रस्सी कूदने के फायदे, सही तरीका, समय और नियम

रस्सी कूद एक खेल में प्रयोग किए जाने वाला एक रस्सी होता है। रस्सी कूद एक प्रकार का खेल होता है, जिसमें व्यक्ति अपने पैर के नीचे से और अपने सर के ऊपर से रस्सी को घुमाते हुए कुदते हैं। रस्सी कूदने में एक अकेला व्यक्ति भी खेल सकता है और वह दो तीन व्यक्तियों के साथ भी खेल सकता है।

रस्सी कूद के बहुत सारे नाम है जिसमें सिंगल फ़्रीस्टाइल, सिंगल स्पीड, पेयर, थ्री-पर्सन स्पीड और थ्री-पर्सन फ़्रीस्टाइल शामिल है। रस्सी कूद लोकप्रिय तब हुआ, जब 2020 में करोना वायरस के कारण लोगों को बाहर जाना बंद कर दिया गया। जिससे लोग ना ही जिम जा सकते थे और ना ही सुबह वॉक पर जा सकते हैं।

Rassi Kudne Ke Fayde Aur Nuksan

इस कारण लोगों को वर्कआउट करने में परेशानी होने लगी तो, उसने सबसे अच्छा वर्कआउट रस्सी कूद को बना लिया।
इसीलिए रस्सी कूद एक सबसे अच्छा वर्कआउट बन गया, जिसमें लोग घर पर आसानी से अपना वर्कआउट कर सकते थे और अपने पूरी बॉडी को तंदुरुस्त बना सकते थे।

तो आज के इस लेख में हम जानेंगे की रस्सी कूद के क्या-क्या फायदे होते हैं? और इसे कैसे कूदना चाहिए? और रस्सी कूदने का सही समय क्या होता है? उसके बारे में आपको बताएँगे तो कृपया करके आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

रस्सी कूदने के फायदे, सही तरीका, समय और नियम

रस्सी कूदना क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति एक रस्सी के ऊपर अपने चारों और घुमाते हुए कूदता है, यानी कि जब रस्सी को अपने पैरों के नीचे से ले जाते हुए अपने सर के ऊपर घुमाते हुए फिर उस पर कूदता है और लगातार यह कर्म चलते रहता है तो इसे रस्सी कूद कहा जाता है।

रस्सी कूद एक प्रकार का खेल होता है। रस्सी कूद की खोज 16 वीं शताब्दी में आदिवासियों के द्वारा की गई थी जब आदिवासी लताओं के द्वारा कूदते हुए देखे गए थे। 17 वी शताब्दी में यूरोपीय देशों में रस्सी कूद शुरू किया गया था और उस समय सिर्फ लड़कों को ही रस्सी कूद के लिए मान्यता दी गई थी, क्योंकि लड़कियों के लिए उस समय रस्सी कूद अशोभनीय मानी गई थी।

लेकिन कुछ समय के बाद 18 वीं शताब्दी में लड़कियों के लिए भी रस्सी कूद करना शुरू कर दिया गया था और कई स्कूलों में भी रस्सी कूद एक प्रतियोगिता के रूप में खिलाया जाता है। 19वीं शताब्दी में रस्सी कूदना केवल घरों में बल्कि बाहर हों में भी लोग जाकर खेलने लगे और स्कूल में भी रस्सी कूद की मानता बढ़ती गई।

लोग इसे दैनिक खेल में शामिल कर लिए और स्कूलों में कॉलेजों में इसे एक प्रतियोगिता के रूप में बच्चों को सिखाया जाने लगा क्योंकि रस्सी कूद एक ऐसा खेल है, जिसमें व्यक्ति का केवल मन बल्कि शरीर भी संतुलित हो जाता है और इस खेल के माध्यम से जो पसीना निकलता है, उसे शरीर के सारे टॉक्सिक भी बाहर निकल जाते हैं और यह बहुत ही आसान और सावधानी से खेला जाने वाला एक खेल है।

