आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान पर भाषण

Speech On Indian Freedom Fighters In Hindi: आज हम आप सभी के समक्ष उन सेनानियों के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने हमारी आजादी के लिए अपना योगदान दिया था। इसके लिए उन्होंने अपनी जान तक की परवाह नहीं की थी। ऐसे बहुत सारे सेनानी है, जिन्होंने हमें ब्रिटिश सरकार से आजादी दिलाई थी और हमारे लिए लड़ाई हुई थी। इसीलिए आज हम इस स्वतंत्र भारत में चैन की सांस ले पा रहे हैं। ऐसे में आज हम आप सभी के समक्ष स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर भाषण प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जो आप सभी के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

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Image : Speech On Indian Freedom Fighters In Hindi

आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान पर भाषण | Speech On Indian Freedom Fighters In Hindi

आजादी के लिए स्वतंत्र सेनानियों का योगदान पर भाषण (500 शब्द)

मुख्य अतिथि गण, प्रिंसिपल, शिक्षक गण, एवं मेरे समस्त मित्रों, आप सभी को मेरा शुभ प्रभात। आज मैं आप सभी के समक्ष स्वतंत्रा सेनानियों के बारे में बात करने जा रहा हूं। जिन्होंने हमें एक स्वतंत्र भारत में जीने के लिए हमारे भारत को स्वतंत्र करवाया और अपनी जान तक की बाजी लगा दी। आशा करता हूं आप सभी इस में मेरा सहयोग देंगे।

हमारे देश को आजादी दिलाने के लिए बहुत सारे सेनानी ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी। जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में पन्नों पर लिख दिया गया है। ऐसे में आज मैं आप सभी के समक्ष कुछ महान सेनानियों के बारे में बात करने जा रहा हूं, जिन्होंने हम सभी के लिए बहुत ही बड़ा योगदान दिया। कुछ सेनानी ऐसे भी हैं जिनका नाम आज तक नहीं लिया जाता है, ना ही उन्हें याद किया जाता है। परंतु आज मैं आप सभी के समक्ष ऐसे ही सेनानियों के बारे में बात करने जा रहा हूं, जिनका नाम शायद आपने कभी नहीं सुना होगा।

  • उल्लासकर दत्ता

उल्हास कर दत्ता ने स्वतंत्रता में एक अहम भूमिका निभाई थी और अलीपुर बम मामले में इन्होंने अपना योगदान भी दिया था। देश की सेवा भी की थी। इसी के साथ उन्होंने कई आंदोलन में भी भाग लिया था। अलीगढ़ बम महाबली की वजह से 2 मई 1908 को इन्हें जेल भी जाना पड़ा था और कुछ समय पश्चात ही इन्हें फांसी की सजा सुना दी गई थी। परंतु दया याचिका अपील की वजह से फांसी की सजा को टाल दिया गया और कारावास भेजने की सजा दे दी गई। इसके पश्चात इन्हें अंडमान सेल्यूलर जेल में भेज दिया गया था।

  • ननी बाला देवी

इनको बहुत ही कम लोग जानते हैं। यह भारत की स्वतंत्रता सेनानी में से एक थे। इन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंग्रेजो के खिलाफ कई सारे आंदोलनों में समर्थन भी किया था।

  • दुकारी बाला देवी

दुकारी बाला देवी ने अंग्रेजो के खिलाफ खुलेआम लड़ाइयां की थी। इसके साथ ही भारत की सशस्त्र स्वतंत्रता सेनानियों की मुखिया भी रह चुकी थी। इन्होंने स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजो के खिलाफ कई आंदोलन में भाग भी लिया लेकिन कुख्यात आर्म्स एक्ट के तहत इन को दोषी ठहरा कर गिरफ्तार कर लिया गया। इन्हें सेनानी के रूप में गिरफ्तार होने वाली पहली फाइटर महिला के रूप में भी जाना गया था।

  • सतीश चंद्र सामंत

यह भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलन में भाग लिया। स्वतंत्रता के पश्चात यह 1952 से लेकर 1977 तक लोकसभा के सदस्य भी रहे थे।

  • पुनील बिहारी दास

यह अनुशीलन समिति के संस्थापक और अध्यक्ष रह चुके थे। अंग्रेजो के खिलाफ भारत के क्रांतिकारी के रूप में इन्होंने मुख्य योगदान दिया था और कई आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी।

  • पीर अली खान

यह भारत के शुरुआती विद्रोहियों में से एक थे। इन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान तक न्योछावर कर दी थी और स्वतंत्रता आंदोलन की मुख्य हिस्से बने रहे। फिर भी आज तक लोगों को इनके बारे में पता नहीं है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में इन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और 14 विद्रोहियों के साथ खुलेआम फांसी दे दी गई थी।

अंत में मैं केवल आप सभी से इतना ही कहना चाहूंगा कि स्वर्ण पन्नों में जिनका नाम नहीं लिखा गया। उन्होंने भी स्वतंत्रता में अपना योगदान दिया था। ऐसे लोगों को हम भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हैं। इसी के साथ में अपनी वाणी को यहीं पर विराम देता हूं।

धन्यवाद!

