महंगाई पर निबंध

Mehangai Essay in Hindi: कुछ परेशानियां आजीवन मनुष्य के साथ चलती रहती है। गरीब और मध्यम के परिवार के लिए इन परेशानियों का नाम महंगाई होता हैं। हम यहां पर महंगाई पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में महंगाई के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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महंगाई पर निबंध | Mehangai Essay in Hindi

महंगाई पर निबंध (250 शब्द)

आज हमारे जीवन में महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण मांग और पूर्ति के बीच असंतुलन का होना हैं। जब हम किसी वस्तु की मांग करते हैं, तो उस वस्तु की पूर्ति पूर्णतया नहीं हो पाती है ऐसे में उस वस्तु की कीमत अपने आप दोगुनी हो जाती है। इससे सब की अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है क्योंकि लोग बाग उन वस्तुओं की कालाबाजारी कम कीमत पर कर दोगुनी कीमत पर बेच देते हैं। सबसे ज्यादा महंगाई बढ़ने के कारण प्रकृति का प्रकोप जैसे-बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, भूकंप आदि हैं। यह सब महंगाई को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

इन अब की वजह से खेती की उपज बहुत घट जाती है और जो भी खाद्यान्न की और अन्य वस्तुएँ है, उन सबको बहुत ज्यादा कीमत पर बाहर से मंगवाना पड़ता हैं। जमाखोरी, काला बाज़ारी आदि मानव निर्मित कारण हैं। इसके अलावा दोषपूर्ण वितरण प्रणाली, असफल सरकारी नियंत्रण तथा मनुष्य की स्वार्थपूर्ण प्रवृत्ति भी इसके लिए उत्तरदायी हैं।

महंगाई का सही अर्थ होता है वस्तुओं की कीमत का ज्यादा होना। महंगाई की वजह से हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले । महंगाई ने ही मनुष्य के जीवन की आजीविका को भी प्रभावित किया है। आज तक हमारे समाज में महंगाई और मुद्रा-स्फीति बहुत ही बड़ी समस्या है।

हमारी जरूरत की सभी वस्तुएँ बहुत महंगी आती हैं और कभी-कभी तो वस्तुएँ बाजार से ही गायब हो जाती हैं। लोग अपनी तनखा में सरकार से जब  वृद्धि की मांग करते हैं तो सरकार के पास इसका कोई जवाब नही होता क्योंकि देश के पास धन नहीं है। सिक्के की कीमत घटती जाती है और महंगाई बढती जाती है।

महंगाई  पर निबंध (850 शब्द)

प्रस्तावना

भारत एक कृषि प्रधान देश है,लेकिन फिर भी हमारे देश की समूची अर्थव्यवस्था की वजह से भी कृषि अच्छी वर्षा पर निर्भर करती है। बिजली उत्पादन भी महंगाई को प्रभावित करता है।

मुद्रा स्फीति और महंगाई

बढती हुई महंगाई का मुद्रा-स्फीति के साथ बहुत ही गहरा संबंध है क्योंकि हमारी सरकार हर साल घाटे के बजट को बढ़ा देती है, जिससे कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका परिणाम ये निकलता है कि रुपए की कीमत घट जाती है।

अक्सर देखा गया है कि सभी लोग महंगाई के भत्ते की मांग करते हैं। सरकार ने कृषि की तो घोर उपेक्षा की। परन्तु काले धन को रोकने के लिए हमारी सरकार ने कुछ नहीं किया। यहा तक कि भ्रष्टाचार को रोकने के इंतजाम भी नहीं किये। जिस वजह से मुद्रा-स्फीति को नहीं रोका गया है। इसी वजह से महंगाई भारत देश में साल-दर-साल ऊपर चली जा रही है।

महंगाई के कारण

महंगाई के बढने के बहुत से कारण होते हैं। लेकिन महंगाई की समस्या हमारे ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की एक बहुत ही गंभीर समस्या है जो लगातार बढती जा रही है।

