मां को समर्पित हिंदी कविताएं

साथियों दुनियां में कोई ऐसी कलम आज तक नहीं बनी हैं जो माँ शब्द की परिभाषा लिख दे। कहते हैं की संसार में माँ भगवान का दूसरा रूप होती है। माँ की ममता का कोई मूल्य नहीं हैं, वे लोग बहुत ही भाग्यशाली जिनकी माँ हैं, कहते हैं कि जिनके सिर पर माँ का हाथ होता हैं किस्मत भी उसका साथ नहीं छोड़ती है। इस पोस्ट में माँ को समर्पित मां पर हिंदी कविताएं (Poem on Mother in Hindi) शेयर की है।

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विषय सूची

माँ पर लोकप्रिय कविताएं – Poem on Mother

वो है मेरी माँ

मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव
ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो
हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।

देवी नांगरानी

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रुला देने वाली मदर डे कविता – Sad Poem on Maa

घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाँव में,
जाने कब बड़ा हुआ..
काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है,
मैं ही मैं हूँ हर जगह,
माँ प्यार ये तेरा कैसा है?
सीधा-साधा, भोला-भाला,
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊ बड़ा,

“माँ!” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ..

जमीन पर जन्नत (माँ) – Poem of Mother

meri maa kavita in hindi

जमीन पर जन्नत मिलती है कहाँ
दोस्तों ध्यान से देखा करो अपनी मा

जोड़ लेना चाहे लाखों करोड़ो की दौलत
पर जोड़ ना पाओगे कभी माँ सी सुविधा

आते हैं हर रोज फरिश्ते उस दरवाजे पर
रहती है खुशी से प्यारी माएं जहाँ जहाँ

छिन लाती है अपनी औलाद की खातिर खुशियाँ
कभी खाली नही जाती माँ के मुहं से निकली दुआ

वो लोग कभी हासिल नही कर सकते कामयाबी
जो बात बात पर माँ की ममता में ढूँढते है कमियां

माँ की तस्वीर ही बहुत,बड़े से बड़ा मन्दिर सजाने को
माँ से सुंदर दुनिया में नही होती कोई भी प्रतिमा

माँ का साथ यूँ चलता है ताउम्र आदमी संग
जैसे कदमों तले झुका रहता हो सदा आसमां

माँ दिखती तो है जिस्म के बाहर सदा
पर माँ है रूह में मौजुद बेपनाह होंसला

कभी गलती से भी बुरा ना सोचना माँ के बारे में
ध्यान रहे माँ ने ही रचा हर जीवन का घोंसला

मर कर भी बसी रहती है माँ धरती पर ही अ नीरज
कभी नही होता औलाद की खातिर उसके प्रेम का खात्मा

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

प्यारी प्यारी मेरी माँ – Best Poems on Mom

प्यारी प्यारी मेरी माँ
सारे जग से न्यारी माँ…

लोरी रोज सुनाती है,
थपकी दे सुलाती है….

जब उतरे आगन में धुप,
प्यार से मुझे जगाती है….

देती चीजे सारी माँ,
प्यारी प्यारी मेरी माँ….

ऊँगली पकड़ चलाती है,
सुबह-शाम घुमाती है….

ममता भरे हुए हातो से,
खाना रोज खिलाती है….

देवी जैसी मेरी माँ,
सारी जग से न्यारी माँ….

प्यारी प्यारी मरी माँ
प्यारी प्यारी मेरी माँ…

माँ और भगवान – Emotional Poems

मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया
पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी
सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी
काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

जगदीश प्रसाद सारस्वत ‘विकल’

है माँ – Hindi Poem on Mother

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…

दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ

द्वारा कुसुम

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आबशारों-झरने – Heart Touching Poems on Mom

maa in hindi

खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर, अपनी आँख के इशारों से
माँ क्या शै होती, पूछ लेना कभी ये बात तुम प्यारी बहारों से
नही जरूरत माँ के रहते किसी और चाहत की हमें जमाने में
भीगे रहते है हम तो सदा, माँ की ममता के हसीन आबशारों से

माँ की दुआ तो हर हाल में कबूल होती है
माँ के रहते जन्नत जमीन पर वसूल होती है
फरिश्ते भी जिसकी चाहत पाने को तरसते
माँ तो वो अदभुत अनोखा प्यारा फूल होती है
तुम से ज्यादा है कौन चमकीला,पूछ लेना ये बात तुम सितारों से
खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर,अपनी आँख के इशारों से

