समचतुर्भुज किसे कहते है? (परिभाषा, क्षेत्रफल, परिमाप, विशेषता, नियम, सूत्र और उदाहरण)

एक ऐसी आकृति जिसके सभी भुजाएं एक समान हो हम उसे समचतुर्भुज कहते है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण आकृति है। गणित में जिसके बारे में हर किसी को जानकारी होनी चाहिए ताकि रोजमर्रा के जीवन में पाए जाने वाले साधारण वस्तुओं के बारे में विस्तार पूर्वक अध्ययन किया जा सके।

इसके अलावा समचतुर्भुज का क्षेत्रफल, परिमाप, विशेषता, नियम, सूत्र सरकारी नौकरी पाने में और अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आपने ऐसी आकृति अपने रोजमर्रा के जीवन में बहुत बार देखी होगी जहां आकृति में मौजूद सभी की लंबाई एक समान होती है।

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नौकरी की तैयारी करने वाले या उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति हैं तो आपको इस महत्वपूर्ण गणित के अध्याय के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जिसे सरल शब्दों में समझाने के लिए आज के डेट में समचतुर्भुज किसे कहते है? के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई है। 

समचतुर्भुज किसे कहते है? (परिभाषा, क्षेत्रफल, परिमाप, विशेषता, नियम, सूत्र और उदाहरण)

समचतुर्भुज की परिभाषा

जैसा कि हमने आपको बताया समचतुर्भुज एक महत्वपूर्ण अध्याय है क्योंकि यह एक ऐसी आकृति होती है, जिसमें सभी भुजाएं एक समान होती है। यह आकृति वर्ग की तरह होती है। मगर उससे भिन्न गुणधर्म की होती है। एक समचतुर्भुज को परिभाषित करते हुए हम कहेंगे कि ऐसी कोई भी आकृति जिस की सभी भुजाएं एक दूसरे के समान हो हम उसे समचतुर्भुज कहेंगे।

समचतुर्भुज में कोण की कोई परिभाषित प्रक्रिया नहीं होती। समचतुर्भुज को हम केवल उन सभी आकृतियों को रखा जाता है, जिनकी सभी भुजाएं एक समान होती है।

समचतुर्भुज के गुणधर्म

समचतुर्भुज की परिभाषा के अलावा उसे और भी अच्छे से समझने के लिए आपको इसके गुण धर्म को समझने की आवश्यकता है, जिसकी संक्षिप्त सूची नीचे दी गई है।

  • समचतुर्भुज की सभी भुजाएं समान होती है।
  • समचतुर्भुज के विकर्ण आपस में समद्विभाजक होते हैं। 
  • अगर किसी समचतुर्भुज के सभी कोण को 90 डिग्री कर दिया जाए, तो वह एक वर्ग बन जाएगा। 
  • समचतुर्भुज के दो आसन्न कोण का योग 1 पूरक कोण होता है और उसके सभी कोणों का योग 360 डिग्री होता है।
  • एक समचतुर्भुज में चारों भुजाएं सर्वांगसम होती है, एवं दो भुजाएं समदिबाहु त्रिभुज बनाती हैं। 
  • इनके विकर्ण की लंबाई आपस में बराबर नहीं होती है।

समचतुर्भुज का क्षेत्रफल

ऊपर बताएँ गए गुणधर्म और परिभाषा से हम किसी भी आकृति को समचतुर्भुज मानते है और इसके क्षेत्रफल से तात्पर्य यह होता है की यह आकृति कितने जगह को छेक रही है। एक समचतुर्भुज में दो विकर्ण होते है। उन दोनों विकर्ण को गुना करके 2 से भाग देने पर हमें समचतुर्भुज का क्षेत्रफल पता चलता है। 

  • समचतुर्भुज का क्षेत्रफल = विकरण 1 X विकर्ण 2 / 2

उदाहरण – अगर किसी समचतुर्भुज के विकर्ण की लंबाई 4 सेंटीमीटर है और दूसरे विक्रम की लंबाई 2 सेंटीमीटर है तो क्षेत्रफल कितना होगा?  

जैसा कि हम जानते हैं किसी भी समचतुर्भुज का क्षेत्रफल को ज्ञात करने के लिए दोनों विक्रण को गुणा करके 2 से भाग देने की आवश्यकता होती है तो हम यह कह सकते है – 

समचतुर्भुज का क्षेत्रफल = ½ X 2 X 4 = 4 cm^2

समचतुर्भुज का परिमाप

किसी भी आकृति का परिमाप यह दर्शाता है कि कितनी दूरी पर है। अगर आपको किसी समचतुर्भुज के बाउंड्री की दूरी पता करनी है, तो उसका परिमाप पता करना होगा। किसी समचतुर्भुज के परिमाप को पता करने के लिए आपको सभी भुजाओं का योग करना होगा।

  • समचतुर्भुज का परिमाप = 4 X भुजा

उदाहरण – अगर किसी समचतुर्भुज की एक भुजा 5 सेंटीमीटर की है तो उसका परिमाप कितना होगा?

जैसा कि हम जानते हैं समचतुर्भुज के सभी भुजाएं एक समान होती है जिस वजह से सभी दोस्तों को जोड़ने या किसी एक भुजा को 4 से गुणा करने पर हमें उस समचतुर्भुज का परिणाम होता है – 

समचतुर्भुज का परिमाप = 4 X 5 = 20 cm

 FAQ

समचतुर्भुज का क्षेत्रफल?

किसी समचतुर्भुज के विकर्ण आपको गुनाह करके 2 से भाग देने पर हमें समचतुर्भुज का क्षेत्रफल प्राप्त होता है। 

समचतुर्भुज किसे कहते हैं?

समचतुर्भुज एक ऐसी आकृति होती है, जिसमें सभी भुजाओं का मान समान होता है। मगर उनके कोण समान नहीं होते हैं। ना ही समकोण बनाते है। दो विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजक करते हैं मगर उन दोनों के विकर्ण की लंबाई एक समान नहीं होती है। ऐसे आकृति को हम समचतुर्भुज करते है। 

समचतुर्भुज का परिमाप क्या होता है?

समचतुर्भुज की सभी भुजाएं एक समान होती है।  इस वजह से सभी भुजाओं को जोड़ने पर या किसी एक भुजा के मान को 4 से गुणा करने पर हमें समझा त्रिभुज का परिमाप मिलता है। 

समचतुर्भुज में समकोण कहां बनता है?

समचतुर्भुज की कोई भी भुजा आपस में बराबर नहीं होती ना ही वह आपस में समकोण बनाते है। मगर किसी भी समचतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को 90 डिग्री पर काटते हैं। जिसे हम कह सकते हैं की किसी भी समचतुर्भुज के विकर्ण आपस में संपूर्ण बनाते हैं। 

निष्कर्ष 

अपने-अपने आज के इस लेख में आप सभी लोगों को समचतुर्भुज का क्षेत्रफल, परिमाप, विशेषता, नियम एवं सूत्र के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की हुई है। हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई आज का यह टेक्नोमेट्री का लेख आप लोगों के लिए काफी हेल्पफुल और यूज़फुल साबित हुआ होगा।

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