकते है, जैसे -पेट्रोल, डीजल, कोयला और खाना पकाने की गैस आदि।

अत: यह पर जरूरत के अनुसार हम ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दे सकते है। क्योंकि यदि समय रहते हम अपने प्रयास करने में सफल नहीं हुये तो सम्पूर्ण विश्व के लोग खतरे में पड़ सकते है। ऊर्जा संरक्षण  महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,] क्योंकि गैर-नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग  करने से हमारे पर्यावरण पर बहुत प्रभाव पड़ता है। विशेष तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड जैसे वायु और जल प्रदूषण के लिए जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति का उत्पादन किया जाता हैऔर बिजली, स्टेशनों मे हीटिंग सिस्टम और कारों के इंजनों में तेल और कोयला,गैस का उपयोग बहुत अधिक मात्रा मे होने लगा है।

ऐसी स्थिति में यहाँ पर भारत को विकसित करने के लिए और ऊर्जा की मांग में बढ़ोतरी के कारण इससे निपटने की  बहुत कोशिश करता है। नवीन स्रोतो को विकसित करने के लिये इनके महत्व को समझाना जरूरी होता है। सभी देशो मे सौर-ऊर्जा को अधिक महत्व दिया जा रहा हैं तथा इसको और अधिक मात्रा मे उपयोगी बनाने के लिये इसके विकास के लिये विश्व भर के  सभी वैज्ञानिकों द्वारा इसकी खोज अभी भी जारी  हैं। हमारे देश में पेट्रोलियम ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी के तेल उत्पादक देशों में आयात  करने के लिये किया जाता है ।

ऊर्जा संरक्षण पर निबंध (1200 शब्द)

प्रस्तावना

प्रकृति से हमें ऊर्जा के बहुत से स्रोत प्राप्त होते है, हमारे दैनिक जीवन में ऊर्जा के स्रोतो का बहुत अधिक मात्रा में उपयोग किया जाता है। ऊर्जा के स्रोतो से हम सभी का जीवन सरल हो गया है, हम सभी के पास ऊर्जा स्रोत के बहुत से सांसधन मौजूद होते है जैसे – लकड़ी,  कोयला,पेट्रोल आदि इन सभी स्रोतो को एक ही बार  उपयोग में लाया जा सकता है। पुनः इनका उपयोग नहीं कर सकते है क्योंकि इनकी प्रचूर मात्रा बहुत ही कम होती है।

आज  के समय की सभी के जीवन मे ऊर्जा संरक्षण जरूरत बन गयी है, प्रकृति द्वारा मनुष्य को दिया गया ईधन एक अनमोल तोफा है। ईधन पर मनुष्य हर तरह से निर्भर रहता है, इनकी मांगे दिन -प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। मानव अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिये दिन -प्रतिदिन नये -नये उपकरणो की खोज करने में लगे होते है। मनुष्य के जीवन में दिन -प्रतिदिन ईधन की जरूरतें कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही है। पहले गर्मियों के दिन मे पंखे का उपयोग होता था लेकिन समय के साथ जनसंख्या में जैसे -जैसे बढ़ोतरी हुयी, वैसे -वैसे तापमान बढ़ने से अधिक गर्मी होने के वजह से अब लोग ज्यादातर एसी का उपयोग करने लगे है।

ऊर्जा संरक्षण का क्या है

इसका अर्थ  होता है कि ऊर्जा संरक्षण की बचत करना होता है। हमें ऊर्जा का उपयोग कम से कम करना चाहिए । किसी भी कार्य को पूरा करने के लिये कम ऊर्जा  का उपयोग कर सकते है। जैसे -अगर आप कार से कही आते -जाते है, उसके जगह पर साईकिल या स्कूटी से आ -जा सकते है, और कार मे लगने वाले ईधन की बचत की जा सकती है।और उस ऊर्जा  का  उपयोग ना करके उसका संरक्षण करना चाहिए।

ऊर्जा संरक्षण के नियम

इस नियम के अनुसार ऊर्जा को ना तो उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही ऊर्जा को नष्ट किया जा सकता है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप मे बदला जा सकता है। इसे ही ऊर्जा संरक्षण का नियम कहा जाता है। अर्थात यदि किसी क्रिया को करने मे जितनी ऊर्जा लुप्त होती है, उतनी ही ऊर्जा दूसरे रूपों मे उत्पन्न हो जाती है। ऊर्जा को किसी भी रूप मे समाप्त नहीं किया जा सकता है।

1841मे जुलियस रोबर्ट मेयर ने ऊर्जा संरक्षण के नियम का प्रतिपादन किया था, इन्हे ऊर्जा संरक्षण के नियम का जनक भी कहा जाता है।