माना माँ की बोली कभी कभी कड़वी,खारी होती है
पर माँ हर गुड़ शक्कर,हर मीठे से प्यारी होती है
चाहे अनपढ़ ही क्यूं ना हो कोई भी माँ जमीन की
पर उसकी सीखों में जीवन जीने की बात छुपी सारी होती है
सुंदर होती है हर माँ तो,जमीन के हसीन से हसीन नजारों से
खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर,अपनी आँख के इशारों से

माँ तो जीती है हजारों सदियों तक,वो कभी भी ना मरती है
माँ हर रूह में,हर धड़कन में जीवन जीने का हौसला भरती है
हर देवता से बहुत ज्यादा बड़ी होती है माँ की शख्सियत,समझो इसे
रब भी वो कर नही सकता, जो औलाद की खातिर माँ करती है
बचा लेती है माँ अपनी औलाद को दुःख दर्द के बेदर्द अंगारो से
खुशियाँ को बुला लाती है जमीन पर, अपनी आँख के इशारों से

माँ क्या शै होती पूछ लेना कभी ये बात तुम प्यारी बहारों से
नही जरूरत माँ के रहते किसी और चाहत की हमें जमाने में
भीगे रहते है हम तो सदा, माँ की ममता के हसीन आबशारों से

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

मैं माँ को मानता हूँ – Hindi Poem on Mother

बचपन में माँ कहती थी
बिल्ली रास्ता काटे,
तो बुरा होता है
रुक जाना चाहिए…

बचपन में माँ कहती थी
बिल्ली रास्ता काटे,
तो बुरा होता है
रुक जाना चाहिए…

मैं आज भी रुक जाता हूँ
कोई बात है जो डरा
देती है मुझे…

यकीन मानो,
मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ…
मैं शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता…

मैं माँ को मानता हूँ।
मैं माँ को मानता हूँ।

दही खाने की आदत मेरी
गयी नहीं आज तक…
दही खाने की आदत मेरी
गयी नहीं आज तक..

चाहे हम बड़े हो जाये मगर हम अपनी माँ के लिए तो बच्चे ही है…

माँ कहती थी।

घर से दही खाकर निकलो
तो शुभ होता है..
मैं आज भी हर सुबह दही
खाकर निकलता हूँ…
मैं शगुन-अपशगुन को भी नही मानता….

मैं माँ को मानता हूँ।
मैं माँ को मानता हूँ।

आज भी मैं अँधेरा देखकर डर जाता हूँ,
भूत-प्रेत के किस्से खोफा पैदा करते हैं मुझमें,
जादू, टोने, टोटके पर मैं यकीन कर लेता हूँ।

बचपन में माँ कहती थी
कुछ होते हैं बुरी नज़र लगाने वाले,
कुछ होते हैं खुशियों में सताने वाले…
यकीन मानों, मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ…
मैं शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता….

मैं माँ को मानता हूँ।
मैं माँ को मानता हूँ।

मैंने भगवान को भी नहीं देखा जमीं पर
मैंने अल्लाह को भी नहीं देखा
लोग कहते है,
नास्तिक हूँ मैं
मैं किसी भगवान को नहीं मानता

लेकिन माँ को मानता हूँ
में माँ को मानता हूँ।।

हज़ारों दुखड़े सहती

हज़ारों दुखड़े सहती है माँ
फिर भी कुछ ना कहती है माँ

हमारा बेटा फले औ’ फूले
यही तो मंतर पढ़ती है माँ

हमारे कपड़े कलम औ’ कॉपी
बड़े जतन से रखती है माँ

बना रहे घर बँटे न आँगन
इसी से सबकी सहती है माँ

रहे सलामत चिराग घर का
यही दुआ बस करती है माँ

बढ़े उदासी मन में जब जब
बहुत याद में रहती है माँ

नज़र का कांटा कहते हैं सब
जिगर का टुकड़ा कहती है माँ

मनोज मेरे हृदय में हरदम
ईश्वर जैसी रहती है माँ

मनोज ‘भावुक’

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वो है मेरी माँ – हिंदी कविता माँ पर

maa par kavita

मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव
ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो
हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो

वो है मेरी माँ।

देवी नाँगरानी

माँ मतलब परछाई – Maa pe Kavita

माँ के होते कभी नही होती जीवन में कठिनाई है
माँ ताउम्र बनकर रहती अपनी औलाद की परछाई है

दिखता है जिसमे केवल स्नेह माँ तो वो नजर है
कभी नही मरती कोई भी माँ, वो तो परी अजर अमर है

