खुदा पर शायरी

Khuda Shayari in Hindi

Khuda Shayari in Hindi
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खुदा पर शायरी | Khuda Shayari in Hindi

दोस्ती खुशी है दोस्ती दुआ है,
दोस्ती अहसास है दोस्ती खुदा है.

वो पहले सा कहीं,
मुझको कोई मंज़र नहीं लगता,
यहाँ लोगों को देखो,
अब ख़ुदा का डर नहीं लगता।

नजर नमाज नजरिया सब
कुछ बदल गया,
एक रोज इश्क हुआ और,
मेरा खुदा बदल गया.

काँटों पर चलकर फूल खिलते हैं,
विश्वास पर चलकर भगवान मिलते हैं,
एक बात सदा याद रखना दोस्त !!
सुख में सब मिलते है,
लेकिन दुख में सिर्फ भगवान मिलते है।

इतना आसान नहीं खुदा की इबादत करना,
दिल से गुरुर जायेगा तभी तो नूर आयेगा.

मुझे खुदा के इन्साफ पर
उस दिन यकीन हो गया,
जब मैंने अमीर और गरीब
का एक जैसा कफ़न देखा।

न था कोई हमारा न हम किसी के हैं,
बस एक खुदा है और हम उसी के हैं.

ऐ खुदा मेरे दोस्त की जिंदगी में,
खुशियों के रंग भर दे,
है गम उसकी जिंदगी में जो,
वो मेरे नाम कर दे।

मुझे भी बना दे ऐ खुदा -दिल तोड़ने वाला,
कब-तक वफा करूँगा बेवफाओ के शहर मे.

कर लेता हूँ बर्दाश्त तेरा हर
दर्द इसी आस के साथ,
की खुदा नूर भी बरसाता है,
आज़माइशों के बाद।

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे,
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे.

खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा,
तो खुद आज़माया होगा,
हमारी तो औकात ही क्या है,
इस इश्क़ ने खुदा को भी रुलाया होगा।

कुछ तुम,कुछ तुम्हारा अंदाज़ ए गुफ्तगू,
मुझे तबाह कौन करेगा, खुदा ही जाने.

बंदगी हमने छोड़ दी ए फ़राज़,
क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएँ।

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है,
रहे सामने और दिखाई न दे.

या मेरे खुदा अपनी ज़मानत,
में मेरी अमानत रखना,
मै सलामत रहूँ या न रहू,
मेरी मोहब्बत को सलामत रहना।

उदास बच्चे के आंसू में रह गया खोकर,
जो कह रहा था मुझको खुदा नहीं मिलता.

बाद मरने के मिली जन्नत ख़ुदा का शुक्र है,
मुझको दफ़नाया रफ़ीक़ों ने गली में यार की।

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे,
न ख़ुदाई की हो परवा न ख़ुदा याद रहे.

खुदा सलामत रखना उन्हें,
जो हमसे नफरत करते हैं,
प्यार न सही नफरत ही सही,
कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं।

जो लोग मौत को ज़ालिम करार देते हैं,
खुदा मिलाये उन्हें ज़िन्दगी के मारो से.

सलीक़ा ही नहीं शायद
उसे महसूस करने का,
जो कहता है ख़ुदा है
तो नज़र आना ज़रूरी है।

मेरा झुकना और तेरा खुदा हो जाना,
अच्छा नही इतना बड़ा हो जाना.

नही मांगता ए खुदा की,
जिंदगी 100 साल की दे,
दे भले चंद लम्हो की,
मगर कमाल की दे। से

हर जगह जाके झुकाया नही है सर हमने,
जो खुदा है उसे ही हमने खुदा रक्खा है.

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कशिश तो बहुत है मेरे प्यार मैं,
लेकिन कोई है पत्थर दिल जो पिघलता नहीं,
अगर मिले खुदा तो माँगूंगी उसको,
सुना है ख़ुदा मरने से पहले मिलते नहीं।

मैंने अपने आप को हँमेशा बादशाह समझा,
पर तुझे खुदा से माँगा अकसर फकीरों की तरह.

खुदा की रहमत में अजियाँ नहीं चलतीं,
दिलों के खेल में खुदगरजियाँ नहीं चलती,
चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर,
इश्क़ की राह में मनमरजियाँ नहीं चलतीं!

