कृष्णार्जुन में कौन सा समास है?

कृष्णार्जुन में समास है (krishanarjun Mein Kaun sa Samas Hai)

कृष्णार्जुन में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
कृष्णार्जुन में द्वंद्व समास है।

krishanarjun Mein Kaun sa Samas Hai?
krishanarjun
Shabd mein Dwand Samas Hai.

कृष्णार्जुन का समास विग्रह क्या है?
कृष्णार्जुन का समास विग्रह कृष्ण और अर्जुन
 है।

krishan Arjun ka Samas Vigrah kya hai?
krishan or Arjun

कृष्ण और अर्जुन का समस्त पद है?
कृष्णार्जुन

द्वंद्व की परिभाषा

द्वंद्व समास हिंदी व्याकरण में बहुत सारे भाग है। जिसमें समास मुख्य रूप से शामिल है। समास बहुत ही बड़ा हिस्सा हिंदी व्याकरण का माना जाता है। हिंदी व्याकरण में संज्ञासर्वनामविशेषण के साथ-साथ समास भी मुख्य रूप से हिंदी व्याकरण का अंग है।

समास हिंदी व्याकरण की एक प्रमुख शाखा है। आज यहां पर समास के एक भाग द्वंद्व समास के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले है। यहां पर हम द्वंद्व समास को निम्न स्टेप्स में जानेंगे:

  • द्वंद्व समास किसे कहते है? (Dwand Samas in Hindi)
  • द्वंद्व समास के उदाहरण (Dwand Samas ke Udaharan)

समास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां पर क्लिक करें समास (परिभाषा, भेद और उदाहरण)

द्वंद्व समास किसे कहते है?

द्वंद्व समास की परिभाषा: ऐसे समास शब्द जिनमें समस्त या दोनों पद प्रधान हो और जब उन शब्दों का समास किया जाता है तो दोनों पदों को मिलाते समय और, अथवा, या, एवं इत्यादि योजक शब्दों का उपयोग होता है, उस समास द्वंद समास कहा जाता है।

द्वंद्व समास के उदाहरण

Dwand Samas Examples in Hindi

  • राजा-रंक: राजा और रंक
  • दिन-रात: दिन और रात
  • अपना- पराया: अपना और पराया
  • छोटा-बड़ा: छोटा और बड़ा
  • भला-बुरा: भला और बुरा
  • काला-गोरा: काला और गोरा
  • देश-विदेश: देश और विदेश
  • सम्मान-अपमान: सम्मान और अपमान
  • सही-गलत: सही और गलत
  • अन्न-जल: अन्न और जल

उदाहरण के रूप में ऊपर जो वाक्य दिखाए गए हैं, इन वाक्य में देख सकते हैं कि दोनों पद प्रधान है और दोनों पदों को योजक चिन्ह के माध्यम से जोड़ा गया है।

जब योजक चिन्ह लुप्त हो जाता है तो और शब्द का प्रयोग दिखाई दे रहा है। इन उदाहरण में समास के बनने पर योजक चीन्ह लुप्त हो गया है। अतः यह सभी उदाहरण द्वंद समास के अंतर्गत आएंगे।

  1. दाल-रोटी: दाल और रोटी
  2. पाप-पुण्य: पाप और पुण्य
  3. राधा-कृष्णा: राधा और कृष्णा
  4. सीता-राम: सीता और राम
  5. ऊंच-नीच: ऊचं और नीच
  6. रुपया-पैसा: रूपया और पैसा
  7. खरा-कड़वा: खरा और कड़वा

ऊपर दिए गए सभी उदाहरण में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि यहां पर योजक चिन्ह के साथ दोनों पद प्रधान है और जब समाज किया जाता है तब योजक चेन्ह की जगह पर और शब्द का प्रयोग हुआ है। अतः ऊपर दिए गए सभी उदाहरण द्वंद समास के अंतर्गत आएंगे।

हमने क्या सिखा?

हमने यहां पर द्वंद्व समास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की है। द्वंद्व समास की परिभाषा (Dwand Samas ki Paribhasha) और द्वंद्व समास के उदाहरण को बहुत ही गहराई से समझा है। यदि आपका कोई सवाल है तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

महत्वपूर्ण शब्दों में समास और समास विग्रह

नीलकमलधर्माधर्मधर्मांध
प्रतिदिनघर-घरलम्बोदर
पीताम्बरमाता-पिताचक्रपाणि

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