पिता पर कविता

Poem on Father in Hindi: नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने पिता पर कविता के संग्रह के माध्यम से पिता के जीवन का वर्णन करने का प्रयास किया है। हम उम्मीद करते हैं आपको यह हिंदी कविताएं पसंद आयेंगी।

Poem on Father in Hindi

पिता पर कविता – Poem on Father in Hindi

मेरे प्यारे पापा कविता – 1

मेरे प्यारे प्यारे पापा,
मेरे दिल में रहते पापा,
मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए
सब कुछ सेह जाते हैं पापा,
पूरी करते हर मेरी इच्छा,
उनके जैसा नहीं कोई अच्छा,
मम्मी मेरी जब भी डांटे,
मुझे दुलारते मेरे पापा,
मेरे प्यारे प्यारे पापा।

Pita ji Par Kavita – 2

माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्वा होते हैं,
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है।

दोनो समय का भोजन माँ बनाती है
तो जीवन भर भोजन की व्यवस्था करने वाले पिता होते हैं।
कभी चोट लगे तो मुंह से ‘ओह माँ’ निकलता है

रास्ता पार करते वक़्त कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो ‘बाप रे’ ही निकलता है।
क्यूं कि छोटे छोटे संकट के लिये माँ याद आती है
मगर बड़े संकट के वक़्त पिता याद आते हैं।

पिता एक वट वृक्ष है जिसकी शीतल च्हाव मे,
सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है…!!!!

Heart Touching Poem on Father in Hindi – 3

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता,
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता,
जन्म दिया है अगर माँ ने,
जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता,
कभी कंधे पे बिठा के मेला दिखाता है पिता,
कभी बनके घोड़ा घुमाता है पिता,
माँ अगर पैरों पर चलना सिखाती है,
पैरों पर खड़ा होना सिखाता है पिता।

Hindi Poem on Papa – 4

प्यार का सागर ले आते
फिर चाहे कुछ न कह पाते
बिन बोले ही समझ जाते
दुःख के हर कोने में
खड़ा उनको पहले से पाया
छोटी सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सीखाया
जीवन के हर पहलु को
अपने अनुभव से बताया
हर उलझन को उन्होंने
अपना दुःख समझ सुलझाया
दूर रहकर भी हमेशा
प्यार उन्होंने हम पर बरसाया
एक छोटी सी आहट से
मेरा साया पहचाना,
मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया
आशिर्वाद उनका हमेशा हमने पाया
हर ख़ुशी को मेरी पहले उन्होंने जाना
असमंजस के पलों में,
अपना विश्वाश दिलाया
उनके इस विश्वास को
अपना आत्म विश्वास बनाया
ऐसे पिता के प्यार से
बड़ा कोई प्यार न पाया।

Miss U Papa Poems in Hindi – 5

जाते जाते वो अपने जाने का गम दे गये…
सब बहारें ले गये रोने का मौसम दे गये…

ढूंढती है निंगाह पर अब वो कही नहीं…
अपने होने का वो मुझे कैसा भ्रम दे गये…

मुझे मेरे पापा की सूरत याद आती है…
वो तो ना रहे अपनी यादों का सितम दे गये…

एक अजीब सा सन्नाटा है आज कल मेरे घर में…
घर की दरो दिवार को उदासी पेहाम दे गये…

बदल गयी है अब तासीर, तासीरी जिन्दगी की…
तुम क्या गये आंखो में मन्जरे मातम दे गये…

Mere Pita Kavita – 6

प्यारे पापा सच्चे पापा,
बच्चो के संग बच्चे पापा।
करते हैं पूरी हर इच्छा,
मेरे सबसे अच्छे पापा।

दिन रात जो पापा करते हैं,
बच्चे के लिए जीते मरते हैं।
बस बच्चों की खुशियों के लिए,
अपने सूखो को हरते हैं।

पापा हर फ़र्ज निभाते हैं,
जीवन भर कर्ज चुकाते हैं।
बच्चे की एक ख़ुशी के लिए,
अपने सुख भूल ही जाते हैं।

फिर क्यों ऐसे पापा के लिए,
बच्चे कुछ कर ही नही पाते।
ऐसे सच्चे पापा को क्यों,
पापा कहने में भी सकुचाते।

पापा का आशीष बनाता है,
बच्चे का जीवन सुखदाइ,
पर बच्चे भूल ही जाते हैं,
यह कैसी आँधी है आई।

जिससे सब कुछ पाया है,
जिसने सब कुछ सिखलाया है।
कोटि नमन ऐसे पापा को,
जो हर पल साथ निभाया है।

प्यारे पापा के प्यार भरे,
सीने से जो लग जाते हैं।
सच्च कहती हूँ विश्वास करो,
जीवन में सदा सुख पाते हैं।

Hindi Poem on Father Day – 7

पिता एक उम्मीद है एक आस है,
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त और अंदर से नरम है,
उसके दिल में दफन कई मरम है,
पिता संघर्ष की आँधियों में हौसलों की दीवार है,
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला बिछौना है,
पिता जिम्मेदारियों से लदी गाड़ी का सारथी है,
सबको बराबर का हक़ दिलाता एक महारथी है,
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है,
इसी में तो माँ और बच्चों की पहचान है,
पिता जमीर है, पिता जागीर है,
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को तो सब ऊपर वाला देता है,
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर हैं।