ज़रा ये धूप ढल जाए तो उनका हाल पूछेंगे,
यहाँ कुछ साए अपने आपको खुदा बताते हैं.

हमें इस चिस्त से उम्मीद क्या थी और क्या निकला,
कहाँ जाना हुआ था तय कहाँ से रास्ता निकला,
खुदा जिनको समझते थे वो शीशा थे न पत्थर थे,
जिसे पत्थर समझते थे वही अपना खुदा निकला।

हम ख़ुदा के कभी काबिल ही न थे,
उन को देखा तो ख़ुदा याद आया.

मुझे जरूरत नहीं इंसानों की,
जो मतलब के लिए साथ हो,
मैं खुश हूं अपने खुदा के साथ,
जो बिना मतलब के मेरे साथ है।

​मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर,
थक गया हूँ​ ​ऐ खुदा​,
किस्मत मे कोई ऐसा लिख दे,
जो मौत तक वफा करे।

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख,
इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है.

खुदा की कसम तुम बहुत खुबसूरत हो,
खुदा की कसम तुम बहुत खुबसूरत हो,
दुनिया की नज़र से खुद को बचा लो,
काजल का एक टिका तुम्हारे लिए कम है,
एक काला तवा अपने गले में लटका लो।

सुनकर ज़माने की बातें तू
अपनी अदा मत बदल
यकीं रख अपने खुदा पर
यूँ बार बार खुदा मत बदल।

छोड़ा नहीं ख़ुदी को दौड़े ख़ुदा के पीछे,
आसाँ को छोड़ बंदे मुश्किल को ढूँडते हैं.

आज तो उस खुदा से भी हमने कह दिया,
किस्मत में जो लिखा है,
वो तो सबको मिलना ही है,
देना ही है तो वो दे जो मेरी किस्मत में नहीं।

ज़रुरत भर का तो खुदा, सबको देता है,
परेशां है लोग इस वास्ते कि, बेपनाह मिले.

हैरान हूँ तेरा इबादत में झुका सर देखकर,
ऐसा भी क्या हुआ जो खुदा याद आ गया।

कहते हैं लोग खुदा की इबादत है,
ये मेरी समझ में तो एक जहालत है,
चैन न आए दिल को , रात जाग के गुजरे,
जय बताओ दोस्तों क्या यही मोहब्बत है!

तेरे आजाद बन्दों की
न ये दुनिया न वो दुनिया,
यहाँ मरने की पाबन्दी,
वहाँ जीने की पाबन्दी

*****

दिलों में नज़दीकियाँ हो तो,
रिश्तों मैं खुदा बसता हैं.

कभी खुद से कभी खुदा से शिकायत करते हैं हम,
किस कम्बखत ने कोनसी,
किताब के किस पन्ने पे मोहब्बत,
का नाम जन्नत रख दिआ.!

Khuda Shayari in Hindi

बस ये कहकर टाँके लगा दिये उस हकीम ने कि,
जो अंदर बिखरा है उसे
खुदा भी नहीं समेट सकता.

अपना तो आशिकी का किस्सा-ए-मुख़्तसर है,
हम जा मिले खुदा से दिलबर बदल- बदल कर।

मेरी आँखों में मत ढूंढा करो खुद को,
पता है ना दिल में रहते हो खुदा की तरह.

जब मुझे यकीन है,
की खुदा मेरे साथ है,
इससे कोई फर्क न पड़ता कि,
कौन…कौन मेरे खिलाफ है।

लौट आती है हर बार दुआ मेरी खाली,
जाने कितनी ऊंचाई पर खुदा रहता है।

खुदा को दोष देना,
समझ नहीं आया है आज़तक,
हम इंसान,
खुद को ही नहीं समझ पाया है अबतक।

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एक बार भूल से ही कहा होता
की हम किसी और के भी है,
खुदा कसम हम तेरे साये से भी दूर रहते.

खुदा से प्यारा कोई नाम नहीं होता,
उसकी इबादत से बड़ा कोई काम नहीं होता,
दुनिया की मोहब्बत में है रुसवाईयां बड़ी,
पर उसकी मोहब्बत में कोई बदनाम नहीं होता।

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे,
निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे.

खुदा ने बङे अजीब से
दिल के रिश्ते बनायें हैं,
सबसे ज्यादा वही रोया
जिसने ईमानदारी से निभाये है.