उदाहरण :- 1.यदि मोटर के द्वारा किसी यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा मे बदल जा सकता है।
2.जनरेटर के माध्यम से यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा मे बदला जा सकता है।
3. हीटर के द्वारा हम यांत्रिक ऊर्जा को  ऊष्मा ऊर्जा मे बदला जा सकता है।

ऊर्जा संरक्षण कब मनाया जाता है

देश भर में प्रतिवर्ष  14 दिसम्बर को ऊर्जा संरक्षण दिवस ऊर्जा  के रूप मे मनाया जाता है।  ऊर्जा संरक्षण दिवस के दिन ऊर्जा  के महत्व को समझने के लिये इसे उत्सवपूर्वक मनाया जाता है। जैसे -जैसे जनसंख्या मे वृद्धि हो रही है, वैसे -वैसे ऊर्जा की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए हर वर्षा ऊर्जा संरक्षण दिवस पर लोगो को ऊर्जा  के महत्व के बारे मे सभी को जागरूक करने के लिये हर वर्षा ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाते है।

ऊर्जा संरक्षण का उपयोग लोगों को सोच समझ कर करना चाहिए, जहाँ तक संभव हो सके तो ज्यादातर प्राकृतिक ऊर्जा का ही उपयोग करके काम चलाये।

हम सभी के जीवन मे इस्तेमाल किये जाने वाले ऊर्जा के कुछ ऐसे स्रोत होते है। जिनका एक बार उपयोग करने पर उसको पुनः उपयोग मे नहीं लाया जा सकता है, जैसे -पेट्रोल, कोयला, डीजल, लकड़ी आदि। ये सभी प्रकार के साधन 40-50 वर्षा तक रहते है, हम सभी के जीवन मे ऊर्जा संरक्षण का बहुत महत्व होता है इसलिए हमें ऊर्जा संरक्षण का बचाव करना चाहिए।

ऊर्जा संरक्षण से बचाव

जब आप कमरे हो तो तभी बल्ब, लाइट और पंखा जलाये अगर बाहर जाये तो बंद करके जाये तभी ऊर्जा की बचत की जा सकती है। ट्यूब लाइट और बल्ब और अन्य प्रकार के उपकरणो को  अच्छी तरह से साफ करते रहना चाहिये। ऊर्जा की बचत करने के लिये सीएफएल बल्ब का उपयोग करना चाहिए, फ्रीज़ का दरवाजा काम पड़ने पर ही ओपन करे बार -बार फ्रीज़ को खोलने बंद करने से बिजली की खपत बढ़ती है।

खाना पकाते समय कुकर की फटकी बंद करके ही खाना पकाये। प्रेसर कुकर का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने से ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

देश भर मे पेट्रोल की क़ीमत बढ़ रही है, कई जगहों पर 1लीटर पेट्रोल 100₹ मे मिलता है। हम सभी को ज्यादातर सार्वजनिक वहनाओ का उपयोग अधिक करना चाहिए। साथ ही कार को एक वर्ष के अंदर ही समय -समय पर सर्विस कराते रहना चाहिए जिससे कार के इंजन दक्षता  सही से काम करता है, और कार अधिक मात्रा मे पेट्रोल भी नही खाती है क्योंकि ज्यादा दिन तक कार की सर्विस ना कराने के वजह से कार, बाइक अधिक मात्रा मे पेट्रोल लगने लगता है क्योंकि उसकी खपत बढ़ने लगती है, जिसके कारण से पेट्रोल ज्यादा लगने लगता है।

निष्कर्ष

हम ऊर्जा की बचत करना चाहते है, तो बहुत आसान तरीके से बचत कर सकते है। घर पर कपड़ो पर रोज़ प्रेस करते है, और हर रोज़ कपडे प्रेस करने पर 1000 वाट ऊर्जा की खपत हो जाती है। रोज़ – रोज़ कपड़े मे प्रेस करने के वजह एक हप्ते के कपड़े इकट्ठा करके प्रेस कर लेने से ऊर्जा की बचत की जा सकती है। ज़ब भी खाना पकाने के लिये रसोई घर मे जाते है, तो खाना बनाने से पहले सारी सामग्री इकठा करले फिर खाना बनाये ताकि समान ढूढ़ने मे ऊर्जा को खपत होने से बचाया जा सके।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने ऊर्जा संरक्षण पर निबंध (Urja Sanrakshan Par Nibandh) के बारे में संपूर्ण जानकारी आप तक पहुंचाई है। हमें उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि किसी व्यक्ति को हमारे आर्टिकल से जुड़ा हुआ कोई सवाल यह सुझाव है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है। हम आपके सवाल का जवाब देने का जल्द से जल्द प्रयास करेंगे। धन्यवाद

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