लोक परलोक की, माँ ही होती है सबसे खूबसूरत आत्मा
माँ के कदमों में सदा झुका रहता है पूर्ण परमात्मा

माँ ही धरा पर जीवन लिखने वाली अनोखी कलम है
समझो औरत का जन्म ही धरा पर जीवन का जन्म है

माँ राहत, माँ चाहत, माँ पहचान, माँ ही सम्मान है
माँ जरूरत, माँ मूरत, माँ निदान, माँ ही अभिमान है

माँ जमीन पर रहकर जन्नत का अहसास दिलाती है
माँ छोटे परिंदों को हौसलों का बड़ा आकाश दिलाती है

माँ सितार, माँ बहार माँ ही देवों की अदभुत बोली है
माँ अधिकार, माँ प्यार, माँ कंगन, माँ ही चंदन रोली है

माँ सदा सुखों से कराती अपनी औलाद की मुलाकात है
पहुंचाती जो रूह को सकून माँ वो चांदनी रात है

जो महकाती सांसो को माँ की चाहत वो कस्तूरी है
जिस पर है सारी धरा आश्रित माँ ही वो धुरी है

माँ का प्रेम ही दुनिया का सबसे सुगंधित चन्दन है
नीरज की ओर से हर माँ को शत शत वन्दन है

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

माँ पर कविता

जितना मैं पढता था, शायद उतना ही वो भी पढ़ती,
मेरी किताबों को वो मुझसे ज्यादा सहज कर रखती थी,

मेरी कलम, मेरी पढने की मेज़, उसपर रखी किताबे,
मुझसे ज्यादा उसे नाम याद रहते, संभालती थी किताबे,

मेरी नोट-बुक पर लिखे हर शब्द, वो सदा ध्यान से देखती,
चाहे उसकी समझ से परे रहे हो, लेकिन मेरी लेखनी देखती थी,

अगर पढ़ते पढ़ते मेरी आँख लग जाती, तो वो जागती रहती,
और जब मैं रात भर जागता, तब भी वो ही तो जागती रहती,

और मेरी परीक्षा के दिन, मुझसे ज्यादा उसे भयभीत करते थे,
मेरे परीक्षा के नियत दिन रहरह कर, उसे ही भ्रमित करते थे,

वो रात रात भर, मुझे आकर चाय काफी और बिस्कुट की दावत,
वो करती रहती सब तैयारी, बिना थके बिना रुके, बिन अदावात,

अगर गलती से कभी ज्यादा देर तक मैं सोने की कोशिश करता,
वो आकर मुझे जगा देती प्यार से, और मैं फिर से पढना शुरू करता,

मेरे परीक्षा परिणाम को, वो मुझसे ज्यादा खोजती रहती अखबार में,
और मेरे कभी असफल होने को छुपा लेती, अपने प्यार दुलार में,

जितना जितना मैं आगे बढ़ता रहा, शायद उतना वो भी बढती रही,
मेरी सफलता मेरी कमियाबी, उसके ख्वाबों में भी रंग भरती रही,

पर उसे सिर्फ एक ही चाह रही, सिर्फ एक चाह, मेरे ऊँचे मुकाम की,
मेरी कमाई का लालच नहीं था उसके मन में, चिंता रही मेरे काम की,

वो खुदा से बढ़कर थी पर मैं ही समझता रहा उसे नाखुदा की तरह जैसे,
वो मेरी माँ थी, जो मुझे जमीं से आसमान तक ले गयी, ना जाने कैसे…

ममता की मूरत

क्या सीरत क्या सूरत थी
माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने
अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में
एक अहम ज़रूरत थी

सच कहते हैं माँ हमको
तेरी बहुत ज़रूरत थी

मंगल नसीम

मेरी प्यारी माँ पर कविताएं

माँ की ममता करुणा न्यारी,
जैसे दया की चादर
शक्ति देती नित हम सबको,
बन अमृत की गागर
साया बन कर साथ निभाती,
चोट न लगने देती
पीड़ा अपने उपर ले लेती,
सदा सदा सुख देती
माँ का आँचल सब खुशियों की,
रंगा रंग फुलवारी
इसके चरणों में जन्नत है,
आनन्द की किलकारी
अदभुत माँ का रूप सलोना,
बिलकुल रब के जैसा
प्रेम के सागर सा लहराता,
इसका अपनापन ऐसा….