हम मुतमईन है उस की राजा के बगैर भी,
हर काम चल रहा है खुदा के बगैर भी।

पुछेगा अगर खुदा तो कहूँगी,
हाँ हूई थी मोहब्बत,
मगर जिसके साथ हूई
वो उसके काबिल ना था.

मोहब्बत कर सकते हो तो खुदा से करो,
मिटटी के खिलौनों से कभी वफ़ा नहीं मिलती।

******

ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैंने,
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला.

दामन पे मेरे, सैकड़ों पैबंद हैं ज़रूर,
लेकिन खुदा का शुक्र है,धब्बा कोई नहीं.

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दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा,
याद-ए-खुदा किये जा तुझ को खुदा मिलेगा,
दौलत हो या हुकूमत ताक़त हो या जवानी,
हर चीज़ मिटने वाली हर चीज़ आनी जानी।

देता सब कुछ है खुदा हमें,
पर जिसे चाहो उसे छोड़कर.

लाख ढूंढें गौहर-ए-मक़सूद मिल सकता नहीं,
हुक्म गर तेरा न हो पत्ता भी हिल सकता नहीं।

तक़दीर के लिखे से सिवा बन गए हैं हम,
बंदा न बन सके तो ख़ुदा बन गए हैं हम.

खुदा को भूल गए लोग फ़िक्र-ए-रोज़ी में,
तलाश रिजक की है राजिक का ख्याल नहीं।

क्या बताये मेरे लिए क्या हो तुम,
खुदा का डर है वर्ना खुदा हो तुम.

करम जब आला-ए-नबी का शरीक होता है,
बिगढ़ बिगढ़ कर हर काम ठीक होता है।

मत सोचना मेरी जान से जुदा है तू,
हकीकत में मेरे दिल का खुदा है तू.

तेरा करम तो आम है दुनिया के वास्ते,
मैं कितना ले सका ये मुकद्दर की बात है।

खुदा का मतलब है खुद में आ तू,
खुद आगाही है खुदा शनासी,
खुदा को खुद से जुदा समझ कर,
भटक रहा है इधर उधर क्यूँ।

मशरूफ थे सब अपनी जिंदगी की उलझनों में,
ऐ दोस्त ज़रा सी जमींन क्या हिली
सबको खुदा याद आ गया.

मिट जाए गुनाहों का तसवुर ही जहाँ से,
अगर हो जाये यकीन के खुदा देख रहा है।

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एक मुद्दत के बाद हमने ये जाना ऐ खुदा,
इश्क तेरी ज़ात से सच्चा है बाकी सब अफ़साने।

मजहबी इबारतें आती नहीँ मुझको,
आज भी इंसानीयत ही मेरा खुदा हुआ है.

तु नाराज न रहा कर
तुझे खुदा का वास्ता,
इक तेरा चेहरा देखकर ही
हम अपना गम भुलाते है.

खुदा जाने कि दुनिया
कह रही है हम ही मुजरिम है,
हमारे साँस लेने से मशालें बुझ गईं उनकी.

सौदागरी नहीं ये इबादत खुदा की है,
ऐ बे-खबर जीजा की तमन्ना भी छोढ़ दे।

*******

उस वक़्त तो खुदा भी सोच में पड़ गया,
जब मैंने इश्क़ और सुकून
दोनों साथ में माँग लिया.

तुम मिल गई तो खुदा भी नाराज हैं मुझसे.,
कहता है कि अब तु कुछ माँगता नहीं.

Khuda Shayari in Hindi

मैं अपनी इबादत खुद ही
कर लूँ तो क्या बुरा है?
किसी फकीर से सुना था
मुझमें भी खुदा रहता है.

वही रखेगा मेरे घर को बलाओं से महफूज़,
जो सजर से घोंसला गिरने नहीं देता ।

वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर
खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए किसी
की ज़िंदगी ना तबाह करो.

वो पहले सा कहीं मुझको
कोई मंज़र नहीं लगता,
यहाँ लोगों को देखो
अब खुदा का डर नहीं लगता।

खुदा जाने, प्यार का दस्तूर क्या होता है
जिन्हें अपना बनाया वो न जाने क्यों दूर होता है.

लोगो ने कुछ दिया,
तो सुनाया भी बहुत कुछ
ऐ खुदा एक तेरा ही दर है,
जहा कभी ताना नहीं मिला.

