भ्रष्टाचार पर कविताएं

Poem on Corruption in Hindi: भ्रष्टाचार भारत की एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हर भारतीय इस गंभीर समस्या को झेल रहा है। भ्रष्टाचार से ही भारत के विकास के मार्ग में कई बाधाएं आती है और आ रही है। वर्तमान समय में हर दफ्तर भ्रष्टाचार में शामिल हो चुका है जो कि एक गंभीर मामला है।

Poem on Corruption in Hindi

यहां पर हम भ्रष्टाचार पर छोटी कविताएं शेयर कर रहे हैं। आप इन हिंदी कविताओं (Hindi Poems) से भ्रष्टाचार के विरोध में किये गये हर कार्यक्रम में, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रता दिवस जैसे और भी देशभक्ति कार्यक्रमों में भ्रष्टाचार का विरोध प्रकट कर सकते हैं।

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भ्रष्टाचार पर कविताएं – Poem on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार पर कविता

भ्रष्टाचार लूट की कमाई में बहार ही बहार है
हर्रे लगे फिटकरी बाबू साहब का राज है
गौशाला बना दिया चौपाल खरीद लिया
गांव के गांव चरवाहों से चारा सब हड़प लिया
जाति धर्म संप्रदाय के नाम पर कब तक वोट मांगोगे
कब तक करोगे गुमराह जनता को
कब तक नासमझ उन्हें समझोगे
माना पैसा बड़ा साधन है पर समय इससे ज्यादा बलवान है
हम क्यों करें इस पर विचार करें नित नया भ्रष्टाचार
धन है तो जन है और जन है तो व्यापार
पैसे बटोरकर जाओगे कहां यार
आएगी जब बारी तो होगी विनाशकारी
हंसेगी दुनिया सारी रोने की होगी बारी
छोड़ो इस फिलॉसफी को करो अपना काम
भ्रष्टाचार है धर्म अपना भ्रष्टाचारी नाम
जिस थाली में खाएंगे छेद उसी में बनाएंगे
जनता का पैसा लूट लूट कर
उनको थाल चटाएगें
समय परिवर्तनशीला है उसकी अजब लीला है
कभी नाव पर गाड़ी तो कभी गाड़ी पर नाव है
कौन जाने अबकी किसकी बारी है
देखना अब यह है कि नाव पर किसकी सवारी है।।

Poem on Corruption in Hindi

अस्पताल हो या शमशान हर जगह लगती है कमीशन.
बैंको से चाहिए लोन या लगाना हो टेलीफोन,
बच सका है इससे कौन?
खेलों में फिक्सिंग या रेलों में टिकटिंग,
हर जगह है सेटिंग।

एग्जामिनेशन हो या इलेक्शन,
हर तरफ है करप्शन।

डाला है इसने मजबूरी का फंदा,
जिससे परेशान है हर बन्दा,
जिसने जीवन में ज़हर घोल डाला,
इंसान की फिरत ही बदल डाला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल-बाला।

जिसने समाज का बेड़ा गर्क कर डाला
हमीने उसे पला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल–बाला।

भ्रष्टाचार – Bhrashtachar par Kavita

मानव को मानव पर से विश्वास उठ गया हो जैसे
आपस के रिश्तो से प्रेम उठ गया हो जैसी
चारों तरफ वैचारिक अन्धकार फ़ैल गया है
हर कोई इस पर विचार कर रहा है
क्योंकि मानव ने सीखा है एक नया विचार भ्रस्टाचार
भ्रस्टाचार …भ्रस्टाचार ….चारों तरफ है भ्रस्टाचार

सच्चाई का आधार लुप्त हो गया हो जैसे
झूठे और फ़रेबियो का जाल फ़ैल गया हो जैसे
मेहनत करने वाले कर रहे है हाहाकार
सच्चे लोगो का तो जैसे हुआ है बुरा हाल
क्योंकि मानव ने सीखा है एक नया विचार भ्रस्टाचार
भ्रस्टाचार …भ्रस्टाचार ….चारों तरफ है भ्रस्टाचार

चकाचौंध की दुनिया आडम्बर भरा हो जैसे
शिष्टाचार की हमने तिलांजलि दे दी हो जैसे
सुनता था हमेसा वो अपने दिल की आवाज
परन्तु आजकल छेड़ा है नया साज
क्योंकि मानव ने सीखा है एक नया विचार भ्रस्टाचार
भ्रस्टाचार …भ्रस्टाचार ….चारों तरफ है भ्रस्टाचार

पर मेरे मित्र बताना चाहती हूँ एक बात
क्षण भंगुर है भ्रस्टाचार का साथ
दामन उसका थामो जो जिंदगी भर निभाए साथ
अंतर आत्मा की आवाज सुनो जो सच्ची रह दिखाए
छोड़ो भ्रस्टाचार, शिष्टाचार निभाओ
सच्ची रह पर चलकर जीवन उन्मुक्त बनाओ

राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कविता

ईमानदारी की कमाई दिल को रास नहीं आती
तारों की चमक से प्रकाश नहीं मिलती
किसी संस्था से, मोटा न लिया हो चंदा
धरती पर आकर भी व्यर्थ है वो बंदा
न लिया कभी घूस, न क्या है घोटाला
न मारा है तमाचा कोई लाल फीते वाला
वह दूकानदार क्या जिसने डंडी न मारी
सड़े माल अपने सेल पे लगायी
वह नेता ही क्या जिसने दादागिरी न दिखाई
सरकार के खजाने से फॉरेन ट्रिप न लगायी
लाल फीता सही क्या लाल बत्ती न जलाएंगे
अपनी औकात का बिगुल न बजायेंगे
सीधा साधा इंसान का यहाँ कुछ काम नहीं
परिश्रम से कमाना यहाँ कुछ नाम नहीं।।

भ्रष्टाचार पर हास्य कविता

इसमें जाकर भाषण करूंगा,
अपने ही समर्थकों में नया जोशा भरूंगा,
अपने किसी दानदाता का नाम
कोई थोडे ही वहां लूंगा,
बस, हवा में ही खींचकर शब्द बम दूंगा,
इस आधुनिक लोकतंत्र में
मेरे जैसे ही लोग पलते हैं,
जो आंदोलन के पेशे में ढलते हैं,
भ्रष्टाचार का विरोध सुनकर
तुम क्यों घबड़ाती हो,
इस बार मॉल में शापिंग के समय
तुम्हारे पर्स मे ज्यादा रकम होगी
जो तुम साथ ले जाती हो,
इस देश में भ्रष्टाचार
बन गया है शिष्टाचार,
जैसे वह बढ़ेगा,
उसके विरोध के साथ ही
अपना कमीशन भी चढ़ेगा,
आधुनिक लोकतंत्र में
आंदोलन होते मैच की तरह
एक दूसरे को गिरायेगा,
दूसरा उसको हिलायेगा,
अपनी समाज सेवा का धंधा ऐसा है
जिस पर रहेगी हमेशा दौलत की छाया।

Poem On Corruption In Hindi By Anna Hazare

अन्ना कितना अच्छा हुआ जो तुम जन्मे
ये शादी बाँझ होने से बच गई।
हम फिर से अपने बच्चों और उनके बच्चों को
सच का चलता फिरता गाँधी दिखा पाए।
वरना हम बच्चों से यही कहते रहते थे
जो आइंस्टीन ने कहा था कि
आने वाली पीढ़ियाँ ये विश्वास नहीं कर पायें गी कि
इस धरती पर गाँधी नाम का एक चलता फिरता आदमी हुआ करता था।।

भ्रष्टाचार (Poem on Corruption in Hindi)

ईमानदारी की कमाई दिल को रास नहीं आती
तारों की चमक से प्रकाश नहीं मिलती
किसी संस्था से, मोटा न लिया हो चंदा
धरती पर आकर भी व्यर्थ है वो बंदा
न लिया कभी घूस, न क्या है घोटाला
न मारा है तमाचा कोई लाल फीते वाला
वह दूकानदार क्या जिसने डंडी न मारी
सड़े माल अपने सेल पे लगायी
वह नेता ही क्या जिसने दादागिरी न दिखाई
सरकार के खजाने से फॉरेन ट्रिप न लगायी
लाल फीता सही क्या लाल बत्ती न जलाएंगे
अपनी औकात का बिगुल न बजायेंगे
सीधा साधा इंसान का यहाँ कुछ काम नहीं
परिश्रम से कमाना यहाँ कुछ नाम नहीं।।

ये भूखे भ्रष्टाचारी

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी
जिस थाली में खाना खाते, ये छेद उसी में करते है
लातगरीबके पेट पे मार, घर अपना ये भरते है।
इस देश की है बीमारी, ये धनवान भिखारी।
ले हाथ कटोरा घर घर जाते, मौसम जो चुनावों का आता
अल्लाह के नाम पे दे-दे वोट, गाना इनको बस एक ही आता।
इस देश की है बीमारी, येमूल्यों के व्यापारी।
नीलाम देश को कर दे ये, जो इनका बस चल जाये
भारत माँको कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाये।
इस देश की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी.
खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाये
जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाये।
इस देश की है बीमारी, देखो इनकी गद्दारी।
गाय का चारा खाते ये, कोयले की कालिख लगाते ये
धरती माँ का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये।
इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी।।