हर एक साँस की कहानी है तू

हर एक साँस की कहानी है तू
परी कोई प्यारी आसमानी है तू
जीती मरती है तू औलाद की खातिर
सिर्फ ममता की भूखी दीवानी है तू

तेरी गोदी से बढकर नही कोई भी चमन
हमेशा फरिश्तों से घिरा रहता था तन
गुजरा है तेरे संग हर लम्हा जन्नत में
ताउम्र महसूस होती रहेगी तेरी चाहतों की तपन
इश्क करना फितरत है तेरी
हर देवता की जानी पहचानी है तू

तू अदभुत साँस बनकर जिस्म को महकाती
हसीन जन्नत खुद तेरे करीब आ जाती
अजीब कशिश है तेरी चाहतों में माँ
तू रोते बालक को पल में हंसाती
कोई नही तुझसे बढकर खुबसुरत जग में
हजारों परियों की रानी है तू

दुआ है तेरी कोख से हो हर बार जन्म
भूलकर भी कभी ना हो तुझे कोई गम
तुझ जैसा कोई और चाह नही सकता
तू ही सच्ची दिलबर तू ही सच्ची हमदम
हर करिश्मे से है तू बड़ी
खुदा की जमीन पर मेहरबानी है तू

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा

हे जननी, हे जन्मभूमि, शत-बार तुम्हारा वंदन है।
सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा, तेरा ही अभिनन्दन है।।
तेरी नदियों की कल-कल में सामवेद का मृदु स्वर है।
जहाँ ज्ञान की अविरल गंगा, वहीँ मातु तेरा वर है।
दे वरदान यही माँ, तुझ पर इस जीवन का पुष्प चढ़े।
तभी सफल हो मेरा जीवन, यह शरीर तो क्षण-भर है।
मस्तक पर शत बार धरुं मै, यह माटी तो चन्दन है।
सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा, तेरा ही अभिनन्दन है।।१।।
क्षण-भंगुर यह देह मृत्तिका, क्या इसका अभिमान रहे।
रहे जगत में सदा अमर वे, जो तुझ पर बलिदान रहे।
सिंह-सपूतों की तू जननी, बहे रक्त में क्रांति जहाँ,
प्रेम, अहिंसा, त्याग-तपस्या से शोभित इन्सान रहे।
सदा विचारों की स्वतन्त्रता, जहाँ न कोई बंधन है।
सर्वप्रथम माँ तेरी पूजा, तेरा ही अभिनन्दन है।।

माँ के लिए – Hindi Poetry on Mother

साल के बाद
आया है यह दिन
करने लगे हैं सब याद
पल छिन
तुम ना भूली एक भी चोट या खुशी
ना तुमने भुलाया
मेरा कोई जन्म दिन
और मैं
जो तुम्हारी परछाई हूँ
वक्त की चाल-
रोज़गार की ढाल
सब बना लिए मैंने औज़ार
पर माँ!
नासमझ जान कर
माफ़ करना
करती हूँ तुमको प्यार
मैं हर पल
खामोशी तनहाई में
अर्पण किए
मैंने अपनी श्रद्धा के फूल तुमको
जानती हूँ
मिले हैं वो तुमको
क्योंकि
देखी है मैंने तुम्हारी निगाह
प्यार गौरव से भरी मुझ पर
जब भी मैं तुम्हारे बताए
उसूलों पर चलती हूँ चुपचाप
माँ!
मुझमें इतनी शक्ति भर देना
गौरव से सर उठा रहे तुम्हारा
कर जाऊँ ऐसा कुछ जीवन में
बन जाऊँ
हर माँ की आँख का सितारा
आज मदर्स डे के दिन
“अर्चना” कर रही हूँ मैं तुम्हारी
श्रद्धा, गौरव और विश्वास के चंद फूल लिए

अर्चना हरित

मेरी प्यारी माँ पर कविताएं – Poetry on Mother

बहुत याद आती है माँ
जब भी होती थी मैं परेशान
रात रात भर जग कर
तुम्हारा ये कहना कि
कुछ नहीं… सब ठीक हो जाएगा।
याद आता है…. मेरे सफल होने पर
तेरा दौड़ कर खुशी से गले लगाना।
याद आता है, माँ तेरा शिक्षक बनकर
नई-नई बातें सिखाना
अपना अनोखा ज्ञान देना।
याद आता है माँ
कभी दोस्त बन कर
हँसी मजाक कर
मेरी खामोशी को समझ लेना।
याद आता है माँ
कभी गुस्से से डाँट कर
चुपके से पुकारना
फिर सिर पर अपना
स्नेह भरा हाथ फेरना।
याद आता है माँ
बहुत अकेली हूँ
दुनिया की भीड़ में
फिर से अपना
ममता का साया दे दो माँ
तुम्हारा स्नेह भरा प्रेम
बहुत याद आता है माँ