हर ज़र्रा चमकता है अनवर-ए-इलाही से,
हर सांस ये कहती है हम हैं तो खुदा भी है।

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झूठ, लालच और फरेब से परे है,
खुदा का शुक्र है,
आइने आज भी खरे है.

खुदावंद यह तेरे सदा-दिल बन्दे किधर जायें,
कि दरवेशी भी अय्यारी है सुलतानी भी अय्यारी।

इश्क़ इनायत है खुदा की,
तो मैं गुनाहगार कैसे.

खुदा आज भी है ज़मीं पर ये मुझको यकीं,
बस उसको देखने वाली निगाह चाहिए.

करनी है खुदा से गुजारिश
तेरी दोस्ती के सिवा कोई बंदगी न मिले,
हर जनम में मिले दोस्त तेरे
जैसा या फिर कभी जिंदगी न मिले.

कमियों की गिनती जिस तरह करते है वो,
इंसान हो कर भी आप खुदा बन बैठे हो जैसे.

तेरी रहमत भी मोहताज़ है मेरे गुनाहों की,
मेरे बिना तू भी खुदा हो नहीं सकता.

******

मिसाल उसकी क्या देगा ज़माना,
जिसे खुदा भी खुद लाजवाब कहता है.

Khuda Shayari in Hindi

वो दुआएं काश मैने दीवारों से मांगी होती,
ऐ खुदा.. सुना है कि उनके तो कान होते है.

सारे फैसले खुदा के,
फिर गलतियाँ मेरी कैसे.

ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़,
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम.

मिल के भी तुम ना मिले,
बिछड़े भी तो जुदा ना हुए,
हम भी इंसा ही रहे,
तुम भी तो खुदा न हुए.

ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है
यही जानता है तो क्या जानता है.

फितूर होता है हर उम्र में जुदा-जुदा,
खिलौना, इश्क़, पैसा,
ख्याति फिर खुदा-खुदा.

न कर किसी पे भरोसा कि कश्तियाँ डूबें,
ख़ुदा के होते हुए नाख़ुदा के होते हुए.

मैं इक थका हुआ इंसान और क्या करता,
तरह तरह के तसव्वुर ख़ुदा से बाँध लिए.

मैं तुझसे अब कुछ नहीं मांगूगा ए खुदा,
तेरी देकर छीन लेने की आदत मुझे पसंद नही.

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है.

जुबानी इबादत ही काफी नहीं,
खुदा’ सुन रहा है खयालात भी.

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मुझे भी बना दे ऐ खुदा-दिल तोड़ने वाला,
कब-तक वफा करूँगा बेवफाओ के शहर मे.

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

कि मोहब्बत हो और महबूब पास न हो ,
ऐ खुदा ये जुल्म कभी किसी के साथ न हो.

आता है जो तूफ़ाँ आने दे
कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों
में बहता हुआ साहिल आ जाए

तुम इतना हुस्न आख़िर क्या करोगे,
अरे कुछ तो ख़ुदा के नाम पर दो.

जोड़ी भी खूब बनाई थी उस खुदा ने,
वो मासूम सी लड़की और मैं शायर बदनाम.

मिट जाये गुनाहों का तसव्वुर ही जहां से,
अगर हो जाये यकीन के खुदा देख रहा है.

अगर इसी रफ़्तार से
मानेंगे सब खुद को खुदा,
तो एक दिन दुनिया में
बन्दों की कमी हो जाएगी.

*******

रहमत तेरी मोहताज है मेरे गुनाहों की,
मेरे बिना तू भी खुदा हो नहीं सकता.

जब सब तेरी मर्जी से होता है
तो ऐ खुदा,
ये बन्दा गुनहगार कैसे हो गया .

तुम थक तो नहीं जाओगे इन्तजार में तब तक,
मैं माँग के आऊँ खुदा से तुमको जब तक.

हर किसी को नही देता
वो मोहब्बत का हुनर,
खुदा नही चाहता हर
किसी का खुदा होना.

वो साल तो बीत गया आँसुओं के साथ
इस साल तो खुदा करे खुशियाँ मिले मुझे.

तुझमे और खुदा में एक बात मिलती है,
वो भी नहीं मिलता है ,तू भी नहीं मिलती है.

Khuda Shayari in Hindi

किसका वास्ता देकर मैं रोकता उसे,
खुदा तक तो मेरा बन चूका था वो.

