शरणागत में कौन सा समास है?

शरणागत शब्द में समास (Sharnagat Mein Kaun sa Samas Hai)

शरणागत में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
शरणागत में तत्पुरुष समास है।

Sharnagat Mein Kaun sa Samas Hai?
Sharnagat Shabd Mein Tatpurush Samas Hai.

शरणागत का समास विग्रह क्या है?
शरणागत का समास विग्रह शरण को आगत है।

Sharnagat ka Samas Vigrah kya hai?
Sharnagat ka Samas Vigrah Sharan Ko Aagat.

शरण को आगत का समस्त पद है?
शरणागत

तत्पुरुष की परिभाषा

तत्पुरुष समास उसे कहते है, जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है अर्थात प्रथम पद का महत्त्व दूसरे से कम होता है। यहां हम कह सकते है कि तत्पुरुष समास में द्वितीय पद गौण होता है एवं उत्तर पद की प्रधानता होती है। जैसे शरणागत इसमें “शरण को आया हुआ” में द्वितीय पद प्रधान है। प्रथम पद में बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है।

तत्पुरुष समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की आदि से पहचान की जा सकती है।

तत्पुरुष समास में कौन सापद प्रधान होता है?

तत्पुरुष समास में प्रथम पद प्रधान नहीं होता है। इसमें द्वितीय पद प्रधान होता है, जब किसी सभद को दो या दो से अधिक पदों से मिलाकर बनाए जाता है और उसमें द्वितीय पद प्रधान होता है, तब उसे हम तत्पुरुष समास कहते है। समासीकरण में मूल शब्दों से बने हुए नये शब्द का अर्थ भी भिन्न भिन्न होता है।

तत्पुरुष समास के बारे में विस्तार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें तत्पुरुष समास (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

कुछ अन्य उदहारण

  • जनप्रिय: जन को प्रिय
  • मरणासन्न: मरण को आसन्न
  • माखनचोर: माखन को चुरानेवाला
  • गिरहकट: गिरह को काटने वाला
  • कठफोड़वा: कांठ को फ़ोड़ने वाला
  • यशप्राप्त: यश को प्राप्त
  • रथचालक: रथ को चलने वाला
  • शत्रुघ्न: शत्रु को मारने वाला
  • मनोहर: मन को अच्छा लगने वाला
  • घरफूँक: घर को फूँकने वाला

तत्पुरुष समास का विग्रह

समस्त पदविग्रह
जनप्रियजन को प्रिय
माखनचोरमाखन को चुरानेवाला
मनोहरमन को अच्छा लगने वाला

ऊपर दिए गए सभी उदाहरण में तत्पुरुष समास का बोध होता है। जैसा कि आप देख सकते हैं यहां सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है और पूर्वपद गौण है। जब इनका समास विग्रह किया जाता है तो शब्दों के बीच में से योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

तत्पुरुष समास के भेद

तत्पुरुष समास में 6 तरह के भेद होते है, जिन्हें कारक चिन्हों के अनुसार विभाजित किया जाता है।

इसमें प्रथम तीन, कर्म तत्पुरुष समास, करण तत्पुरुष समास और सम्प्रदान तत्पुरुष समास आते है। इसके बाद तीन और है। अपादान तत्पुरुष समास, सम्बन्ध तत्पुरुष समास और अधिकरण तत्पुरुष समास यह सभी 6 तत्पुरुष समास के भेद होते है।

महत्वपूर्ण शब्दों में समास और समास विग्रह

आशुतोषशांतिदूतघर-घर
आकंठचंद्रशेखरआत्मनिर्भर
दीर्घायुसप्तशतीधर्माधर्म

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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