रस्सी कूदने के फायदे

रस्सी कूदने के कई फायदे होते हैं जो कि निम्न है।

  • रस्सी कूदने से आपका बेहतरीन शरीर की कैलोरी कम हो जाती है। रस्सी कूदना एक तरह का काडियो और एरोबिक एक्सरसाइज है। रस्सी कूदने से आपके स्तन टोन होते हैं। आपके कमर के हिस्से की चर्बी कम होती है। आप की सहनशक्ति बढ़ती है। आपके फेफड़ों की और श्वास लेने की प्रक्रिया में सुधार आता है।
  • रस्सी कूदने से ना केवल आपका वजन कम होता है बल्कि रस्सी कूदने से आपकी पाचन प्रकिया में भी सुधार आता है, इसलिए रस्सी कूदना हमारे दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए।
  • रस्सी कूदने से हमारे हृदय संबंधी रोग में सुधार आता है। रस्सी कूदना एक सबसे अच्छा व्यायाम है और इससे हमारे हृदय गति में वृद्धि होती है और हृदय गति में संतुलित रूप से काम करने की क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे कि हृदय रोग या स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • रस्सी कूदने से हमारे फोकस करने की शक्ति में वृद्धि होती है अर्थात हम किसी एक विषय पर अपना ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। जब हम रस्सी कूदते हैं तो, हमारा ध्यान रस्सी के अपने नीचे से निकालने पर रहता है। जिससे कि हमारा ध्यान आकर्षित होता है।
  • यह हमारा एक तरह का एक्सरसाइज हो जाता है, जिससे कि हम अपने ध्यान को एक जगह केंद्रित कर पाते हैं और यही ध्यान केंद्रित करने की शक्ति ही हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है।
  • रस्सी कूदने से हमारा मन शांत होता है और हमारा एकाग्रता की शक्ति में वृद्धि होती है, जिससे कि हम किसी भी कार्य को पूरे मन से करते हैं और उसे पूरा करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि हमें अपने दैनिक दिनचर्या में एक कोई भी एक्सरसाइज करना चाहिए, जिससे कि हमारा मन हमारी शरीर को शांति मिले और वह सुचारू रूप से कार्य करें। तो सबसे अच्छा एक्सरसाइज रस्सी कूदना है, जिसे हम सभी को करना चाहिए और अपनी एकाग्रता की शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
  • रस्सी कूदने से हमारी सहनशक्ति में सुधार आता है। जब हम एक्सरसाइज करते हैं, तो हम किसी कार्य को करते हैं और उसके लिए अपने अंदर उर्जा पैदा करते हैं। जिससे कि हम हम अपने अंदर एक ऐसी शक्ति को जगाते हैं, जिससे कि हम किसी कार्य को पूरे मन से और पूरे तन से कर सकें उसमें अपना सब कुछ लगा सके। जो कि एक सहनशक्ति है इस प्रकार रस्सी कूदने से हमारे अंदर किसी कार्य को करने का उसे पूरा करने का सहनशक्ति उत्पन्न होता है।
  • रस्सी कूदने से हम अपने स्टैमिना को बढ़ा सकते हैं और जो थकान हमें महसूस होती है उन सभी चीजों से छुटकारा पा सकते हैं। जब हम रस्सी कूदना स्टार्ट करते हैं तो हम धीरे-धीरे ऐसा कार्य प्रारंभ करते हैं, जिससे कि हमारे अंदर एक सहनशक्ति प्रारंभ होती है और हम नियमित रूप से रस्सी कूदते हैं, तो हमारे अंदर वह सहनशक्ति बढ़ती जाती है।
  • जब हम इस अभ्यास को लगातार करते जाते हैं तो हमारे अंदर जो आलस्य होता है, जिससे कि हम थकान महसूस करते हैं वह दूर हो जाती है क्योंकि रस्सी कूदने से हमारे पूरे शरीर में एक ऊर्जा प्रवाह होता है। जिससे कि हमें ताजगी का अनुभव होता है और इसी कारण हमारे अंदर जो थकान होता है वह दूर हो जाता है और किसी कार्य को करने की जो शक्ति होती है उस में वृद्धि होती है। जिस वजह से हमारे स्टैमिना में भी वृद्धि हो जाती है, इसीलिए रस्सी कूद एक बहुत ही आसान और सुविधाजनक एक्सरसाइज है।
