कनफटा में कौन सा समास है?

कनफटा शब्द में समास (Kanfata Mein Kaun sa Samas Hai)

कनफटा में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
कनफटा
में बहुब्रीहि समास है।

Kanfata Mein Kaun sa Samas Hai?
Kanfata Shabd mein Bahuvrihi Samas Hai.

कनफटा का समास विग्रह क्या है?
कनफटा का समास विग्रह जिसके सहस्त्र “हजार” आनन ” मुँह” हैं, विष्णु

Kanfata ka Samas Vigrah kya hai?
Kanfata ka Samas Vigrah Jiske sehstra
“Hazar” aanan “Munh” hai . Ex- Vishnu, Sheshnag

 जिसके सहस्त्र “हजार” आनन “मुँह” हैं -विष्णु, शेषनाग  का समस्त पद है?
कनफटा

बहुब्रीहि समास की परिभाषा

बहुब्रीहि समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं। यहां पर दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद के महत्व को दर्शाते हैं, जहां पर दोनों पदों का महत्त्व ना हो और तीसरे पद को महत्व दिया जाता हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होते हैं। उदहारण के लिए जैसे- दशानन इसका अर्थ है दस है मुख जिसके अर्थात् रावण, यहां पर रावण मुख्य पद के रूप है।

बहुब्रीहि समास में कौन सा पद प्रधान होता है?

बहुब्रीहि समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं, यहां दोनों पद अप्रधान होते हैं। इनके द्वारा बनने वाला तीसरा पद प्रधान होता है, जिसमें दोनों पद प्रधान नहीं हो, बहुब्रीहि समास के अंतर्गत आयेंगे।

बहुब्रीहि समास के बारे में विस्तार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बहुव्रीहि समास (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

कुछ अन्य उदहारण

  • राजरोग :– रोगों में राजा -असाध्य रोग, यक्ष्मा
  • पुण्डरीकाक्ष :– कमल के समान आँखें है जिसकी
  • वक्रतुण्ड :– वक्र है तुण्ड जिसकी -गणेश
  • त्नगर्भा : – वह जिसके गर्भ में रत्न हैं -पृथ्वी
  • रतिकांत – वह जो रति का कांत पति है -कामदेव
  • दशरथनंदन :- वह जो रशरथ के नंदन है, राम
  • दशमुख :- दस हैं मुख जिसके, रावण
  • दत्तचित्त :- चित्त को किसी काम में दिया हुआ, तल्लीन
  • पद्मासना :– पद्म है आसन जिसक
  • नीलकण्ठ: – नीला है कण्ठ जिसका
  • दत्तचित्त :- चित्त को किसी काम में दिया हुआ, तल्लीन
  • त्रिलोचन :- तीन है लोचन जिसके शिव
  • रेवतीरमरण – वह जो रेवती के साथ रमण करते हैं -बलराम
  • छिन्नमस्ता :- जिसका मस्तक छिन्न हो देवी का एक रूप
  • चारपाई :- जिसके चार पाए हों, खाटरघुपति – वह जो रघु के पति हैं -राम

बहुब्रीहि समास का विग्रह

समस्त पदविग्रह
शेषशायीजो शेष नाग पर शयन करते हैं अर्थात विष्णु
विषधरजिसने विष का पान किया है अर्थात शिव
रतिकांतवह जो रति का पति है अर्थात – कामदेव
मंदोदरीजिसका उदर मंद हो वह स्त्री अर्थात – रावण की पत्नी

इन सभी पदों में बहुब्रीहि समास का विग्रह आता है। यदि यहां दोनों पद मुख्य होते तो यह बहुब्रीहि समास नहीं कहलाता।

महत्वपूर्ण शब्दों में समास और समास विग्रह

आकंठचंद्रशेखरमाँ-बाप
शांतिदूतपूर्व-पश्चिमआत्मविश्वास
दीर्घायुधर्माधर्मआत्मनिर्भर

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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