धर्माधर्म में कौन सा समास है?

धर्माधर्म शब्द में समास (Dharmadharam Mein Kaun sa Samas Hai)

धर्माधर्म में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
धर्माधर्म में द्वंद्व समास है।

Dharmadharam Mein Kaun sa Samas Hai?
Dharmadharam Shabd mein Dwand Samas Hai.

धर्माधर्म का समास विग्रह क्या है?
धर्माधर्म का समास विग्रह धर्म और अधर्म है।

Dharmadharam ka Samas Vigrah kya hai?
Dharam aur adharam

धर्म और अधर्म का समस्त पद है?
धर्माधर्म

इस समास में दोनों पद धर्म और अधर्म प्रधान हैं। दोनों पदों का संयोजक शब्द ‘और’ लुप्त है अतः धर्माधर्म में द्वन्द्व समास है।

जब दोनों ही पद प्रधान हैं एवं जब दोनों पदों को जोड़ा जाता है तब बीच में से ‘और’ योजक लुप्त हो जाता है। तब यह द्वंद समास होगा।

द्वंद्व समास कि भी बिलकुल ऐसी ही विशेषताएं होती हैं जिनमें दोनों पद प्रधान होते हैं एवं जोड़ने पर योजक लुप्त हो जाते हैं।

द्वंद समास की परिभाषा

जिस समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है।

जैसे

ऊंच-नीच: ऊँच और नीच
खरा-खोटा: खरा और खोटा
रुपया-पैसा: रुपया और पैसा
मार-पीट: मार और पीट
माता-पिता: माता और पिता
दूध-दही: दूध और दही

जैसा कि हम ऊपर दिए गए कुछ उदाहरणों में देख सकते हैं कि ऊंच-नीच, खरा-खोटा, रूपया-पैसा, मार-पीट, माता-पिता, दूध-दही इत्यादि समस्त्पदों में दोनों ही पद प्रधान हैं एवं जब दोनों पदों को जोड़ा जाता है तब बीच में से ‘और’ योजक लुप्त हो जाता है। अतः यह उदाहरण द्वंद्व समास के अंतर्गत आयेंगे।

द्वंद्व समास के बारे में विस्तार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें द्वंद्व समास (परिभाषा और उदाहरण)

परीक्षा में यह भी पूछे जा सकते हैं

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