  •  जनसंख्या वृद्धि -हमारे देश में जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है, उस तरह से फसलों की पैदावार यहा नहीं हो रही है। पिछली 2-3 सालों से फसलों की पैदावार में अधिक वृद्धि हो रही है। देश में अतिवृष्टि और अनावृष्टि दोनों की वजह से ही अन्न की कमी हो रही है इसीलिए जनसंख्या वृद्धि के कारण महंगाई की लोगों को बहुत मार झेलनी पड़ रही है।
  • जमाखोरी की समस्या – जमाखोरी से भी महंगाई की समस्या बहुत बढती जा रही है। कालाबाजारी की वजह से लोगों को खाने के लिए अन्न भी नहीं मिल पाता है।
  • व्यापारियो की दोषपूर्ण वितरण की प्रणाली – कई बार हम लोगों के द्वारा देखा गया है कि हमारे देश में सभी वस्तुओं का अच्छा उत्पादन होने के बाद भी वह वस्तु हमें समय पर नहीं मिल पाती हैं और अगर मिलती भी है, तो वह बहुत महंगी मिलती हैं। इसमें हमारी वितरण प्रणाली का दोष होता है। भ्रष्ट व्यापारी भ्रष्ट नेताओं की वजह से बहुत महंगाई आम लोगों को झेलनी पड़ती है।
  • कौन कौन जिम्मेदार है : – बढ़ती हुई महंगाई के लिए सबसे ज्यादा अमीर लोग जिम्मेदार होते हैं। क्योंकि वह बाजार से बहुत कम कीमतों पर चीजों खरीद लेते हैं और फिर बाद में उनको समय आने पर अधिक मूल्य में मार्केट में भेज देते हैं। इससे वो लोग अपने फायदे के लिए आम जनता को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी अफसर, नेता, बड़े-बड़े उद्योगपति यह सभी महंगाई को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

महंगाई को रोकने के उपाय

अगर कोशिश की जाये तो भारत में महंगाई को रोका भी जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले सरकार को मुद्रा-स्फीति पर रोक लगानी होगी और बजट घाटों को बनाना बंद करना होगा। महंगाई को रोकने के उपाय निम्न है –

  • सरकार को बड़े-बड़े नगरों के विकास के साथ साथ गांवों के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अब लोग गांव में सुविधाएं ना होने के कारण ज्यादातर लोग शहरों की तरफ भाग रहे है क्योंकि ना गांव में पानी की व्यवस्था है ना बिजली की व्यवस्था और जीवन के मूलभूत संसाधनों की आवश्यकता ओं की भी बहुत कमी है इसी वजह से सरकार को गांव की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए पूरे देश के लिए एक तरह की सिंचाई व्यवस्था का आयोजन होना चाहिए। महंगाई को रोकने के लिए समय-समय पर हड़तालें और आंदोलन चलाये गये हैं।
  • सरकार को कालाबाजारी, जमाखोरों को रोकने के लिए बहुत ही सख्त कानून बनाने चाहिएँ क्योंकि यह लोग आम जनता का बहुत शोषण करते हैं। बाजार से कम कीमत पर वस्तुओं का क्रय विक्रय कर देते हैं, इससे लोगों को बहुत महंगाई झेलनी पड़ती है।
  • महंगाई को खत्म करने के लिए जनता को भी सरकार का साथ देना चाहिए। जनता का कर्तव्य है कि महंगी चीजों से दूर रहे उसे महंगाई से होने वाली समस्याओं के बारे में सोचना चाहिए।

वितरण की व्यवस्था का समुचित होना

हमारी जरूरत की सभी चीजों के उपयोग के लिए समुचित वितरण के लिए बहुत कानून बनाएं गए है। हर जगह खदानों की पूर्ति के लिए खाद्यान्न आपूर्ति विभाग स्थापित किए गए हैं। जगह जगह पर राशन की दुकान खोली गई है ताकि लोगों को राशन के लिए दूर-दूर तक ना भटकना पड़े। अगर हमारे देश में खाद्यान्न वितरण की प्रणाली सही होगी तो महंगाई को बहुत आसानी से रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार का पूरा सहयोग और जनता का सहयोग होना बहुत जरूरी है लेकिन ऐसा होता नहीं है।

निष्कर्ष

महंगाई को कम करने के लिए हमारे देश मे उपयोगी राष्ट्र नीति की जरूरत है। जैसे-जैसे हमारे देश मे जनसंख्या बढ़ रही है। उस तरीके से महंगाई को रोकना बहुत ही जरूरी है, नहीं तो हमारी आजादी को दुबारा से खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि जब तक जनसंख्या वृद्धि में रोक नहीं लगेगी, तब तक महंगाई को भी कम नहीं किया जा सकता।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने महंगाई पर निबंध (Mehangai Essay in Hindi)  के बारे में बात की है। मुझे पूरी उम्मीद है की हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल में कोई शंका है। तो वह हमें कमेंट में पूछ सकता है।

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