मां की खुशबू, माँ पर कविता हिंदी में – Poem in Hindi for Mother

माँ के आँचल के आसपास कभी भी बेरहम लू नही आती
मुर्ख है वो लोग तो जिन्हें माँ के किरदार से खुशबू नही आती

फैंक आते है माँ बाप को वृद्धाश्रम जबरदस्ती लावारिस बना कर
पर माँ बाप को कभी भी लावारिस औलाद में भी बदबू नही आती

मैं तो मांगता हूँ हर बार रब से रहमतें मजबूरों की खातिर
अपने जहन में खुद के लिये मांगने को कोई भी जुस्तजू नही आती

जो अमीर जुड़े है जमीन से,कभी भी पीछे नही हटते किसी की मदद को
कभी भी उनकी बातों से अमीरी की गंदी,मतलबी बू नही आती

गुजर जाता है हर वो दिन सकून से,चैनो अमन से,आराम से अपना
जिस दिन अ मेरी हसीन दिलरुबा ख्यालों में तू नही आती

कहते है लोग के नीरज बिन उर्दू वजन नही आता शायरी में
अरे हम लिखते है तबाही,जबकि हमको भाषा उर्दू नही आती

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

माँ तुम गंगाजल होती हो – Poem on Mother in Hindi

मेरी ही यादों में खोई
अक्सर तुम पागल होती हो
माँ तुम गंगा-जल होती हो!

जीवन भर दुःख के पहाड़ पर
तुम पीती आँसू के सागर
फिर भी महकाती फूलों-सा
मन का सूना संवत्सर

जब-जब हम लय गति से भटकें
तब-तब तुम मादल होती हो।

व्रत, उत्सव, मेले की गणना
कभी न तुम भूला करती हो
सम्बन्धों की डोर पकड कर
आजीवन झूला करती हो

तुम कार्तिक की धुली चाँदनी से
ज्यादा निर्मल होती हो।

पल-पल जगती-सी आँखों में
मेरी ख़ातिर स्वप्न सजाती
अपनी उमर हमें देने को
मंदिर में घंटियाँ बजाती

जब-जब ये आँखें धुंधलाती
तब-तब तुम काजल होती हो।

हम तो नहीं भगीरथ जैसे
कैसे सिर से कर्ज उतारें
तुम तो ख़ुद ही गंगाजल हो
तुमको हम किस जल से तारें

तुझ पर फूल चढ़ाएँ कैसे
तुम तो स्वयं कमल होती हो।

जयकृष्ण राय तुषार

मेरी प्यारी माँ पर कविताएं – Poem on Mother in Hindi

मुझको हर हाल में बख़्शेगा उजाला अपना
चाँद रिश्ते में तो लगता नहीं मामा अपना
मैंने रोते हुएपोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना
हम परिन्दों कीतरह उड़ के तो जाने से रहे
इस जनम में तो न बदलेंगे ठिकाना अपना
धूप से मिल गए हैं पेड़ हमारेघर के
हम समझते थे कि काम आएगा बेटा अपना
सच बता दूँ तो ये बाज़ार-ए-मुहब्बत गिर जाए
मैंने जिस दाम में बेचा है ये मलबा अपना
आइनाख़ाने में रहने का ये इनआम मिला
एक मुद्दत से नहीं देखा है चेहरा अपना
तेज़ आँधी में बदल जाते हैं सारे मंज़र
भूल जाते हैं परिन्दे भी ठिकाना अपना..!

माँ पर कविता – Maa Par Kavita in Hindi

हर शै से ऊपर जग मे माँ होती है,
एक अक्षर मे छुपी पूरी दुनिया होती है।
जितने लाडों से पालती है माँ बच्चो को,
बच्चों की नजर मे उतनी कद्र कहाँ होती है।।

हर दुःख को अपने आँचल मे छुपाती,
खुद भूखी रहकर भी बच्चों को खिलाती।
गुणों के भंडारों से तर बतर होती है हर माँ
कभी ना अपने बच्चों को कुछ बुरा सिखाती।।