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आजादी के लिए स्वतंत्र सेनानियों का योगदान पर भाषण (500 शब्द)

 माननीय अतिथि गण, प्रधानाचार्य जी, शिक्षक गण एवं मेरे समस्त मित्रों, आप सभी को मेरा सुप्रभात। आज मैं आप सभी के समक्ष आजादी के लिए स्वतंत्र सेनानियों का योगदान पर भाषण देने जा रहा हूं। कुछ ऐसे स्वतंत्र सेनानी हुए थे, जिनको हम आज तक याद करते हैं और जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में पन्नों पर लिखा गया था। जिन्होंने हमारा इतिहास रचा और एक स्वतंत्र भारत में हमें रहने के लिए हर संभव प्रयत्न किए और वह सफल भी हुए, इसीलिए आज हम एक स्वतंत्र भारत में रह रहे हैं। आइए हम कुछ स्वतंत्र सेनानियों के बारे में बात करते हैं।

  • महात्मा गांधी

भारत को स्वतंत्र कराने के लिए महात्मा गांधी का सबसे बड़ा योगदान रहा था। उन्होंने भारत में अंग्रेजों के खिलाफ प्रमुख नेता का योगदान दिया और वह प्रमुख नेता बने जिसकी वजह से आज हम स्वतंत्र भारत में रह रहे हैं।

  • बाल गंगाधर तिलक

यह एक जानी-मानी हस्ती है। इसी के साथ एक भारतीय राष्ट्रीय वादी शिक्षक पत्रकार समाज सुधारक वकील और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख कार्यकर्ता भी रह चुके हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के पहले नेता के रूप में बाल गंगाधर तिलक को जाना जाता है। इसी के साथ ब्रिटिश अधिकारियों ने इन्हें भारतीय अशांति का जनक भी कहा था।

  • शहीद भगत सिंह

यह स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक जाने जाते हैं। यह बहुत बड़े समाजवादी थे। लोग आज भी शहीद भगत सिंह को जानते हैं। इन्होंने मरते दम तक अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। 23 वर्ष की आयु में इन्हें फांसी दे दी गई थी। इन्होंने भारत को स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए प्रेरित किया था और आधुनिक भारत में एक युवा मूर्ति बन गए।

  • जवाहरलाल नेहरू

यह हमारे भारत देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे। इन्होंने महात्मा गांधी के संरक्षण के तहत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था और एक नेता के रूप में उभरे थे।

  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर

यह एक भारतीय अर्थशास्त्री राजनीतिक और समाज सुधारक थे। इन्होंने दलित, महिलाओं, श्रमिकों के खिलाफ समाज में हो रहे भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया था और भारत की न्याय व्यवस्था को भी सही किया था। इन्होंने भारत संविधान के नियम भी बनाए थे। अपने शुरुआती करियर में यह एक अर्थशास्त्री प्रोफेसर और वकील भी रह चुके थे, आज इनको बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है।

  • चंद्रशेखर आजाद

यह आंदोलन में सोशलिस्ट आर्मी से जुड़े हुए थे। राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में 1925 काकोरी कांड में इन्होंने भाग लिया था। इसके पश्चात पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर वहां से भाग निकले थे। 27 फरवरी 1931 को संकल्प को पूरा करने के लिए इन्होंने इलाहाबाद के इसी बाग में खुद को गोली मारकर अपने प्राण त्याग दिए थे।

  • रानी लक्ष्मीबाई

अगर किसी महिला क्रांतिकारी की बात की जाए तो, रानी लक्ष्मीबाई का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह भारत की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान निभाया था। उनके साहस और धैर्य की तारीफ तो अंग्रेजो के द्वारा भी की गई थी। संघर्ष के दौरान लक्ष्मीबाई ने एक सेना का गठन भी किया था, जिसमें उन्होंने महिलाओं को युद्ध प्रशिक्षण देकर पूर्ण तरह की शिक्षा दी थी।

इसी के साथ और भी कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर, भारत को स्वतंत्र करवाया था। अगर हम बात करने लगे तो हमारा आज का भाषण समाप्त ही नहीं होगा, परंतु हमें आगे के कार्यक्रम को चालू रखते हुए मैं, अपनी वाणी को यहीं पर विराम दे रहा हूं।

धन्यवाद!

निष्कर्ष

इस आर्टिकल के जरिए हमने आपको आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान पर भाषण (Speech On Indian Freedom Fighters In Hindi)के उपलक्ष में भाषण प्रस्तुत किया है। अगर आप स्कूल या कॉलेज में या अन्य किसी भी समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इसी के साथ इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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