मुझ में नही खुदा में भी फर्क है
एक रास्ते पे रखा है
एक महंगे पत्थरो में दर्ज है.

मेरा दर्द तो सिर्फ मेरा खुदा जानता हैं,
तुमने तो सिर्फ मेरी मुस्कान देखी है.

ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है,
तो मेरा लहू लेले,
यू कहानिया अधूरी न लिखा कर.

खुदा का शुक्र है की, ख्वाब बना दिये,
वरना तुम्हे देखने की तो,
हसरत ही रह जाती.

यंकी का कोई अलग से खुदा नही होता,
झूठ के लिए रियायते भी लड़ जाती है.

खुदा अबके जो मेरी कहानी लिखना,
बचपन में ही मर जाऊ
ऐसी जिंदगानी लिखना.

बेहिसाब झूठ कहा तो खुदा मान बैठे,
जरा सा सच बोल दिया बुरा मान बैठे.

ऐ खुदा मुसीबत मैं डाल दे मुझे,
किसी ने बुरे वक़्त मैं
आने का वादा किया है.

खुदा जाने तुमने किस
अन्दाजे-नजर से देखा है
कि मुझको जिन्दगी
अब जिन्दगी मालूम होती है.

नजर , नमाज , नजरिया ,
सब कुछ बदल गया,
एक रोज इश्क़ हुआ ,
और खुदा बदल गया.

कुछ लोग सारी जिंदगी इंसान नही बन पाते,
और कुछ लोग मयखाने से
खुदा बनकर निकलते हैं.

कभी जो मुझे हक मिला
अपनी तकदीर लिखने का,
कसम खुदा की तेरा
नाम लिखूंगा और कलम तोड दूंगा.

खुदा ने लिखा ही नहीं
तुझको मेरी क़िस्मत में शायद,
वरना खोया तो बहुत कुछ था
एक तुझे पाने के लिए.

रजामंदी मे भी खिलाफत जरा सी बाकी है,
तुम्हारे खुदा से मेरा कुछ हिसाब बाकी है.

ऐ सनम जिस ने तुझे
चाँद सी सूरत दी है
उसी खुदा ने मुझ
को भी मोहब्बत दी है

में वो काम नहीं करता हूँ जिसमे खुदा मिले,
में बस वो करता हूँ जिसमे दुनिया की दुआ मिले.

मेरे सजदों में कमी तो ना थी ऐ खुदा,
क्या मुझसे भी ज्यादा
किसी ने माँगा था उसे.

अगर कसमें सच्ची होतीं तो
सबसे पहले खुदा मरता.

खुदा के पास तो देने को हजार तरीके हैं,
माँगने वाले तू देख तुझमें कितने सलीके हैं.

इश्क ‘महसूस’ करना भी
इबादत से कम नहीं,
ज़रा बताइये छू कर’
खुदा को किसने देखा है?

मसरूफ़ थे सब अपनी
ज़िन्दगी की उलझनों में,
जरा सी ज़मीन हिली,
सबको खुदा याद आने लगा.

कमाल का हौसला दिया है,
खुदा ने हम इंसानोँ को,
वाकिफ़ हम अगले पल से नहीँ,
और वादेँ जन्मोँ के कर लेते है.

बेटियाँ ये वो झरोखे हैं साहेब
जहाँ से खुदा हमे देखता है.

तेरी मुहब्बत के
साए में जिंदा हैं हम तो
तुझे खुदा का दीया
हुआ तावीज मानते हैं.

जाने कितनी परियों ने मिल,
अर्जिया दी थी,
तब खुदा ने दुनिया
को ये बेटियाँ दी थी.

इंतज़ार तो हम सारी उम्र कर लेंगे,
बस खुदा करे ,वो बेवफा ना निकले.

इतनी शिद्दत से तो वो खुदा भी नही ढूंढता,
जितनी शिद्दत इंसान दूसरे में एब ढूंढता है.

ना तू खुदा न मेरी बंदगी वैसी,
सबकी कहानी है तेरे – मेरे जैसी.

साजिशे उस खुदा की देखो तो जरा,
मुझे खुश देखकर
“मोहब्बत” में फसा दिया.

खुदा करे, सलामत रहें दोनों हमेशा,
एक तुम और दूसरा मुस्कुराना तुम्हारा.

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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