धरती पर माँ ही भगवान की पहचान होती है,
उसके बच्चों मे छुपी उसकी जान होती है।
कुछ देर जरुर बैठा करो अपनी माँ के पास,
माँ सिर्फ माँ नहीं माँ तो तजुर्बो की खान होती है।।

हर आफत हर परेशानी खुद दूर होती है,
माँ ही जमीं पर जन्नत से बहता नूर होती है।
गलती से भी कभी कोई गलती न करती वो,
वो तो बस कभी कभी बच्चों की जिद के आगे मजबूर होती है।।

सिर्फ एक माँ है जो कभी न नाराज होती है,
मूक बच्चे की माँ ही हमेशा आवाज होती है।
कोई भी सम्मान बड़ा नहीं होता माँ की सेवा के आगे
अरे लोगों सुखी माँ ही धरती पर सबसे बड़ा ताज होती है।।

लोगों चाहे मत संभालो अपनी जां को,
पर सम्भालों जरुर अपनी प्यारी माँ को।
हर काम मे खुद ब खुद हो जायेगी बरकत,
कभी हल्के मे मत लेना उसकी दुआ को।।

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

माँ के नाम – Poem on Mother in Hindi

बचपन में अच्छी लगे यौवन में नादान।
आती याद उम्र ढ़ले क्या थी माँ कल्यान।।१।।

करना माँ को खुश अगर कहते लोग तमाम।
रौशन अपने काम से करो पिता का नाम।।२।।

विद्या पाई आपने बने महा विद्वान।
माता पहली गुरु है सबकी ही कल्यान।।३।।

कैसे बचपन कट गया बिन चिंता कल्यान।
पर्दे पीछे माँ रही बन मेरा भगवान।।४।।

माता देती सपन है बच्चों को कल्यान।
उनको करता पूर्ण जो बनता वही महान।।५।।

बच्चे से पूछो जरा सबसे अच्छा कौन।
उंगली उठे उधर जिधर माँ बैठी हो मौन।।६।।

माँ कर देती माफ़ है कितने करो गुनाह।
अपने बच्चों के लिए उसका प्रेम अथाह।।७।।

सरदार कल्याण सिंह

मां सबकुछ है – Mother Poem in Hindi

गहन अंधेरों को उजालों में बदलती है
औलाद के हर दुःख को पल में छलती है
मजबूर हो जाते है देव भी उसकी ममता के आगे
खुदा से ज्यादा धरती पर माँ की चलती है

फैला रूह में हर वक्त उजाला होता है
माँ का प्यार तो अमृत का प्याला होता है
सोचते ही हर दुआ खुद पूरी हो जाती है
माँ का रूप ही सबसे बड़ा शिवाला होता है

माँ ही फरिश्ता माँ ही पैगम्बर होती है
माँ दिखती है बाहर पर रूह के अंदर होती है
कोई श्रृंगार बड़ा नही माँ की मुस्कान के आगे
धरती पर माँ ही सबसे ज्यादा सुंदर होती है

निरंतर जो बहती माँ तो वो अदभुत नदी है
आजकल की बात छोड़ो माँ तो एक सदी है
हर शै छोटी होती है माँ के आकार के आगे
माँ सारे जहानो को मिलाकर भी बड़ी होती है

माँ से ही औलाद की औकात होती है
माँ ही धर्म माँ कर्म माँ ही जात होती है
माँ के रहते चाहे मत ध्यान करों किसी देव का
माँ के रूप में हर रोज देवों से मुलाकात होती है

जो काट देती दर्दों को माँ वो दुआ होती है
माँ अथाह सागर माँ प्रेम का कुआँ होती है
चाहे कितनी मर्जी देती हो माँ औलाद को गालियाँ
पर कभी ना माँ के लबों पर बददुआ होती है

नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

मेरी प्यारी माँ पर कविताएं – Poem for Mother in Hindi

चूल्हे की
जलती रोटी सी
तेज आँच में जलती माँ!
भीतर-भीतर
बलके फिर भी
बाहर नहीं उबलती माँ!

धागे-धागे
यादें बुनती,
खुद को
नई रुई सा धुनती,
दिन भर
तनी ताँत सी बजती
घर-आँगन में चलती माँ!

सिर पर
रखे हुए पूरा घर
अपनी-
भूख-प्यास से ऊपर,
घर को
नया जन्म देने में
धीरे-धीरे गलती माँ!

फटी-पुरानी
मैली धोती,
साँस-साँस में
खुशबू बोती,
धूप-छाँह में
बनी एक सी
चेहरा नहीं बदलती माँ!

कौशलेन्द्र

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