  • रस्सी कूदने से हमारे शरीर के लचीलापन में वृद्धि होती है क्योंकि जब हम रस्सी कूदते हैं तो हमारे शरीर में जहां-जहां चर्बी जमीन होती है, वह सभी कम होती है। जिससे कि हमारा शरीर लचीला बने लगता है और रस्सी कूदने से हमारी मांसपेशियां भी मजबूत होती है और चर्बी की वजह से जो उन्हें परेशानी हो रही होती है, उससे भी उसे आराम मिलता है और जितने भी खेल से संबंधित खिलाड़ी है, चाहे वह क्रिकेटर हो, चाहे वह किसी भी फील्ड के खिलाड़ी हो, सभी अपने वर्कआउट में रस्सी कूदना शामिल जरूर करते हैं।
  • रस्सी कूदने से हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुधारते हैं। जब हम रस्सी कूदते हैं, तो हम थोड़ी देर के लिए अपनी सारी टेंशन को भूल जाते हैं। जिससे कि हमारा जो तनाव होता है, वह कम होता और रस्सी कूदने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह तेजी से होता है और हमें ऑक्सीजन भी ज्यादा चाहिए होता है और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी तेजी से इधर-उधर शरीर के सभी अंगों में जाने लगती है। जिससे कि मस्तिष्क में भी रक्त परिसंचरण की प्रक्रिया में वृद्धि होती है और उसमें सुधार होता है।
  • रस्सी कूदने से हमारा मन शांत होता है। हम चिंता से दूर होते हैं। कुछ समय के लिए हम सब कुछ भूल कर बस रस्सी कूदते हैं, जिससे कि हमारा सारा टेंशन खत्म हो जाता है और हमारा जो मानसिक स्वास्थ होता है, वह ठीक हो जाता है।
  • रस्सी कूद कर आप अपने पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं। जब कोई भी व्यक्ति वजन कम करना चाहता है, तो उसका सबसे बड़ा जो टेंशन होता है, वह पेट की चर्बी को कम करना होता है और जब हम रस्सी कूदते हैं, तो हमारा सबसे ज्यादा असर हमारे पेट की चर्बी पर होता है और हमारी पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है। इसीलिए रस्सी कूद कर आसानी से अपना पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं।
  • रस्सी कूदने से हमारे हड्डियां भी मजबूत होती है। जब हम रस्सी कूदते हैं, तो ना केवल हमारे शरीर का कार्य करता है हमारा हाथ भी कार्य करता और जब हम रस्सी कूदते हैं, तो उसमें हड्डियों की भी ताकत लगती है और इससे हड्डियां की घनत्व में वृद्धि होती है इसीलिए रस्सी कूदने से हड्डियां मजबूत होती है।
  • रस्सी कूदने से आपकी त्वचा में चमक आता है जब हम रस्सी कूदते हैं तो हमारे शरीर से पसीना निकलता है। जो कि हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिक चीजों को बाहर निकलता है। जिससे कि हमारा शरीर साफ हो जाता है इसीलिए कहा जाता है कि हमें अपने दैनिक जीवन में कोई भी एक्सरसाइज शामिल करना चाहिए। जिससे कि हमें स्वस्थ और चमकती त्वचा मिलती है और रस्सी कूदना तो बहुत ही आसान है और घर पर किया जा सकता है इसीलिए रस्सी कूद कर आप अपनी त्वचा को भी चमका सकते हैं।
  • रस्सी कूदने से आप अपने सांस लेने की प्रक्रिया में भी सुधार ला सकते हैं। जब हम रस्सी कूदते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर सांस लेने की जो प्रक्रिया होती है वह तेजी से होती है और उसमें सुधार होती है, इसीलिए रस्सी कूदने से हमारे शरीर में सांस लेने की जो परेशानी होती है वह दूर हो जाती है और हमारे फेफड़े की क्षमता बढ़ जाती है और हमारे शरीर में जो रक्त संचार होता है वह भी सुचारू रूप से कार्य करने लगता है इसीलिए रस्सी कूदने से हमारे स्वास संबंधी कार्य में सुधार होता है।