पिता दिवस पर कविता – 8

ऊँगली को पकड़ कर सिखलाता,
जब पहला कदम भी नहीं आता,
नन्हे प्यारे बच्चे के लिए,
पापा ही सहारा बन जाता,
पापा हर फर्ज निभाते है,
जीवन भर कर्ज चुकाते है,
बच्चे की एक ख़ुशी के लिए,
अपने सुख भूल ही जाते है,
फिर क्यों ऐसे पापा के लिए,
बच्चे कुछ कर नहीं पाते है,
ऐसे सच्चे पापा को क्यों,
पापा कहने में भी सकुचाते है,
पापा का आशीष बनाता है,
बच्चे का जीवन सुखदायी,
पर बच्चे भूल ही जाते है,
यह कैसी आंधी है आई,
जिससे सब कुछ पाया है,
जिसने सबकुछ सिखलाया है,
कोटि नमन ऐसे पापा को,
जिसने हर पल साथ निभाया है,
प्यारे पापा के प्यार भरे,
सीने से जो लग जाते है,
सच्च कहती हूँ विश्वास करो,
जीवन में सदा सुख पाते हैं।

Short Poem on Father in Hindi – 9

मैं पतंग, पापा है डोर
पढ़ा लिखा चढ़ाया आकाश की ओर,
खिली काली पकड़ आकाश की ओर,
जागो, सुनो, कन्या भ्रूण हत्यारों,
पापा सूरज की किरण का शोर,
मैं बनू इंदिरा सी, पापा मेरे नेहरू बने,
बेटियों के हत्यारों, अब तो पाप से तौबा करो,
पापा सच्चे, बेहद अच्छे, नेहरू इंदिरा से वतन भरे,
बेटियां आगे बेटो से, पापा आओ पाक एलान करो,
देवियों के देश भारत की जग में, ऊंची शान करें!

पिता का स्नेह – 10

प्यार का सागर ले आते
फिर चाहे कुछ न कह पाते
बिन बोले ही समझ जाते
दुःख समझ के हर कोने में
खड़ा उनको पहले से पाया
छोटी सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सीखाया
जीवन के हर पहलु को
अपने अनुभव से बताया
हर उलझन को उन्होंने
अपना दुःख समझ सुलझाया
दूर रहकर भी हमेशा
प्यार उन्होंने हम पर बरसाया
एक छोटी सी आहट से
मेरा साया पहचाना,
मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया
आशिर्वाद उनका हमेशा हमने पाया
हर ख़ुशी को मेरी पहले उन्होंने जाना
असमंजस के पलों में,
अपना विश्वाश दिलाया
उनके इस विश्वास को
अपना आत्म विश्वास बनाया
ऐसे पिता के प्यार से
बड़ा कोई प्यार न पाया।

Fathers Day Poems in Hindi – 11

हर घर में होता है वो इंसान
जिसे हम पापा कहते है।

सभी की खुशियों का ध्यान रखते
हर किसी की इच्छा पूरी करते

खुद गरीब और बच्चों को अमीर बनाते
जिसे हम पापा कहते है।

बड़ों की सेवा भाई-बहनों से लगाव
पत्नी को प्यार, बच्चों को दुलार

खोलते सभी ख्वाहिशों के द्वार
जिसे हम पापा कहते है।

बेटी की शादी, बेटों को मकान
बहुओं की खुशियां, दामादो का मान

कुछ ऐसे ही सफर में गुजारे वो हर शाम
जिसे हम पापा कहते है।

पिता क्या है – 12

मेरा साहस मेरा सम्मान है पिता,
मेरी ताकत मेरी पुंजी मेरी पहचान है पिता,
घर की एक-एक ईट में शामिल उनका खून-पसीना,
सारे घर की रौनक उनसे सारे घर की शान पिता,
मेरी इज्जत मेरी मेरी शौहरत मेरा रूतबा मेरा मान है पिता,
मुझको हिम्मत देने वाले मेरा अभिमान है पिता,
सारे रिश्ते उनके दम से सारे नाते उनसे है,
सारे घर की दिल की धड्कन सारे घर की जान है पिता,
शायद रब ने दे कर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का,
उसकी रहमत उसकी नेअमत उसका है वरदान पिता।

Best Poem on Father in Hindi – 13

आज तो पापा मंजिल भी है, दम भी है परवाजों में
एक आवाज नहीं है लेकिन, इतनी सब आवाजों में
सांझ की मेरी सैर में हम-तुम, साथ में मिल कर गाते थे
कच्चे-पक्के अमरूदों को, संग-संग मिल कर खाते थे
उन कदमों के निशान पापा, अब भी बिखरे यहीं-कहीं
कार भी है, एसी भी है, पर अब सैरों में मज़ा नहीं
कोई नहीं जो आंसू पोछें, बोले पगली सब कर लेंगे
पापा बेटी मिलकर तो हम, सारे रस्ते सर कर लेंगे
इतनी सारी उलझन है और पप्पा तुम भी पास नहीं
ये बिटिया तो टूट चुकी है, अब तो कोई आस नहीं
पर पप्पा ! तुम घबराना मत, मैं फिर भी जीत के आउंगी
मेरे पास जो आपकी सीख है, मैं उससे ही तर जाऊंगी
फिर से अपने आंगन में हम साथ में मिल कर गाएंगे
देखना अपने मौज भरे दिन फिर से लौट के आएंगे।

Papa ke Liye Kavita – 14

जब किसी मुश्किल सवाल का जवाब हो न पता
तब याद आतें है मुझे अपने प्यारे पिता।

लगते हैं वो बाहर से थोड़े सख्त
पर हमेशा देते हैं मुझको अपना वक़्त।

बुरी संगत में न मैं पड़ जाऊँ
इसलिये रखते हैं मुझपर नज़र।

जब भी पिताजी बाज़ार जाते हैं
मेरे लिये ज़रूर कुछ लाते हैं।

मुझे अपने पिताजी पर बहुत गर्व है
पिताजी साथ हैं, तो खुश हर पर्व है।

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