भ्रष्टाचार पर छोटी कविता

भ्रष्टाचारी ने ईमानदार को फटकारा
“क्या पुराने जन्म के पापों का फल पा रहे हो,
बिना ऊपरी कमाई के जीवन गंवा रहे हो,
अरे
इसी जन्म में ही कोई अच्छा काम करते,
दान दक्षिणा दूसरों को देकर
अपनी जेब भरने का काम भी करते,
लोग मुझे तुम्हारा दोस्त कहकर शरमाते हैं,
तुम्हारे बुरे हालात सभी जगह बताते हैं,
सच कहता हूं
तुम पर बहुत तरस आता है।”
ईमानदार ने कहा
“सच कहता हूं इसमें मेरा कोई दोष नहीं है,
घर में भी कोई इस बात पर कम रोष नहीं है,
जगह ऐसी मिली है
जहां कोई पैसा देने नहीं आता,
बस फाईलों का ढेर सामने बैठकर सताता,
ठोकपीटकर बनाया किस्मत ने ईमानदार,
वरना दौलत का बन जाता इजारेदार,
एक बात तुम्हारी बात सही है,
पुराने जन्म के पापों का फल है
अपनी ईमानदारी की बनी बही है,
यही तर्क अपनी दुर्भाग्य का समझ में आता है।

Bhrashtachar In Hindi Poem

समाज सेवक की पत्नी ने कहा
‘तुम भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
शामिल मत हो जाना,
वरना पड़ेगा पछताना।
बंद हो जायेगा मिलना कमीशन,
रद्द हो जायेगा बालक का
स्कूल में हुआ नया एडमीशन,
हमारे घर का काम
ऐसे ही लोगों से चलता है,
जिनका कुनबा दो नंबर के धन पर पलता है,
काले धन की बात भी
तुम नहीं उठाना,
मुश्किल हो जायेगा अपना ही खर्च जुटाना,
यह सच है जो मैंने तुम्हें बताया,
फिर न कहना पहले क्यों नहीं समझाया।’
सुनकर समाज सेवक हंसे
और बोले
‘‘मुझे समाज में अनुभवी कहा जाता है,
इसलिये हर कोई आंदोलन में बुलाता है,
अरे,
तुम्हें मालुम नहीं है
आजकल क्रिकेट हो या समाज सेवा
हर कोई अनुभवी आदमी से जोड़ता नाता है,
क्योंकि आंदोलन हो या खेल
परिणाम फिक्स करना उसी को आता है,
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में
मेरा जाना जरूरी है,
जिसकी ईमानदारी से बहुत दूरी है।

Comedy Poem On Corruption In Hindi

व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है
मुनाफाखोरी की बीमारी लगी सभी को
महंगाई से जनता त्रस्त हो गई तभी तो
न्याय मिलने में देरी हो रही है
राष्ट्रिय संपत्ति चोरी हो रही है
व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है
सडको का हाल बेहाल है
दूर दूर तक न कोई अस्पताल है
सरकार आँखे मूंदे बैठी है
चोरो का अड्डा तो पुलिस चौकी है
व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है।

LINE POEM ON CORRUPTION IN HINDI

Bhrashtachar In Hindi Poem

माता पिता ने पढ़ा लिखाकर, तुमको अफसर बना दिया..
आज देखकर लगता है की, सबसे बड़ा एक गुनाह किया..
रिश्वत लेने से अच्छा था, भिक्षा लेकर जी लेते..
मुह खोलकर मांगे पैसे, बेहतर होंठ तुम सी लेते..!!
लाखों का धन है तो भी, क्यों आज भिखारी बन बैठे..
काले धन की पूजा करके, जाने केसे तन बैठे..
भूल गए, बचपन में तुम भी, खिलौना देख रो देते थे..
आज कैसे, उन नन्हे हाथों से, खेलने का हक़ ले बैठे..!!
एक आदमी पेट काट कर, अपना घर चलाता है..
खून पसीना बहा बहा कर, मेहनत की रोटी खाता है..
खुद भूका सो जाये पर, बच्चो की रोटी लाता है..
तू उनसे छीन निवाला, जाने कैसे जी पता है..!!

Poem on Corruption in English

When we think of some political tension,  
At first, the cause which comes in our mind is Corruption!  
Indeed, this epidemic curse is spreading in the political arena,
Huh! They tried a lot to remove it, but lost their stamina.  
They take millions from the government to help the poor,
But swallow it all themselves…
And who’s going to take care of the posted letter,  
If the postman himself, is one of the corruption’s slaves!!!
Many have tried to throw out Corruption,
But, my god! It’s so powerful,
That whoever volunteered,
Was also dragged in this vicious circle.
But who cares…the politician?
Never friends, He only is the inventor…
Of this game, which he plays,
With the most ill-fated poor.

Note: यह सभी भ्रष्टाचार पर कविताएं (Poems in Hindi) इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है।

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