रस्सी कूदने से आप अपनी कितनी कैलोरी को कम कर सकते हैं?

यदि आप रोजाना रस्सी कूदते हैं, तो आप 1 घंटे में ही 200 से लेकर 300 तक की कैलोरी को कम कर सकते हैं। यदि आप शुरुआत कर रहे हैं, रस्सी कूदने का तो आपको 30 मिनट की रस्सी कूदना चाहिए।

बहुत लोग रस्सी कूदने बहुत जल्दबाजी हैं, लेकिन जो लोग शुरुआती होते हैं उन्हें रस्सी धीरे-धीरे ही कूदनी चाहिए और जो इसमें अभ्यासरथ हो जाते हैं, उन्हें अपनी मर्जी के अनुसार तेजी से भी रस्सी कूद कर सकते हैं।

रस्सी कूद का सही समय

रस्सी कूद का जो सबसे अच्छा समय होता है या यूं कहें कि किसी भी वर्कआउट का जो सबसे अच्छा समय होता है। वह सुबह का समय होता है या फिर शाम का समय होता है। लेकिन सुबह को ज्यादा ही लोग पसंद करते हैं क्योंकि सुबह जब आप किसी कार्य को करते हैं तो आपका आलस और थकान दूर हो जाता है और आप दिन भर ऊर्जावान रहते हैं।

इसीलिए सुबह के समय लोगों को कोई भी एक्सरसाइज करना चाहिए और जिन लोगों के पास सुबह का समय ना हो वह शाम के समय रस्सी कूद कर सकते हैं।

रस्सी कूद करते समय हमें कुछ बातों की सावधानी भी रखनी चाहिए

  • रस्सी कूद शुरू करने के पहले सबसे पहले आपको जूता खरीद लेना चाहिए क्योंकि अगर आप जूते नहीं पहनोगे तो रस्सी कूद में आपको पैरों की चोट काफी लगे और आपके पैर में काफी चोट लगने की संभावना रह सकती। इसीलिए जो लोग भी रस्सी कूदने की सोच रहे हैं वह सबसे पहले एक जूता खरीद ले।
  • रस्सी कूद शुरू करने के पहले हमें कम से कम 10 मिनट का वार्मअप करना चाहिए क्योंकि हमारा शरीर सोया हुआ रहता है और अचानक से हम उसे किसी कार्य को कर दें तो हमारे शरीर को झटका लग सकता है। इसीलिए हमें सबसे पहले अपने शरीर को जगाना रहता है। इसीलिए सबसे पहले हमें वार्मअप करना चाहिए उसके बाद रस्सी कूदना चाहिए।
  • रस्सी कूदने के पहले और बाद में हमें प्रोटीन युक्त कुछ भी पेय पदार्थ लेना चाहिए क्योंकि इससे हमारा शरीर पसीने के निकलने से डिहाइड्रेट नहीं होगा। इसीलिए हमें संतुलित रूप में पानी पीते रहना चाहिए।
  • खास करके जो महिलाएं रस्सी कूदना चाहती है उनके लिए अपने स्तनों को सहारा देने के लिए sport Bra पहनना बहुत ही जरूरी है, नहीं तो यह आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है।
  • रस्सी कूद करने के पहले आप रस्सी कूद के सही तरीके को सीख ले नहीं तो यह एक्सरसाइज आपको चोट लगने की संभावना को बढ़ा सकती है और हो सकता है कि आपके पैर में मोच भी आ सकती है। इसीलिए रस्सी कूदने के पहले रस्सी कैसे कूदा जाता है? इसकी संपूर्ण जानकारी ले लेनी चाहिए।
  • जब आप रस्सी कूद रहे हो या कोई भी व्यायाम कर रहे हो, तो आपको सबसे पहले अपना सभी ध्यान अपने व्यायाम पर लगाना चाहिए यानी कि आपको ध्यान केंद्रित करने चाहिए। अपने व्यायाम पर ना कि दूसरे टेंशन पर या फिर आपको कोई सिर दर्द हो या चोट हो उन सभी को साइड रखकर आपको अपना एक्सरसाइज करना चाहिए। तभी आप सुचारू रूप से अपने एक्सरसाइज को कर पाते हैं और अपने ध्यान को एक जगह केंद्रित कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।
  • रस्सी कूदने का जो जगह होता है वह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है तो अगर रस्सी कूदने की सतह समतल ना हो, ऊपर नीचे ना हो तो, उसे के हमें रस्सी कूदने नहीं चाहिए। रस्सी कूदने के लिए कंक्रीट जैसे तत्वों से बचना चाहिए। क्योंकि इससे चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है लकड़ी या रबड़ जैसे सतह पर भी हमें रस्सी कूदने नहीं चाहिए।
  • यदि आपके पास कोई विकल्प ना हो और आपके पास कठोर सतह ही बची हो तो आप अपने कसरत की तीव्रता को कम करें जिससे कि आपके पैर में कम चोट लगे और पैर फैक्चर होने की संभावना कम हो जाए।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार से चोट लगी हो या आपका किसी भी प्रकार से कोई एक्सीडेंट हुआ हो या फिर संबंधी कोई भी बीमारी हो तो आपको रस्सी कूदने से बचना चाहिए।
  • जब आप रस्सी कूदना स्टार्ट करते हैं तो आपके मांसपेशियों में एक अलग सा खिंचाव होने लगता है और जिससे कि वहां वसा कम होने लगती है लेकिन जब आप रस्सी कूदना या कोई भी एक्सरसाइज छोड़ देते हैं तो आपके मांसपेशियों में जकड़न होने लगती है। तो इसके लिए आपको स्ट्रैचिंग करना चाहिए। लेकिन लोग स्ट्रैचिंग करना बहुत ही मामूली समझते हैं, उसे नहीं करते हैं। तो जो लोग किसी भी कारणवश अपना वर्कआउट या फिर रस्सी कूदना नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए स्ट्रैचिंग बहुत ही अच्छा विकल्प है और उन्हें रोज थोड़ा थोड़ा स्ट्रैचिंग कर लेना चाहिए। जिससे कि उसके शरीर को भी आराम मिले और उनका दिन ऊर्जावान हो।

रस्सी कूदने का सही तरीका

रस्सी कूदना तो हर कोई चाहता है और सोचता है कि हम सभी रस्सी कूदना जानते हैं लेकिन जो व्यक्ति रस्सी कूदने का सही तरीका नहीं जानता है तो अगर वह रस्सी कूदेगा तो उसके चोट को उसके पैर को बहुत चोट लग सकती है।
इसीलिए हमें रस्सी कूदने के पहले रस्सी कूदने की सही तरीके को जानना बेहद ही जरूरी है जो कि इस प्रकार है:

  • सबसे पहले हम जिस रस्सी का चयन कर रहे हैं वह हल्की होनी चाहिए। अगर वह हल्की नहीं हुई तो वह हमारे हाथों में दर्द दे सकती है और उसे घुमाने में भी काफी मेहनत लगेगी। इसीलिए जो भी रस्सी का चयन करें वह हल्की होनी चाहिए।
  • अगर आप शुरुआत ही कर रहे हैं रस्सी कूदने का तो आप प्लास्टिक वाली रस्सी की चयन बिल्कुल भी ना करें। क्योंकि प्लास्टिक वाली जो रस्सी होती है उन को कंट्रोल कर करना बेहद ही मुश्किल होता है और वह बहुत तेजी से घूमने लगता है। इसीलिए हमें मध्यम भार वाले व्यक्ति का चयन करना चाहिए।
  • रस्सी कूदने वाली रस्सी का लंबाई कम से कम 3 फीट होनी चाहिए।
  • रस्सी कूदने की शुरुआत करें तो 30 मिनट जम्प करें जब यानी अपने दोनों पैर को उठाएं और नीचे करें दोनों पैर से कुदे। फिर 60 सेकंड रेस्ट ले और फिर रस्सी कूदना प्रारंभ करें और इस प्रक्रिया को 9 बार करने की कोशिश करें।
  • जब आपका रस्सी कूदने कुछ दिन बीत जाए, तो उसके बाद आप अपने पैरों को दौड़ के कदमताल यानी कि एक पैर आगे और एक पैर पीछे करके रस्सी से कूदे 30 सेकंड के 30 मिनट के लिए ऐसा करने से आपको अपने वजन को आगे और पीछे करने का अभ्यास होगा और इस अभ्यास को करने के बाद आप 90 सेकंड का रेस्ट ले और इस प्रक्रिया को 4 बार करने की कोशिश करें।
  • जब आप रस्सी कूदने में थोड़ा सा अभ्यासरत हो गए हैं यानी कि आप की रस्सी कूदने कुछ महीने बीत गए हैं। तब आप अपने रस्सी कूद में विभिन्न विभिन्न तरीके को शामिल कर सकते हैं। जैसे कि 30 मिनट रस्सी कूदने दे यानी कि जंप करें और 15 सेकंड का आराम ले। उसके बाद जब आप रस्सी कूद, तो जंपिंग करें। फिर 15 सेकंड का आराम ले और फिर रस्सी कूदने तो इस बार क्रॉस रोप जंपिंग भी कर ले फिर 15 सेकंड का आराम ले और फिर इसके बाद बर्पी एक्सरसाइज़ करें।

रस्सी कूदने से होने वाली हानि

  • जिन लोगों को दिल से जुड़ी किसी भी प्रकार की बीमारी हो उन्हें रस्सी कूदना नहीं चाहिए, नहीं तो उनके दिल से जुड़ी बीमारी में बढ़ोतरी हो सकती है।
  • जिन लोगों की किसी भी प्रकार की सर्जरी हुई हो उन्हें डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही रस्सी कूदना चाहिए।
  • जिन लोगों को भी अपने हड्डी से जुड़ी किसी भी प्रकार की बीमारी हो, उन्हें रस्सी कूदना नहीं चाहिए क्योंकि रस्सी कूदने में आपके हड्डी की उपयोगिता होती है और जो लोग हड्डी से जुड़ी बीमारी से ग्रसित हैं। उनकी कहीं की हड्डी टूट जाए, इसीलिए इन लोगों को रस्सी कूदने से बचना चाहिए।
  • जिन व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप की बीमारी हो, उन्हें भी रस्सी कूद नहीं करनी चाहिए क्योंकि जब रस्सी कूद प्रक्रिया होती है तो सांस की जो प्रक्रिया होती है, उसमें तेजी आती है। अगर कोई व्यक्ति रस्सी कूदेगा, जिन्हें उच्च रक्तचाप हो तो हो सकता है।उन्हें हार्ड अटैक आ जाए तो उन्हें रस्सी कूदने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

रस्सी कूदना एक कम लागत वाला व्यायाम है, जिसमें कम उपकरण और न्यूनतम स्थान की आवश्यकता होती है। रस्सी कूदने के बेनीफिट भी अनगिनत है। इस व्यायाम को आप कही पर भी कर सकते हो।

इस आर्टिकल के जरिये हमने आपको रस्सी कूद के क्या फायदे होते हैं? और इसे कैसे कूदना चाहिए? और रस्सी कूदने का सही समय क्या होता है? उसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की है। आर्टिकल पसंद आये तो उन्हें लाइक और शेयर जरुर करें।

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